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Exclusive Articles written by Ajay Setia

अटल के नाम से लिब्राहन रपट की साख दाव पर

Publsihed: 24.Nov.2009, 00:25

लिब्राहन आयोग की रपट कब पेश होगी। यह पी. चिदंबरम ने अभी भी नहीं बताया। सोमवार को 'रपट' लीक हो गई। रपट में अटल बिहारी वाजपेयी का नाम चौंकाने वाला। छपी 'रपट' पर भरोसा करें। तो वाजपेयी, आडवाणी, जोशी बराबर के जिम्मेदार। 'रपट' के मुताबिक नरसिंह राव सरकार जिम्मेदार नहीं। पर वाजपेयी का नाम सुन आडवाणी खुद चौंक गए। सो उनने खुद कामरोको का नोटिस दिया। बीजेपी में फुलझड़ी चलती रही- 'मेहनत आडवाणी ने की थी। पीएम वाजपेयी बने। अयोध्या आंदोलन भी आडवाणी ने चलाया। पर ढांचा टूटने का सेहरा भी वाजपेयी के सिर बंध गया।' सुषमा बोली- 'हम खुद हैरान हैं। वाजपेयी उस आंदोलन में थे ही नहीं।' पर अपन को याद है- वाजपेयी 5 दिसंबर को लखनऊ में थे।

झेंप मिटाने को पी-3 बोला यह तो यूपीए का फैसला

Publsihed: 21.Nov.2009, 10:20

सो संसद दूसरे दिन भी नहीं चली। चलनी भी नहीं थी। यही लिखा था अपन ने कल। कांग्रेस खाम ख्याली में थी। सोचा था- शुक्रवार को बुंदेलखंड के पैकेज पर राहुल को बधाई देंगे। खाम ख्याली की बात चली। तो एक किस्सा बताते जाएं। बात पिछले सेशन की। वीरप्पा मोइली लोधी गार्डन में घूम रहे थे। वहीं पर अरुण जेतली से मुलाकात हुई। तो बोले- 'आज जजों वाला बिल पास करवा दो।' जेतली बोले- 'बिल बोगस है, मैं तो पेश होने की स्टेज पर ही विरोध करूंगा।' जेतली की बात सुनकर मोइली बोले- 'वह तो कर लेनां। पर पास आज ही करवा देना।' आखिर बिल पेश होने की स्टेज पर ही वापस लेना पड़ा था। अब अध्यादेश का ठीकरा भी मोइली के सिर फूटने लगा। जिसे शुक्रवार को ठंडे बस्ते में डालने का फैसला हुआ।

यूपीए के गले में महंगाई, भ्रष्टाचार, बाबरी का फंदा

Publsihed: 19.Nov.2009, 09:53

अपन ने कल सवाल उठाया था- 'ओबामा-जिंताओं की आपसी बात में भारत-पाक जिक्र क्यों?' विदेश मंत्रालय के अपने प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने भी यही एतराज उठाया। भारत-पाक संबंधों में चीन का दखल अपन को मंजूर नहीं। पर पाक को मंजूर। सो ओबामा की यह हरकत अपने लिए खतरे की घंटी। बुधवार को अमेरिकी राजदूत ने सफाई दी- 'राष्ट्रपति खुद मनमोहन को बात का ब्योरा देंगे।'मनमोहन अगले हफ्ते अमेरिका में होंगे। भारत के बुधवार को दिखाए तेवर तो काबिल-ए-तारीफ। पर क्या 24 नवंबर को मनमोहन के तेवर ऐसे ही रहेंगे। अपन को शक। बात अमेरिका-चीन की होगी। तो आज से शुरू सेशन में अरुणाचल और दलाई लामा की भी होगी। देश की सरहदों में घुसे चीनी हेलीकाप्टरों की भी होगी। सर-जमीं हिंदुस्तान छोड़ते ही मनमोहन को तेवर बदलने की आदत। बात सर जमीं की चली। तो वंदेमातरम् की बात करते चलें।

तो 26/11 की निगरानी कर रहे थे हेडली-राणा

Publsihed: 17.Nov.2009, 21:18

शनिवार को अपन ने खुफिया तंत्र की पोल खोली। तो अपन ने नागरिकता पहचान पत्र का मुद्दा उठाया था। यों तो नीलकेणी उस काम में जुट चुके। पर काम की रफ्तार बेहद धीमी। उसमें भी फिर कितने सुराख निकलेंगे। अपन अभी क्या कहें। जब पासपोर्ट बनाना मुश्किल नहीं। तो नागरिकता पहचान पत्र क्या मुश्किल होगा। कितने ही बांग्लादेशियों ने राशन कार्ड बनवा लिए। वोटर बनकर सरकारें बनाने का जिम्मा ले लिया। जी हां, कुछ पार्टियों की सरकार बनाने के ठेकेदार हैं अब बांग्लादेशी। वही उन्हें भारत से बेदखल नहीं होने देते। बेदखल की बात चलेगी। तो मानवता की दुहाई देंगे। पर अपन बात कर रहे थे फर्जी पासपोर्ट की। पाकिस्तानी जासूस सईद अमीर अली एयरपोर्ट पर पकड़ा गया। लखनऊ से भारतीय पासपोर्ट बनवा चुका था। मंगलवार को दो सहयोगी पकड़े गए। पासपोर्ट बनवाने में सहयोगी थे मो. अरशद और चांद। दोनों भारतीय।

अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे

Publsihed: 17.Nov.2009, 10:10

लौट के 'कल्याण' घर को आए। यह उस कहावत जैसा ही लगा। जिसे अपन आमतौर पर बोल-चाल में इस्तेमाल करते। बीजेपी वालों ने 'एप्रोच' शुरू भी कर दी। अब खरा हो, खोटा हो, है तो अपना ही। कहते हैं पूत कपूत हो जाते हैं, मापे कु-मापे नहीं होते। मुलायम को मुस्लिम वोटों की फिक्र। तो बीजेपी को कल्याण के भरोसे 'राम' रथ पर चढ़ने की उम्मीद। वैसे भी राजनाथ सिंह जा रहे हैं। तो कल्याण को लौटने में क्या हर्ज। राजनाथ जिद करके अशोक प्रधान को टिकट न देते। तो कल्याण सिंह छोड़कर जाते भी नहीं। अशोक प्रधान हार गए। कल्याण सिंह जीत गए। खैर अपन ने मुलायम-कल्याण की दोस्ती देखी। अब दुश्मनी भी देखेंगे। सोमवार को अमर सिंह का बड़बड़ शुरू भी हो गया। कुछ दिन पहले यही मुलायम अमर कह रहे थे- 'छोड़ेंगे न तेरा साथ, ओ साथी मरते दम तक।'

खुली खुफिया तंत्र की पोल

Publsihed: 14.Nov.2009, 08:35

अपने यहां तो खुफिया विभाग में कोई खबर तक नहीं थी। डेविड हेडली और राना अमेरिका में पकड़े गए। तब जाकर पता चला- हेडली-राना तो भारत में सक्रिय थे। मुंबई पर आतंकी हमले के बाद भी अपन ने कई ऐंगल निकाले। पुलिस ने कई थ्योरियां पेली। पाकिस्तान से सीधे तार जुड़े। मोटर बोट की मोटरें खरीदने तक के सबूत ढूंढ लिए। अब एक साल होने को। पर हेडली-राना का कोई ऐंगल तो कभी सामने नहीं आया। यह ऐंगल खुला, तो अमेरिका में जाकर खुला। अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई ने खोला। अब मुंबई के सन्नी सिंह कहते हैं-'हेडली मेरे पास फ्लैट किराए पर लेने आया था। ऐना नाम की एक विदेशी महिला साथ थी। बोलचाल का ढंग विदेशी था। मैने फ्लैट दिला भी दिया। पर जब पासपोर्ट-वीजा की बात आई। तो हेडली उत्तेजित हो गया।'

बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव हो, तो मोदी जैसा कोई नहीं

Publsihed: 13.Nov.2009, 10:29

संघ ने बंद मुट्ठी खोल ली। बीजेपी की साख बढ़ेगी या घटेगी। यह तो बीजेपी वाले या संघ वाले जाने। पर एनडीए का कुनबा बिखरेगा। एनडीए का आडवाणी को नेता मानना भी आसान नहीं था। पर शरद यादव-नीतीश कुमार जैसों ने आडवाणी को करीब से देखा था। तो आडवाणी को कबूल करना आसान हुआ। वरना मीडिया ने आडवाणी की ऐसी इमेज बना दी थी। अपन को तो वाजपेयी के बाद ही कुनबा बिखरने का अंदेशा था। आडवाणी का असली व्यक्तित्व मीडिया की बनाई इमेज से कोसों दूर। शरद यादव ने एक बार कहा था-'हमने आडवाणी के साथ छह साल काम किया। हमें उन्हें एनडीए का नेता मानने में कोई प्रॉब्लम नहीं।' मीडिया की नजर में मोदी की इमेज तो आडवाणी से भी बुरी।

आडवाणी पर भविष्यवाणी करने वाले अब कहां हैं

Publsihed: 12.Nov.2009, 10:23

अपनी स्पीकर मीरा कुमार जा रही हैं अमेरिका। उन्नीस नवंबर को लौटेंगी। तब सेशन से पहले मीटिंग का वक्त नहीं होगा। सो उनने आज ही मीटिंग बुला ली। सेशन से एक हफ्ता पहले। यों तो इस मीटिंग के मुताबिक सेशन नहीं चलना। मीरा कहेंगी-'सबको मौका मिलेगा। सेशन को हंगामों से बचाओ।' पर हंगामें तो होकर रहेंगे। मंहगाई पर अब विपक्ष जरूर एकजुट होगा। मुलायम को भी कांग्रेस से हाथ मिलाने की अकल आ चुकी। सोचो, एटमी करार पर सरकार गिर जाती। तो कांग्रेस को 206 सीटें मिल पातीं। कतई नहीं। अलबत्ता 1989 के हालात बनते। पर बात मंहगाई की।

गलतियों का दूसरा दौर शुरू करने को तैयार बीजेपी

Publsihed: 11.Nov.2009, 10:23

कांग्रेस यूपी-केरल में लौट आएगी। बीजपी का सितारा डूबना बरकरार। यह है मंगलवार को निकले नतीजों का लब्बोलुआब। सबसे ज्यादा महत्व यूपी के नतीजों का। न मुलायम अपनी पुत्रवधू को जीता पाए। न अखिलेश अपनी सीट अपनी बीवी के नाम कर पाए। सो यह बाप-बेटे दोनों की हार हुई। अपन भी फिरोजाबाद को यादव सीट समझते थे। तो फिरोजाबाद से जातिवाद राजनीति का भूत उतर गया। राज बब्बर की जीत इसका साफ इशारा। अपन को लगता था- फतेहपुर सीकरी के बाद फिरोजाबाद भी हारेंगे राज बब्बर। पर फिरोजाबाद ने सिर्फ यादव महारथियों को नहीं हराया। आने वाले कल के यूपी की इबारत लिख दी। राहुल गांधी ने दाव लगाया था फिरोजाबाद पर। राहुल कोई सीएम पद के उम्मीदवार तो नहीं होंगे। पर 2012 की यूपी एसेंबली चुनाव के कांग्रेसी दूल्हे जरूर होंगे।

न लाग, न लपेट, खरी-खोटी वाले थे प्रभाष जी

Publsihed: 06.Nov.2009, 23:52

कोई माने, न माने। प्रभाष जोशी के साथ ही मिशनरी पत्रकारिता का अंत हो गया। मिशनरी पत्रकारिता के वही थे आखिरी स्तंभ। यों उनके जमाने में ही पत्रकारिता व्यवसायिक हो गई। प्रभाष जी का आखिरी साल तो व्यवसायिकता के खिलाफ जंग में बीता। चुनावों में जिस तरह अखबारों ने न्यूज कंटेंट बेचने शुरू किए। उनने उसके खिलाफ खम ठोक लिया। उनने लिखा- 'ऐसे अखबारों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर प्रिटिंग प्रेस के लाइसेंस देने चाहिए।' इन्हीं महाराष्ट्र, हरियाणा, अरुणाचल के चुनावों में उनने निगरानी कमेटियां बनाई। पत्रकारिता की स्वतंत्रता को जिंदा रखने की आग थी प्रभाष जी में। प्रभाष जी पांच नवंबर को भारत-आस्ट्रेलिया मैच देखते-देखते सिधार गए। प्रभाष जी की दो दिवानगियां देखते ही बनती थी। उन्हीं में एक दिवानगी उनके सांस पखेरू उड़ा ले गई। क्रिकेट मैच में हार का सदमा नहीं झेल पाए। हार्ट अटैक से चले गए। दूसरी दिवानगी थी- पाखंडी नेताओं की चङ्ढी उतारना।