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Exclusive Articles written by Ajay Setia

आडवाणी के नाम से मनमोहन क्यों परेशां

Publsihed: 11.Dec.2007, 20:40

गुजरात का पहला दौर निपटा। कोई छप्पन फीसदी वोटिंग हुई। पचास फीसदी से कम होती। तो बीजेपी के तम्बू उखड़ते। छप्पन फीसदी से मोदी की बल्ले-बल्ले। पर जितने खुश बीजेपी महासचिव ओम माथुर। उतने ही कांग्रेस महासचिव बी के हरिप्रसाद। दोनों का डेरा गुजरात में। बी के हरिप्रसाद बोले- 'मंगलवार को सौराष्ट्र-कच्छ ने मोदी को नकार दिया।' अपन ने माथुर से पूछा, तो बोले- 'जिन 87 सीटों पर चुनाव हुआ। उनमें 54 बीजेपी के पास थी। ज्यादा नहीं, तो 54 बरकरार रहेंगी।'

आडवाणी-शेखावत देंगे सोनिया को चुनौती

Publsihed: 10.Dec.2007, 20:40

ताकि सनद रहे, सो याद कराएं। अपन ने बारह सितम्बर को लिखा था- 'आडवाणी ताकतवर होकर मुम्बई से लौटे।' दस दिसम्बर को बीजेपी पार्लियामेंट्री बोर्ड ने एलान किया- 'आडवाणी होंगे पीएम पद के दावेदार।' वैसे यह एलान सितम्बर में ही होता। पर कई आडवाणी विरोधी जल-भुन गए थे। जिसकी झलक अपन ने 25-26 सितम्बर को भोपाल में देखी। जब राजनाथ ने पहले ही दिन अटल की चिट्ठी का पैंतरा चल दिया। जिन्ना प्रकरण से कईयों के मुंह में पानी था।

आयोग की निष्पक्षता सवालों के घेरे में

Publsihed: 07.Dec.2007, 20:32

शीत सत्र का भोग पड़ गया। यानी सत्रावसान हो गया। सत्रावसान के वक्त पीएम गायब थे। लोकसभा के नेता प्रणव दा भी होते। तो गनीमत थी। पर वह भी गायब। राज्यसभा में तो मनमोहन के साथ विपक्ष के नेता जसवंत सिंह भी गायब। संसद की ऐसी अनदेखी अपन ने पहले नहीं देखी। मनमोहन शाम को गुजरात जाते। तो पहाड़ नहीं टूट पड़ता। वैसे भी मनमोहन वोटरों को कितना प्रभावित करेंगे। किसी से छिपा नहीं। पर गुजरात की बात चली। तो बता दें- मनमोहन ने वहां क्या कहा।

स्वर्गीय श्री सोहराबुद्दीन के कटघरे में मोदी

Publsihed: 06.Dec.2007, 20:45

अपन चुनाव आयोग की मजबूरी नहीं जानते। पर नरेंद्र मोदी को भेजा गया नोटिस अपने गले नहीं उतरा। अपन ने शाम सवा सात बजे ओम माथुर से बात की। तो नोटिस अभी उन्हें मिला ही था। नोटिस अरुण जेटली को थमाते हुए उनने अपन से बात की। चुनाव आयोग से निपटने में जेटली की महारत। पर कोई अपन से पूछे। तो इससे मोदी को राजनीतिक फायदा ही होगा। आयोग जितना कड़ा रुख अपनाएगा। मोदी उतने फायदे में।

लेफ्ट ने गलती सुधारी लोस पर लटकी तलवार

Publsihed: 06.Dec.2007, 04:13

एटमी करार पर बहस देर रात तक चली। मनमोहन भी शौरी-सिब्बल को सुनने बैठे रहे। यों तो राज्यसभा में सिब्बल-जेटली की नोंक-झोंक मजेदार होती। पर करार के एक्सपर्ट शौरी। वैसे भी जेटली गुजरात के मोर्चे पर। गुजरात की बात चली। तो बता दें- कांग्रेस का अपना सर्वेक्षण 85 का। बीजेपी के खाते में 95 सीटें। कांटे की लड़ाई का अहसास दोनों को। सो सोनिया ने पूरा जोर लगा दिया। मोदी ने भी तलवार म्यान से निकाल ली। मंगल की रात सिब्बल गुजरात छोड़ राज्यसभा में लेफ्ट से जूझ रहे थे। तो मोदी ने सोहराबुद्दीन का मुद्दा उठा दिया।

नटवर के कटघरे में खड़े मनमोहन

Publsihed: 04.Dec.2007, 20:40

संसद की बहस का स्तर कितना गिर गया। यह अपन ने मंगलवार को राज्यसभा में देखा। पीएम जब कटघरे में खड़े हुए। तो पर्सनल अटैक पर उतर आए। फिर लालू यादव क्यों पीछे रहते। सो वे भी अपनी पर आ ही गए। देखते-देखते राज्यसभा गली-मोहल्ला दिखने लगा। एटमी करार पर बहस शुरू हुई। तो यशवंत सिन्हा ने पीएम पर बमबारमेंट शुरू कर दी।

मौत का सौदागर मोदी या अफजल? नया सवाल

Publsihed: 04.Dec.2007, 08:13

यह तो अपन को पहले से पता था-'मोदी पर जहर बुझे तीर चलाएगी सोनिया।' पर अपन को भरोसा था-सोनिया चक्रव्यूह में नहीं फसेगी। भले ही अनारी कितनी ऊट-पटांग बाते लिखकर थमाएं। पर अपना भरोसा टूट गया। जब सोनिया ने चिकली में मोदी को बेइमान और मौत का सौदागर कह दिया। साथ में गांधी के गुजरात को गोडसे से जोड़ बलंडर किया।

कमाल के हैं कलाम

Publsihed: 01.Dec.2007, 16:29

माना- मनमोहन की गठबंधन सरकार। पर छोटे-छोटे दलों की ऐसे बंधक बनेगी। अपन ने नहीं सोचा था। वेणुगोपाल के मामले में हैल्थ मिनिस्टर रामदौस ने जो किया। उससे मनमोहन की छवि भी कोई अच्छी नहीं बनी। रामदौस पहले दिन से एम्स डायरेक्टर वेणुगोपाल को हटाने पर आमादा।

सदनों की सर्वोच्चता पर सरकारी हमला

Publsihed: 30.Nov.2007, 12:16

अपने यहां लोकतंत्र के तीन अंग। लेजिस्लेचर, ज्यूडिश्यरी, एक्जीक्यूटिव। यानि चुने हुए सदन, अदालतें और सरकार। बहुत पुरानी बात नहीं। बात सिर्फ तीन साल पुरानी। जब झारखंड के गवर्नर सिब्ते रजी ने बिना बहुमत के शिबू सोरेन को सीएम बनाया। बहुमत साबित करने का वक्त भी अच्छा-खासा दे दिया। बहुमत अर्जुन मुंडा के साथ था। प्रोटर्म स्पीकर की तैनाती हुई। खरीद-फरोख्त शुरू हो गई।

उधर वर्दी उतरी इधर बखिया उधड़ी

Publsihed: 29.Nov.2007, 07:18

जनरल परवेज मुशर्रफ की वर्दी आखिर उतर गई। इमरजेंसी लगाकर भी वर्दी नहीं बचा पाए। देखा अमेरिका का करिश्मा। सो  नरेंद्र मोदी अबके  चुनाव में मियां मुशर्रफ का मुद्दा शायद ही उठाएं। मोदी की बात चली। तो बताते जाएं। लालू की करनी कांग्रेस के सामने आ गई। लालू ने जिद करके बनर्जी आयोग बनवाया। जिसने कहा- 'गोधरा में आग बाहर से नहीं। डिब्बे के अंदर से लगी थी।' अब कांग्रेस को इस सवाल का जवाब देना होगा। बीजेपी के पहले इश्तिहार ने ही कटघरे में खड़ा कर दिया।