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Exclusive Articles written by Ajay Setia

सबसे पहले उत्तराखंड कांग्रेसमुक्त होगा ajaysetia 16.Jan.2017, 17:49

यूपी तो बहुत साल से कांग्रेस मुक्त जैसी ही है. इस बार अखिलेश यादव के सहारे 28 को 50 बनाने की सोच रहे. वैसे जब शीला दीक्षित को सीएम प्रोजेक्ट किया . तो सपना 205 का था. पर पी.के की बनाई खाट टूट गई. तो अब अखिलेश के सहारे मोटरसाईकिल की सवारी होगी. शीला तो बेचारी हो कर दिल्ली लौट रही. यो तो चुनाव आते ही दलबदल का भी मौसम आता है. पर इस बार तो कुछ ज्यादा ही उथल-पुथल हो रही. कांग्रेस से रीटा बहुगुणा जैसी दिग्गज भाजपा में गई . तो बसपा से स्वामी प्रशाद मौर्य जैसा दिग्गज. अब सपा से आगरा के राजा और रानी भाजपा में चले गए. अशोक प्रधान तो पता नहीं क्या सोच कर 2014 में सपा में गए थे.

डिम्पल-प्रियंका के बाद अखिलेश-राहुल के पोस्टर 

Publsihed: 15.Jan.2017, 05:27

सोमवार से चुनावी रंगत चढनी शुरु होगी. बाप-बेटे की लडाई का फैसला सोमवार को होगा. अपन ने कोई 40 साल पहले एक नेता का भाषण सुना था. वोटिंग से पहले वाली रात थी. बंद कमरे में वर्करो की मीटिंग थी. नेता कह रहा था, आज की रात कत्ल की रात है. मतलब यह कि जो करना है,आज की रात कर लो. इसी तरह अखिलेश-मुलायम के लिए आज की रात कतल की रात. घर की बात घर में रह जाए. तो घर की साईकिल भी घर में रह जाएगी. वरना जैसे पुलिस थाने में जब्त वाहनो की हालत होती है. वैसी हालत चुनाव आयोग में जब्त साईकिल की होगी. वापस मिली भी तो आधे पुर्जे नहीं होंगे.  बहुत साल पहले अपन एक पुलिस वाले घर में किराएदार थे.

पीएम जवानो को सुरक्षा की गारंटी देंगे क्या .

Publsihed: 13.Jan.2017, 18:39

नेता चीन से जंग के समय जीप घोटाला करेगा. बोफोर्स घोटाला करेगा. अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकाप्टर घोटाला करेगा.एम्बरार एअयरक्राफ्ट घोटाला करेगा. यूरिया घोटाला करेगा. चारा घोटाला करेगा. 2 जी घोटाला करेगा. कोल घोटाला करेगा. तेलगी घोटाला करेगा. सत्यम घोटाला करेगा. तो आईएएस घोटाला क्यो नही करेगा. असल में बेता और ब्यूरोक्रेट का घोटालो में गठबंधन है. जो 1948 मे शुरु हुआ. 68 साल से बिना ब्रेक चल रहा . हाल ही में तमिलनाडू का चीफ सक्रेटरी पकडा गया. वह बेचारा कोई अकेला नहीं. देश के सारे चीफ सक्रेटरियो के यहाँ छापे मार कर देख लो. कोई एक भी बेदाग निकल आए, तो बता देना. . पीएम मोदी हाल ही में देहरादून गए.

राहुल-केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट का झटका 

Publsihed: 12.Jan.2017, 11:02

याद है वह "भूकम्प" आने वाला बयान. राहुल गांधी ने कहा था-"मुझे संसद में बोलने नहीं दिया जा रहा. मैं अपना भाषण तैयार कर के आया हूँ. मै बोलूंगा तो भूकम्प आ जाएगा. मेरे पास नरेंद्र मोदी पर भ्रष्टाचार के सबूत हैं." अपन को राहुल के इस बयान पर हंसी आई. संसद  तो खुद कांग्रेस नहीं चलने दे रही थी. सत्र का दो-तिहाई निकल  गया था. तब कांग्रेस को अपने खिलाफ फीड बैक मिलने लगा था . तो कांग्रेस ने स्टैंड बदला था. पहले तो लोकसभा में वोटिंग वाले रूल में ही नोटबंदी पर बहस को अडी रही थी. पर जब मल्लिकार्जुन खडके झुकते दिखे. तो अरूण जेतली का फार्मूला आ गया.

सिसोदिया ने किया केजरीवाल का बंटाधार 

Publsihed: 11.Jan.2017, 08:59

पंजाब में अकाली दो बार जीत लिए. तो यह 43 साल बाद करिश्मा हुआ था.  अब पंजाब में चुनाव हो रहे . तो आम आदमी पार्टी उम्मींद से है.  जब अरविंद केजरीवाल दिल्ली की सल्तनत छोड मोदी को हराने बनारस गए थे. तो आम आदमी पार्टी सारे देश में उम्मींद से थी.  पर जब  केजरीवाल-कुमार विश्वास समेत सारे लुढक गए. तब भी पंजाब में तीन आपिए जीत गए थे.  सो अब पंजाब में केजरीवाल ज्यादा ही उम्मींद से हैं.  उन के हनुमान मनीष सिसोदिया मंगलवार को पंजाब में थे. वह केजरीवाल को पंजाब का सीएम प्रोजेक्ट कर आए. अब कोई माने या न माने.  पर पंजाब में अकालियो की वापसी होगी.

मायावती का मायाजाल 1316 करोड का 

Publsihed: 10.Jan.2017, 10:20

यूपी का चुनाव है. सब की इज्जत का सवाल है. सो जम कर गढे मुर्दे उखडेंगे.  अपन समझते थे भाजपा एक खिडकी खुली रखेगी. वह खिडकी सिर्फ एक हो सकती थी. खिडकी थी मायावती. ताकि कही त्रिशंकु विधानसभा आए. तो मायावती के समर्थन से बीजेपी बन जाए. या बीजेपी के समर्थन से मायावती बन जाए. पर मायावती समझती हैं वही सपा की असली विकल्प है. यो तो लोकसभा चुनाव में बसपा का सूपडा साफ हुआ था. पर लोकसभा चुनाव कोई माणक नहीं हो सकता. लोकसभा चुनाव में तो दिल्ली भी एकतरफा मोदी के साथ थी. बिहार भी मोदीमय थी. सो विधानसभा चुनावो की बिसात पूरी तरह अलग. यह बीजेपी को अच्छी तरह पता है. ऐसा मानने वालो की कमी नहीं.

अभिव्यक्ति की आज़ादी वालो का बदरंग चेहरा

Publsihed: 08.Jan.2017, 21:51

चुनाव आ गए . तो ची-ची करने वाले भी आ गए . साक्षी महाराज ने ऐसा क्या कहा था. जो बवाल हुआ. साल भर पहले जो अभिव्यक्ति की आज़ादी मांग रहे थे. वही साक्षी महाराज से अभिव्यक्ति की आज़ादी छीनना चाहते हैं. जो अपन ने टीवी चैनलो पर सुना. वही तो आप ने भी सुना होगा. वह मेरठ के शनिधाम मंदिर में बोल रहे थे. सुनने वाले भी सारे साधु-संत ही थे. संत समागम जो था.  उन ने कहा- बच्चो का भविष्य बेहतर कैसे बने.  सब से बडी समस्या तो आबादी है. जो सुरसा के मुह्न की तरह बढ रही. चार बीवी , चालीस बच्चो का जमाना नहीं रहा. अब बताईए इस में क्या गलत है. पर पिल पडे सारे अभिव्यक्ति की आज़ादी वाले.

सात साल बाद फिर निकला मुहुर्त

Publsihed: 07.Jan.2017, 21:45

अपन की वापसी हो रही है. फिलहाल अखबार में नहीं. अलबत्ता यही पर. अपने मशहूर "इंडिया गेट से" कालम की वापसी. जो अपन ने 1997 में शुरु किया था. दस साल तक अपन राजस्थान के नवज्योति में यह कालम लिखते रहे. नवज्योति ने भी गजब का प्रयोग किया. न उस से पहले किसी ने ऐसा किया था. न बाद में कभी किसी ने हिम्मत दिखाई.दस साल तक पहले पेज पर पहला कालम. दीन बंधु चौधरी को दिल से आभार. उन ने मौका दिया . तो अपन ने भी मन से लिखा. जम के लिखा. राजस्थान में कोई ऐसा अफसर नेहीन था. जो रोज अपना कालम नहीं पढता था. राजस्थान में कोई ऐसा नेता नहीं था. जो रोज सुबह अपन को नहीं पढता था.

कांग्रेस बोली- 'नई बात नहीं महंगाई तो हम साथ लाए थे'

Publsihed: 24.Feb.2010, 06:04

यह अपनी मनगढ़ंत बात नहीं। खुद कांग्रेस ने कहीं है यह बात। वह भी कोई छोटे-मोटे नेता ने नहीं। अलबत्ता सोनिया की बगल में खड़े होकर कही गई। वह भी ताल ठोककर। कहां कही, किसने कही, कब कही। उस सबका खुलासा अपन बाद में करेंगे। पहले बात संसद ठप्प होने की। पहले ही दिन दोनों हाऊस नहीं चले। शुकर है इस बार विपक्ष ने जनता का मुद्दा उठाया। महंगाई का। जिस पर कांग्रेस के सहयोगी भी घुटन महसूस कर रहे। खासकर ममता और करुणानिधि की पार्टियां। लालू-मुलायम भी। जो सरकार के साथ हैं, या नहीं। वे खुद भी नहीं जानते। सहयोगियों की बात छोड़िए। कांग्रेस की सांसद मीरा कुमार भी बोली- 'महंगाई से सचमुच जनता त्रस्त। सदन में प्रभावी बहस होनी चाहिए।' पर यह बात उनने कही बाहर आकर। अंदर काम रोको प्रस्ताव उन्हीं ने मंजूर नहीं किया। नामंजूर भी नहीं किया।

अमीर हो गए हैं लोग, मंहगाई का असर नहीं

Publsihed: 23.Feb.2010, 09:59

अपन को भी पार्लियामेंट कवर करते दो दशक होने को। ऐसा ढुलमुल अभिभाषण किसी सरकार का नहीं सुना। अभिभाषण पढ़ते भले ही राष्ट्रपति हों। तैयार करती है सरकार। मंजूरी देती है केबिनेट। सो मनमोहन सरकार का अभिभाषण बेअसर सा रहा। ढुलमुल सा रहा। जैसे बचाव की मुद्रा में खड़ी हो सरकार। समस्याओं के बचाव में अजीबोगरीब दलीलें पेश हुई। कुछ समस्याओं से तो कबूतर की तरह आंख ही मूंद लीं। जैसे तेलंगाना का जिक्र तक नहीं। नौ दिसंबर का ऐलान कांग्रेस के जी का जंजाल बन चुका। न बनते बन पड़ रहा है, न उगलते। टाइमपास करने को कमेटी बनी। तो उसकी शर्तें बदनीयती की पोल खोल गई। अब तेलंगाना राष्ट्र समिति की मुखालफत तो अपनी जगह। तेलंगाना के कांग्रेसियों को भी अपने आलाकमान की नीयत पर शक। अपने प्रधानमंत्री की नीयत पर शक। बजट सत्र के पहले दिन ही कांग्रेस को मुखालफत का स्वाद चखना पड़ा।