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Exclusive Articles written by Ajay Setia

अब नार्थ-ईस्ट में शांति की उम्मीद जगी

Publsihed: 05.Dec.2009, 09:49

आज बात नार्थ-ईस्ट में अलगाववाद की। पर पहले बात भारत पर मंडराते खतरों की। अपन खतरों को तीन हिस्सों में बांटें। तो गलत नहीं होगा। पहला खतरा पाक और चीन से। दूसरा खतरा नक्सलवादियों से। तीसरा खतरा- अंदरूनी विद्रोहियों से। नार्थ-ईस्ट का अलगाववाद तीसरे खतरे का हिस्सा। पर पहले बात पाक और चीन की। तो पाक में होने वाले आतंकी हमलों से अपन को प्रभावित नहीं होना चाहिए। जैसे अपने नरम दिल पीएम हो जाते हैं। तभी तो पहले अमेरिका में कह आए- भारत और पाक दोनों ही आतंकवाद के शिकार। तो बाद में शर्म-अल-शेख में कह आए- 'बातचीत ही समझदारी का रास्ता। आतंकवाद बातचीत में बाधक नहीं बनेगा।' इसका मतलब था- आतंकवाद होता रहे। तब भी बातचीत जारी रहेगी।

आम आदमी रोटी को मोहताज पीएम बोले- कोठी खरीदिए

Publsihed: 03.Dec.2009, 23:44

इसे कहते हैं- दिन में सपने दिखाना। पीएम दिन में ही बोल रहे थे। सो दिन में ही सपने दिखा रहे थे। मौका था जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीकरण मिशन का सालाना समारोह। जमीन पर काम हुआ हो, न हुआ हो। समारोह से तो दिखेगा। पिछले चार साल में बिल्डरों की कमाई खूब हुई। मनमोहन सरकार ने 2005 में शुरू की थी यह योजना। तब से शहरों में जमीनों को आग लग चुकी। दिल्ली अब मिडिल क्लास के बूते में नहीं। दिल्ली की तो बात न पूछिए। बाकी शहरों की हालत भी अलग नहीं। आम आदमी की तो बात ही छोडिए। अब मिडिल क्लास भी छत का मोहताज। मनमोहन पीएम बने, तो एनसीआर में फ्लैट मिल जाता था- हजार रुपए स्केयर फुट के हिसाब। अब नसीब नहीं तीन हजार रुपए स्केयर फुट।

सदन में बैठ अपने सांसदों को शर्मसार करेंगी सोनिया

Publsihed: 03.Dec.2009, 05:09

अपन नहीं जानते मीरा कुमार क्या 'एक्शन' लेंगी। लालकृष्ण आडवाणी अपने सांसदों को कैसे समझाएंगे। यह सवाल भी जवाब का मोहताज। सोनिया गांधी इन दोनों से ज्यादा खफा। अपन पिछले दस साल के गवाह। सोनिया जबसे कांग्रेस संसदीय दल की नेता बनी। तब से सांसदों की हर मीटिंग में एक बात जस की तस रही। वह थी- सांसदों की सदन में गैर हाजिरी पर चिंता। दस साल में सोनिया अपने सांसदों को नहीं समझा पाई। सो उनका खफा होना बेहद जायज। सोमवार को जब प्रश्नकाल में सत्रह सवालों के पूछने वाले नहीं मिले। तो मीरा कुमार के पास चारा नहीं था। उनने आधा घंटा लोकसभा ठप्प कर दी। बात सांसदों के गायब होने की। अपन किसी की नियत पर सवाल नहीं उठा रहे।

लिब्राहन की रपट, 356 और विपक्ष की एकता

Publsihed: 30.Nov.2009, 23:32

छह दिसम्बर दूर नहीं। बाबरी ढांचे की 17वीं बरसी होगी। पर इस बार छह दिसम्बर इतवार को। पांच दिसम्बर को भी संसद नहीं बैठेगी। सत्रह साल कांग्रेस गैर भाजपाई दलों का फायदा उठाती रही। इस बीच गैर भाजपाई सरकारें भी रह चुकी। भाजपाई सरकार भी रह चुकी। पर छह दिसम्बर का हंगामा कभी नहीं रुका। लंबे अर्से बाद विपक्ष गन्ने के मुद्दे पर एकजुट दिखा। तो कांग्रेस के होश फाख्ता थे। इसीलिए लीक की गई लिब्राहन रपट। पर गले की हड्डी बन गई। तो तुरत-फुरत संसद में पेश करनी पड़ी। फिर भी लिब्राहन रपट विपक्षी एकता तोड़ने में उतनी कारगर नहीं हुई। दो-चार दिन ही सेक्युलर दलों का एका दिखा। यों इस बात पर बीजेपी जरूर खफा होगी। बीजेपी किसी को सेक्युलर दल नहीं मानती। आडवाणी कहा करते हैं- सब छ्दम धर्मनिरपेक्ष। असली धर्मनिरपेक्ष तो बीजेपी है। पर अपन इस बहस में नहीं पड़ते। सवाल संसद में विपक्षी एकता का।

मक्का-मदीना से फिदायिन हमलों के खिलाफ फतवा

Publsihed: 28.Nov.2009, 00:12

अपन ने वंदेमातरम् के खिलाफ फतवे की आलोचना की। तो आतंकवाद के खिलाफ फतवे की तारीफ भी होनी चाहिए। मक्का-मदीना से इस बार मुसलमानों को नया संदेश मिला। जेहाद के नाम पर आतंकवाद फैलाने वालों को सबक। संदेश मक्का-मदीना से आया। सो दुनियाभर के मुसलमानों को मानना चाहिए। वह भी बकरीद के मौके पर। सो इसे मोहम्मद पैगंबर का संदेश मानना चाहिए। देबबंद के जिस दारूल उलूम का देश की आजादी में योगदान रहा। जिस दारूल-उलूम ने बंटवारे की मुखालफत की। उसी दारूल-उलूम से वंदेमातरम् के खिलाफ फतवा चुभा था। सिर्फ हिंदुओं को नहीं। सच्चे मुसलमानों को भी चुभा था। जैसा गुजरात के डीआईजी ने अपने लेख में लिखा- 'नमाज पढ़कर जमीं को चूमना वंदेमातरम् ही है। तो फिर वंदेमातम की मुखालफत क्यों।' अपन को तसल्ली हुई। जब हजारों सच्चे मुसलमानों ने फतवे की मुखालफत की। बैतूल में तो मस्जिद के सामने वंदेमातरम् गाकर की। अपन कहेंगे- भारतीय मुसलमानों को कट्टरपन छोड़ना चाहिए। तो कोई बुरा मान लेगा। पर ज्यादातर मुस्लिम देशों के शासक आधुनिक हो चुके।

आप चुनाव हार चुके, हम से न पूछो सवाल

Publsihed: 27.Nov.2009, 10:06

अपन राजस्थान के चुनावों की बात नहीं कर रहे। जहां नगर पालिका चुनावों में बीजेपी चारों गढ़ों में चारों खाने चित्त हो गई। जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, कोटा सब किले ढह गए। वसुंधरा विरोधियों का कलेजा ठंडा हुआ होगा। पर अपन राजस्थान की बात कर ही नहीं रहे। अपन महंगाई की बात भी नहीं कर रहे। जिस पर गुरुवार को विपक्ष ने सवाल उठाया। महंगाई पर कांग्रेस गंभीर नहीं। यह बात तो लोकसभा में दिखी। पर विपक्ष भी गंभीर नहीं दिखा। प्रणव दा महंगाई पर बहस से ठीक पहले उठकर चले गए। तो आडवाणी बहस शुरू होते ही उठ गए। सोनिया नहीं थी, सो कांग्रेसी सांसद भी नाममात्र थे। विपक्ष भी हाजिरी के हिसाब से गंभीर नहीं दिखा। पर अपन न राजस्थान के चुनाव नतीजों की बात कर रहे। न महंगाई की। अपन बात कर रहे आतंकवाद पर जीत की। क्यों, अपन ने लिखा था न कल।

सबक जो हमने फिर भी नहीं सीखा

Publsihed: 26.Nov.2009, 10:00

आज उस आतंकी वारदात को एक साल हो गया। आज की शाम शुरु हुआ था आतंकी हमला। तीन दिन तक आतंकियों से लड़ना पड़ा। वे सिर्फ दस थे। साठ घंटे तक देश को बंधक बनाए रखा। अपने और कुछ विदेशी भी मिलाकर 183 लोग मारे गए। इनमें 15 तो सुरक्षाकर्मी ही थे। एनएसजी जवानों से लेकर एटीएस चीफ तक। एटीएस चीफ हेमंत करकरे की मौत से भी अपन ने कितना सिखा। बुलेटप्रुफ जैकेट पहनी हुई थी करकरे ने। अपन सब ने सीधे प्रसारण वाले हमले को देखा। अलबत्ता साठ घंटे तक लगातार देखा। तो अपन ने देखा था- करकरे बुलेटप्रुफ जैकेट पहन रहे थे। नेताओं-अफसरों ने रिश्वत लेकर खरीदी थी जैकेटें। जो आतंकी की गोली भेद गई। तो क्या अपन ने कुछ सीखा करकरे की मौत से। क्या रिश्वतखोरी पर नकेल लगाई अपन ने इस एक साल में।

कटघरे में अटल-आडवाणी नहीं, खुद जस्टिस लिब्राहन

Publsihed: 24.Nov.2009, 23:42

तो यूपीए सरकार तीन दिन में तीन बार झुकी। पहले गन्ना मूल्य के आर्डिनेंस पर। फिर विपक्ष के दबाव में लिब्राहन आयोग की रपट पेश करने पर। और इस बीच मंगलवार को विपक्ष के दबाव में ही लाटरी बिल वापस नहीं ले पाई। लिब्राहन आयोग की रपट पेश हो गई। खोदा पहाड़ निकली चूहिया। रपट में ऐसा कुछ भी नहीं। जो अपन सबको पता न हो। वही सब कुछ- 'बीजेपी-शिवसेना हालात को इस मोड़ पर ले आए थे। आडवाणी ने रथयात्रा से माहौल बनाया। आरएसएस-वीएचपी ने भीड़ जुटा दी। वाजपेयी-बाल ठाकरे रणनीति के तहत मौजूद नहीं थे। ढांचा भीड़ ने तोड़ दिया।' अब इस रपट में नया क्या है। वाजपेयी पर लिब्राहन आयोग का आरोप किसी जज की टिप्पणी नहीं लगती।

अटल के नाम से लिब्राहन रपट की साख दाव पर

Publsihed: 24.Nov.2009, 00:25

लिब्राहन आयोग की रपट कब पेश होगी। यह पी. चिदंबरम ने अभी भी नहीं बताया। सोमवार को 'रपट' लीक हो गई। रपट में अटल बिहारी वाजपेयी का नाम चौंकाने वाला। छपी 'रपट' पर भरोसा करें। तो वाजपेयी, आडवाणी, जोशी बराबर के जिम्मेदार। 'रपट' के मुताबिक नरसिंह राव सरकार जिम्मेदार नहीं। पर वाजपेयी का नाम सुन आडवाणी खुद चौंक गए। सो उनने खुद कामरोको का नोटिस दिया। बीजेपी में फुलझड़ी चलती रही- 'मेहनत आडवाणी ने की थी। पीएम वाजपेयी बने। अयोध्या आंदोलन भी आडवाणी ने चलाया। पर ढांचा टूटने का सेहरा भी वाजपेयी के सिर बंध गया।' सुषमा बोली- 'हम खुद हैरान हैं। वाजपेयी उस आंदोलन में थे ही नहीं।' पर अपन को याद है- वाजपेयी 5 दिसंबर को लखनऊ में थे।

झेंप मिटाने को पी-3 बोला यह तो यूपीए का फैसला

Publsihed: 21.Nov.2009, 10:20

सो संसद दूसरे दिन भी नहीं चली। चलनी भी नहीं थी। यही लिखा था अपन ने कल। कांग्रेस खाम ख्याली में थी। सोचा था- शुक्रवार को बुंदेलखंड के पैकेज पर राहुल को बधाई देंगे। खाम ख्याली की बात चली। तो एक किस्सा बताते जाएं। बात पिछले सेशन की। वीरप्पा मोइली लोधी गार्डन में घूम रहे थे। वहीं पर अरुण जेतली से मुलाकात हुई। तो बोले- 'आज जजों वाला बिल पास करवा दो।' जेतली बोले- 'बिल बोगस है, मैं तो पेश होने की स्टेज पर ही विरोध करूंगा।' जेतली की बात सुनकर मोइली बोले- 'वह तो कर लेनां। पर पास आज ही करवा देना।' आखिर बिल पेश होने की स्टेज पर ही वापस लेना पड़ा था। अब अध्यादेश का ठीकरा भी मोइली के सिर फूटने लगा। जिसे शुक्रवार को ठंडे बस्ते में डालने का फैसला हुआ।