Edit Page

मज़बूती ब्यूरोक्रेसी की नहीं, डेमोक्रेसी की चाहिए

Publsihed: 22.Jun.2018, 13:30

अपनी शपथ ग्रहण के तुरंत बाद 5 जून 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्यूरोक्रेट्स के साथ मीटिंग कर के उन्हें फ्री हेंड दिया था | उस पर 22 जून 2014 को दैनिक हिन्दुस्तान में मेरा एक लेख छपा था | नरेंद्र मोदी के शासन के आख़िरी साल आज वह लेख और ज्यादा सार्थक हो गया है, क्योंकि मोदी शासन में यह छवि बनी है कि ब्यूरोक्रेसी ने राज किया | मैं अपना वह असम्पादित लेख अपने पाठकों के समक्ष रख रहा हूँ, जबकि हिन्दुस्तान में छोटा करने के चक्कर में सम्पादित लेख छपा था | 

कश्मीर में अब आपरेशन मोदी होगा

Publsihed: 21.Jun.2018, 22:51

अजय सेतिया / संघ नरेंद्र मोदी की कश्मीर निति से खफा था | महबूबा मुफ्ती खुलेआम पाक परस्तों को हवा दे रही थी ,जिस कारण आतंकवाद 1990 से भी ज्यादा भयावह हो गया है | पहले कश्मीर की अलग

संघ –भाजपा काडर के फीडबैक ने गिरवाई महबूबा सरकार

Publsihed: 19.Jun.2018, 20:35

अजय सेतिया / अपन ने 16 और 18 जून यानि शनि और सोम को कश्मीर पर जो लिखा | उस का लब्बोलुबाब यह था कि संघ मोदी की कश्मीर निति से खफा है | राजनाथ सिंह के घर हुई संघ से जुड़े संगठनों की ब

संघ और भाजपा का कोर वर्कर खफा था युद्धविराम से

Publsihed: 18.Jun.2018, 23:40

अजय सेतिया / अपन ने शनिवार को लिखा था युद्धविराम का फैसला गलत था | आतंकवादियों ने युद्धविराम को माना ही नहीं था | पाकिस्तान ने भी युद्धविराम को नहीं माना | आतंकियों ने हिंसा और हत्

आतंकियों से युद्धविराम गलत फैसला था 

Publsihed: 15.Jun.2018, 21:04

अजय सेतिया / रमजान का महीना का खत्म हुआ | कायदे से अर्ध्सेनिक बलों का युद्धविराम शनिवार आधी रात से खत्म हो जाना चाहिए | इस के लिए सरकारी फरमान की भी कोई जरुरत नहीं | युद्धविराम सिर्फ रमजान महीने के लिए हुआ था | जिस का पाकिस्तान और उस के आतंकवादियों ने जम कर फायदा उठाया

अब होगा मोदी के रुतबे का इम्तिहान

Publsihed: 14.Jun.2018, 20:11

अजय सेतिया / संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार दफ्तर की तथाकथित “कश्मीर रिपोर्ट” ने भारत में बवाल खडा किया है | यह रिपोर्ट 14 जून 2018 को जारी हुई | कश्मीर पर यह पहली “रिपोर्ट” जारी हुई है | “रिपोर्ट” संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयुक्त जीद-राद-अल-हुसैन ने जारी की | अपन बात शुरू करने से पहले बता दें