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Exclusive Articles written by Ajay Setia

सोनिया का आम आदमी अब बीजेपी-मोदी के साथ

Publsihed: 24.Dec.2007, 20:35


लुटिया डूबने के बाद भी कांग्रेस जिद पर कायम। सोमवार को भी वीरप्पा मोइली बोले- 'मौत के सौदागर वाले बयान पर कोई अफसोस नहीं।' पर यह नहीं बताया- मौत के सौदागर वाला भाषण लिखा किसने था। यों लिखा-लिखाया पढ़ने की आदत अब कांग्रेस में छूत की बीमारी। मोइली भी लिखा-लिखाया पढ़ते दिखे। लिखे भाषण की बात चली। तो अरुण जेटली याद आए। बोले- 'सोनिया को तो मौत के सौदागर का मतलब भी पता नहीं होगा। जो लिखकर दे दिया गया, बोल दिया।' पर सोनिया अब इतनी अनाड़ी भी नहीं। अनाड़ी होती, तो मौत के सौदागर वाली जिद छूट जाती। सोमवार को सोनिया के सामने सारे दिग्गज सिर झुकाए खड़े थे।

विलास राव- राणे लड़ाई पहुंची दिल्ली

Publsihed: 21.Dec.2007, 20:37

राष्ट्रपति का चुनाव हुआ। तो अपन ने शिवसेना-कांग्रेस मेलजोल का खुलासा किया। शिवसेना एनडीए उम्मीदवार की हार का कारण बनी। शिवसेना शुरूआत न करती। तो नतीजा कुछ और होता। तब अपन ने खुलासा किया था- 'बाल ठाकरे ने मराठी अस्मिता को मुद्दा तो बनाया। पर नारायण राणे को सीएम न बनाने की शर्त भी रखी।' नारायण राणे जब कांग्रेस में आए। तो अघोषित वादा था- 'देर सबेर सीएम की कुर्सी सौंपेंगे।' राणे के आने से कांग्रेस की जान में जान आई। तब तक तो एनसीपी का पलड़ा भारी था। राणे ने आकर कांग्रेस की सीटें एनसीपी से ज्यादा की। पर राणे से किया वादा नहीं निभा।

चलो, नक्सलियों का बढ़ा दायरा तो माना मनमोहन ने

Publsihed: 20.Dec.2007, 20:39

शुकर है, मनमोहन सिंह ने मान लिया। एनडीसी खत्म हुई। तो आतंरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों की मीटिंग हुई। मनमोहन बोले- 'नक्सलियों ने अपना जाल बढ़ा लिया।' एक दिन ऐसा भी आएगा। जब मनमोहन कहेंगे- 'आतंकवादियों ने अपनी जड़ें मजबूत कर लीं।' पहले बात नक्सलवाद की। अपन अगर मनमोहन के कहे की जड़ में जाएं। तो गढ़े मुर्दे उखड़ेंगे ही। याद करो आंध्र प्रदेश। जहां चंद्रबाबू नायडू पर नक्सली हमला हुआ। वह बाल-बाल बच गए। पर मई 2004 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जीती। तो पहली बार नक्सली संगठनों पर बैन हटा।

बिदके मनमोहन, जब मोदी ने दिखाया आईना

Publsihed: 19.Dec.2007, 20:40

बुधवार को मनमोहन-मोदी आमने-सामने हुए। तो मोदी के तीर नहीं झेल पाए मनमोहन। यह हुआ एनडीसी यानी राष्ट्रीय विकास परिषद की मीटिंग में। मीटिंग का मकसद था- ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना को मंजूरी। मनमोहन-मोदी में तू-तू, मैं-मैं किस बात पर हुई। वह बाद में बताएंगे। पहले मीटिंग के एजेंडे की बात। योजना का ड्राफ्ट तैयार था। उसमें हेर-फेर की गुंजाइश ही नहीं थी। फिर भी सारे सीएम मनमोहन-मोंटेक-चिदंबरम के बहरे कानों तक आवाज पहुंचाने में जुटे। नीतीश कुमार बोले- 'नदियों को जोड़कर बिहार को बाढ़ से बचाएं। नेपाल के साथ समझौता न हो। तो कम से कम भारतीय नदियां तो जोड़िए।'

नगालैंड में कांग्रेसी छेड़छाड़ की तैयारी

Publsihed: 18.Dec.2007, 20:45

सोचो, गुजरात-हिमाचल से निपटकर कांग्रेस क्या करेगी। गोवा-झारखंड के बाद अब कांग्रेस की नजर नगालैंड पर। अपन को कांग्रेसी इरादों की भनक तब लगी। जब नगालैंड के कांग्रेसी एमएलए चौबीस अकबर रोड पर देखे। नगालैंड कांग्रेस के अध्यक्ष होखेतो सुमी 30 एमएलए लेकर पहुंचे। साठ की एसेंबली में मौजूदा तादाद 54 की। गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने मुलाकात की। पर सबको दस जनपथ का रास्ता दिखा दिया। सोनिया के रायबरेली से लौटने का इंतजार। सोनिया की हरी झंडी हुई। तो कल केबिनेट नगालैंड सरकार बर्खास्तगी की सिफारिश कर देगी। कांग्रेस के एमएलए तीस का जुगाड़ कर चुके।

प्रणव बोले- लोकसभा पर मिड टर्म की तलवार

Publsihed: 17.Dec.2007, 20:40

मोदी का एक्जिट नहीं होगा। एक्जिट पोल कुछ भी कहें। इम्तिहान तो होगा स्टार के एक्जिट पोल का। जिसने साफ-साफ कहा- 'बीजेपी 103, कांग्रेस 76 पर निपटेगी।' यों सीएनएन-आईबीएन ने भी दो टूक भविष्यवाणी की- 'बीजेपी को बहुमत जरूर मिलेगा। किस्मत ने साथ न दिया। तो भी 92 सीटें तो आएंगी ही। पर सौ से ज्यादा नहीं मिलेंगी। कांग्रेस को 77 और लाटरी निकल आई तो 85 तक।' जीटीवी का एक्जिट पोल भी करीब-करीब ऐसा ही। दो सीटें कम या ज्यादा। पर एनडीटीवी एक्जिट पोल न भी करता। तो कोई फर्क नहीं पड़ता। कहा- 'बीजेपी को 90 से 110 के बीच। कांग्रेस को 70 से 95 के बीच।' बीजेपी जीत भी सकती है, हार भी सकती है। कांग्रेस जीत भी सकती है, हार भी सकती है। यानी चित भी मेरी, पट भी।

आ रहे हैं भैरों बाबा

Publsihed: 15.Dec.2007, 20:40

सोनिया हिमाचल में बीजेपी के खिलाफ गरजी। तो अपन को शक हुआ- कहीं गुजरात वाला भाषण तो नहीं पढ़ आई। आखिर हिमाचल में तो बीजेपी का राज नहीं। पर नहीं, यह गुजरात-हिमाचल के बाद का इशारा। लोकसभा चुनाव अब बहुत दूर नहीं। लेफ्ट ने इसी महीने की लक्ष्मण रेखा खींच दी। मनमोहन ने एटमी ऊर्जा की मृग तृष्णा न छोड़ी। लक्ष्मण रेखा पार कर ली। तो लेफ्ट सत्ता का अपहरण करेगा। फिर जो चुनावी युध्द जीतेगा। वही दिल्ली की अयोध्या पर राज करेगा। पर फिलहाल बात गुजरात-हिमाचल की। आडवाणी आज वोट डालकर हिमाचल का रुख करेंगे। पर गुजरात की वोटिंग से पहले बीजेपी को मध्य प्रदेश में जोरदार झटका धीरे से लगा।

दे बाबा- अफजल, अजहर, सोहराबुद्दीन के नाम पर

Publsihed: 14.Dec.2007, 20:40

गुजरात के चुनावी महासमर का आज आखिरी दिन। कल बाकी की 95 सीटों पर भी वोट पड़ेंगे। संग्राम तो कांग्रेस-बीजेपी में रहा। पर महाभारत संघ परिवारियों में हुई। आधा परिवार कौरव बन गया। आधा पांडव। आधे मोदी के साथ। बाकी बचे केशुभाई के साथ। केशुभाई की तुलना अपन भीष्म पीतामह से करें। तो ठीक ही रहेगा। भीष्म पीतामह का शरीर कौरवों के साथ था। मन पांडवों के साथ। केशुभाई का शरीर बागियों के साथ था। मन बीजेपी के साथ। सिर्फ बीजेपी ही क्यों। बाकी संघ परिवारिए भी महाभारत में कूदे। वीएचपी को ही लें। तोगड़िया अंदरखाते कांग्रेस के साथ थे। तो अशोक सिंघल-आचार्य धर्मेंद्र बीजेपी के साथ।

तुम्हारा अजहर, तो हमारा अफजल

Publsihed: 13.Dec.2007, 20:40

चुनाव आयोग से मोदी को नोटिस मिला। अलबत्ता मोदी को नोटिस दिलवाया। तो कांग्रेस बहुत खुश थी। पर मोदी के जवाब ने आयोग की जुबान तो बंद की ही। कांग्रेस की जुबान पर भी ताला पड़ गया। अपन अगर चुनावी दांव-पेंच की पड़ताल करें। तो सोनिया गांधी को बधाई देनी पड़ेगी। जिनके एक वाक्य पर चुनावी घमासान अटक गया। यह वाक्य था- 'गुजरात में शासन चलाने वाले मौत के सौदागर।' सोनिया ने दो काम किए। एक तो सारा चुनाव इसी के इर्द-गिर्द कर दिया। दूसरा- मोदी को मुद्दा बना दिया। वही चाहते थे मोदी। मोदी की बात चली। तो इस बार का खास नारा बताएं। नारा लगा- 'न दर्द चाहिए, न हमदर्द चाहिए। मोदी जैसा मर्द चाहिए।'

मोदी को अभिमन्यु की तरह घेरने की कोशिश

Publsihed: 12.Dec.2007, 20:39

अपनी सुप्रीम कोर्ट ने मोदी को नोटिस दिया। तो जयंती नटराजन बाग--बाग हो गई। बोली- 'अदालत पहले भी कई बार मोदी की निंदा कर चुकी। फासिस्ट मोदी गोधरा की लाशों पर सवार होकर सत्ता में पहुंचे।' लाशों की राजनीति पर अपने जावड़ेकर बोले- 'लाशों की राजनीति में कांग्रेस की महारत।' उनने याद कराया 1984 का चुनाव। उनने याद कराया 1991 का चुनाव। बात 1984 की चली। तो बता दें- बुधवार को अपने सिध्दू भाजी ने अमदाबाद में मनमोहन को 84 के दंगे याद कराए।