India Gate Se

Published: 18.Sep.2020, 20:46

अजय सेतिया / देश की राजधानी नई दिल्ली में दूरदर्शन की स्थापना 1959 में हुई थी , जबकि उस के नियमित दैनिक प्रसारण की शुरुआत 1965 में आल इंडिया रेडियों के एक अंग के रूप में हुई | राष्ट्रीय प्रसारण 1982 से शुरू हुआ |  दूरदर्शन और बीबीसी पर कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे प्रणब राय ने 1988 में एनडीटीवी नाम से कम्पनी बनाई और दूरदर्शन से पहले “द वर्ल्ड दिस वीक” और बाद में “न्यूज टू नाईट”  के नाम से रात्रि न्यूज का स्लाट खरीद लिया | 1992 में सुभाष चन्द्रा ने “जी टीवी प्राईवेट न्यूज चेनेल” शुरू किया , जो स्टार न्यूज के लिए काम कर रहा था | जब स्टार टीवी को एक अमेरिकी कंपनी ने खरीद लिया तो एनडीटीवी ने स्टार के साथ करार कर के उन्हें न्यूज देना शुरू किया |

1995 में जीटीवी अपना पहला भारतीय निजी टीवी न्यूज चेनेल ले कर आया | तभी 1995 में ही इंडिया टूडे ने दूरदर्शन का रात्रि 10.20 का स्लाट ले कर “आज तक” नाम से खबरों का प्रसारण शुरू किया | 1999 में इंडिया टूडे ने “आज तक” नाम से अपना प्राईवेट न्यूज चेनेल शुरू कर दिया , उस के चार वर्ष बाद 2003 में प्रणब राय ने भी एनडीटीवी नाम से हिन…

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Published: 17.Sep.2020, 19:39

अजय सेतिया / शिव सेना के अखबार सामना ने लिखा था कि समुद्र में रह कर मगरमच्छ से वैर नहीं किया जा सकता | शिव सेना खुद को मुम्बई का वह समुद्र मानती है , जिस से वैर कर के कोई मुम्बई में ज़िंदा नहीं रह सकता | यह धमकी कंगना रनौत को दी गई है , जिस के दफ्तर का छज्जा तोड़ कर पहले सिर्फ चेतावनी देते हुए कहा गया था-“उखाड़ दिया” , बाद की चेतावनी थी कि समुद्र में रह कर मगरमच्छ से बैर करोगी तो जिंदगी से उखाड़ दी जाओगी | असल में इस घमंड की तह में जाने की जरूरत है , बाला साहेब ठाकरे के समय से शिव सेना बड़े से बड़े फ़िल्मी कलाकार से घुटने टिकाती रही है | वे संरक्षण के नाम पर मातोश्री में जा कर चरण भी छूते रहे हैं और भेंट पूजा भी करते रहे हैं | वह भय तब से ज्यादा बन गया है , जब से उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने हैं | भय के साथ साथ स्नेह भी बरस रहा है क्योंकि उद्धव सरकार को कांग्रेस , एनसीपी और कम्युनिस्ट पार्टी का समर्थन है |

पिछले लम्बे समय से बालीवुड पर वामपंथी-मुस्लिम घालमेल का प्रभाव रहा है | यह घालमेल जेएनयू से लेकर शाहीन बाग़ तक दिखा | महेश भट , जावेद अख्तर , शबाना आजमी , अमजद खान , जीशान…

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Published: 15.Sep.2020, 19:55

अजय सेतिया / फ़िल्मी दुनिया के नशैडियों को बचाने के लिए वामपंथी लाईन वाले अनुराग कश्यप, जावेद अख्तर , फरहान अख्तर, तापसी पन्नू, स्वरा भास्कर , नसीरुद्दीन शाह , विद्या बालन, सोनम कपूर, दिया मिर्जा, करीना खान नाकाफी थे क्या, कि अमिताभ बच्चन का परिवार भी सामने आ गया है | सुशांत सिंह राजपूत की हत्या में आरोपी नम्बर एक रिया चक्रवर्ती पर नशे के व्यापार का फंदा फसने के बाद से फ़िल्मी दुनिया में सन्नाटा है , क्योंकि रिया उन सभी का राज़ खोलेगी , जो जो नशा करते हैं , क्योंकि रिया और उस का भाई शौविक नशा सप्लाई करने के धंधे में संलिप्त पाया जा रहा है |

पहले अमिताभ बच्चन की बेटी श्वेता नंदा रिया चक्रवर्ती के बचाव में सामने आई तो अब उन की पत्नी जया बच्चन सामने आ गई हैं | आश्चर्य यह है कि जया बच्चन ने फ़िल्मी दुनिया के नशैडियों को बचाने के लिए संसद के मंच का दुरूपयोग किया | हुआ यह कि सोमवार को जब संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ तो फ़िल्मी पृष्ठभूमि वाले भाजपा सांसद रवि किशन ने फ़िल्मी दुनिया में चल रहे नशे पर लोकसभा में खुल कर बोला | उन्होंने कहा था, ड्रग्स की तस्करी और युवाओं की ओर से इसका…

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Published: 14.Sep.2020, 21:41

अजय सेतिया / अपन 1992 से संसद की कार्यवाही को कवर करना शुरू किया था | उन दिनों इतनी सुरक्षा नहीं होती थी | संसद परिसर के भीतर जिस जगह इस समय गांधी की मूर्ति लगी है , वहां अपन स्कूटर खड़ा किया करते थे , फिर जब वहां गांधी की मूर्ति के लिए जगह बनाई गई , तो मूर्ति के पीछे जो दीवार दिखाई देती है , उस के पीछे स्कूटर खड़ा करने लगे | उन दिनों पत्रकार भी उसी गेट से आते थे , जिस गेट से सांसद आते थे , मोटे तौर पर पत्रकार उस गेट से आते थे , जिसे संसद पर हमले के बाद से बंद कर दिया गया था , क्योंकि आतंकवादी संसद मार्ग वाले उसी गेट से अंदर घुसे थे | उस के बाद से तो संसद की सुरक्षा का रूप रंग काफी बदला | संसद भवन और संसदीय सौंध के बीच के बीच की सडक बंद कर के संसद परिसर में मिला ली गई | पत्रकारों को कई तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ा |

पर जैसी पाबंदियों का सामना अब कोरोनावायारस काल में भुगतना पड रहा है , वैसी पाबंदियों की तो कभी कल्पना भी नहीं की थी | बीस साल तक संसद की कार्यवाही को कवर करने वाले पत्रकारों को लांग एंड डीस्टिंगविश केटागिरी का पास मिल जाता है और उन्हें कभी भी सेंट्रल…

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Published: 12.Sep.2020, 18:36

अजय सेतिया / 23 मार्च 2020 को हुए बजट सत्र के सत्रावसान के बाद केंद्र सरकार ने कृषि से जुड़े तीन अध्यादेश जारी किए थे , इन में एक कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग सम्बन्धी अध्यादेश को लेकर सब से ज्यादा विवाद है | यह अध्यादेश अगर 14 सितम्बर से शुरू हो रहे मानसून सत्र में बाकायदा क़ानून का रूप ले लेता है तो भारत में कृषि और कृषकों की परम्परागत स्थिति बदल जाएगी | इस अध्यादेश पर किसानों और विपक्षी दलों ने कई तरह के सवाल खड़े किए हैं | देश भर में जगह जगह प्रदर्शन भी हुए हैं , जिन्हें मानसून सत्र के दौरान भी बड़े पैमाने पर दोहराया जाएगा | इस अध्यादेश का मकसद बड़ी औद्धोगिक इकाईयों के लिए कृषि के क्षेत्र में प्रवेश करने का रास्ता खोलना है |

किसान बड़ी औद्धोगिक कम्पनियों या व्यापारियों से एक मुश्त पैसा ले कर अन्य कार्यों में संलिप्त हो सकते हैं , वैसे अभी भी जिन कृषक परिवारों के बच्चे पढ़ लिख कर नौकरियों करने शहरों में चले गए हैं , वे परिवार एकमुश्त राशि के बदले अपनी जमीनें अन्य परिवारों को कृषि के लिए दे देते है | यानी यह व्यवस्था गाँवों में पहले से लागू है | लेकिन गाँव के ही भूमि रहित किसान क…

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Published: 11.Sep.2020, 19:49

अजय सेतिया / कोरोना काल में संसद का मानसून सत्र टाला भी जा सकता था | इसे करने की दो वजहें बताई गई हैं , पहली तो यह कि छह महीने अंतराल में संसद की बैठक होना लाजिमी होता है , दूसरा यह कि इस बीच 23 मार्च के बाद जितने भी अध्यादेश जारी हुए हैं , उन की अवधि भी छह महीने होती है , अगर वे संसद से पास करवा कर क़ानून का रूप नहीं लेंगे तो खत्म हो जाएंगे | अपना मानना है कि सर्वदलीय बैठक में सहमती बना कर सत्र को आने वाले छह महीने के लिए टाला जा सकता था , सर्वदलीय बैठक में सहमति  बना कर केबिनेट राष्ट्रपति को इस आशय की अधिसूचना जारी करने का आग्रह करती | छह महीने की अवधि में अध्यादेश अप्रभावी रहने की स्थिति भी कोई पहली बार नहीं आई , अनेकों बार पहले भी उन अध्यादेशों को दुबारा जारी किया गया है |

खैर अब 14 सितम्बर से संसद का सत्र हो ही रहा है तो उन अध्यादेशों की समीक्षा करनी चाहिए , जो 23 मार्च के बाद जारी किए गए हैं | ऐसे कुल बारह अध्यादेश हैं , लेकिन अपन आज सिर्फ किसानों और कृषि से सम्बन्धित तीन अध्यादेशों की चर्चा करेंगे | ये तीनों अध्यादेश 3 जून को जारी हुए थे | पहला, आवश्यक वस्…

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Published: 10.Sep.2020, 20:43

अजय सेतिया / भारत की सीरम कम्पनी को नहीं , बल्कि भारत समेत दुनिया के उन देशों को जबर्दस्त झटका लगा है जो कोरोनावायरस का इलाज करने वाली वेक्सीन के लिए भारत की तरफ देख रहे थे | रूस और चीन की ओर से वेक्सीन बना लेने के दावों के बावजूद दुनिया की निगाह आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के सहयोग से बन रही वेक्सिन की इन्तजार कर रहे थे | एस्ट्राज़ेनेका नाम की कम्पनी ने 30 अप्रेल को एलान किया था कि वह आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के सहयोग से कोरोनावायरस के इलाज की वेक्सीन पर काम कर रही है , जिस का उत्पादन दुनिया के तीन देशों की दवा निर्माता कम्पनियां करेंगी , जिन में भारत की सीरम कम्पनी प्रमुख है , क्योंकि सब से ज्यादा उत्पादन भारत में होना है |

जिन व्यक्तियों पर वेक्सिन का ट्रायल किया जा रहा था , उन में से एक महिला वालंटियर ने रीढ़ की हड्डी में दर्द होने की शिकायत की , यह मामला इस लिए गंभीर हो गया , क्योंकि जुलाई में भी परीक्षण में शामिल एक वालंटियर ने रीढ़ की हड्डी में दर्द की शिकायत की थी | ताज़ा शिकायत के बाद  एस्ट्राजेनेका ने अपनी कोरोना वैक्सीन के अंतिम दौर के ट्रायल को टाल दिया है |…

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Published: 09.Sep.2020, 21:05

अजय सेतिया / सुशांत सिंह राजपूत की हत्या या आत्महत्या के मामले में मुम्बई पुलिस की जांच पहले दिन से संदेह के घेरे में थी , मीडिया उस पर सवाल उठा रहा था | नसीरुद्दीन शाह और आमिर खान जैसे जिन फ़िल्मी कलाकारों का कुछ दिन पहले तक दम घुटता था , उन की चुप्पी रहस्यपूर्ण थी | न वे जांच पर संदेह कर रहे थे , न बिना जांच आत्महत्या कहे जाने पर सवाल उठा रहे थे | आखिर क्या कारण था कि किसी बड़े फ़िल्मी कलाकार ने सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या पर निष्पक्ष जांच की आवाज नहीं उठाई , ऐसे वातावरण में किसी का दम क्यों नहीं घुटा , जिस में जीवन तक सुरक्षित नहीं रहा था | क्या भारत के मन में यह सवाल नहीं उठता होगा कि वे सब चुप क्यों थे , आज भी चुप हैं |

आखिर सवाल खड़ा होता है कि जब चारों तरफ से सीबीआई जांच की मांग उठ रही थी , तो शिव सेना ने मुम्बई पुलिस के बचाव में बयानबाजी क्यों की | पुलिस खुद जवाब देती , शिवसेना क्यों पुलिस के बचाव पर उतरी | इसे मराठी –गैर मराठी का सवाल क्यों बनाया गया | न तो रिया चक्रवर्ती मराठी है , न सुशांत सिंह राजपूत मराठी थे , फिर शिव सेना ने महाराष्ट्र पुलिस को निष्पक्ष…

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Published: 08.Sep.2020, 21:07

अजय सेतिया / चौदह सितम्बर से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है | वजह यह बताई जा रही है कि नियमानुसार संसद की दो बैठकों के बीच अधिकतम 180 दिन का वक्फा हो सकता है , संसद का बजट सत्र क्योंकि 23 मार्च को खत्म कर दिया गया था , इस लिए संसद की बैठक 22 सितम्बर से पहले होनी चाहिए | बजट सत्र 3 अप्रेल तक चलना था , वह देश में कोरोनावायरस की बीमारी फ़ैल जाने के कारण दस दिन पहले सत्रावसान करना पड़ा था | हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की गई थी कि उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत दौरे और मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार गिरने तक सत्रावसान नहीं किया , जब कि तब तक भारत में हालात बिगड़ चुके थे | 18 मार्च 2020 तक भारत में 1000 से ज्यादा लोग कोरोनावायरस से पीड़ित हो चुके थे और 27 लोगों की मौत भी हो चुकी थी , भारत में 21 दिन के लाकडाउन की घोषणा कर दी गई थी , 22 मार्च को एक दिन का जनता कर्फ्यू लग चुका था , लेकिन संसद चल रही थी |

दुनिया भर में छह लाख लोग संक्रमित हो चुके थे , मरने वालों का आंकडा भी 30 हजार से ज्यादा हो चुका था | आखिरकार 23 मार्च को जब सत्रावसान क…

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Published: 07.Sep.2020, 17:56

अजय सेतिया /सुशांत सिंह की मौत के बाद कंगना रानौत ने ड्रग माफिया , फिल्म इंडस्ट्री और राजनीतिज्ञों के गठजोड़ का खुलासा कर के सुशांत सिंह की हत्या किए जाने की आशंका जताई थी | मामला इतना तूल पकड़ा कि सुप्रीमकोर्ट में गया और कोर्ट के रास्ते सीबीआई के पास पहुंच गया | सीबीआई के बाद नारकोटिक्स जांच एजेंसी के पास पहुंच गया | रिया चक्रवर्ती का सारा परिवार ड्रग रैकेट में फंसता दिखाई दे रहा है , आने वाले दिनों में कई फ़िल्मी हस्तियों और राजनीतिज्ञों के फंसने के भी आसार हैं |

इस सारे घटनाक्रम से शिव सेना और खासकर शिवसेना के सांसद संजय राउत सब से ज्यादा परेशान हैं | उन्होंने कंगना रानौत के खिलाफ अनाप शनाप बोलना शुरू कर दिया और सारी मर्यादाएं तोड़ कर यहाँ तक कह दिया कि वह छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान कर रही हैं , अगर अपने बाप की औलाद हैं तो मुम्बई में आ कर दिखाएं | संजय राउत ने कंगना रानौत को हरामखोर तक कह डाला , जिस से सारे देश खासकर उत्तर भारतीयों में रोष है | कंगना क्योंकि हिमाचल मूल की हैं , इस लिए हिमाचल सरकार ने केंद्र सरकार से उन की सुरक्षा की दरख्वास्त की थी , जिस पर गृह मंत्री…

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