India Gate Se

Published: 19.Apr.2021, 20:50

अजय सेतिया / अपना शुरू से मत रहा है और अपन कई बार लिख भी चुके हैं | टीवी चेनल पर चर्चा में भी अपना मत साफगोई से रख चुके हैं कि मोदी को ब्यूरोक्रेसी के मक्कड़जाल से निकल कर राजनीतिक लोगों से सलाह मशविरा ले कर निर्णय करने चाहिए | लेकिन यह गलती सिर्फ मोदी के स्तर पर ही नहीं हो रही , राज्यों के भाजपाई मुख्यमंत्री भी इसी तरह की गलतियाँ कर रहे हैं | जिस से जनाक्रोश बढ़ता है | उत्तराखंड का उदाहरण अपने सामने है | कोरोनावायरस से पहले भी अपन पिछले कई सालों से लिख रहे हैं कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को अपना राजनीतिक फीडबैक मजबूत करना चाहिए | ब्यूरोक्रेसी से मिले फीडबैक के आधार पर फैसला करने की बजाए काउन्टर चेक किया जाना चाहिए | राजनीतिक मामलों की केबिनेट कमेटी की बैठकें साप्ताहिक स्तर पर होने चाहिए | अगर अपन संक्रमन की मौजूदा रफ्तार के लिए ब्यूरोक्रेटिक फैसलों को जिम्मेदार ठहराएं तो गलत नहीं होगा |

अपन जानते हैं कि भारत में मेन्युफेकचर की गई कोवेक्सिन और कोवाशिल्ड दुनिया के अन्य देशों को देने की हमारी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिब्द्ध्ता थी , क्योंकि वेक्सीन पर उन देशों का भी हक बन…

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Published: 14.Apr.2021, 20:36

अजय सेतिया / शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक पहले कदम उठाने से चूक गए | दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने खुद को बच्चों के बारे में ज्यादा संवेदनशील साबित किया | उन्होंने वक्त रहते प्रधानमंत्री से सीबीएसई की परीक्षाएं रद्द करने की मांग की | राजनीति में अपन देखते आए हैं सरकार ने जब कोई लोकप्रिय फैसला लेना होता था तो सत्ताधारी पार्टी की तरफ से मांग उठाई जाती थी | अपनी पार्टी को लोकप्रिय फैसले का श्रेय दिया जाता था | लेकिन इस मामले में केजरीवाल श्रेय ले गए | केजरीवाल की सार्वजनिक मांग के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहल कर के शिक्षामंत्री को बुला कर फैसला करवाया | यह घटना मोदी सरकार की कार्यशैली पर भी एक टिप्पणी है कि मंत्री जनहित के फैसले लेने में भी तब तक पहल नहीं करते , जब तक ऊपर से इशारा न हो | यह लोकतंत्र के लिए अच्छी बात नहीं है |

प्रधानमंत्री के आदेश पर मेट्रिक की परीक्षाएं रद्द हो गई है और बाहरवीं की परीक्षाएं स्थगित | यह उन्हीं का बनाया हुआ फार्मूला है कि स्टूडेंट्स का मूल्यांकन इंटर्नल एसेसमेंट के आधार पर किया जाएगा | जिन छात्रों को इंटरनल ए…

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Published: 13.Apr.2021, 21:25

अजय सेतिया / विक्रमी सम्वत 2078 के पहले दिन मंगलवार शाम आठ बजे जब अपन यह कालम लिख रहे थे , दुनिया भर में 29,62,470 लोग कोरोना का शिकार हो कर स्वर्ग सिधार चुके थे | अमेरिका जो अभी तक पहले नम्बर पर है , वहां 5,62,000 लोग मौत का शिकार हुए हैं , भारत की संख्या 1,71,058 है | लेकिन कोरोना की शुरूआत से ही मोदी विरोध के कारण भारत के बारे में नाकारात्मक सोच रखने वाले मीडिया ने शोर मचाना शुरू कर दिया है कि क्या अमेरिका को पीछे छोड़ेगा भारत | राजनीतिक तौर पर मात नहीं दे सके तो कोरोना महामारी को आगे कर के मोदी को मात देने की इस कुत्सित मानसिकता पर क्या कहा जाए | हालांकि अपन भी मोदी सरकार की पहले 60 से ऊपर और अब 45 से ऊपर उम्र वालों को वेक्सीन दिए जाने की राशनिंग से सहमत नहीं है | सरकार की इस दलील को भी अपन खारिज नहीं करते कि भारत की दोनों वेक्सीन उत्पादक कम्पनियां इतनी वेक्सीन नहीं बना रही हैं कि सब को वेक्सीन लगाने के दरवाजे एक साथ खोल दिए जाएं | लेकिन इस में भी कोई मापदंड रख कर रास्ता निकाला जा सकता था | जैसे महानगर मुम्बई और दिल्ली के आधार कार्ड धारकों को 25 साल की उम्र से वेक्सीन लगा…

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Published: 12.Apr.2021, 17:46

अजय सेतिया / भारत का सुप्रीमकोर्ट किसी की याचिका की सुनवाई अपने दायरे में न समझ कर स्वीकार न करे , यह हो सकता है | इस में न तो कोई हैरानी वाली बात होगी , न गुस्से वाली | अपन को पहले से अनुमान था कि भारत की सुप्रीमकोर्ट ऐसा कोई सेक्यूलरिज्म का कदम नहीं उठा सकती ,जिस से दुनिया भर में उस की वाहवाही हो | सेक्यूलरिज्म संविधान में दिखावटी चीज बना रहना ही शोभा देता है या सिर्फ राजनीतिक दलों को चुनावी मुद्दे के तौर पर उछालना अच्छा लगता है | अपना यह पक्का विशवास है कि हिन्दू सेक्यूलर है पर 1975 में भारत के संविधान में लिख दिए जाने के बावजूद संविधान सेक्यूलर नहीं है | संविधान सेक्यूलर होता तो 1975 में संविधान में लिखते समय ही धर्म के आधार पर पारित सभी क़ानून खारिज किए जाते और भारत में  समान आचार संहिता लागू की जाती |

शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी किसी और ही दुनिया में रहते थे , जो सुप्रीमकोर्ट में कुरआन की 26 आयतें खारिज करवाने चले गए | किसी धार्मिक किताब में दखल देना भारतीय अदालतों का काम नहीं | जिन 26 आयतों में मुसलमानों को दुनिया के गैर मुसलमानों से श्रेष्ठ…

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Published: 09.Apr.2021, 20:54

अजय सेतिया / भारत में कोरोना का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है |  पिछले 7 दिनों में संक्रमण प्रतिदिन औसत 1, 08,202  हैं | शुक्रवार सुबह जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे के दौरान देशभर में 1,31,968 नए मामले दर्ज किए गए, जिन्हें मिलाकर देश में संक्रमण के कुल पुष्ट मामलों की तादाद 1,30,60,542 हो गई है | पिछले 24 घंटे के दौरान 780 लोगों ने कोरोना संक्रमण के चलते जान भी गंवाई है | मौतों के मामले में महाराष्ट्र 57,028 मौतों के साथ पहले नम्बर पर , कर्नाटक 12,767 मौतों के साथ दूसरे नम्बर पर और दिल्ली 11,157 मौतों के साथ तीसरे नम्बर पर है | संक्रमण के मामले में महाराष्ट्र 32,30,000 , केरल 11,50,000 और कर्नाटक 10,40,000 आंकड़ों के साथ क्रमश पहले दूसरे और तीसरे नम्बर पर हैं | यानी कोरोनावायरस यह नहीं देख रहा कि कहां पर किस पार्टी की सरकार है , इस के बावजूद वेक्सीन को लेकर महाराष्ट्र और दिल्ली सरकारों ने केंद्र सरकार के साथ जंग छेड़ रखी है | अपन को याद है कि जब पिछले साल संक्रमण शुरू हुआ था तो गुजरात में थोड़ा ज्यादा फ़ैल रहा था और केरल में कम फ़ैल रहा था , तब टीवी चेनलों पर…

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Published: 08.Apr.2021, 21:03

अजय सेतिया / अपन को जब यह बात पता चली थी कि केन्द्रीय सुरक्षा बलों ने सूचना के आधार पर पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी की बटालियन-वन का प्रमुख माडवी हिडमा को ज़िंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए बीजापुर में आपरेशन की रूपरेखा बनाई थी , तभी अपनी आँख फडफडाई थी कि यह सूचना केन्द्रीय सुरक्षा बलों को फांसने के लिए भेजी गई थी | सूचना 60-70 नक्सलियों के छिपे होने की थी , जिस की पुष्टि ड्रोन से करवाई गई थी | सवाल खड़ा होता है कि फिर नक्सलियों की संख्या सात सौ से ज्यादा कैसे हो गई | क्या इस से यह नहीं लगता कि केन्द्रीय सुरक्षा बलों को फांसने का जाल खुद नक्सलियों ने बुना था और प्रशासन ने इस में उन की मदद की | गुरूवार को सैंकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में छ्तीसगढ़ सरकार की बनाई कमेटी के सामने जब नक्सलियों ने बंदी बनाए गए राकेश्वर सिंह मनहास को छोड़ा तो अपना शक और गहरा हुआ कि ग्रामीणों में नक्सलियों का दबदबा फिर से कायम करने के लिए स्थानीय प्रशासन ने नक्सलियों के साथ मिल कर खून खराबे की साजिश रची थी |

नक्सलियों में माडवी हिडमा के छिपे होने की खबर भी अपने शक को गहरा करती है | अब 22 सुरक्षा बलों…

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Published: 07.Apr.2021, 19:05

अजय सेतिया / अपन बार बार लिख रहे हैं कि मोदी सरकार राजनीतिक निर्णय ले , ब्यूरोक्रेसी पर निर्णय नहीं छोड़े , वरना बाद में पछताना पड़ेगा | ब्यूरोक्रेसी के तुगलकी फरमानों से कोरोना के हालात बिगड़ रहे हैं और देश के उत्पादक राज्य लाक डाउन की ओर बढ़ रहे हैं , जिस से पलायन की स्थिति फिर से पैदा हो रही है | मोदी , राजनाथ सिंह , अमित शाह , पीयूष गोयल , डा. हर्ष वर्धन और संतोष गंगवार मिल कर बैठें | ब्यूरोक्रेसी से बिलकुल सलाह न करें , अलबत्ता पार्टी लाईन छोड़ कर मुख्यमंत्रियों से फीड बैक लें और उन के फीडबैक में अपना राजनीतिक विजन डाल कर कार्य योजना तैयार करें | पीयूष गोयल और संतोष गंगवार को अपन ने इस लिए जोड़ा है , क्योंकि उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय पीयूष गोयल के पास है और लेबर मंत्रालय संतोष गंगवार के पास | लाक डाउन में सब से ज्यादा प्रभाव श्रमिको के पलायन और इंडस्ट्री के उत्पादन पर होना है |

पीयूष गोयल भारत की आर्थिक राजधानी मुम्बई से ताल्लुक रखते हैं | वह अपने गृह राज्य महाराष्ट्र के हालात बेहतर जानते हैं , जो पिछले साल की अप्रेल जैसे ही हो गए हैं | पिछले साल लाकडाउन के समय मुम्बई…

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Published: 06.Apr.2021, 18:22

अजय सेतिया / पहले अपन ने सोचा था कि राफेल सौदे में फ्रांस की “द वायर” यानी “मीडिया पार्ट” की उस खबर पर लिखें , जिस पर राहुल गांधी की बांछें फिर खिल गई है , और उन्होंने आज ट्विटर पर लिखा था –“कर्म-किए कराए का भी खाता | इस से कोई नहीं बच सकता | #राफेल “ फिर जब देखा कि चंडूखाने की इस खबर को जब कांग्रेस समर्थक एनडीटीवी ने ही महत्व नहीं दिया , तो अपन क्यों दें | पर यह बताते जाएं कि यह मामला है क्या | जैसे भारत में वामपंथी विचारधारा की मुहीम चलाने वाली वेबसाईट “द वायर” है , वैसे ही फ्रांस में वामपंथी वेबसाईट “मीडिया पार्ट” है | उस ने यह चंडूखाने की खबर प्रसारित की है कि 60 हजार करोड़ के सौदे में आठ करोड़ 62 लाख रूपए की रिश्वत दी गई | और रिश्वत भी उसे दी गई , जिसे मोदी सरकार ने 2017 में अगस्ता वेस्टलैंड सौदे में दलाली के लिए जेल में बंद किया था ( अभी जमानत पर रिहा है ) उस का नाम सुशेन मोहन गुप्ता है , जो कांग्रेस के बड़े नेता कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी का साझेदार है | “मीडिया पार्ट” की खबर हास्यस्पद थी , क्योंकि 60,000 करोड़ के सौदे में सिर्फ साढ़े आठ करोड़ की रिशत हास्यस्पद ही है ,…

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Published: 05.Apr.2021, 17:31

अजय सेतिया / खैर यह नैतिकता तो नहीं है , जिस को आधार बता कर अनिल देशमुख ने इस्तीफा दिया है | नैतिकता होती , तो उसी दिन इस्तीफा दे कर सीबीआई जांच की मांग करते , जिस दिन परमवीर सिंह ने सौ करोड़ रुपए माहवारी लेने का आरोप लगाया था | मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे में भी कोई नैतिकता होती तो वह उसी दिन अपने गृहमंत्री से इस्तीफा मांग लेते , जिस दिन उन्हें परमवीर सिंह की चिठ्ठी मिली थी | परमवीर सिंह में भी नैतिकता होती , तो वह मुम्बई के पुलिस कमिश्नर रहते हुए उस दिन मुख्यमंत्री को चिठ्ठी लिखते ,जिस दिन उन्हें पता चला था कि गृहमंत्री अनिल देशमुख ने सचिन वाझे जैसे छोटे पुलिस अधिकारियों को वसूली पर लगा रखा है , जिस कारण वह उन पुलिस कर्मियों से इमानदारी की अपेक्षा नहीं कर सकता | परमवीर सिंह में जरा भी नैतिकता होती तो यह सब जानते हुए वह वाझे को सम्मानित नहीं करते, जिस के फोटो अखबारों में छपे थे |

नैतिकता के हमाम में सब नंगे हैं , सिर्फ अनिल देशमुख , परमवीर सिंह और सचिन वाझे ही क्यों , उद्धव ठाकरे और शरद पवार भी , जो पिछले 15 दिन से भ्रष्टाचार को दबाने की कोशिश में लगे हुए थे | उद्धव ठाकर…

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Published: 02.Apr.2021, 16:00

अजय सेतिया / तीसरा दौर आते आते बंगाल का चुनाव ज्यादा दिलचस्प हो गया है | मोदी और अमित शाह के जुमले तो चुनाव में दिलचस्पी ला रहे हैं , लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी को जुमले सिखाने का दावा करने वाले प्रशांत किशोर के जुमले सूख गए हैं | प्रशांत किशोर ने दावा किया था कि अच्छे दिन, चाय पर चर्चा और हर हर मोदी , घर घर मोदी का जुमला उन का बनाया हुआ था , जिस ने मोदी को वास्तव में घर घर पहुंचा कर उन्हें प्रधानमंत्री पद तक पहुंचा दिया था | अपने मुहं मियाँ मिठ्ठू बनने वाले इस प्रशांत किशोर को तब राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने लपक लिया था | लेकिन वह दोनों की खाट खडी कर के मुहं छुपा कर नीतीश कुमार की शरण में चले गए थे , वहां भी वह मियाँ मिठ्ठू बनने लगे तो निकाल बाहर किए गए | इस बीच चन्द्र शेखर राब और जग्गन रेड्डी के लिए काम करने का दावा करने वाले प्रशांत किशोर ने इस बार ममता दीदी को फांस लिया था | दीदी से करोड़ों करोड़ों रूपए ऐंठने के बाद भी उन्हें कोई ऐसा जुमला नहीं थमा सके कि जिस के सहारे वह चुनाव की नैय्या पार करती दिखती | असल में वह खुद ही अपने एक जुमले में फंस गए हैं कि भाजपा ने स…

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