Guest Column

नोटबंदी के समर्थन पत्रकार ने महसूस की परेशानी

शशि भूषण मैठाणी / मैं यह शपथ लेता हूँ कि मैं न भक्त हूँ न किसी का विरोधी :P 
पिछले दिनों में मैंने मोदी के फैसले की दिल खोल छप्पर फाड़ तारीफ़ की थी, और लिखा भी था , लेकिन अब पिछले तीन दिन से जब मुझे बच्चों की फीस व घर खर्चे के लिए पैसों की जरूरत पड़ी तो वाकही परेशानी को करीब से महसूस कर पा रहा हूँ । 

नोटबंदी की गोपनीयता पर सवाल उठाने वाले पत्रकार की सच्चाई

एल.एन.शीतल/ दूरदर्शन के एक युवा अधपढे पत्रकार ने प्रधानमंत्री के खिलाफ प्रेस कान्फ्रेंस की और मोदी विरोधियो का लोकप्रिय हीरो बन गया. वह सोशल मीडिया पर भी मोदी विरोधियो की खूब वाहवाही लूट रहा है. हालांकि प्रेस क्लब में हुई उस की प्रेस कांफ्रेंस में जब उससे सवाल पूछे जा रहे थे, तो उस की घिग्घी बंधी हुई थी. सत्येन्द्र मुरली नाम के इस नए नए पत्रकार का आरोप है कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 8 नवंबर 2016 को ‘राष्ट्र के नाम संदेश’ लाइव नहीं था, बल्कि पूर्व रिकॉर्डेड और एडिट किया हुआ था.

परेशां तो भाजपा वाले भी कम नही हैं

एल.एन.शीतल/ पीएम नरेन्द्र मोदी के नोट-बन्दी हमले से विपक्षी सियासतदानों को तो दस्त लगे हुए हैं ही, लेकिन उनसे ज़्यादा हवा ख़राब उन सत्ताधीश भाजपाइयों की है, जिन्होंने ‘माल’ बटोरा तो अन्धाधुन्ध रफ़्तार से, लेकिन उसे क़ायदे से हज़म करने का शऊर जिनमें नहीं था. इन बेशऊर पेटू भाजपाइयों की संख्या उन राज्यों में सबसे ज़्यादा है, जहाँ भाजपा सत्तासीन है, या फिर सत्ता में भागीदार है. इन राज्यों में कांग्रेसी तो एक लम्बे अरसे से बेदखल हैं. उन ‘बेचारों’ का ‘माल’ तो बेकारी काटते-काटते काफ़ी हद तक वैसे ही ठिकाने लग चुका है.

भक्त अब उन्हें भडुए कहें तो कैसा रहे

लक्ष्मी नारायण शीतल मंजे हुए पत्रकार हैं. उन्होने दिग्विजय सिंह को निशाना बना कर एक लेख लिखा.जिस का शीर्षक दिया था 'सियासी तवाइफखाने के भडुए'. मुझे शुरू में इस शब्द पर कडा एतराज था.आज भी है. हमें संसदीय भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए. लेकिन उन के उस लेख को खासी तारीफ मिली.इस से बात जाहिर हुई कि समाज अब क्या सोच रहा है. शीतल जी ने सियासी वर्ग के लिए भडुए शब्द का इस्तेमाल किया. लेकिन एक दूसरा वर्ग है जो सोशल मीडिया पर सरकार के समर्थकों को भक्त लिख रहा है.यह खुद को बुद्धिजीवी वर्ग कहलाता है और पिछली सरकार का समर्थक था.तब इन्हें भद्र लोगों ने कभी भक्त नहीं कहा.

पाटलीपुत्र का सपना लिए जन.एस.के.सिन्हा चले गए

प्रवीण बागी/   पटना निवासी लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा अब नहीं रहे। आज दिल्ली में उनका निधन हो गया। वे 92 वर्ष के थे। उन्होंने एक सार्थक और मूल्य आधारित जीवन जीया। वे युद्ध नीति और इतिहास के गहरे जानकर थे। उन्हें अपने जीवन में कई बार अन्याय का सामना करना पड़ा ,लेकिन उन्होंने कभी समझौता नहीं किया। वे 1943 में सेना में शामिल हुए थे। 1947 में कश्मीर पर कब्जे के लिए जब पाक कबाइलियों ने हमला किया था तो उसे रोकने के लिए भारतीय सेना की जो पहली टुकड़ी श्रीनगर पहुंची थी ,उसके लीडर एसके सिन्हा ही थे। आगे चलकर वे थल सेना के उप सेनाध्यक्ष बने। जेपी से संबंध

सलमान खुर्शीद का कुतर्क और अनपढ मीडिया

निशीथ जोशी/ कोई कुछ भी कह दे और मीडिया उसे प्रचारित और प्ररसारित कर दे। बिना तथ्थों को परखे। यह समझे सोचे बिना कि इसका समाज पर साम्प्रदायिक एकता पर क्या असर पडेगा। क्या ऐसे माध्यम दंड के भागी नहीं। आज एक खबर पढ़ी ।।।पूर्व विदेश मंत्री रहे सलमान खुर्शीद ने कुतर्क दिया है कि अगर सामान नागरिक संहिता लागू हो जाती है तो शवों को जलाएंगे या फिर दफनाएंगे। हिंदू धर्म में 11 दिन का शोक होता है मुस्लिम धर्म में 40 दिन का। ऐसे में दोनों व्यवस्थाएं कैसे एक साथ लागू होंगी। या तो सलमान खुर्शीद पत्रकार के ज्ञान का टैस्ट ले रहे थे या वह जानबूझ कर समाज में भ्रम फैलाना चाह रहे थे यह तो वह जाने। पर । यह ज

चीनी वस्तुओं के बहिष्कार की पहल करें

-श्याम सिंह रावत / चीन द्वारा पाकिस्तानी आतंकवाद को प्रश्रय देने के खिलाफ़ आजकल चीनी वस्तुओं के बहिष्कार की आवाजें सोशल मीडिया में खूब उठ रही हैं। इस सम्बंध में तरह-तरह की बातें हो रही हैं; लेकिन क्या यह सम्भव है कि चीन निर्मित वस्तुओं को छोड़ पाना सहज होगा? इस पर विचार करने की आवश्यकता है।

हिंदी मातृभाषा के ईंगलिश मीडियम बच्चे/ ड्रीम ठाकुर

सर पर साफा और सम्पूर्ण खादी के वस्त्र, हवाई चप्पल मतलब पूरे गाँव वाले का हुलिया बनाये एक अधेड़ जिसे हम "देहाती"भी कह सकते हैं। भोर होते ही दरवाजे पर आ धमके और मैं आँखे मूंदे, कभी मिलमिलाते हुए, गोंणा (जानवर बाँधने की जगह ) से नीम की दातून तोड़ने के लिए जा रहा था, एक नजर हमने उनकी और गर्दन घुमा के देखा चलते चलते। सोचा कि होगा कोई पड़ोस गाँव का, पिता जी से मिलने या किसी काम से आया होगा। अब तक मैं नीम की टहनी पकड़ पूरा लटककर दातुन तोड़ लिए थे। मुंह में नीम की टहनी की दातुन करते करते मैं वापस हुआ तो दरवाजे की ओर देखा कि वह शख्स हमको बड़ा टकटकी लगाकर देख रहे थे। हमने पास पहुँच कर मुंह में दा

राहुल गांधी का अयोध्या दर्शन/ डूबते को राम का सहारा/ ड्रीम ठाकुर

डूबते को तिनके का सहारा होता है। कांग्रेस की हालत और राहुल का अयोध्या जाकर मत्था टेकना। इस पर बीजेपी की चिंता स्वाभाविक है ! गांधी परिवार अयोध्या से परहेज कर्ता रहा है !  राजीव गांधी के बाद गांधी परिवार से कोई भी अयोध्या नहीं गया ! राजीव गांधी ने भी 1991 के चुनाव में दांव लगाया था! क्योंकि अयोध्या में राम मंदिर बनाने का सपना बीजेपी नेताओं का है, और उत्तरप्रदेश के इस बार के चुनाव कांग्रेस के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो गये हैं !

मोदी की भतीजी की मौत का रहस़्य / अमित मालवीय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भतीजी का निधन हो गया | चीन से वापस आते ही उन्होंने अपने भाई प्रह्लाद मोदी को फोन किया और सारी जानकारी ली| मोदी जी के भाई प्रह्लाद मोदी की ही बेटी थी निकुंज बेन मोदी | जिसके सगे चाचा एक ताकतवर देश के सबसे ताकतवर प्रधानमंत्री हो वो निकुंज बेन किराये के घर में रहती थी भोपाल में अपने पति के साथ | पति एक कम्पूटर की दुकान में रिपेयरिंग का काम करते थे और निकुंज खुद सिलाई बुनाई करके घर के खर्चे में पति का हाथ बाटती थी| काफी दिनों से निकुंज बेन ह्रदय रोग से ग्रसित थी और अन्तोगत्वा उनका निधन हो गया | दिल पसीज जाता है भारत देश के इस प्रधान मंत्री को देखक