Current Analysis

Earlier known as राजनीति this column has been re-christened as हाल फिलहाल.

बजरंग दल भाजपा के रास्ते का कांटा

Publsihed: 06.Oct.2008, 03:36

कांग्रेसी नेताओं ने दिल्ली की मुठभेड़ पर सवाल उठाकर आतंकवादियों के तुष्टिकरण का रास्ता अपना लिया है, तो भाजपा बजरंग दल की हरकतों पर मौन है। ईसाईयों की हिंदुत्व विरोधी हरकतें बजरंग दल को हिंसा करने की इजाजत तो नहीं देती।

भारतीय जनता पार्टी ने आतंकवाद और महंगाई को अपना चुनावी मुद्दा बना लिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडालीसा राइस की लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात के बाद एटमी करार का विरोध भाजपा का मुख्य एजेंडा नहीं रहेगा। ऐसा लगता है कि कोंडालीसा राइस ने आडवाणी से मुलाकात कांग्रेस के आग्रह पर की है। कांग्रेस एटमी करार के चुनावी मुद्दा बनने से भयभीत है,

देश के साथ विश्वासघात

Publsihed: 27.Sep.2008, 22:10

एटमी करार से देश का परमाणु शक्तिसंपन्न होने और सुरक्षा परिषद सीट का दावा हमेशा-हमेशा के लिए खत्म हो गया। मनमोहन सिंह एटमी ऊर्जा के लिए देश की सुरक्षा को गिरवी रखने के साथ-साथ आतंकवाद के लिए देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी याद किए जाएंगे।

एटमी करार के कारण भारत-अमेरिका के रिश्तों में व्यापक बदलाव आ रहा है। पाकिस्तान में भी निजाम बदलने से अमेरिका के साथ उसके रिश्तों में बदलाव आ रहा है। परवेज मुशर्रफ के परिदृश्य से हटने को अलकायदा अपनी जीत मान रहा है।

धर्मांतरण के अधिकार से उपजा टकराव

Publsihed: 22.Sep.2008, 05:31

कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश में चर्च के खिलाफ आक्रोश हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आई नई किताब 'सत्यदर्शनी' के कारण फैला। धर्म प्रचार के अधिकार का इस्तेमाल दूसरे धर्म के खिलाफ विषवमन के लिए नहीं होना चाहिए।

उड़ीसा में स्वामी लक्ष्मणानंद की हत्या के बाद उग्र हिंदू संगठनों ने ईसाईयों के खिलाफ जगह-जगह पर हिंसक वारदातें की। हिंसा में जानमाल की भारी हानि हुई। उड़ीसा की आग अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि कर्नाटक में हिंसक वारदातें शुरू हो गईं। कर्नाटक के बाद केरल और मध्यप्रदेश में भी हिंदुओं का गुस्सा ईसाईयों के खिलाफ फूट पड़ा।

भाजपा में मुद्दों पर भटकाव

Publsihed: 14.Sep.2008, 02:25

एटमी करार को लेकर भाजपा गंभीर दुविधा में फंसी है। नए खुलासों ने तेवर कड़े करने पर मजबूर तो किया, लेकिन चुनावी मुद्दे में शामिल नहीं हुआ करार विरोध। भाजपा फिलहाल देखो और इंतजार करो के मूड में।

अमेरिकी कांग्रेस से भारतीय एटमी करार को मंजूरी मिलने से ठीक पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह उस गंभीर मुश्किल में फंस गए हैं, जो एक दिन आनी ही थी। मनमोहन सिंह तो इस वास्तविकता को जानते ही थे कि एटमी करार के बाद परमाणु विस्फोट नहीं कर सकेगा। वह इस बात को भी अच्छी तरह जानते थे कि अमेरिकी परमाणु ऊर्जा ईंधन कानून के मुताबिक भारत को बिना एनपीटी पर दस्तखत किए ईंधन सप्लाई की गारंटी नहीं मिल सकती।

अमेरिकी चुनाव का असली मुद्दा अर्थव्यवस्था

Publsihed: 07.Sep.2008, 20:39

शुरू में ऐसा लगता था कि बुश प्रशासन के समय अफगानिस्तान और इराक युध्द ही चुनावी मुद्दा बनेगा। अब जबकि चुनाव का दूसरा दौर शुरू हो गया है, तो अर्थव्यवस्था प्रमुख मुद्दा बनकर उभर आया है। अब देखना यह है कि अमेरिकी वोटर बेहतर अर्थव्यवस्था के लिए जोहन मैककेन पर भरोसा करेगी या बराक ओबामा पर।

अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव अब दूसरे दौर में पहुंच गया है। पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार बराक ओबामा के मुकाबले जोहन मैककेन मौजूदा राष्ट्रपति जार्ज बुश की रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार घोषित हो चुके हैं।

पाक कुएं से निकल कर खाई की ओर

Publsihed: 31.Aug.2008, 20:39

बेनजीर भुट्टो के पति आसिफ अली जरदारी ने जब युसुफ रजा गिलानी को प्रधानमंत्री पद के लिए पीपीपी के उम्मीदवार के तौर पर चुना था तो पाकिस्तान में उन्हें मिस्टर सोनिया गांधी कहा गया। सोनिया गांधी के बारे में भारत और बाहर यह धारणा बनी हुई है कि उन्होंने प्रधानमंत्री पद की कुर्सी ठुकरा कर मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया था। आज यह मुद्दा नहीं है कि उस समय के राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और सोनिया गांधी के बीच क्या बात हुई थी।

संसदीय समिति ऐसी जांच में सक्षम नहीं

Publsihed: 24.Aug.2008, 20:39

सांसदों की खरीद-फरोख्त के मामले में जांच समिति का काम करीब-करीब पूरा हो गया है। कार्यकाल बढ़ाया नहीं गया, तो इस हफ्ते रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी भी यह मानकर चल रहे हैं कि रिपोर्ट इस हफ्ते आ जाएगी। इसलिए उन्होंने चार सितंबर को संसद की गिरती साख पर गोलमेज कांफ्रेंस बुलाने का फैसला किया है। सोमनाथ चटर्जी को एक कड़े स्पीकर के तौर पर याद किया जाएगा।

गठबंधनों पर ही निर्भर होगी चुनावी बिसात

Publsihed: 18.Aug.2008, 06:10

लाल किले के प्राचीर से मनमोहन सिंह का आखिरी भाषण लाचार प्रधानमंत्री की तरह हुआ। एक ऐसा लाचार प्रधानमंत्री जो महंगाई से लेकर आतंकवाद की समस्या तक से जूझ रहा है। इसके बावजूद सोनिया गांधी अगर उन्हीं को सामने रखकर चुनावी दंगल में कूदने का मन बना रही हैं तो कांग्रेस भारी रिस्क लेगी। लालकिले से भाषण देते समय मनमोहन सिंह के चेहरे पर जीत के कोई हाव-भाव नहीं थे।

संसदीय जांच समिति का संकट

Publsihed: 10.Aug.2008, 20:39

दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में आजकल हर्षद मेहता की चर्चा है। हर्षद मेहता ने 1990-91 में पांच हजार करोड़ का शेयर घोटाला करके पूरी दुनिया को चौँका दिया था। उन्होंने इससे भी ज्यादा तब चौंकाया था जब कहा कि उन्होंने नरसिंह राव को एक करोड़ रुपए की रिश्वत से उनका मुंह बंद किया था। हर्षद मेहता ने चार नवंबर 1991 को खुद प्रधानमंत्री आवास जाकर नोटों से भरे दो सूटकेस देने की बात कही थी।

दक्षेस ही नहीं, अमेरिका भी आईएसआई से परेशान

Publsihed: 03.Aug.2008, 08:43

दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन के गठन के समय ही तय हो गया था कि इस मंच से द्विपक्षीय मसले नहीं उठाए जाएंगे। अलबत्ता शिखर सम्मेलन के समय द्विपक्षीय बातचीत में आपसी मसले उठाए जा सकते हैं। इसलिए इस बात की कोई गुंजाइश ही नहीं थी कि भारत दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क-दक्षेस) के मंच से आतंकवाद के मुद्दे पर कोई दोषारोपण करेगा। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत और अफगानिस्तान की आतंकवादी वारदातों में आईएसआई की भूमिका पर अपनी बात पाक के प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी से सीधी बातचीत में उठाना ही उचित समझा।