कांग्रेस ने मक्खियों के छत्ते में हाथ डाल लिया। तेलंगाना का ऐलान मक्खियों का छत्ता साबित हुआ। बोडोलैंड, गोरखालैंड, विदर्भ, हरितप्रदेश, बुंदेलखंड की मांग उठ गई। गोरखों ने भी चंद्रशेखर राव की तरह आमरण अनशन का ऐलान कर दिया। गोरखों को इंसाफ का वादा दिलाकर संसद में पहुंचे हैं अपने जसवंत सिंह। सो शुक्रवार को वह भी आंदोलन की आग में कूद गए। बोले- 'गोरखालैंड की मांग जायज। सरकार उसे वक्त रहते मंजूर करे।' उनने पीएम को चिट्ठी भी लिख मारी। चिट्ठी न लिखते। तो गोरखे दिल्ली में आकर घेर लेते। वैसे भी उनने सीट बीजेपी को दी थी। जसवंत सिंह को नहीं। सो जसवंत सिंह ने घेराव से डरकर गोरखालैंड का समर्थन कर दिया। अब 21 दिसंबर से गोरखालैंड समर्थक दिल्ली पहुंचेंगे। तो जसवंत सिंह आगवानी करेंगे। राहुल गांधी बुंदेलखंड का समर्थन कर ही आए थे। अब मायावती ने भी चिंगारी में फूंक मार दी।