Guest Column

हिंदी मातृभाषा के ईंगलिश मीडियम बच्चे/ ड्रीम ठाकुर

सर पर साफा और सम्पूर्ण खादी के वस्त्र, हवाई चप्पल मतलब पूरे गाँव वाले का हुलिया बनाये एक अधेड़ जिसे हम "देहाती"भी कह सकते हैं। भोर होते ही दरवाजे पर आ धमके और मैं आँखे मूंदे, कभी मिलमिलाते हुए, गोंणा (जानवर बाँधने की जगह ) से नीम की दातून तोड़ने के लिए जा रहा था, एक नजर हमने उनकी और गर्दन घुमा के देखा चलते चलते। सोचा कि होगा कोई पड़ोस गाँव का, पिता जी से मिलने या किसी काम से आया होगा। अब तक मैं नीम की टहनी पकड़ पूरा लटककर दातुन तोड़ लिए थे। मुंह में नीम की टहनी की दातुन करते करते मैं वापस हुआ तो दरवाजे की ओर देखा कि वह शख्स हमको बड़ा टकटकी लगाकर देख रहे थे। हमने पास पहुँच कर मुंह में दा

राहुल गांधी का अयोध्या दर्शन/ डूबते को राम का सहारा/ ड्रीम ठाकुर

डूबते को तिनके का सहारा होता है। कांग्रेस की हालत और राहुल का अयोध्या जाकर मत्था टेकना। इस पर बीजेपी की चिंता स्वाभाविक है ! गांधी परिवार अयोध्या से परहेज कर्ता रहा है !  राजीव गांधी के बाद गांधी परिवार से कोई भी अयोध्या नहीं गया ! राजीव गांधी ने भी 1991 के चुनाव में दांव लगाया था! क्योंकि अयोध्या में राम मंदिर बनाने का सपना बीजेपी नेताओं का है, और उत्तरप्रदेश के इस बार के चुनाव कांग्रेस के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो गये हैं !

मोदी की भतीजी की मौत का रहस़्य / अमित मालवीय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भतीजी का निधन हो गया | चीन से वापस आते ही उन्होंने अपने भाई प्रह्लाद मोदी को फोन किया और सारी जानकारी ली| मोदी जी के भाई प्रह्लाद मोदी की ही बेटी थी निकुंज बेन मोदी | जिसके सगे चाचा एक ताकतवर देश के सबसे ताकतवर प्रधानमंत्री हो वो निकुंज बेन किराये के घर में रहती थी भोपाल में अपने पति के साथ | पति एक कम्पूटर की दुकान में रिपेयरिंग का काम करते थे और निकुंज खुद सिलाई बुनाई करके घर के खर्चे में पति का हाथ बाटती थी| काफी दिनों से निकुंज बेन ह्रदय रोग से ग्रसित थी और अन्तोगत्वा उनका निधन हो गया | दिल पसीज जाता है भारत देश के इस प्रधान मंत्री को देखक

क्या अक्षत गुप्ता को दिल का दौरा पड़ा था

 उत्तराखंड के आईएएस अधिकारी अक्षत गुप्ता की हृदयघात से मौत की खबर ने सभी को स्तब्ध कर दिया है। डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। काया वह दिल का दौरा था । क्या उन्हें बचाया जा सकता था। इस पर संजय सिन्हा का लेख अति महत्व पूर्ण है, यह लेख नहीं अलबत्ता यमराज के दूतों से दो दो हाथ करने की कहानी है।
संजय  सिन्हा

भारत-विभाजन के पीछे बहके मुसलमानों का फितूर (भाग दो)

ईरानियों का वर्चस्व

‘ताज महल बनाने के लिए 20 हजार लोग 22 साल तक दिनरात जुटे रहे’-अपने इस वाक्य के लिए मशहूर हुआ फ्रांसीसी जवाहरात व्यापारी टेवरनिअर बताता है: ‘यहां तक कि सरदार ईरानी भगोड़े हैं, जिनकी जन्मभूमि हिन्दुस्तान नहीं है और जो दिल के बहुत छोटे हैं। ऐसे तंगदिल लोगों को उन लोगों का साथ मिल गया, जिन्होंने इस धरती को अपना सर्वस्व दे डाला।’ वह आगे लिखता है: ‘मैंने कहीं उल्लेख किया है कि मुगलों की रियाया में शामिल देशी मुसलमानों में से महज कुछ मुसलमानों को ही बड़े ओहदे हासिल थे, और यही वजह थी कि अनेक ईरानी लोग किस्मत आजमाने हिन्दुस्तान चले आए।

भारत-विभाजन के पीछे बहके मुसलमानों का फितूर (भाग एक)

भारत को जीतने के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी के अनेक अधिकारियों ने भारत का ‘इतिहास’ लिखा। उन्होंने जगह-जगह लिखा कि भारत पर अंग्रेजों से पहले मुसलमानों का राज था। उन्होंने अपनी इस शरारत के जरिये मुसलमानों के दिमाग में एक गलत धारणा बैठा दी, जिसका नतीजा अंतत: यह निकला कि वे बेचारे घमंड, हठधॢमता और अदम्य महात्वाकांक्षा का शिकार बन गए। इसकी परिणति 1947 में भारत-विभाजन के रूप में सामने आई। ब्रिटिश हुक्मरानों ने कहा कि उन्होंने मुसलमानों के हाथों से हुकूमत ली। इससे बड़ा झूठ तो कोई हो ही नहीं सकता।

जयराम रमेश की गुस्ताखी

केन्द्रीय पर्यावरण एवम् वन राज्य मन्त्री (स्वतन्त्र प्रभार) जयराम रमेश ने पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना को करोड़ों हिन्दुओं के आराध्य देव भगवान शंकर के समान बताकर एक और अनावश्यक विवाद तो खड़ा किया ही है, हजारों साल पुरानी भारतीय संस्कृति के अपमान का अक्षम्य अपराध भी किया है। श्री रमेश ने शनिवार को अपनी भोपाल यात्रा के दौरान महात्मा गान्धी की तुलना ब्रह्मा और नेहरूजी की तुलना भगवान विष्णु से कर डाली।