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Published: 14.Dec.2017, 20:56

अजय सेतिया / गुजरात में कांग्रेस 80 सीटें ले गई | तो वह कांग्रेस की जीत होगी | यह अपन शुरू से कहते रहे है | अब गुजरात के चुनाव निपट गए हैं तो अपन आज इसे फिर दोहराते हैं | जो लोग कांग्रेस की जीत की उम्मींदे लगाए हैं | उन्हें अपनी शुभकामनाएं | अपन को ऐसी कोई उम्मींद नहीं लगती | कांग्रेस 2012 की जीती हुई 61 भी बचा ले, तो वह भी कांग्रेस की हार नहीं | 2012 में भाजपा ने 115 सीट जीती थीं  |  कांग्रेस को 61 सीटों पर जीत मिली थी | जब देश को कांग्रेस मुक्त करने की हवा चल रही हो | ऐसे में राहुल गुजरात में यथास्थिति भी बनाए रखें, तो कम नहीं | टूडे चाणक्य तो अपने एक्जिट पोल में कांग्रेस को ज्यादा से ज्यादा 58 सीटें दे रहा है | जबकि न्यूज नेशन तो ज्यादा से ज्यादा 56 दे रहा है | शुरू में मोदी और अमित शाह की रणनीति कांग्रेस को यूपी वाली हालत में पहुंचाने की थी | इस लिए अमित शाह ने 150 का लक्ष्य रखा था | कांग्रेस को 30-32 में निपटाने की योजना बना रखी थी | पर पाटीदारों के विरोध ने वह स्थिति तो नहीं बनाने दी | इस लिए आख़िरी दिनों में अमित शाह ने 150 का लक्ष्य नहीं दोहराया | भाजपा का कोई ने…

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Published: 12.Dec.2017, 21:36

अजय सेतिया / चलो गुजरात का शोर शराबा शांत हुआ | प्रधानमंत्री मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दिल्ली लौट आए | पूरे चुनाव में राहुल गांधी से कोई बड़ी भूल नहीं हुई | गुजरात ने राहुल से पप्पू का लेबल हटा दिया | राहुल गुजरात विधानसभा चुनावों के दौरान ही कांग्रेस अध्यक्ष बन गए | गुजरात ने कांग्रेस को अल्पसंख्यकवाद के भंवरजाल से निकालने की शुरुआत कर दी  |  यह श्रेय भी राहुल गांधी को जाएगा | अध्यक्ष बनते ही उन ने कांग्रेस को नी दिशा दिखा दी | जो उन की मां की अल्पसंख्यकवाद की दिशा के एकदम उल्ट है | चुनाव के आख़िरी दिन प्रेस कांफ्रेंस कर के राहुल ने खुद को नेता भी साबित किया | कुल मिला कर गुजरात चुनाव ने राहुल को मच्योर नेता की मान्यता दिलाई है | राहुल ने गुजरात में मोदी को पहली बार चुनावी चुनौती का अहसास करवाया है | अब मोदी यह नहीं कह सकते कि 2019 में उन को कोई चुनौती नहीं | दोनों दलों की ओर से मोदी और राहुल ही चुनाव लड़ रहे थे | इस लिए यह 2019 की रिहर्सल थी | दोनों दलों के लोकल नेता मैदान से गायब थे | यहाँ तक की मुख्यमंत्री रुपानी की खुद की हालत खराब बताई जा रही है | इस चुनाव…

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Published: 11.Dec.2017, 20:58

 अजय सेतिया / गुजरात विधानसभा चुनाव से अब विकास कहीं गुम हो गया है | सभी पार्टियां और उनके नेताओं के बयानों में विकास गायब है | गुजरात चुनाव में कश्मीर से लेकर पाकिस्तान तक चर्चा में है | पर गुजरात के अहम मुद्दों पर कोई बात नहीं कर रहा | कांग्रेस बीजेपी दोनों ने शुरुआत विकास के मुद्दे पर की थी | अब चुनाव का मुद्दा कश्मीर, अफजल गुरु के बाद पाकिस्तान पर आ गया है | रिपब्लिक न्यूज चेनेल ने मोदी को पाकिस्तान का मुद्दा सौप दिया | हुआ यह था कि मणिशंकर अय्यर ने जब नरेंद्र मोदी को नीच आदमी कहा | उस से ठीक एक दिन पहले पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद मुहम्मद कसूरी दिल्ली में थे | कसूरी और मणिशंकर भारत-पाक रिश्ते सुधारने की मुहीम में लगे रहते हैं | कसूरी भारत आते हैं, तो मणिशंकर इस तरह की बैठक बुलाते हैं | मणिशंकर पाक जाते हैं , तो कसूरी विचार-विमर्श की बैठक बुलाते हैं | इसी तरह की एक बैठक में मणिशंकर ने कहा था -" पहले मोदी को हटाना पडेगा | जब तक वह पीएम हैं भारत-पाक रिश्ते नहीं सुधर सकते | "  इसी पुरानी बात को मोदी ने पाकिस्तान को सुपारी देने की बात कह कर भुनाया है | मणिशं…

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Published: 08.Dec.2017, 21:26

अजय सेतिया / सोशल मीडिया में राहुल के समर्थक भी अजीब हैं | मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री को नीच कहा  | तो राहुल गांधी ने तो मणिशंकर अय्यर को निलम्बित करवा दिया | गुजरात के चुनाव न होते | उस चुनाव में मोदी को नीच कहा गया भारी न पड़ता | तो अय्यर कभी निलम्बित नहीं होते | वह तब निलम्बित नहीं हुए थे जब उन ने मोदी का सत्ता पलट करने के लिए पाकिस्तान की मदद माँगी थी | वह तो राष्ट्रद्रोह था | पर सोनिया गांधी ने तब उन्हें निलम्बित नहीं किया | मोदी ने शुक्रवार को याद दिलाया कि मणिशंकर ने उन्हें हटवाने के लिए पाकिस्तान को सुपारी दी थी | मणिशंकर अय्यर को तब भी निलम्बित नहीं किया गया था जब उन ने मोदी के लिए कहा था -" वह लौह पुरुष नहीं लौ पुरुष है | वह सांप ,बिच्छू , गंदा और आदमी है | वह तब भी निलम्बित नहीं हुए थे , जब लोकसभा चुनाव में उन ने कहा था कि चाय बेचने वाला देश का प्रधानमंत्री नहीं बन सकता |  मणिशंकर अय्यर तब भी निलम्बित नहीं हुए थे, जब उन ने कहा था कि मोदी रावण का अवतार हैं | पर अब जब मणिशंकर अय्यर की बदजुबानी की आंच गुजरात के चुनाव पर पहुंची | तो राहुल ने उन्हें निलम्बित करव…

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Published: 07.Dec.2017, 22:01

अजय सेतिया / सत्ता से बाहर होने के बाद बूढ़े कांग्रेसियों का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है | इस की शुरुआत खुद सोनिया गांधी ने की थी | जब उन ने नरेंद्र मोदी को मौत का सौदागर कहा | कांग्रेस को उस का खामियाजा भुगतना पड़ा | पर सोनिया गांधी ने आज तक माफी नहीं माँगी | इस से कांग्रेसी छुटभैयों के होंसले बुलंद होते गए | कभी दिग्विजय सिंह अपनी मर्यादा तोड़ देते हैं | कभी कपिल सिब्बल और कभी मणिशंकर अय्यर | मोदी लम्बी लम्बी हांकते होंगे | जिस लिए वामपंथी बुद्धिजीवियों ने उन्हें फेंकू कहना शुरू किया | राहुल गांधी से बोलने में लाख गलतियाँ होती होंगी | वह राजनीति के पप्पू साबित होते होंगे | पप्पू और फेंकू से शुरू हुई राजनीतिक भाषा की नीचता अब यहाँ तक पहुंच गई है | विदेश सेवा का ज्वायंट सक्रेटरी और मंत्री रहा व्यक्ति प्रधानमंत्री के लिए "नीच" शब्द का इस्तेमाल करता है | अपन दो दिन से कह रहे है कि कांग्रेस के नेहरूवादी राहुल के रास्ते का रोड़ा हैं | हालाकि मणिशंकर अय्यर को खुद नहीं पता होता कि वह क्या बोल रहे होते हैं | जिस दिन राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष का पर्चा भर रहे थे | उस दिन  मणिशंकर अय्यर…

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Published: 06.Dec.2017, 23:52

अजय सेतिया / अपना बुधवार को शीर्षक था राहुल के रास्ते की अडचन हैं नेहरूवादी | जिसमें अपन ने अयोध्या मुद्दे पर सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकीलों का जिक्र किया था | कपिल सिब्बल सुन्नी वक्फ बोर्ड के याचिकाकर्ताओ में से एक के वकील हैं | सिब्बल के साथ दो और कांग्रेसी सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील थे | राजीव धवन और दुष्यंत दवे | " तीनों का तर्क था कि मोदी सरकार कोर्ट के कंधे पर बन्दूक रख कर मंदिर बनाना चाहती है | मोदी ने रामजन्मभूमि मंदिर बनवाने का वादा किया था | वह कोर्ट से फैसला करवा कर मंदिर बनवाना चाहती है | इन तीनों ने दलील दी कि 15 जुलाई 2019 तक सुनवाई स्थगित की जाए | यानी लोकसभा चुनाव के बाद फैसला हो | यानी नेहरूवादी सोमनाथ मंदिर की तरह रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण रोकने को भी सामने आ गए हैं |" अपन ने सवाल उठाया था-" क्या राहुल इन सिब्बलों के रहते कांग्रेस को सही रास्ते पर ला पाएंगे | तीन कांग्रेसी वकीलों की याचिका ने गुजरात में राहुल गांधी के किए कराए पर पानी फेर दिया है | राहुल कांग्रेस को अल्पसंख्यकवाद से निकालने में जुटे हैं | पर नेहरूवादी उन की पीठ में छूरा घोंप रहे हैं | " जब कोर्ट से…

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Published: 05.Dec.2017, 22:45

अजय सेतिया / आज बाबरी ढांचा टूटने की 25वीं साल गिरह है | रामभक्तों ने 6 दिसम्बर 1992 को बाबरी ढांचा तोड़ दिया था | तब से तीन केस अदालत में चल रहे हैं | एक बाबरी ढांचा तोड़ने वालों के खिलाफ | एक ढांचा तोड़ने की साजिश रचने का केस | तीसरा केस विवादास्पद जमीन के टाईटल का | टाईटल का केस अंतिम दौर से गुजर रहा है | इलाहाबाद हाई कोर्ट 30 सितम्बर 2010 को फैसला सुनाया था |  फैसले से पहले विवादास्पद जमीन की खुदाई करवाई गई थी | खुदाई करने वाली टीम में आधे मुस्लिम और आधे हिन्दू थे | खुदाई में मंदिर के अवशेष मिले थे | हाईकोर्ट के फैसले में मंदिर के अवशेषों का जिक्र है | तीनों जजों ने माना था कि बाबरी ढांचा मन्दिर के मलबे पर खडा था | सभी जजों ने  सुन्नी वक्फ बोर्ड का दावा ठुकरा दिया था | पर दो जजों सुधीर अग्रवाल और एसयू खान ने संतुलन बनाने वाला फैसला दिया | विवादित जमीन का एक तिहाई हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दे दिया | इन जजों ने कहा कि मुस्लिम वहां लम्बे समय तक नमाज पढ़ते रहे हैं | इस लिए एक तिहाई जमीन उन्हें दे दी जाए | हाई कोर्ट ने कहा कि परिसर के एक हिस्से में भगवान राम विराजमान हैं |…

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Published: 04.Dec.2017, 22:49

 अजय सेतिया / कांग्रेस को अपन दो हिस्सों में बाँट कर देखें | तो कांग्रेस को समझना आसान होगा | आज़ादी के पहले की कांग्रेस और आज़ादी के बाद की कांग्रेस | कांग्रेस की स्थापना ब्रिटिश राज में 28  दिसंबर 1885 में हुई थी |  इसके संस्थापक  ए ओ ह्यूम थे | जो ब्रिटिश आईसीएस अफसर थे | जब 1857 का पहला विद्रोह हुआ | तो वह इटावा में कलेक्टर थे | तब उन्होंने विद्रोह के खिलाफ 30 मई 1857 को "राजभक्त" जमीदारों की रक्षक सेना बनाई थी | इस सेना का मकसद इटावा में विद्रोह को कुचलना था | इस की सफलता ही कांग्रेस के गठन का आधार बना | कांग्रेस स्थापना के वक्त  ए ओ ह्यूम ने कुलीन वर्ग के 72 लोग जुटाए थे | पहली बैठक बॉम्बे के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत महाविद्यालय में हुई थी | पहले महासचिव महासचिव ए ओ ह्यूम खुद चुने गए | उन्होंने कलकत्ते के व्योमेश चन्द्र बनर्जी को अध्यक्ष नियुक्त किया था | कांग्रेस ब्रिटिश शासन के साथ तालमेल और सामाजिक संस्था के तौर पर काम कर रही थी | राजनीतिक रूप 1907 में जा कर लिया | जब काँग्रेस में दो दल बन चुके थे - गरम दल और नरम दल | गरम दल का नेतृत्व बाल गंगाधर ति…

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Published: 01.Dec.2017, 22:30

अजय सेतिया / उत्तर प्रदेश के स्थानीय चुनावों में भाजपा ने फिर परचम फहरा दिया | कांग्रेस, सपा,बसपा बड़ी उम्मींद लगा कर बैठे थे | इस राजनीतिक दलों से ज्यादा उम्मींद तो स्वयम्भू  बुद्धिजीवी लगा कर बैठे थे | इन में कई सक्रिय पत्रकार भी थे | राजनीतिक दलों को तो अपनी हालत पता होती है | सो उन को ज्यादा सदमा नहीं लगता | बेगानी शादी के दुल्ल्हे ज्यादा परेशान होते हैं | जब से फेसबुक और ट्विटर का सोशल मीडिया आया है | तब से निष्पक्षता का आवरण औढे बैठे मिडिया मुगलों की पोल खुल गई | वे अपनी फर्जी रिपोर्टों से वोटरों को प्रभावित करते रहते थे | अब हवा का रुख सोशल मीडिया से बेहतर मिल जाता है | जहां हर कोई सम्पादक है | इस लिए मीडिया हाऊसों ने भी उन फर्जी रिपोर्टों वालों को बर्फ में लगा दिया है | अब वे अपना फर्जीवाडा सोशल मीडिया पर पेलते हैं | जिन पर उन्हीं के पाठक उन की खाल खिंचते हैं | उन के सारे चुनावी आकलन गलत साबित हो रहे हैं | इन्हीं में से एक ने शुक्रवार सुबह लिखा-" पिछली बार भाजपा के 12 में से 10 मेयर थे, इस बार भाजपा 16 में से 10 भी जीत जाए, तो बहुत बड़ी जीत होगी |" अब यह बात उन ने रिजल…

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Published: 29.Nov.2017, 22:26

अजय सेतिया / राहुल गांधी ने सोमनाथ मंदिर जा कर गुजरात के पुराने जख्म हरे कर दिए | राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी के नाना सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण किए जाने के खिलाफ थे | नेहरु सरकार के गृह मंत्री सरदार पटेल सरकारी खर्चे पर सोमनाथ मंदिर का निर्माण करवाना चाहते थे | सोमनाथ मंदिर सदियों से हिन्दुओं की अस्मिता का सवाल बना रहा |  तुर्कों, अफगानियों और मुगलों ने इसे बार बार तोड़ा था | अपन हिन्दू कांग्रेसी नेताओं के मदिर बनवाने की जिद्द और नेहरु के विरोध की चर्चा बाद में करेंगे | पहले मंदिर को बार बार तोड़ने का इतिहास जान लें | सोमनाथ मंदिर ईसा से पहले अस्तित्व में था | दूसरी बार मंदिर का पुनर्निर्माण सातवीं सदी में वल्लभी के मैत्रक राजाओं ने किया | आठवीं सदी में सिन्ध के अरबी गवर्नर जुनायद ने इसे नष्ट करने के लिए अपनी सेना भेजी | प्रतिहार राजा नागभट्ट ने 815 ईस्वी में इसका तीसरी बार पुनर्निर्माण किया | अरब यात्री अल-बरुनी ने अपने यात्रा वृतान्त में मंदिर की तारीफ़ में लिखा | जिससे प्रभावित हो महमूद ग़ज़नवी ने सन 1024 सोमनाथ मंदिर पर हमला किया | गजनवी के हमले से मंदिर बचाने के लिए…

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