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Exclusive Articles written by Ajay Setia

श्रीराम अयोध्या लौटे तो पटाखे नहीं चले थे 

Publsihed: 09.Oct.2017, 20:49

अजय सेतिया / सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी है | यह रोक दीपावली को ध्यान में रख कर लगाई गई है | इस अच्छी पहल का स्वागत होना चाहिए | पर हिन्दू कट्टरपंथी इस का विरोध कर रहे हैं | जब कि आतिशबाज़ी का रामायण में कहीं   नहीं | न ही भगवान राम के अयोध्या वापस लौटने पर आतिशबाज़ी हुई थी | आतिशबाज़ी का भारतीय संस्कृति से भी कोई लेना देना नहीं है | न ही आतिशबाज़ी का संस्कृत या हिंदी में कोई जिक्र है | आतिशबाज़ी संस्कृत या हिंदी का शब्द भी नहीं है | न ही पाली भाषा में कहीं आतिशबाजी जैसे किसी शब्द का जिक्र आया है |  यह फारसी शब्द है | आतिश का मत

मोदी हज सब्सिडी का कलंक भी धो डालेंगे

Publsihed: 07.Oct.2017, 23:59

 अजय सेतिया / अपन ने एक जगह पढ़ा था -"अल्लाह कभी भारतीय मुसलमानों का हज कबूल नहीं करेगा |" आप भी जानना चाहेंगे कि ऐसा क्यों ?

एक साथ चुनाव में लोकतंत्र सीमित हो जाएगा 

Publsihed: 05.Oct.2017, 22:37

अजय सेतिया / एक साथ चुनाव अटल बिहारी वाजपेयी का आईडिया था | इस आईडिया को भैरोंसिंह शेखावत ने आगे बढाया था | नरेंद्र मोदी ने जब 2016 में यह मुद्दा उठाया था | तो हुआनसांग की खोज जैसी कोई नई खोज नहीं थी | गुरूवार को चुनाव आयोग ने एक साथ चुनाव सहमति जता दी | तो इस का मतलब यह नहीं कि एक साथ चुनाव हो सकते हैं | न तो चुनाव आयोग को किसी विधानसभा का कार्यकाल घटाने का हक़ है , न केंद्र सरकार को, न संसद को | विधानसभाएं खुद चाहें , तभी किसी विधानसभा का कार्यकाल घट सकता है | मोरारजी देसाई ने कई विधान सभाएं भंग कर दी थी | इंदिरा गांधी ने भी कई विधानसभाएं भंग कर दी थी | बाबरी ढांचा टू

तो क्या संघ मोदी से खफा होना शुरू हो गया है

Publsihed: 02.Oct.2017, 22:29

 अजय सेतिया / आरएसएस को लेकर अपने पास कई खबरें थीं | पर जब तक पुष्टि न हो , लिखना ठीक नहीं होता | अपन सुनी-सुनाई अनाप-शनाप लिखने से परहेज करते हैं | सो इस मामले में भी परहेज ही रखा | पर जब एस.

भारत का जर्जर रेलवे ढांचा बनाम इंडिया की शाइनिंग बुलेट ट्रेन 

Publsihed: 29.Sep.2017, 20:23

अजय सेतिया / जिस दिन बुलेट ट्रेन का एलान हुआ | अपन ने उस दिन स्कूलों और अस्पतालों की दुर्दशा का सवाल उठाया था | तो कई लोगों को परेशानी हुई | अपना तब भी मानना यही था | आज भी मानना यही है | भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य की उपेक्षा कर के बुलेट ट्रेन चलाने की जरुरत नहीं | पहले मौजूदा रेल व्यवस्था को तो ठीक कर लेना चाहिए | देश में 11,563 नों मैन फाटक हैं | जहां हर साल सैंकड़ों लोग मरते हैं | रेलवे के सैंकड़ों पुल जर्जर हालत में है | पिछले रेलमंत्री सुरेश प्रभु महाराष्ट्र के थे | न तो वह भाजपा में थे, न ही सांसद | नरेंद्र मोदी उन्हें एक्सपर्ट बता कर लाए थे | संविधान में लिखा है कि राष्ट्रपति

काशी में गुंडई पर उतरे छात्रों और पुलिस में कोई फर्क नहीं 

Publsihed: 26.Sep.2017, 21:34

अजय सेतिया / पीएम नरेंद्र मोदी का चुनावी हल्का जंग का नया मैदान बना है | जंग-ए-मैदान भी तब बनाया गया , जब मोदी खुद अपने हल्के में थे | बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में लड़कियों से छेड़छाड़ को वीसी नहीं रोक पाए | घटना रात को हुई थी | अपन इस पर आगे तपसरा करें, उस से पहले घटना को समझ लें | बात बीते गुरूवार रात की है | बिड़ला होस्टल के कुछ छात्रों ने हॉस्टल के बगल से जा रही लड़कियों के साथ छेड़खानी की | तो लड़कियों ने विरोध किया | हैरानी की बात थी कि उन लड़कियों को 50-60 लड़कों ने घेर लिया | लड़कियों के साथ भद्दी हरकतें की गई | गाली-गलौज किया गया | | वे रोने लगीं, लेकिन वहां से हटी नहीं

सैम पित्रोदा ने संभाल ली राहुल की रणनीतिक कमान 

Publsihed: 21.Sep.2017, 13:50

सैम पित्रोदा ने भारत में घर घर टेलीफोन पहुंचा दिया था | यों तो कम्प्यूटर पहले ही देश में आ चुका था | पर सैम पित्रोदा भारत में बड़े पैमाने पर कम्प्यूटर लेकर आए | इस लिए वही भारत में कम्प्यूटरीकरण के जनक माने जाते हैं | क्रेडिट भले ही राजीव गांधी को दिया जाता है | राजीव गांधी की जितनी भी सफलताएं थी , उस के पीछे पित्रोदा का दिमाग था | उन्हीं सैम पित्रोदा ने अब राहुल गांधी की कमान सम्भाल ली है | राहुल गांधी के अमेरिका दौरे के वही सूत्रधार हैं | मिलिंद देवड़ा उन के सहायक की भूमिका में हैं | भारत का एक अंगरेजी न्यूज चैनल कांग्रेस का करीबी है | हालांकि मोदी सरकार आने के बाद वह चेनेल संकट में है | टे

राजनीतिक उथल-पुथल और दाऊद के भाई की गिरफ्तारी 

Publsihed: 19.Sep.2017, 23:15

अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम फिर चर्चा में है | अब खबर यह है कि भले ही वह पाकिस्तान में रह रहा है | पर मुम्बई में जबरन वसूली का उस का धंधा अभी भी चल रहा है | उसका भाई इकबाल कासकर धंधा देख रहा है | जबरन वसूली यानि एक्स्टार्शन  की एक शिकायत पर इकबाल कासकर को गिरफ्तार किया गया है | अपन को गिरफ्तारी के मुद्दे को लेकर थोड़ा शक है | शक की एक वजह है 2015 की घटना | इकबाल कासकर को हूँ-ब-हूँ जबरन वसूली के मामले में ही पहले भी गिरफ्तार किया गया था | पर पुलिस अदालत में साबित नहीं कर पाई | यहाँ तक कि इकबाल कासकर को जब 2003 में दुबई से प्रत्यार्पित किया गया था | और भारत लाने  के बाद उस पर सारा स

रोहिंग्या मुसलमानों को वोट बैंक बनाने की साजिश  

Publsihed: 18.Sep.2017, 20:47

रोहिंग्या को बसाने का कलंक नहीं लेंगे मोदी | यह अपन ने 15 सितम्बर को लिखा था | हूँ-ब-हूँ वही होता दिख रहा है | अपन ने तब उस हल्फिया बयान का जिक्र किया था | जो रोहिंग्या मुसलमानों की घुसपैठ के सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होना था | चौदह सितम्बर को हल्फिया बयान दाखिल नहीं हो पाया था | सोमवार को दाखिल किया , तो उम्मींद के मुताबिक़ ही था | अलबत्ता जो अपन ने उस दिन लिखा था उस से भी कड़े तेवरों वाला हल्फिया बयान | जो भी इन रोहिंग्या मुसलमानों की अमानवीय हरकतों को पढ़ चुका है | वह कभी इन अमानवीय लोगों के मानवाधिकारों की पैरवी नहीं करेगा | म्यांमार में बोद्धों ने बहुत सब्र किया | अब बौद्ध भिक्ष