Edit Page

1971 की जंग जीतने का श्रेय किस ने लिया था.

Publsihed: 08.Oct.2016, 14:34

अजय सेतिया / सर्जिकल स्ट्राईक की घोषणा के तुरंत बाद कांग्रेस सदमे में थी. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तुरंत पार्टी के वरिष्ट नेताओ की बैठक बुला कर सलाह ली . सोनिया गांधी को सलाह दी गई थी कि सरकार के निर्देश पर सेना ने आप्रेशन किया है, इसलिए पार्टी के पास समर्थन करने के सिवा कोई विकल्प नहीं है. उसी शाम हुई सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस ने सरकार और फौज दोनो को बधाई दी. सिर्फ मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के सीता राम येचुरी ने कश्मीर समस्या हल करने और पाकिस्तान के साथ बातचीत करने की वकालत की थी. 

नेताजी सम्बंधी दस्तावेजो ने फिर फंसाया नेहरू को

Publsihed: 01.Oct.2016, 22:58

आजादी के लिए जंग लड रहे नेता जी सुभाष चंद्र बोस को भारत की जनता ने देश के लिए बेशुमार आभूषण दान दिए थे. नेता जी जब विमान में सवार हुए थे तो आभूषणो से भरे कई सूटकेस उन के पास थे. जवाहर लाल नेहरू ने विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने और उस में नेता जी के कथित तौर पर स्वर्गवासी होने की बात फैलाई थी. हालांकि देश की जनता इस कहानी को नही मानती,क्योंकि विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने तक की पुष्टि नहीं हुई थी. चलिए जवाहर लाल नेहरू की कहा मान भी ले तो वह आभूषण कहाँ हैं , जो 18400 केरेट के बताए जाते हैं.

पाक फौज़ और आतंकियो में गठबंधन

Publsihed: 30.Sep.2016, 23:03

अजय सेतिया / पाकिस्तान की सरकार थोडा ठंडी पडी है लेकिन फौज और आतंकवादी सक्रिय हो गए है. केबिनेट बैठक के बाद प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने शुक्रवार को कहा कि इस्लामाबाद क्षेत्र में शांति चाहता है, लेकिन ‘हम किसी को भी पाकिस्तान पर बुरी नजर रखने की अनुमति नहीं देंगे. दूसरी तरफ हाफिज़ सैयद ने भारत को धमकी देते हुए कहा है कि अब हम भारत को बताएंगे कि सर्जिकल स्ट्राईक क्या होता है. पाक फौज़ और आतंकवादियो के नए गठबंधन से नवाज शरीफ का तख्ता पलटने की आशंकाए बढ जाती है.

क्या सुषमा वह कहेगी, जो पावेल ने कहा था/ अजय सेतिया

Publsihed: 25.Sep.2016, 13:02

अब सब की निगाह विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के सोमवार रात को संयुक्त राष्ट्र के 71वें सत्र में होने वाले भाषण पर है. देश की जनता मोदी सरकार की ओर से अब तक उठाए गए कदमो से संतुष्ट नहीं है. दो चार दिन की चुप्पी के बाद मोमबत्तियो और अमन की आशा वाले सोशल मीडिया पर फिर सक्रिय हो गए हैं. जिस से भारत की छवि सोफ्ट स्टेट की बनती जा रही है. यह ठीक है कि दस साल के यूपीए शाषण के दौरान भारतीय सेना की हालत करीब करीब 1962 जैसी हो गई है, तब सेना गोला बारूद से खाली हाथ ही थी.

संवैधानिक ब्रेकडाउन और राजनीतिक अनाडीपन

Publsihed: 10.May.2016, 09:30

उत्तराखंड विधानसभा का नतीजा उम्मीद के मुताबिक ही है. स्पीकर ने भाजपा के विधायक भीम लाल आर्य को बर्खास्त नहीं कर के भाजपा का एक वोट हरीश रावत के लिए सुरक्षित कर लिया था. इस लिए भाजपा 28 से 27 हो गई, लेकिन कांग्रेस की रेखा आर्य ने भाजपा के साथ वोट कर के भाजपा के वोट फिर 28 कर दिए. बाकी 62 में से 34 वोट हरीश रावत के पक्ष में गए.....यानि स्पीकर ने 9 कांग्रेसी विधायकों को निलंबित न किया होता तो हरीश रावत के पक्ष में 34 और उन के विपक्ष में 37 विधायक होते.

अटार्नी जनरल संवैधानिक ब्रेकडाउन समझाने में फेल

Publsihed: 06.May.2016, 09:30

नैनीताल हाईकोर्ट ने जब उत्तराखंड में राष्ट्रपति राज की अधिसूचना रद्द करते हुए विधानसभा और सरकार को बहाल कर दिया था तो सुब्रह्मणयम स्वामी ने कहा था कि अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी को इस्तीफा देना चाहिए. अब सुप्रीम कोर्ट भी उसी दिशा में आगे बढ रहा है तो अटार्नी जनरल की योग्यता पर सवाल खडा होता है. उत्तराखंड विधानसभा को केंद्रीय मंत्रीमंडल ने संवैधानिक ब्रेकडाउन का मुद्दा बना कर निलंबित और सरकार को बर्खास्त किया था. अटार्नी जनरल दोनो अदालतों में सरकार का यह पक्ष तर्कपूर्ण ढंग से नहीं रख पाए.

क्या सुप्रीमकोर्ट में संवैधानिक ब्रेकडाऊन आधार बनेगा

Publsihed: 22.Apr.2016, 09:30

सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी जिसमे उत्तराखंड के राष्ट्रपति राज की अधिसूचना को रद्द कर के 29 अप्रैल को विधानसभा में बहुमत का फैसला करने के आदेश जारी किए थे.स्टे अंतरिम है , उस पर आगे सुनवाई 27 अप्रेल को होगी. अब 9 विधायकों ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है कि जब तक उन की सदस्यता का फैसला नहीं होता उन्हे 29 अप्रेल को वोट का अधिकार दिया जाए. हाई कोर्ट ने कह दिया था कि मतविभाजन के समय विधानसभा में विधायकों की स्थिति वह रहेगी, जो 27 मार्च को थी.

गुम होते बच्चों की फिक्र किसे है

Publsihed: 13.Dec.2011, 20:30

जनसत्ता 14 दिसंबर, 2011:  पिछले दिनों दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में एक अत्यंत गंभीर विषय पर चर्चा हुई। विषय था, देश में बच्चों के अपहरण की बढ़ रही घटनाएं। विषय की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बच्चों के अपहरण पर शोध आधारित पुस्तक का विमोचन करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अल्तमस कबीर खुद मौजूद थे। इस गंभीर समस्या का सनसनीखेज खुलासा 1996 में हुआ था, जब यूनिसेफ ने भारत में बच्चों के देह-शोषण पर एक रिपोर्ट जारी की थी। बी भामती की इस रिपोर्ट में बच्चों के अपहरण का देह व्यापार से सीधा संबंध बताया गया था। इसके बाद 2003-04 में राष्ट्रीय मानवाध

संसद की अनदेखी

Publsihed: 02.Dec.2011, 00:06

जनसत्ता, 1 दिसंबर, 2011 : वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने चौबीस नवंबर को उपभोक्ता क्षेत्र में विदेशी निवेश संबंधी मंत्रिमंडल के फैसले का एलान किया। उन्होंने कहा कि जनता ने यूपीए को बहुमत दिया है, इसलिए उन्हें फैसले करने का अधिकार है। अगर संविधान में ऐसा होता तो संसद की जरूरत ही क्या थी। अमेरिका की तरह यहां प्रधानमंत्री का सीधा चुनाव नहीं होता। सरकार अपने फैसलों के लिए संसद के प्रति उत्तरदायी है और उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का भी प्रावधान है। रहा चुनाव में बहुमत का सवाल, तो वह भी जनता ने न कांग्रेस को दिया न यूपीए को।

जांच की सियासत

Publsihed: 21.Nov.2011, 20:30

जनसत्ता, 22 नवंबर, 2011 : राजनीतिक गलियारों में लोग कहते सुने जाते हैं, राज तो कांग्रेस को ही करना आता है। कौन-सी चाल कब चलनी है, इस मामले में बाकी सब अनाड़ी हैं। मायावती चाहे लाख बार सवाल उठाती रहें कि जयराम रमेश की चिट्ठियां और गुलाम नबी आजाद के आरोपों की बाढ़ चुनावों के वक्त ही क्यों। भारतीय जनता पार्टी भी चाहे जितने आरोप लगाए कि राजग कार्यकाल के स्पेक्ट्रम आबंटन पर एफआईआर सीबीआई का बेजा इस्तेमाल है, पर यह कांग्रेस को ही आता है कि लालकृष्ण आडवाणी की भ्रष्टाचार विरोधी रथयात्रा के समापन आयोजन की हवा कैसे निकालनी है। आडवाणी की भ्रष्टाचार विरोधी रैली और संसद के शीत सत्र से