India Gate Se

Published: 05.Apr.2020, 18:08

अजय सेतिया / क़ानून अपना काम करता दिखे तो उस की तारीफ़ की जानी चाहिए , लेकिन जहां दिखावा तो काम का हो और वास्तव में किया कुछ न जाए तो आक्रोश पनपना स्वाभाविक भी है | दिल्ली की इनेक बस्तियों में जहां तीन मंजिल बनाने की इजाजत है , बीते कुछ सालों में पांच पांच मंजिल बन गई हैं , यह कोई प्रसाशन की अनदेखी से नहीं हुआ , बल्कि प्रसाशन की देख रेख में हुआ | नगर निगम में रेट बंधा हुआ है , अफसर आँख मूंदने का तीन लाख रुपए लेते हैं | फिर वह दिल्ली पुलिस और बाकी अमले में बंटता है , इस बीच कोई फोन पर रिकार्डिड या लिखित में शिकायत कर दे तो नगर निगम के कर्मचारी आ कर तोड़ जाते हैं , फिर नए सिरे से सौदेबाजी होती है और काम फिर शुरू हो जाता है | सब अंधे हैं,किसी को पांच मंजिला अवैध निर्माण नहीं दिखते |

अब यह खबर आई है कि तबलीगी जमात की इमारत का नक्शा सिर्फ दो मंजिल का पास है और बनी हुई हैं सात मंजिलें , तो कहाँ है क़ानून का राज | रिश्वत खाने वाले कभी गिरफ्तार नहीं होते , वही गिरफ्तार होते हैं , जो गिरफ्तारी से बचने के लिए रिश्वत का हिस्सा नहीं देते | अवैध निर्माण के लिए दक्षिण दिल्ली का रेट सब…

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Published: 03.Apr.2020, 16:21

अजय सेतिया / आखिरकार मोदी सरकार ने 960 विदेशी तबलिगियों का वीजा रद्द कर के उन्हें ब्लैक लिस्ट भी कर दिया है | ये सभी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे और टूरिज्म के नाम पर पहले निजामुद्दीन में ट्रेनिंग और बाद में इस्लाम के प्रचार में निकल पड़े थे | ये तबलीगी देश की छोटी छोटी जगहों की छोटी छोटी मस्जिदों से मिल रहे हैं | पिछले सत्तर साल से टूरिस्ट वीजा का दुरूपयोग हो रहा था , हर साल कोई दस हजार तबलीगी टूरिस्ट वीजा पर भारत आ रहे हैं | वे पहले निजामुद्दीन के तबलीगी सेंटर में रहते हैं फिर देश के किसी कोने में इस्लाम का प्रचार करने के लिए भेज दिए जाते हैं | एक नहीं कई कानूनों का उलंघन हो रहा था , भारत में विदेशियों की ओर से धर्म प्रचार पर भी प्रतिबंध है, वे उस का भी उलंघन कर रहे थे | अब तो उन्होंने सरकार के लाकआउट आदेश का भी उलंघन किया और भारत के महामारी एक्ट 1897 का भी उलंघन किया |

सवाल यह पैदा होता है कि हर साल हजारों की तादाद में मुस्लिमों को टूरिस्ट वीजा क्यों मिल रहा था ,  कोई एजेंसी उन पर निगाह क्यों नहीं रख रही थी कि वे टूरिस्ट वीजा के नाम पर तबलीगी जमात के मुख्यालय में…

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Published: 02.Apr.2020, 16:18

अजय सेतिया / यह खबर शर्मसार करने वाली है कि 22 मार्च को जिन डाक्टरों , नर्सों , पुलिसकर्मियों के सेवाभाव के लिए सारा देश तालियाँ बजा रहा था , उन्हीं के साथ कुछ लोग दुर्व्यवहार कर रहे हैं |आप अंदाज लगाईए कि भारतीय जन मांस की सेवा में लगे 50 डाक्टर और नर्सें खुद कोरोना वायरस के शिकार हो चुके हैं | कोरोना वायरस से बचने के लिए सरकार 13 मार्च से सारे देश वासियों को सावधान कर रही है | अगर सरकार की बताई एहतियातों का पालन नहीं कर के कोई कोरोना वायरस से पीड़ित हो जाता है , तो डाक्टर उन्हें बचाने की कोशिश ही तो कर सकते हैं , बचाने की गारंटी तो नहीं ले सकते | आप की गलती का फल आप ही भोगेंगे , डाक्टर पर गुस्सा निकालने का क्या फायदा, आप को बचाने के लिए वे खुद मौत से जूझ रहे हैं |

अब तबलीगी जमात को भी कितना समझाया था | टीवी चेनलों पर वह वीडियो दिखाया जा चुका है जिसमें 23 मार्च को निजामुद्दीन थाने का थानेदार तबलीगी जमात के हेड और अन्य चार मुआज्जिज मुल्लाओं को समझाते हुए  पूछ रहे हैं कि अब बिल्डिंग में कितने लोग बचे हैं ,उन्हें बताया जाता है कि 2500 आए थे ,1500 जा चुके ,अब 1000 ब…

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Published: 01.Apr.2020, 19:29

अजय सेतिया / जब से भारत के ग्यारह राज्यों में तबलीगी जमात के कारण बड़े पैमाने पर कोरोना वायरस फैलने की खबर आई है तब से तबलीगी जमात कोतुहल का विषय बन गई है | कांग्रेस के नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने अपने ट्विट में लिखा है कि उम्मींद करनी चाहिए कि इस संगठन का किसी अवांछित संगठन से सम्बन्ध नहीं होगा | उन के कहने का आशय है कि उम्मींद करनी चाहिए कि तबलीगी जमात का इस्लामिक आतंकवादी संगठन से सम्बन्ध नहीं होगा | हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि तबलीगी जमात आतंकवादी संगठनों से भी ज्यादा खतरनाक है , क्योंकि यह इस्लामिक कट्टरता को बढावा देती है , मोहम्मद के जमाने वाली शाषण की खलीफा पद्दति को वापस लाना चाहती है और दुनिया भर में शरीयत लागू करवाना तबलीगी जमात का उद्देश्य है |

तबलीगी जमात की वेबसाईट कहती कहती है –“ तबलीगी जमात एक इस्लामिक मिशनरी मूवमेंट है , जो मुसलमानों को प्रेरित करती है कि इस्लाम को इसी तरह अपनाया जाना चाहिए , जैसा पैगम्बर मोहम्मद के समय में अपनाया जाता था , खासकर मजहबी प्रक्रिया , चाल ढाल और व्यक्तिगत व्यवहार | ” वेबसाईट यह भी कहती है कि जमात गठन 1927 में उस समय जब…

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Published: 31.Mar.2020, 23:06

अजय सेतिया / केजरीवाल सरकार ने नरेंद्र मोदी के लाक आउट का बंटाधार कर दिया | पहले शाहीन बाग़ , फिर मजदूरों , कर्मचारियों का सामूहिक पलायन और अब निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के मरकज में में 441 लोगों में कोरोना वायरस के लक्ष्ण पाया जाना | पहली नजर में केजरीवाल प्रसाशन की लापरवाही दिखाई देने लगी है | भले ही कम से कम इस मामले में केजरीवाल खुद जिम्मेदार नहीं हों , लेकिन प्रसाशन की लापरवाही की जिम्मेदारी उन पर ही आती है | केजरीवाल के स्वास्थ्य मंत्री सतेन्द्र जैन ने कहा है कि सरकार को यह जानकारी 28 मार्च को तब मिली थी जब वहां छह लोगों को खांसी कि शिकायत हुई कि तबलीगी जमात की बिल्डिंग में 1500 से 1700 लोग रह रहे हैं |

हालांकि निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के हजारों लोगों के इक्कठा होने की जानकारी 24 मार्च को अंडमान निकोबार से आ चुकी थी , जब वहां गए 10 में से 9 तबीलीगियों में कोरोना वायरस के लक्ष्ण पाए गए थे | तबलीगी जमात ने भी स्वास्थ्य मंत्री के इस दावे का खंडन करते हुए कहा है कि 24 मार्च को दिल्ली पुलिस ने उन्हें नोटिस भेजा था और 26 मार्च को पुलिस ने उन की एसडीएम से मुलाक़ात क…

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Published: 30.Mar.2020, 20:43

अजय सेतिया / यह बात सही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाकआउट करने से पहले कई बातों के बारे में विचार नहीं किया | देश की जनता को लाकआउट के लिए सिर्फ चार घंटे दिए गए | 24 मार्च को रात आठ बजे वह टीवी पर आए और अपना भाषण खत्म करते करते रात 12 बजे से लाक आउट का एलान कर दिया | जिस तरह नोट बंदी करते समय कुछ बातों का ध्यान नहीं रखा गया था और बाद में कम से कम सौ बार नियमों में बदलाव किया गया | ठीक वैसे ही लाक डाउन में समस्या का सामना होने पर समाधान ढूंढा जा रहा है | यानी प्यास लगने पर कुआं खोदने वाली कहावत चरितार्थ हो रही है |

इसे माना ही जाना चाहिए कि लाक डाउन का फैसला केबिनेट में लिया गया था , तो केबिनेट में क्या श्रम मंत्री या गृह मंत्री को यह नहीं बताना चाहिए था कि दिल्ली , मुम्बई और सभी प्रदेशों की राजधानियों में लाखों मजदूर रहते हैं , जो दैनिक मजदूरी कर के अपना और अपने परिवार का पेट पालते हैं , उन का क्या होगा | अगर यह बात शुरू में ही प्रधानमंत्री के ध्यान में लाई जाती तो प्यास लगने पर कुआं खोदने की जरूरत नहीं पडती और उतर प्रदेश और राजस्थान में मुख्यमंत्रियों को दिल्…

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Published: 29.Mar.2020, 17:16

अजय सेतिया / देश भर में 21 दिन का लाक डाउन लागू होने के तीसरे दिन ही दिल्ली में अफरा तफरी मच गई | एक तरफ ऐसी अफवाहों का बाज़ार गर्म था कि लाक डाउन अवधि आगे भी बढ़ेगी , तो दूसरी तरफ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल उन लाखों मजदूरों के खाने-पीने का इंतजाम करने में पूरी तह विफल साबित हो रहे थे | पहले दिन तो उन्होंने सिर्फ 20 हजार दिहाड़ी मजदूरों के लिए खाने की व्यवस्था की थी , जबकि जरूरत कम से कम चार लाख लोगों के लिए भोजन की थी | यह एहसास उन्हें दुसरे दिन हुआ तो उन्होंने 2 लाख लोगों के भोजन की व्यवस्था करने का एलान किया लेकिन तीसरे दिन उस में भी विफल हो गए | नतीजा यह निकला कि यूपी, बिहार, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान से आ कर दिल्ली में काम करने वाले लोगों में बेचेनी बढ़ गई | ख़ास कर यूपी –बिहार के मजदूरों का दिल्ली में बिना काम के दिल्ली में रहना मुश्किल हो गया |

इधर व्यवस्था में नाकाम आम आदमी पार्टी के विधायकों और कार्यकर्ताओं ने यह कर कर उन का होंसला तोड़ा कि लाक आउट तो 21 दिन से भी ज्यादा चलेगा , यह सच भी हो, तो भी उन्हें उन के रहने खाने की व्यवस्था करनी चाहिए थी , जैसा…

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Published: 26.Mar.2020, 19:14

अजय सेतिया / कांग्रेस को शायद अब एहसास हो गया है कि यह वक्त राजनीतिक बयानबाजी का नहीं है | न ही राजनीतिक आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर कदम पर मीन-मेख निकालने का वक्त है | इस लिए 22 मार्च के जनता कर्फ्यू से दूरी बनाने और खिल्ली उड़ाने के दो दिन बाद राहुल गांधी ने ट्विट कर के सरकार के आदेशों का पालन करने की अपील की और 26 मार्च को जब मोदी सरकार ने गरीबों और निम्न मध्यम वर्ग के लिए 1,70,000 करोड़ के पॅकेज का एलान किया तो राहुल गांधी ने उस का स्वागत किया | राष्ट्र के प्रति कांग्रेस की इस सकारात्मक सोच का स्वागत किया जाना चाहिए | राष्ट्रीय स्वय सेवक संघ की तरह कांग्रेस सेवा दल भी अभावग्रस्त लोगों की सेवा में जुट जाए तो संकट की इस घड़ी में राष्ट्र एकजुट दिखाई ही नहीं देगा , विजय भी हासिल करेगा |

 

यह एक अच्छी बात है कि प्रधानमंत्री ने पांच साल पहले ही स्वच्छ भारत की मुहीम शुरू कर दी थी , सोचो इस बीच अगर 4.5 करोड नए शौचालय नहीं बने होते तो भारत कोरोना वायरस का कैसे मुकाबला करता | अक्टूबर 2014 से पहले सि…

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Published: 25.Mar.2020, 19:11

अजय सेतिया  / नरेंद्र मोदी ने जब 22 मार्च के जनता कर्फ्यू का आह्वान किया था , तो सारा देश शाम 5 बजे इस संकट की घड़ी ने जनता की सेवा करने वालों का आभार करने के लिए तालियाँ, थालियाँ और घंटियां शंख बजा रहा था | शरद पवार मुम्बई में , नवीन पटनायक भुवनेश्वर में , केसीआर और जगनमोहन रेड्डी हैदराबाद में इस हवन में शामिल थे | सिर्फ सोनिया गांधी और राहुल गांधी कहीं दिखाई नहीं दिए | हालांकि खुद राहुल गांधी में फरवरी मध्य में देश को इस खतरे से आगाह किया था | हालांकि उन्हें तब तक यह नहीं पता था कि कोरोना वायरस उन की एक राज्य सरकार निगल लेगा | इधर 2 मार्च को कोरोनावायरस ने दबे पाँव दस्तक दे दी थी, जब राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने भारत में कोरोनावायरस से पीड़ित पहले मरीज की पुष्टि की | उधर उसी दिन दिग्विजय सिंह ने दिल्ली में विस्फोटक बयान दिया था कि भाजपा कांग्रेस के विधायको को खरीदने के लिए 25 से 35 करोड़ रूपए का भाव लगा रही है |

कोरोना वायरस छूआछूट की बीमारी है और सब जानते हैं कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस के खेमे हमेशा से छूआछूत से ग्रस्त रहे हैं | तब यह समझ आ रहा था क…

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Published: 24.Mar.2020, 19:08

अजय सेतिया /प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजुल मीडिया के पत्रकारों से बातचीत के 24 घंटे बाद जब पुलिस ने शाहीन बाग़ से तम्बू उखाड़ फैंके तो मीडिया में कोई शोर शराबा नहीं हुआ | असल में सरकार विजुअल मीडिया के डर से ही चुप्पी साध कर बैठी हुई थी | वरना वह गैरकानूनी धरना 17 दिसम्बर को ही उखाड़ फैंकती | नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध तो पूरी तरह अनपढ़ता पर आधारित है ही , सडक पर धरना लगाना भी गैरकानूनी था |

शुरू में आमजन और मीडिया की आँखों में धूल झोंक कर धरने को सेक्यूलर बताने की कोशिश की गई , कुछ हिन्दुओं , सिखों , ईसाईयों को धरने में बिठा कर सभी धर्मों की ओर से नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध दर्शाया गया | अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के दिल्ली स्थित रिपोर्टरों ने इसी भ्रान्ति में आ कर क़ानून के खिलाफ व्यापक विरोध की बेबुनियाद खबरें लिखीं जिस से दुनिया भर में भारत की छवि खराब हुई | इस लिए भी मोदी सरकार फूंक फूंक कर कदम रखना चाहती थी |

कपिल सिब्बल ने राज्यसभा में यह कह कर कि नागरिकता संशोधन क़ानून से किसी की नागरिकता नहीं जाएग , इस धरने के आधार की हवा निकाल दी थी | साबित हो गया था कि…

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