India Gate Se

Published: 16.Jan.2020, 14:05

अजय सेतिया / दिल्ली के शाहीन बाग़ में मणिशंकर अय्यर का जाना धरने की साजिश को उजागर कर गया | दिग्विजय सिंह का ताज़ा बयान उसी कहानी को आगे बढाता है | अभी जावेद अख्तर , स्वरा भास्कर और अनुराग कश्यप का आना बाकी है | वे भी आएँगे तो वही कहेंगे जो मणिशंकर और दिग्विजय सिंह कह रहे हैं | मणि शंकर अय्यर ने पाकिस्तान से लौट कर शाहीन बाग़ में धरने पर बैठे मुस्लिमों और वामपंथियों को खूब भडकाया और हर हफ्ते वहां आने का वादा किया | यानी लम्बे समय तक धरने को चलाने के लिए फंडिंग हो चुकी है | दिग्विजय सिंह ने कहा "हम तो कहते हैं कि मोदी अपने पिता और माता का जन्म प्रमाणपत्र हमें बता दें, (इसके बाद) हम सब कागज दे देंगे |" यानी देश के ये बड़े नेता ,जो कई बार मुख्यमंत्री और केंद्र में मंत्री रह चुके हैं , बिना सिर पैर की बयानबाजी कर रहे हैं , वे जानते हैं कि उन्होंने मुसलमानों को जैसी शिक्षा दी है , उस में उन के पास उन के बयानों पर भरोसा करने के सिवा कोई चारा ही नहीं है |

आखिर जो भी होगा , होगा तो भारतीय नागरिकता क़ानून के अंतर्गत | इस लिए राजनीतिक दल उन्हें क्यों बरगला रहे हैं कि उन के बाप-दादाओ…

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Published: 15.Jan.2020, 13:54

अजय सेतिया / हमे यह सोचने की ज्यादा जरूरत नहीं है कि जम्मू खमीर के डीएसपी देवेन्द्र सिंह की गिरफ्तारी पर कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने बेतुका बयां क्यों दिया कि  देविंदर सिंह यदि देविंदर खान होता तो आरएसएस के समर्थकों की प्रतिक्रिया कहीं तीखी होती | लोकसभा में उन की अब तक की कारगुजारी यह साबित करती है कि वह हर बात को हिन्दू मुस्लिम कर के और प्रधानमंत्री पर मर्यादाहीन टिप्पणियाँ कर के कांग्रेस की ही छवि खराब कर रहे हैं | इसलिए अधीर रंजन चौधरी अगर कोई समझदारी वाला बयान देते तो सोचना पड़ता कि यह कैसे हुआ | समझदारी होती कि अगर जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलामनबी आज़ाद यह सवाल उठाते कि पिछले 18 साल से देवेन्द्र सिंह को कौन राजनीतिक संरक्ष्ण दे रहा था |

हिजबुल के 2 आतंकियों के साथ गिरफ्तार हुए डीएसपी ( निलम्बित )  देवेंदर सिंह को किसी न किसी का तो राजनीतिक आश्रय तो जरुर था | नहीं तो दिसम्बर 2001 में संसद पर आतंकी हमले के बाद ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाता | तब केंद्र में वाजपेयी सरकार थी और जम्मू कश्मीर में फारूख अब्दुला मुख्यमंत्री थ…

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Published: 14.Jan.2020, 14:29

अजय सेतिया / भारत की नागरिकता केंद्र का विषय है , राज्य का नहीं | इसलिए जो राज्य सरकारें या विधानसभाएं नागरिकता संशोधन क़ानून को न मानने के प्रस्ताव पास कर रही हैं , वे क़ानून को नहीं संविधान को चुनौती दे रही हैं | संविधान का अनुच्छेद 256 इस सम्बन्ध में स्पष्ट व्याख्या करता है | इस अनुच्छेद के अनुसार राज्य सरकारों को संसद से पारित क़ानून का अनुपालन सुनिश्चित करवाना होगा | केंद्र सरकार इस सम्बन्ध में राज्यों को निर्देश भी जारी कर सकती है | इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज आर एस सिंह का कहना है कि संसद के अधिकार क्षेत्र वाले क़ानून को न मानना राज्य में संवैधानिक तंत्र का फेल होना है | इसलिए संसद से पारित क़ानून को न मानने वाली राज्य सरकारों को भंग किया जा सकता है | सुप्रीमकोर्ट के वरिष्ठ वकील एनकेपी साल्वे का मत है कि क़ानून में संशोधन संविधान सम्मत है |

विधानसभा में प्रस्ताव पास करने के बाद केरल सरकार की ओर से सुप्रीमकोर्ट में दायर याचिका ने घटनाक्रम में नया मोड़ ला दिया है | केरल सरकार ने सोमवार को संविधान के अनुच्छेद 131 के अंतर्गत याचिका दाखिल की है | संविधान के अनुच्छेद…

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Published: 13.Jan.2020, 14:27

अजय सेतिया / सोनिया गांधी पूरी तरह अन्य छोटे मोटे विपक्षी दलों पर निर्भर हैं | वह समझती हैं कि जैसे यूपीए बना कर वह 2004 में वाजपेयी सरकार को अपदस्थ करने में कामयाब हो गई थीं , उसी तरह कभी न कभी मोदी को अपदस्थ कर देंगीं | लेकिन काठ की हांडी बार बार नहीं चढती , कांग्रेस की हालत तब  इतनी खराब नहीं हुई थी , जितनी अब है | राहुल गांधी की हमलावर राजनीति के बावजूद उस की स्थिति में कोई सुधार क्यों नहीं हुआ, सीटें भले ही आठ बढ़ गई , लेकिन अखिल भारतीय वोट में 1.03 प्रतिशत की गिरावट हुई | कांग्रेस भले ही अब राफेल सौदे में तथाकथित घोटाले का नाम नहीं लेती , मोदी को चोर भी नहीं कहती पर वह यह मानने को तैयार नहीं कि कांग्रेस को झूठ बोलने का नुक्सान हुआ | अगर वह यह मान लेती तो भविष्य में झूठ के सहारे राजनीति करने से परहेज करती |

वह जिन वामपंथी और क्षेत्रीय दलों के बूते नकारात्मक राजनीति कर रही हैं 2019 के चुनावों में उन का भी सात प्रतिशत वोट भाजपा खा गई | कांग्रेस अभी तक विश्लेष्ण करने को तैयार ही नहीं है कि जनता उस से इतनी नाराज क्यों है | इस का कारण सिर्फ यूपीए सरकार का भ्रष्टा…

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Published: 12.Jan.2020, 16:08

अजय सेतिया / दो मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ धूप छाँव का खेल खेल रहे हैं | ममता बेनर्जी की चिंता तो कांग्रेस और वामपंथी दलों को करनी चाहिए , क्योंकि उन दोनों को ममता के कभी भी साथ छोड़ जाने का खतरा है | शनिवार 11 जनवरी को जब ममता बेनर्जी बिना किसी तय कार्यक्रम के कोलकाता के राजभवन में नरेंद्र मोदी से मिली तो वामपंथियों की त्यौरियां चढ़ गई | इस से पहले वह यह एलान कर ही चुकी हैं कि 13 जनवरी को विपक्ष की रणनीति के लिए बुलाई गई बैठक में शामिल नहीं होंगी | हालांकि मोदी ममता मुलाक़ात से किसी के स्टैंड में कोई बदलाव नहीं आया है | ममता बेनर्जी का नागरिकता संशोधन क़ानून , जनसंख्या रजिस्टर और नागरिकता रजिस्टर को लेकर विरोध कायम है , उन्होंने मोदी से बातचीत के दौरान अपना स्टैंड दोहराया भी | मोदी अपनी अध्यात्मिक यात्रा में कोई कडवाहट पैदा नहीं करना चाहते  थे , इस लिए उन्होंने कह दिया कि वह राजनीतिक बातें दिल्ली में आ कर करें , इस का मतलब यह नहीं है कि मोदी टस से मस हुए हैं |

 

दूसरे मुख्यमंत्री नितीश कुमार की चिंता नरेंद्र मोदी को करनी चाहिए , जो इस समय उन के पाले…

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Published: 11.Jan.2020, 16:04

अजय सेतिया / नागरिकता संशोधन क़ानून के खिलाफ चला वामपंथी-मुस्लिम गठजोड़ का आन्दोलन विफल हो गया है | एक महीने के हिंसक आन्दोलन और छह कांग्रेसी सरकारों की ओर से क़ानून न मानने की धमकी की परवाह किए बिना मोदी सरकार ने 10 जनवरी को नोटिफिकेशन जारी कर के 10 जनवरी से क़ानून लागू कर दिया | अब तीनों इस्लामिक देशों से आ कर पिछले छह साल से भारत में रह रहे हिन्दुओं, सिखों, जैनिओं, बोद्धों, पारसियों और ईसाईयों को नागरिकता का आवेदन करने का अधिकार होगा | नागरिकता संशोधन क़ानून के तहत नागरिकता के आवेदन जिलाधिकारियों को दिए जाएंगे , उन्हें सिर्फ इस बात का प्रमाण देना होगा कि वे छह साल से भारत में रह रहे हैं | संशोधित क़ानून में इन ख़ास वर्गों को सिर्फ पांच साल की छूट दी गई है , वे पहले भी नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते थे , लेकिन संशोधन से पहले यह अवधि 11 साल थी | इन तीनों देशों से आए मुस्लिम भी तार्किक कारण बता कर नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं , लेकिन उन्हें उस से पहले 11 साल भारत में रहने का प्रमाण देना होगा | सिर्फ इतना ही फर्क है, जिस पर इतना बावेला मचा है |

यह घटना 2018 की है , पाकिस्तान के…

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Published: 09.Jan.2020, 15:59

अजय सेतिया / जिस दिन नागरिकता संशोधन क़ानून के खिलाफ जामिया मिल्लिया में हिंसक आन्दोलन हुआ , उस से अगले दिन भाजपा विरोधी रहे एक पत्रकार ने एक सरकारी टीवी चेनल पर बहस में कहा था कि यह आन्दोलन जेपी आन्दोलन जैसा ही होगा और कोई सरकार छात्र आन्दोलन के सामने कभी नहीं टिकी | उन के कहने का मतलब था कि नागरिकता संशोधन क़ानून के खिलाफ देश भर के छात्र उठ खड़े होंगे और मोदी सरकार के परखचे उड़ जाएंगे | वामपंथियों की कोशिश यह है कि मोदी सरकार के खिलाफ छात्र आन्दोलन खड़ा किया जाए , इसलिए सारी कोशिशें इसी की हो रही हैं | वामपंथी पृष्ठभूमि के फ़िल्मी कलाकार मोहम्मद जीशान अयूब का ट्विट इसी ओर इशारा करता है –“ दोस्तों, इस सरकार कि सबसे बड़ी दिक़्क़त स्टूडेंट्स से है। अगली बार जब भी , जहाँ भी जमा हों, अपने हाथ में एक किताब रखिए, कोई भी, अगर किताब मुश्किल हो तो अपने पास एक पेन ही रख लीजिए | आइए, ये लड़ाई सब छात्र बन के लड़े |”  

पर सच यह है कि नागरिकता संशोधन क़ानून के खिलाफ जामिया मिल्लिया से उठा आन्दोलन धार्मिक आधार पर विरोध का आन्दोलन था , यह छात्र आन्दोलन का मुद्दा भी नहीं है | अगर आन्दो…

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Published: 08.Jan.2020, 15:50

अजय सेतिया / वामपंथियों में एक खासियत हमेशा रही है | अब आप इसे खासियत समझें या क़ानून को चुनौती देना | वे अपने आंदोलनों में सारी ताकत झोंक देते हैं | सडकें लाल झंडों से पाट देते हैं और रेलमार्ग ठप्प कर देते हैं | उन का किसान आन्दोलन हो , मजदूर आन्दोलन हो. छात्र आन्दोलन हो , सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मामला हो या शनि शिगनापुर का आन्दोलन | आंदोलनों के चेहरे अलग अलग होते हैं | पर आन्दोलन में हिस्सा लेने वाले सारे वही के वही |

मुद्दा कोई भी हो ,या कहें कि बहाना कोई भी हो , देश भर के उन के संगठन सीटू , इंटक , एटक , जनवादी महिला समिति , आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा)', स्टूडेंट्स फेडरेशन आफ इंडिया (एसएफआई) और डेमोक्रेटिक स्टूड़ेंट्स फेडरेशन (डीएसएफ), लेखकों, नाटककारों, कलाकारों, फिल्मकारों के संगठन इप्टा के सदस्य सब एक साथ कूद पड़ते हैं | वामपंथी विचारधारा के अध्यापक टीवी चेनलों पर बहस करने और वामपंथी स्कूल के पत्रकार एक तरफा खबरें लिखने में सक्रिय हो जाते हैं | ऐसे लगता है जैसे सारा देश वामपंथी हो गया है |

लम्बे समय तक जातिवादी और मुस्लिम तुष्टिकर…

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Published: 30.Dec.2019, 10:19

अजय सेतिया / उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव 2022 में होने हैं | दिल्ली और बिहार विधानसभाओं के चुनाव इसी साल , यानी कल से शुरू होने वाले 2020 में | दिल्ली विधान सभा के चुनावों का बिगुल तो इसी हफ्ते बजने वाला है | पर प्रियंका गांधी न दिल्ली पर फोकस कर रही हैं , न बिहार पर | उन का सारा फोकस उत्तर प्रदेश पर है | लोकसभा चुनावों में अपने भाई की सीट भी न बचा सकी प्रियंका वाड्रा को गलतफहमी हो गई है कि यूपी की अगली मुख्यमंत्री वह होंगी | इसलिए वह मायावती और अखिलाश यादव को नसीहत देने लगी हैं कि उन्हें कैसे राजनीति करनी चाहिए | एक तरह से वह उन्हें दो-टूक कह रही हैं कि चुनावों में कांग्रेस के साथ गठबंधन करना है तो अभी से सक्रिय हो जाएं , नहीं तो कांग्रेस अकेले लड़ेगी |

प्रियंका ने दोनों दलों से कहा, “ अपनी आवाज़ क्यों नहीं उठाते...उनको सरकार के ख़िलाफ़ खड़ा होना चाहिए...वो पहल नहीं लेते, आवाज़ नहीं उठाते... वही जानें क्यों नहीं करते, करना चाहिए...हमें अकेला चलना पड़े तो अकेले चलेंगे...कई महीनों से लड़ रहे, लड़ते रहेंगे.. हम अन्याय के ख़िलाफ़ लड़ेंगे...2022 में अकेले लड़ सकते हैं..…

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Published: 29.Dec.2019, 09:07

अजय सेतिया / भारत तेरे टुकड़े होंगे , इंशा अल्लाह इंशा अल्लाह के नारे लगते हैं तो राहुल गांधी उन की पीठ थपथपाने जेएनयू जाते हैं | इंशा अल्लाह कहने वाले न तो कम्युनिस्ट हिन्दू हो सकते हैं , न कांग्रेसी हिन्दू | जामिया मिल्लिया में हिन्दुओं से लेंगे आज़ादी के नारे लगाने वाले भी कम्युनिस्ट या कांग्रेसी नहीं हो सकते , जिन के समर्थन में प्रियंका गांधी इंडिया गेट पर धरना दे देती है | छीन कर लेंगे हिन्दुस्तान के नारे लगते हैं तो राहुल- प्रियंका, येचुरी-राजा उन की पीठ कर खड़े हो जाते हैं | मुस्लिम देशों के अभागे हिन्दू भाग कर भारत आते हैं तो उन को नागरिकता देने को ये कांग्रेसी और कम्युनिस्ट सेक्युलरिज्म पर हमला बताते हैं |

पडौसी मुस्लिम देशों के हिन्दुओं को अभागे मनमोहन सिंह ने कहा था | मुस्लिम देशों के हिन्दुओं की पीड़ा मनमोहन सिंह ही समझ सकते हैं | उन का खुद का परिवार इस्लामिक देश से उजड़ कर भारत आया था | नेहरु परिवार के वारिस उस पीड़ा को नहीं समझ सकते | मनमोहन सिंह न प्रधानमंत्री रहते हुए कभी खुल कर बोले , न अब बोलने की हिम्मत कर सकते हैं | जब वह विपक्ष के नेता थे तो 18 दिसम्बर…

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