India Gate Se

Published: 21.Jan.2022, 17:53

अजय सेतिया / इंडिया गेट के मेहराब के नीचे, जहां शहीदों की याद में ज्योति प्रज्वलित है – उस के ठीक पूर्व में एक खाली कोनोपी यानि छतरी है | आज़ादी से पहले इसमें इंग्लैंड के राजा जॉर्ज पंचम  प्रतिमा लगाई गई थी | साठ के दशक में एक मुहिम चली कि ब्रिटिश मेमोरिय्ल्स को हटाया जाए , इस मुहिम के तहत इस छतरी में लगी जार्ज पंचम की प्रतिमा को हटा दिया गया | उस समय एक मुहिम यह भी चली थी कि जार्ज पंचम की जगह पर महात्मा गांधी की प्रतिमा लगाई जाए | मुहिम का एक पहलू यह भी था कि छतरी को हटा कर वहां गांधी की विशालकाय प्रतिमा लगाई जाए , दूसरी मुहिम यह थी कि इसी छतरी के अंदर गांधी की प्रतिमा स्थापित की जाए | खैर प्रतिमा बनाई गई , वह बहुत बड़ी थी , अगर उसे छतरी की जगह पर ही लगाया जाता , तो छतरी को हटाना ही पड़ता | लेकिन तभी कांग्रेस के ही एक नेता ने मुहिम चला दी कि छतरी को हटा कर वहां सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिमा लगाई जानी चाहिए , न कि गांधी की | कांग्रेस सरकार बड़ी दुविधा में फंस गई क्योंकि उस समय तक सुभाष चन्द्र बोस को ले कर अनेक तथ्य अखबारों में छपने शुरू हो गए थे , जिन में कुछ तथ्य नेहरू औ…

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Published: 18.Jan.2022, 19:51

अजय सेतिया / जब हम उतर प्रदेश के चुनावी समर की बात करते हैं , तो हमें पश्चिम बंगाल के चुनाव की याद आती है | चुनाव से ठीक पहले वहां बड़े पैमाने पर दलबदल हुआ था , तृणमूल कांग्रेस के कई मंत्री सांसद विधायक भाजपा में शामिल हुए थे | हवा ऐसी बनी थी कि भाजपा स्पष्ट बहुमत ले कर आएगी | लेकिन हुआ क्या | भाजपा 294 सीटों के सदन में सौ का आंकडा पार नहीं कर पाई , 77 पर अटक गई , जो सदन का एक चौथाई ही बनता है | अब वैसी ही हवा उतर प्रदेश में भाजपा से बड़े पैमाने पर दलबदल करवा कर सपा के पक्ष में बन रही है | इस का मतलब यह नहीं है कि सपा को फायदा नहीं होगा , पर उतना ही होगा , जितना भाजपा को बंगाल में हुआ था | भाजपा वहां तीन सीटों से 77 पर पहुंच गई , तो सपा भी 47 से बढ़ कर ज्यादा से ज्यादा 100 हो जाएगी | सपा ने पिछ्ला चुनाव कांग्रेस के साथ मिल कर लडा था , प्रशांत किशोर चुनाव के रणनीतिकार थे , सपा को 47 और कांग्रेस को 7 सीटें मिलीं थी | सपा को 21.7 प्रतिशत वोट मिला और कांग्रेस को 6.25 प्रतिशत | जबकि अकेले चुनाव लड़ने वाली बसपा को सपा से ज्यादा 22. 23 प्रतिशत मिला था , हालांकि सीटें सिर्फ 19 मिली थीं | जबक…

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Published: 14.Jan.2022, 08:15

अजय सेतिया / योगी सरकार से इस्तीफों का दौर तीसरे दिन भी जारी रहा | तीसरे दिन तीसरे मंत्री धर्म सिंह सैनी ने इस्तीफा दिया | स्वामी प्रसाद मौर्य और दारा सिंह चौहान पहले इस्तीफा दे चुके थे | इन के साथ सात विधायक भी भाजपा छोड़ चुके हैं | इन सभी इस्तीफों की ख़ास बात यह है कि सभी ओबीसी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं | तीनों मंत्रियों और विधायकों के इस्तीफों की एक बात सामान्य है कि सभी के इस्तीफों की भाषा एक ही है | तीसरी बात यह सामान्य है कि तीनों मंत्रियों ने इस्तीफे के बाद अखिलेश यादव के साथ खड़े हुए एक जैसी फोटो खिंचवाई है | इस से साफ़ दिखाई देता है कि ये सभी तस्वीरें कुछ दिन पहले तीनों ने इक्कठे जा कर एक एक कर खिंचवाई थी | इस बात का सबूत यह है कि तीनों मंत्रियों के इस्तीफों के तुरंत बाद और अखिलेश यादव के साथ मुलाकातों से पहले ही तस्वीरें जारी कर दी गईं | योगी सरकार का सूचना तन्त्र इतना कमजोर था कि उसे इन मुलाकातों की भनक तक नहीं लगी | जबकि मुम्बई में बैठे शरद पवार तक को पता था कि लखनऊ में क्या खिचडी पक रही है | उन्होंने दो दिन पहले ही कह दिया था कि तीस विधायक इस्ती…

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Published: 12.Jan.2022, 21:59

अजय सेतिया / मुम्बई और दिल्ली में कोरोना की तीसरी लहर चल रही है तो यूपी , पंजाब और गोवा में दलबदल की लहर चल रही है | पंजाब में अकाली दल साफ़ हो रहा है , उस के कई नेता भाजपा में शामिल हो गए हैं और कई ओर शामिल होने वाले हैं | अगर वे भाजपा में टिके रहते हैं , तो भाजपा को एक फायदा यह होगा कि उसे अच्छे खासे सिख नेता मिल जाएंगे | भाजपा पंजाब में इस लिए पाँव नहीं जमा पाई क्योंकि सिख भाजपा में शामिल नहीं हुए | भाजपा हिन्दुओं की पार्टी बन कर रह गई , जिन की संख्या पंजाबी सूबा बनने के बाद बहुत घट चुकी है | हिन्दू भी भाजपा की बजाए कांग्रेस पर ज्यादा भरोसा करते हैं क्योंकि भाजपा तो अकालियों की गौद में जा बैठी थी | नतीजतन भाजपा न हिन्दुओं की पार्टी बन सकी , न सिखों की |

भाजपा अगर अकाली दल से गठबंधन तोड़ कर अकेले लडती और धीरे धीरे अपनी ताकत बढाती , तो बड़ी पार्टी बन सकती थी | आप सोचिए 2017 में जब भाजपा सारे देश में जीत रही थी , पंजाब में उस का सिर्फ एक विधायक जीत सका , जबकि केंद्र में भाजपा कुछ नहीं थी , तब भी एक बार भाजपा के 20 विधायक जीत गए थे | अगर भाजपा 2017 में अकेले लडती , तो अक…

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Published: 11.Jan.2022, 21:10

अजय सेतिया / गोवा में भाजपा सरकार का मंत्री माइकल लोबो चुनाव का एलान होने के बाद पार्टी छोड़ गया | तो उत्‍तरप्रदेश के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य भी भाजपा छोड़ गए | माइकल लोबो पूरे पांच साल भाजपा सरकार में मंत्री रहे और आखिर में भाजपा को दगा दे गए | मौर्य चुनावों से पहले पार्टी छोड़ने के आदि हो गए हैं | पिछले चुनावों से पहले उन्होंने बसपा छोड़ कर भाजपा ज्वाईन की थी | अब भाजपा छोड़ कर सपा | चुनावों से पहले दलबदल अनैतिक राजनीति की पराकाष्ट है | कोई मंत्री अपनी ही पार्टी से कैसे खफा हो सकता है , अगर खफा था तो चुनावों की घोषणा का इन्तजार क्यों कर रहा था | आख़िरी समय तक पद पर चिपके रहना राजनीति का सब से घटिया स्तर है | स्वामी प्रसाद के समर्थन में चार विधायकों बृजेश प्रजापति, भगवती प्रसाद सागर और रोशन लाल वर्मा ने भी भाजपा का साथ छोड़ दिया है | स्वामी प्रसाद मौर्य को भाजपा ने क्या नहीं दिया | उन्हें पांच साल मंत्री बनाए रखा और उन की बेटी संघमित्रा गौतम को बदाऊँ से लोकसभा का टिकट दे कर संसद में पहुंचा दिया | अब बेटी की बात चली है तो बताते जाएं कि बिधुनी से भाजपा विधायक विनय शाक्य के भी भाज…

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Published: 09.Jan.2022, 15:14

अजय सेतिया  / पांच राज्यों की विधानसभाओं के चुनावों की घोषणा हो चुकी है | इसे मिनी आम चुनाव कहना गलत नहीं होगा क्योंकि इन चुनावों के नतीजों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का इम्तिहान होना है | भाजपा का उतार चढाव भी इन्हीं चुनाव नतीजों से तय होगा क्योंकि पंजाब को छोड़ कर बाकी सभी चारों राज्यों उतर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भी भाजपा की सरकारे हैं | देश की सब से ज्यादा दिलचस्पी उतर प्रदेश में है , क्योंकि उतर प्रदेश ही देश का राजनीतिक थर्मामीटर है | नरेंद्र मोदी खुद उतर प्रदेश से सांसद हैं , इसलिए भाजपा के लिए वहां सत्ता में बने रहना बहुत जरूरी है | उत्तराखंड और मणिपुर भी उतना ही महत्वपूर्ण है क्योंकि इन दोनों राज्यों में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भाजपा सरकार बनी थी | लेकिन भाजपा का सब से बड़ा इम्तिहान गोवा में होना है , जहां भाजपा मोदी के राष्ट्रीय पटल पर आने से पहले ही स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में आ चुकी थी | हालांकि मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद 2017 में हुए चुनाव में भाजपा हारी थी , उसे 13 सीटें मिलीं थी , और कांग्रेस को 17 , लेकिन महार…

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Published: 06.Jan.2022, 13:18

अजय सेतिया / जर्मनी से काम कर रहे खालिस्तानियों के संगठन सिख फार जस्टिस ने कहा है कि उस ने फिरोजपुर में प्रधानमंत्री की सुरक्षा भंग करने में मदद की | किस की मदद की , पंजाब सरकार की या किसानों की या दोनों की | सिख फार जस्टिस ने यह भी कहा है कि यह पहला कदम था , याद रखना चाहिए कि इंदिरा गांधी का क्या हश्र हुआ था | सिख फार जस्टिस का यह ब्यान मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी को गलत साबित करता है | जिन्होंने बुधवार शाम को प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी जान को कोई खतरा नहीं था | अब सीधा सवाल यह बनता है कि प्रधानमंत्री की कार के बिलकुल पास पहुंच जाने वाले छह लोग कौन थे | उन्हें प्रधानमंत्री की कार के बिलकुल बगल में पहुंचने में किस ने मदद की | अपन आगे चल कर पंजाब सरकार की मिलीभक्त के कुछ और सबूत भी देंगे | पर पहला सवाल यह है कि क्या सिख फार जस्टिस उन छह लोगों को वक्त पर हथियार उपलब्ध नहीं करवा सका , इस लिए दुर्घटना नहीं हो सकी | अगर उन छह लोगों के पास हथियार भी होते , तो क्या होता | जर्मनी से काम कर रहे खालिस्तानी आतंकवादी संगठन ने प्रधानमंत्री की हत्या का इरादा जाहिर कर दिय…

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Published: 05.Jan.2022, 20:00

अजय सेतिया/ पंजाब में प्रधानमंत्री की सुरक्षा के साथ क्या सिर्फ खिलवाड़ हुआ | बठिंडा से लौटते हुए प्रधानमंत्री मोदी का यह कथन अति महत्वपूर्ण है कि वह ज़िंदा लौट रहे हैं | यह संदेश उन्होंने एयरपोर्ट पर अधिकारियों पंजाब के मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी को भेजा | उन्होंने से कहा- “अपने मुख्यमंत्री को मेरा शुक्रिया कहना कि मैं बठिंडा एयरपोर्ट तक जिंदा पहुंच सक |” मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी का कहना है कि उन की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं था | अगर ऐसा होता तो पंजाबी अपने मेहमान को अपनी जान पर खेल कर बचाते | क्योंकि दुर्घटना नहीं हुई , इस लिए मुख्यमंत्री को यह कहने का हक है | पर मुख्यमंत्री ने खुद बताया है कि भाजपा वर्करों और भीड़ का रास्ता रोकने के लिए मंगलवार को किसान सडक पर धरना दे रहे थे | जिसे पंजाब सरकार के अधिकारियों ने रात को हटा दिया था | फिर सवाल पैदा होता है कि जब प्रधानमंत्री बुधवार को सुबह बठिंडा से सडक के रास्ते हुसैनीवाला के लिए चल पड़े थे , तो 20 ट्रेक्टरों पर भर कर किसान वहां दुबारा कैसे पहुंच गए | किस ने किसानों को जा कर बताया कि प्रधानमंत्री हेलीकाप्टर की बजाए सडक के…

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Published: 04.Jan.2022, 21:02

अजय सेतिया / इधर यूपी, उत्तराखंड, पंजाब , गोवा और मणिपुर में चुनाव प्रचार पूरे शबाब पर है , उधर कोरोना की तीसरी लहर दहलीज पर है | अब सवाल खड़ा हो रहा है कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की लाख कोशिशों के बाद भी चुनाव हो पाएगा क्या | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग से चुनाव टालने का आग्रह किया था | अपन ने इसी कालम में 28 दिसंबर को लिखा था कि महामारी में चुनाव कहीं महंगे न पड़ें | पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी ने तभी यह बयान दिया था कि केंद्र सरकार कोरोना के बहाने चुनाव टलवाना चाहती है | अब उसी पंजाब में कोरोना के हालात भयंकर हो गए हैं | पटियाला के मेडिकल कालेज और इंजीनियरिंग कालेजों में 200 से ज्यादा अध्यापकों और छात्रों में कोरोना पोजिटिव पाया गया है | चुनावों की सब से बड़ी भयानकता के लक्ष्ण मंगलवार सुबह उस समय मिले जब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से चुनाव प्रचार कर के लौटे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल कोरोना पोजिटिव पाए गए |

अपन को अब भी लगता है कि चुनाव टालने पड़ेंगे और पाँचों राज्यों में छह महीने के लिए राष्ट्रपति राज लगाना पड़ेगा | लेकिन अगर चुनाव हुए…

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Published: 03.Jan.2022, 14:50

अजय सेतिया / अपन ऐसा हिंदुत्व कतई  नहीं चाहते , जिस में दुसरे धर्मों और उन के अनुयाईयों के साथ वैसा ही व्यवहार किया जाए , जैसा वे दुसरे धर्मों के बारे में करते हैं | हाल ही में एक वीडियो देखा जिसमें एक मुस्लिम मौलवी 2024 से 2027 तक सारी मूर्तियाँ तोड़ देने और हिन्दू धर्म को खत्म कर देने की बात कह रहे थे | मूर्तियाँ तोड़ना और गैर मुस्लिमों की हत्या इस्लाम का मुख्य एजेंडा है | इस्लाम अगर सारी दुनिया के साथ सौहाद्रपूर्ण ढंग से रहना चाहता है तो उसे नफरत की इन आयतों को हटाना होगा | लेकिन अगर कोई मुस्लिम इन आयतों को मानवता विरोधी बताता है , तो जाहिल मौलवी हाथ धो कर उस के पीछे पड जाते हैं | उस का निकाह केंसिल कर के उस बीवी को ही उस के खिलाफ खड़ा कर देते हैं | वसीम रिजवी के साथ यही हुआ | उस की बीवी का वीडियो भी सोशल मीडिया पर मौजूद है , जिस में वह अपने पूर्व पति के बारे में बदतमीजी वाली भाषा का इस्तेमाल कर रही है | कुछ मुसलमानों की ओर से नफरत फैलाने वाले यूट्यूब चेनलों पर यह वीडियो देखा जा सकता है |

दूसरी तरफ भारत में कुछ राजनीतिक शक्तियाँ उलटे हिंदुत्व को बदनाम करने की सा…

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