India Gate se Sanjay Uvach

Wed, 14 Dec 2011

जनसत्ता 14 दिसंबर, 2011:  पिछले दिनों दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में एक अत्यंत गंभीर विषय पर चर्चा हुई। विषय था, देश में बच्चों के अपहरण की बढ़ रही घटनाएं। विषय की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बच्चों के अपहरण पर शोध आधारित पुस्तक का विमोचन करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अल्तमस कबीर खुद मौजूद थे। इस गंभीर समस्या का सनसनीखेज खुलासा 1996 में हुआ था, जब यूनिसेफ ने भारत में बच्चों के देह-शोषण पर एक रिपोर्ट जारी की थी। बी भामती की इस रिपोर्ट में बच्चों के अपहरण का देह व्यापार से सीधा संबंध बताया गया था। इसके बाद 2003-04 में राष्ट्रीय मानवाध

Fri, 02 Dec 2011

जनसत्ता, 1 दिसंबर, 2011 : वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने चौबीस नवंबर को उपभोक्ता क्षेत्र में विदेशी निवेश संबंधी मंत्रिमंडल के फैसले का एलान किया। उन्होंने कहा कि जनता ने यूपीए को बहुमत दिया है, इसलिए उन्हें फैसले करने का अधिकार है। अगर संविधान में ऐसा होता तो संसद की जरूरत ही क्या थी। अमेरिका की तरह यहां प्रधानमंत्री का सीधा चुनाव नहीं होता। सरकार अपने फैसलों के लिए संसद के प्रति उत्तरदायी है और उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का भी प्रावधान है। रहा चुनाव में बहुमत का सवाल, तो वह भी जनता ने न कांग्रेस को दिया न यूपीए को।

Tue, 22 Nov 2011

जनसत्ता, 22 नवंबर, 2011 : राजनीतिक गलियारों में लोग कहते सुने जाते हैं, राज तो कांग्रेस को ही करना आता है। कौन-सी चाल कब चलनी है, इस मामले में बाकी सब अनाड़ी हैं। मायावती चाहे लाख बार सवाल उठाती रहें कि जयराम रमेश की चिट्ठियां और गुलाम नबी आजाद के आरोपों की बाढ़ चुनावों के वक्त ही क्यों। भारतीय जनता पार्टी भी चाहे जितने आरोप लगाए कि राजग कार्यकाल के स्पेक्ट्रम आबंटन पर एफआईआर सीबीआई का बेजा इस्तेमाल है, पर यह कांग्रेस को ही आता है कि लालकृष्ण आडवाणी की भ्रष्टाचार विरोधी रथयात्रा के समापन आयोजन की हवा कैसे निकालनी है। आडवाणी की भ्रष्टाचार विरोधी रैली और संसद के शीत सत्र से

Sat, 12 Nov 2011

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जेएस वर्मा को लगता है कि न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू की अध्यक्षता वाली प्रेस परिषद भंग कर देनी चाहिए। यह मांग उन्होंने इसलिए की क्योंकि काटजू ने दृश्य मीडिया को प्रेस परिषद के अधीन लाने की मांग की है। न्यायमूर्ति वर्मा अब दृश्य मीडिया की उस नेशनल ब्राडकास्टिंग अथॉर्टी के अध्यक्ष हैं जो प्रेस परिषद से भी ज्यादा दंतविहीन है, जो नहीं चाहती कि मीडिया पर कोई नियंत्रण होना चाहिए, जो प्रेस परिषद के दायरे में भी नहीं आना चाहती...

Thu, 03 Nov 2011

लोकपाल अभी बना नहीं। पता नहीं जनलोकपाल प्रारूप के अनुरूप बनेगा भी या नहीं। कहीं अन्ना हजारे को मजबूत लोकपाल के लिए फिर से आंदोलन न करना पड़े। लेकिन उससे पहले ही टीम अन्ना ने संसद को सुधारने का बीड़ा उठा लिया है। राइट-टू-रिकॉल के लिए आंदोलन की डुगडुगी बजनी शुरू हो गई है। राइट टू रिकॉल यानी जनता को अपने चुने हुए सांसदों-विधायकों को वापस बुलाने का अधिकार। बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने भी आव देखा न ताव। जयप्रकाश नारायण का नाम लेकर राइट-टू-रिकॉल का समर्थन कर दिया। शरद यादव और नीतिश कुमार समाजवादी परंपरा की उपज हैं। उनके नेता राममनोहर लोहिया कहा करते थे- 'जिंदा कौमें

Mon, 31 Oct 2011

कहते हैं, दूध का जला छाछ को भी फूंक-फूंककर पीता है। कर्नाटक में लोकायुक्त की मार से सहमी भारतीय जनता पार्टी पर यह कहावत कितनी लागू होती है, यह तो अभी नहीं कहा जा सकता। लेकिन जिस तेजी से भाजपा ने उत्तराखंड में मुख्यमंत्री बदला, उससे कर्नाटक का सबक सीखने की भनक तो लगी ही। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप सुर्खियों में नहीं आए थे। गाहे-बगाहे अदालतों में भ्रष्टाचार के मामले जरूर आए। अदालतों ने तीखी टिप्पणियां भी की, सरकार के कुछ फैसले रद्द भी किए। विपक्ष भ्रष्टाचार के मामले उजागर करता, उससे पहले ही कर्नाटक के लोकायुक्त की रिपोर्ट आ गई। कर्नाटक के मुख्यमंत्री को

Fri, 28 Oct 2011

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अचानक अपने ही बनाए एक कानून पर चिंतित हो उठे हैं। उनकी पार्टी के मंत्री और कई सांसद तो पहले से ही चिंतित थे। अकसर सत्ताधारी दल के सांसदों को अपनी ही सरकार से तरह-तरह की शिकायतें रहती हैं। उनके काम तीव्र गति से नहीं होते या कई बार होते ही नहीं। उन्हीं की पार्टी के मंत्री उनकी सुनते नहीं या कई बार मिलने तक का समय नहीं देते। पर यह अनोखा उदाहरण सामने आया है जब प्रधानमंत्री को अपने ही बनाए कानून पर फिक्रमंद देखा जा रहा है। यह चिंता है सूचना के अधिकार कानून के तहत जनता को मिल रही सरकार और अफसरों के दुष्कर्मो की सूचनाओं को लेकर। संभवत: यूपीए सरकार ने अपन

Mon, 24 Oct 2011

हिसार का चुनाव नतीजा कांग्रेस के लिए ही नही, भाजपा के लिए भी सबक लेने का मौका है. कांग्रेस ने अपनी साख बेह्द खराब कर ली है. जमानत जब्त होना कांग्रेस के लिए चिंता का विषय होना चाहिए. टीम अन्ना कांग्रेस के खिलाफ प्रचार करने ना जाती तो उसकी जमानत कतई जब्त नही होती. टीम अन्ना भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाने में कामयाब रही. इससे यह भी जाहिर हो गया है कि देश की जनता भ्रष्टाचार से कितनी त्रस्त है. जो लोग यह मानते हैं कि भ्रष्टाचार अब चुनावी मुद्दा नही बनता उनके लिए भी यह चुनाव बडा सबक है. देश की जनता को अगर कोई सही वकत पर जगा दे, तो वह जग भी जाती है.

Mon, 24 Oct 2011

अन्ना  टीम के सदस्य और प्रसिध वकील प्रशांत भूषण के चेम्बर में घुस कर तीन युवकों ने उनकी पिटाई कर दी. जिस की जितनी निंदा की जाए कम है. जनतंत्र में ऐसी हिंसा की इजाजत नहीं दी जा सकती. उनका कसूर सिर्फ यह था कि उन्होंने कश्मीर पर एक ऐसा बयान दे दिया था, जो इन युवकों को पसंद नही था. वह बयान ज्यादतर भारतीयों को पसंद नहीं आया होगा. बिना लाग-लपेट बयान को प्रस्तुत करें तो उन्होंने कहा था कि कश्मीरियों को साथ रखने की कोशिश करनी चाहिए, लेकिन अगर वे साथ नहीं रहना चाहें तो उन्हें अलग होने देना चाहिए.

Tue, 03 May 2011
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ओसामा बिन लादेन के मारे जाने से ३६ घंटे पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिह ने अपना अफगानिस्तान दौरा स्थगित किया। मनमोहन सिंह के दौरे की तारीख तय नहीं हुई थी, पर यह तय था कि वह मई महीने में अफगानिस्तान जाएंगे। शनिवार को नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय सूत्रों ने प्रधानमंत्री का दौरा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने की बात कही। रविवार को अमेरिकी ऑप्रेशन में ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से डेढ़ सौ किलोमीटर दूर एबोटाबाद में मारा गया। अमेरिका ने दावा किया है कि ओसामा बिन लादेन की खोज अगस्त २०१० में कर ली गई थी। स्वाभाविक है कि पाकिस्तान को अमेरिका ने इसकी जानकारी नहीं दी होगी। अन्यथा जिस प्रकार पहले ओसामा बिन लादेन तौरा-बोरा से भाग जाने में सफल हुए थे, वैसे ही अब भी सफल हो जाते। यह कोई भी मानने को तैयार नहीं हो सकता था कि लादेन के इस्लामाबाद से सिर्फ १५० किलोमीटर पर एक कस्बे में रहने की पाक खुफिया एजेंसियों को पहले से जानकारी नहीं होगी।