India Gate se Sanjay Uvach

  • strict warning: Non-static method view::load() should not be called statically in /home/ajayseti/public_html/sites/all/modules/views/views.module on line 906.
  • strict warning: Declaration of image_attach_views_handler_field_attached_images::pre_render() should be compatible with views_handler_field::pre_render($values) in /home/ajayseti/public_html/sites/all/modules/image/contrib/image_attach/image_attach_views_handler_field_attached_images.inc on line 112.
  • strict warning: Declaration of views_handler_filter::options_validate() should be compatible with views_handler::options_validate($form, &$form_state) in /home/ajayseti/public_html/sites/all/modules/views/handlers/views_handler_filter.inc on line 607.
  • strict warning: Declaration of views_handler_filter::options_submit() should be compatible with views_handler::options_submit($form, &$form_state) in /home/ajayseti/public_html/sites/all/modules/views/handlers/views_handler_filter.inc on line 607.
  • strict warning: Declaration of views_handler_filter_term_node_tid::value_validate() should be compatible with views_handler_filter::value_validate($form, &$form_state) in /home/ajayseti/public_html/sites/all/modules/views/modules/taxonomy/views_handler_filter_term_node_tid.inc on line 302.
  • strict warning: Declaration of views_handler_filter_boolean_operator::value_validate() should be compatible with views_handler_filter::value_validate($form, &$form_state) in /home/ajayseti/public_html/sites/all/modules/views/handlers/views_handler_filter_boolean_operator.inc on line 159.
  • strict warning: Declaration of views_plugin_style_default::options() should be compatible with views_object::options() in /home/ajayseti/public_html/sites/all/modules/views/plugins/views_plugin_style_default.inc on line 24.
  • strict warning: Declaration of views_plugin_row::options_validate() should be compatible with views_plugin::options_validate(&$form, &$form_state) in /home/ajayseti/public_html/sites/all/modules/views/plugins/views_plugin_row.inc on line 134.
  • strict warning: Declaration of views_plugin_row::options_submit() should be compatible with views_plugin::options_submit(&$form, &$form_state) in /home/ajayseti/public_html/sites/all/modules/views/plugins/views_plugin_row.inc on line 134.
  • strict warning: Non-static method view::load() should not be called statically in /home/ajayseti/public_html/sites/all/modules/views/views.module on line 906.
  • strict warning: Declaration of views_handler_argument::init() should be compatible with views_handler::init(&$view, $options) in /home/ajayseti/public_html/sites/all/modules/views/handlers/views_handler_argument.inc on line 744.
Tue, 01 Dec 2009

छह दिसम्बर दूर नहीं। बाबरी ढांचे की 17वीं बरसी होगी। पर इस बार छह दिसम्बर इतवार को। पांच दिसम्बर को भी संसद नहीं बैठेगी। सत्रह साल कांग्रेस गैर भाजपाई दलों का फायदा उठाती रही। इस बीच गैर भाजपाई सरकारें भी रह चुकी। भाजपाई सरकार भी रह चुकी। पर छह दिसम्बर का हंगामा कभी नहीं रुका। लंबे अर्से बाद विपक्ष गन्ने के मुद्दे पर एकजुट दिखा। तो कांग्रेस के होश फाख्ता थे। इसीलिए लीक की गई लिब्राहन रपट। पर गले की हड्डी बन गई। तो तुरत-फुरत संसद में पेश करनी पड़ी। फिर भी लिब्राहन रपट विपक्षी एकता तोड़ने में उतनी कारगर नहीं हुई। दो-चार दिन ही सेक्युलर दलों का एका दिखा। यों इस बात पर बीजेपी जरूर खफा होगी। बीजेपी किसी को सेक्युलर दल नहीं मानती। आडवाणी कहा करते हैं- सब छ्दम धर्मनिरपेक्ष। असली धर्मनिरपेक्ष तो बीजेपी है। पर अपन इस बहस में नहीं पड़ते। सवाल संसद में विपक्षी एकता का।

Sat, 28 Nov 2009

अपन ने वंदेमातरम् के खिलाफ फतवे की आलोचना की। तो आतंकवाद के खिलाफ फतवे की तारीफ भी होनी चाहिए। मक्का-मदीना से इस बार मुसलमानों को नया संदेश मिला। जेहाद के नाम पर आतंकवाद फैलाने वालों को सबक। संदेश मक्का-मदीना से आया। सो दुनियाभर के मुसलमानों को मानना चाहिए। वह भी बकरीद के मौके पर। सो इसे मोहम्मद पैगंबर का संदेश मानना चाहिए। देबबंद के जिस दारूल उलूम का देश की आजादी में योगदान रहा। जिस दारूल-उलूम ने बंटवारे की मुखालफत की। उसी दारूल-उलूम से वंदेमातरम् के खिलाफ फतवा चुभा था। सिर्फ हिंदुओं को नहीं। सच्चे मुसलमानों को भी चुभा था। जैसा गुजरात के डीआईजी ने अपने लेख में लिखा- 'नमाज पढ़कर जमीं को चूमना वंदेमातरम् ही है। तो फिर वंदेमातम की मुखालफत क्यों।' अपन को तसल्ली हुई। जब हजारों सच्चे मुसलमानों ने फतवे की मुखालफत की। बैतूल में तो मस्जिद के सामने वंदेमातरम् गाकर की। अपन कहेंगे- भारतीय मुसलमानों को कट्टरपन छोड़ना चाहिए। तो कोई बुरा मान लेगा। पर ज्यादातर मुस्लिम देशों के शासक आधुनिक हो चुके।

Fri, 27 Nov 2009

अपन राजस्थान के चुनावों की बात नहीं कर रहे। जहां नगर पालिका चुनावों में बीजेपी चारों गढ़ों में चारों खाने चित्त हो गई। जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, कोटा सब किले ढह गए। वसुंधरा विरोधियों का कलेजा ठंडा हुआ होगा। पर अपन राजस्थान की बात कर ही नहीं रहे। अपन महंगाई की बात भी नहीं कर रहे। जिस पर गुरुवार को विपक्ष ने सवाल उठाया। महंगाई पर कांग्रेस गंभीर नहीं। यह बात तो लोकसभा में दिखी। पर विपक्ष भी गंभीर नहीं दिखा। प्रणव दा महंगाई पर बहस से ठीक पहले उठकर चले गए। तो आडवाणी बहस शुरू होते ही उठ गए। सोनिया नहीं थी, सो कांग्रेसी सांसद भी नाममात्र थे। विपक्ष भी हाजिरी के हिसाब से गंभीर नहीं दिखा। पर अपन न राजस्थान के चुनाव नतीजों की बात कर रहे। न महंगाई की। अपन बात कर रहे आतंकवाद पर जीत की। क्यों, अपन ने लिखा था न कल।

Thu, 26 Nov 2009

आज उस आतंकी वारदात को एक साल हो गया। आज की शाम शुरु हुआ था आतंकी हमला। तीन दिन तक आतंकियों से लड़ना पड़ा। वे सिर्फ दस थे। साठ घंटे तक देश को बंधक बनाए रखा। अपने और कुछ विदेशी भी मिलाकर 183 लोग मारे गए। इनमें 15 तो सुरक्षाकर्मी ही थे। एनएसजी जवानों से लेकर एटीएस चीफ तक। एटीएस चीफ हेमंत करकरे की मौत से भी अपन ने कितना सिखा। बुलेटप्रुफ जैकेट पहनी हुई थी करकरे ने। अपन सब ने सीधे प्रसारण वाले हमले को देखा। अलबत्ता साठ घंटे तक लगातार देखा। तो अपन ने देखा था- करकरे बुलेटप्रुफ जैकेट पहन रहे थे। नेताओं-अफसरों ने रिश्वत लेकर खरीदी थी जैकेटें। जो आतंकी की गोली भेद गई। तो क्या अपन ने कुछ सीखा करकरे की मौत से। क्या रिश्वतखोरी पर नकेल लगाई अपन ने इस एक साल में।

Wed, 25 Nov 2009

तो यूपीए सरकार तीन दिन में तीन बार झुकी। पहले गन्ना मूल्य के आर्डिनेंस पर। फिर विपक्ष के दबाव में लिब्राहन आयोग की रपट पेश करने पर। और इस बीच मंगलवार को विपक्ष के दबाव में ही लाटरी बिल वापस नहीं ले पाई। लिब्राहन आयोग की रपट पेश हो गई। खोदा पहाड़ निकली चूहिया। रपट में ऐसा कुछ भी नहीं। जो अपन सबको पता न हो। वही सब कुछ- 'बीजेपी-शिवसेना हालात को इस मोड़ पर ले आए थे। आडवाणी ने रथयात्रा से माहौल बनाया। आरएसएस-वीएचपी ने भीड़ जुटा दी। वाजपेयी-बाल ठाकरे रणनीति के तहत मौजूद नहीं थे। ढांचा भीड़ ने तोड़ दिया।' अब इस रपट में नया क्या है। वाजपेयी पर लिब्राहन आयोग का आरोप किसी जज की टिप्पणी नहीं लगती।

Tue, 24 Nov 2009

लिब्राहन आयोग की रपट कब पेश होगी। यह पी. चिदंबरम ने अभी भी नहीं बताया। सोमवार को 'रपट' लीक हो गई। रपट में अटल बिहारी वाजपेयी का नाम चौंकाने वाला। छपी 'रपट' पर भरोसा करें। तो वाजपेयी, आडवाणी, जोशी बराबर के जिम्मेदार। 'रपट' के मुताबिक नरसिंह राव सरकार जिम्मेदार नहीं। पर वाजपेयी का नाम सुन आडवाणी खुद चौंक गए। सो उनने खुद कामरोको का नोटिस दिया। बीजेपी में फुलझड़ी चलती रही- 'मेहनत आडवाणी ने की थी। पीएम वाजपेयी बने। अयोध्या आंदोलन भी आडवाणी ने चलाया। पर ढांचा टूटने का सेहरा भी वाजपेयी के सिर बंध गया।' सुषमा बोली- 'हम खुद हैरान हैं। वाजपेयी उस आंदोलन में थे ही नहीं।' पर अपन को याद है- वाजपेयी 5 दिसंबर को लखनऊ में थे।

Sat, 21 Nov 2009

सो संसद दूसरे दिन भी नहीं चली। चलनी भी नहीं थी। यही लिखा था अपन ने कल। कांग्रेस खाम ख्याली में थी। सोचा था- शुक्रवार को बुंदेलखंड के पैकेज पर राहुल को बधाई देंगे। खाम ख्याली की बात चली। तो एक किस्सा बताते जाएं। बात पिछले सेशन की। वीरप्पा मोइली लोधी गार्डन में घूम रहे थे। वहीं पर अरुण जेतली से मुलाकात हुई। तो बोले- 'आज जजों वाला बिल पास करवा दो।' जेतली बोले- 'बिल बोगस है, मैं तो पेश होने की स्टेज पर ही विरोध करूंगा।' जेतली की बात सुनकर मोइली बोले- 'वह तो कर लेनां। पर पास आज ही करवा देना।' आखिर बिल पेश होने की स्टेज पर ही वापस लेना पड़ा था। अब अध्यादेश का ठीकरा भी मोइली के सिर फूटने लगा। जिसे शुक्रवार को ठंडे बस्ते में डालने का फैसला हुआ।

Thu, 19 Nov 2009

अपन ने कल सवाल उठाया था- 'ओबामा-जिंताओं की आपसी बात में भारत-पाक जिक्र क्यों?' विदेश मंत्रालय के अपने प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने भी यही एतराज उठाया। भारत-पाक संबंधों में चीन का दखल अपन को मंजूर नहीं। पर पाक को मंजूर। सो ओबामा की यह हरकत अपने लिए खतरे की घंटी। बुधवार को अमेरिकी राजदूत ने सफाई दी- 'राष्ट्रपति खुद मनमोहन को बात का ब्योरा देंगे।'मनमोहन अगले हफ्ते अमेरिका में होंगे। भारत के बुधवार को दिखाए तेवर तो काबिल-ए-तारीफ। पर क्या 24 नवंबर को मनमोहन के तेवर ऐसे ही रहेंगे। अपन को शक। बात अमेरिका-चीन की होगी। तो आज से शुरू सेशन में अरुणाचल और दलाई लामा की भी होगी। देश की सरहदों में घुसे चीनी हेलीकाप्टरों की भी होगी। सर-जमीं हिंदुस्तान छोड़ते ही मनमोहन को तेवर बदलने की आदत। बात सर जमीं की चली। तो वंदेमातरम् की बात करते चलें।

Wed, 18 Nov 2009

शनिवार को अपन ने खुफिया तंत्र की पोल खोली। तो अपन ने नागरिकता पहचान पत्र का मुद्दा उठाया था। यों तो नीलकेणी उस काम में जुट चुके। पर काम की रफ्तार बेहद धीमी। उसमें भी फिर कितने सुराख निकलेंगे। अपन अभी क्या कहें। जब पासपोर्ट बनाना मुश्किल नहीं। तो नागरिकता पहचान पत्र क्या मुश्किल होगा। कितने ही बांग्लादेशियों ने राशन कार्ड बनवा लिए। वोटर बनकर सरकारें बनाने का जिम्मा ले लिया। जी हां, कुछ पार्टियों की सरकार बनाने के ठेकेदार हैं अब बांग्लादेशी। वही उन्हें भारत से बेदखल नहीं होने देते। बेदखल की बात चलेगी। तो मानवता की दुहाई देंगे। पर अपन बात कर रहे थे फर्जी पासपोर्ट की। पाकिस्तानी जासूस सईद अमीर अली एयरपोर्ट पर पकड़ा गया। लखनऊ से भारतीय पासपोर्ट बनवा चुका था। मंगलवार को दो सहयोगी पकड़े गए। पासपोर्ट बनवाने में सहयोगी थे मो. अरशद और चांद। दोनों भारतीय।

Tue, 17 Nov 2009

लौट के 'कल्याण' घर को आए। यह उस कहावत जैसा ही लगा। जिसे अपन आमतौर पर बोल-चाल में इस्तेमाल करते। बीजेपी वालों ने 'एप्रोच' शुरू भी कर दी। अब खरा हो, खोटा हो, है तो अपना ही। कहते हैं पूत कपूत हो जाते हैं, मापे कु-मापे नहीं होते। मुलायम को मुस्लिम वोटों की फिक्र। तो बीजेपी को कल्याण के भरोसे 'राम' रथ पर चढ़ने की उम्मीद। वैसे भी राजनाथ सिंह जा रहे हैं। तो कल्याण को लौटने में क्या हर्ज। राजनाथ जिद करके अशोक प्रधान को टिकट न देते। तो कल्याण सिंह छोड़कर जाते भी नहीं। अशोक प्रधान हार गए। कल्याण सिंह जीत गए। खैर अपन ने मुलायम-कल्याण की दोस्ती देखी। अब दुश्मनी भी देखेंगे। सोमवार को अमर सिंह का बड़बड़ शुरू भी हो गया। कुछ दिन पहले यही मुलायम अमर कह रहे थे- 'छोड़ेंगे न तेरा साथ, ओ साथी मरते दम तक।'