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Exclusive Articles written by Ajay Setia

कांग्रेस को हरियाणा में झटका, बीजेपी को सब जगह

Publsihed: 23.Oct.2009, 10:25

हरियाणा में अपन ने ऐसा तो नहीं सोचा था। झटका लगेगा, यह तो पता था। पर बहुमत नहीं मिलेगा। अपन को ऐसी आशंका नहीं थी। पर कांग्रेस आलाकमान को आशंका हो गई थी। आशंका न हुई होती। तो मोती लाल वोरा और आरके धवन पोलिंग के बाद भजन लाल से न मिलते। चुनाव शुरू हुआ। तो हालात ऐसी नहीं थी। पर चुनाव रोहतक बनाम बाकी हरियाणा बन गया। तो हालात बदल गए। चौटाला जब कहा करते थे- 'हुड्डा हरियाणा के नहीं, रोहतक के सीएम।' तो कांग्रेस ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। पर यह बात चुनावों में साफ दिखने लगी थी। हुड्डा ने वक्त से पहले चुनाव करवाए। हालात तो हुड्डा के पक्ष में थे। पहले मायावती-भजनलाल गठबंधन टूटा। फिर चौटाला-बीजेपी गठबंधन टूटा। फिर कुलदीप-बीजेपी गठबंधन होते-होते टूटा। पांच कोणीय चुनावों में भी कांग्रेस की दुर्गति हुई।

अरुणाचल का जनादेश लेकर जियाबाओ से भिड़ेंगे मनमोहन

Publsihed: 22.Oct.2009, 10:08

आज होगी तीन राज्यों के वोटों की गिनती। उधर गिनती निपटेगी। इधर झारखंड के चुनाव का रास्ता खुलेगा। झारखंड का चुनाव तीन राज्यों के साथ न होना। सत्ता के दुरुपयोग का कांग्रेसी उदाहरण। सरकार न बननी थी, न बनानी थी। पर एसेंबली को जानबूझकर सस्पेंड किए रखा। कांग्रेस की मदद वाली मधु कोड़ा की सरकार सबसे भ्रष्ट साबित हुई। कोई पांच हजार करोड़ की जायदाद बनाई कोड़ा ने। अब सीबीआई जांच के घेरे में। शिबू सोरेन विरोध करते रहे। पर मधु कोड़ा सरकार चलाती रही कांग्रेस। पांच हजार करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार का जिम्मेदार कौन। यह नतीजा आप खुद निकालिए। पर आज बात झारखंड की नहीं। बात तीन राज्यों के चुनाव नतीजों की। मनमोहन आज रात को थाईलैंड रवाना होंगे। तो अपने साथ अरुणाचल का जनादेश ले जाएंगे। चलते-चलते बताते जाएं- इस बार पीएम अलग उड़नखटोले पर सवार होंगे। टीम अलग उड़नखटोले पर।

मनमोहन कन्फ्यूजन से निकले तो अब चिदंबरम की बारी

Publsihed: 21.Oct.2009, 09:56

बात अपने मनमोहन सिंह की। जिनने पीएम बनते ही 2005 में हवाना जाकर कहा- 'पाकिस्तान भी आतंकवाद का शिकार।' महाराजा रणजीत सिंह के बारे में मशहूर था। वह सबको एक नजर से देखते थे। उसी तरह मनमोहन सिंह ने भी आतंकवाद को एक ही नजर से देखा। भारत और पाक के आतंकवाद का फर्क नहीं समझे। भारत का आतंकवाद पाक की देन। आतंकवाद में पाक फौज और आईएसआई शामिल। पर पाक का आतंकवाद घरेलू अमेरिकापरस्ती के खिलाफ। पाक ने जिस तालिबान-अलकायदा को पाला पोसा। उसी को मारने में अमेरिका की मदद की। तो तालिबान-अलकायदा के निशाने पर आया पाक। माना, कूटनीति में अनाड़ी हैं मनमोहन सिंह। पर आतंकवाद को समझने में इतनी नादानी। किसी पीएम को तो शोभा नहीं देती।

चीन से दो टूक बात के दो मौके अगले हफ्ते

Publsihed: 20.Oct.2009, 10:22

भारत-चीन के शब्दबाण चरम पर। नवंबर में दलाईलामा तवांग जाएंगे। जा पाएंगे क्या? गए तो नवंबर में तनाव तेज होगा। यों अब नवंबर में वक्त भी क्या। दलाईलामा तवांग के रास्ते ही भारत में घुसे थे। ऐसा नहीं जो तवांग पहली बार जा रहे हों दलाईलामा। आठ-दस बार जा चुके। वाजपेयी के वक्त 2003 में भी गए थे। पर तब तनाव इतना नहीं हुआ। शब्दबाण भी इतने तीखे नहीं थे। अब तो जैसे जंग की तैयारी कर रहा चीन। इसकी वजह सिर्फ दलाईलामा नहीं। अपनी अमेरिका से बढ़ती दोस्ती भी। पर यह कैसी दोस्ती। अब्दुल कलाम के बाद अब शाहनवाज हुसैन का अपमान।

अपना तो पटाखों से परहेज पर पाकिस्तान में फूट रहे बम

Publsihed: 17.Oct.2009, 09:30

अपने यहां सिर्फ मिठाई का परहेज ही नहीं। पटाखों का भी परहेज। मिठाई की पोल तो दीवाली से ठीक पहले खुल गई। पूरे देश में नकली मावा पकड़ा गया। मिठाई की मांग से हलवाईयों के मुंह में पानी भरने का असर। मांग ज्यादा होगी। तो फर्जीवाड़ा भी बढ़ेगा। सो इस बार ड्राई फ्रूट का चलन बढ़ा। चाकलेट बनाने वाली इंटरनेशनल एजेंसियों की भी चांदी। थोड़ा मीठा हो जाए। पर मिठाई से ज्यादा बात पटाखों की। अपन ने सालों साल शिवकाशी में पटाखे बनाते बच्चों को मरते देखा। विस्फोटों में हाथ-पैर उड़ते देखे। पटाखे हर साल न जाने कितनों का बचपन छीन रहे। सो समझदार लोगों ने पटाखों के खिलाफ मुहिम छेड़ी। जो अब परवान चढ़ने लगी। आपने बुलंदशहर में पटाखों की मंडी तो जलते देखी ही। दीवाली से एक दिन पहले ही बज गए सारे पटाखे।

तालिबान का एजेंडा पाक में अलकायदा सरकार का

Publsihed: 16.Oct.2009, 10:06

बुजुर्गोँ ने कहा था- जैसी करोगे, वैसी भरोगे। बुजुर्गों ने यह भी कहा था- जो बोया पेड़ बबूल का, तो आम कहां से होय। अब पाकिस्तान को करनी की भरनी का वक्त। तड़ातड़ बम फट रहे हैं पाक में। गुरुवार को पांच जगह बम फटे। तीन जगह तो सिर्फ लाहौर में ही। पेशावर और कोहाट में भी बम फटे। पहले अपन पेशावर की बात ही करें। निशाना कोई बड़ा आदमी नहीं था। मरा भी सिर्फ एक ही। वह भी एक मासूम बच्चा। नार्थ-वेस्ट फरंटियर प्रोविंस के सीएम के ड्राइवर का घर था। घर के ठीक सामने कार बम फटा। पेशावर के साथ ही लगता है कोहाट। जहां दस लोग मारे गए। कोहाट में इस्लामाबाद दोहराया गया। याद है- तीन साल पहले का आतंकी हमला। इस्लामाबाद के फाइव स्टार होटल में घुसा था विस्फोटक भरा ट्रक।

चुनाव की पूर्वसंध्या पर फूटा भ्रष्टाचार का बम

Publsihed: 13.Oct.2009, 08:19

तो आज तीन राज्यों में वोट पड़ेंगे। महाराष्ट्र, हरियाणा, अरुणाचल। हरियाणा में कांग्रेस का पलड़ा भारी। बहुमत पा ही जाएगी कांग्रेस। पर हुड्डा की बजाए शैलजा सीएम होंगी। इस खुलासे ने कांग्रेस के होश उड़ा दिए। यों सोनिया का इरादा यही था। अपन ने छह अक्तूबर को किया था खुलासा। हवा उड़ी थी तो जाटों में खलबली मची। जाट चौटाला की तरफ दौड़ने लगे। हुड्डा कैंप के तो होश फाख्ता हो गए। खुद हुड्डा ने सोनिया से अर्ज किया- 'चुनाव से पहले मेरे नाम का ऐलान न किया। तो जाट वोट बैंक खिसक जाएगा।' सो इतवार को सोनिया ने वक्त की नजाकत को पहचाना। हुड्डा के नाम का ऐलान कर दिया। सो अब हुड्डा कैंप में राहत। बात अरुणाचल की। तो कांग्रेस की सरकार वहां भी बनेगी। यों भी वहां जिसका केंद्र उसका राज्य की परंपरा।

कौन से सुरखाब के पर लगे होते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति को

Publsihed: 10.Oct.2009, 09:40

तो नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान हो गया। लाटरी निकली बाराक ओबामा के नाम। यों किसी भारतीय को मिलने की अपन को उम्मीद नहीं थी। जो अपन तिलमिलाएं। पांच-सात साल पहले जरूर वाजपेयी को मिलने की उम्मीद थी। पर अपनी उम्मीदों पर पानी फिरा। वैसे भी जब महात्मा गांधी को शांति पुरस्कार नहीं मिला। तो वाजपेयी क्या चीज। वाजपेयी को तो अब 'भारत रत्न' की भी उम्मीद नहीं। इंदिरा गांधी ने खुद ही 'भारत रत्न' ले लिया था। इस साल जब वाजपेयी को 'भारत रत्न' की मांग उठी। तो अपन को फिजूल की मांग लगी।

काबुल में अपन ही क्यों 'आतंकियों' का निशाना

Publsihed: 08.Oct.2009, 21:27

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल। काबुल में अपना दूतावास फिर बना आतंकियों का निशाना। आईएसआई का हाथ बताना अभी जल्दबाजी होगा। वरना पाकिस्तान फिर कहेगा- 'जांच से पहले पाक पर तोहमत की अपनी आदत।' पर काबुल में कोई और भारतीय दूतावास को निशाना बनाएगा ही क्यों। अपन तो 42 देशों की नाटो फोर्स में भी शामिल नहीं। जो अफगानिस्तान में तालिबान से लड़ रहीं। अपना रोल तो सिर्फ अफगानिस्तान के नव निर्माण का। सड़कों का निर्माण। अस्पतालों-स्कूलों-इमारतों का निर्माण। अपन आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई से सीधे नहीं जुडे। सीधा जुड़ा है पाकिस्तान। फिर बार-बार भारतीय दूतावास पर हमले क्यों। समझना मुश्किल नहीं। अफगानिस्तान में अपनी मौजूदगी से जली-भुनी बैठी है आईएसआई।

पाकिस्तान को लेकर उलझन में अपने मंत्री

Publsihed: 08.Oct.2009, 10:23

लोक दिखावे और असलियत का फर्क अब दिखने लगा। सताईस सितंबर को एसएम कृष्णा और कुरैशी की मुलाकात हुई। तो अपन को खबर दी गई- 'सख्त कार्रवाई के बिना बात नहीं।' पर कुरैशी ने बुधवार को इस्लामाबाद में कहा- 'सकारात्मक रुख दिखाई दिया।' अपन को पहले से ही आशंका थी। महाराष्ट्र का चुनाव हो जाने दीजिए। मनमोहन की याद धुंधली हो जाएगी। मुंबई का हमला महत्वहीन तो नहीं होगा। पर पाक से बातचीत में अड़चन भी नहीं होगा। अपन ने 23 सितंबर को लिखा था- 'महाराष्ट्र चुनाव के बाद मिलेंगे मनमोहन-गिलानी।' सो अब नवंबर के तीसरे हफ्ते की मुलाकात तय।