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Exclusive Articles written by Ajay Setia

करार पर किरकिरी होगा पूर्ण जनादेश का एजेंडा

Publsihed: 24.Oct.2007, 05:07

एटमी करार पर यूपीए-लेफ्ट चख-चख अब आखिरी दौर में। अपने मनमोहन तो उम्मीद छोड़ चुके। भले ही अमेरिका ने अभी भी उम्मीद नहीं छोड़ी। मंगलवार को व्हाइट हाऊस के प्रवक्ता टोनी फ्रेटो बोले- 'अभी से निराशा जाहिर करना जल्दबाजी होगा।' अब अपन को नहीं पता। मनमोहन ने पंद्रह अक्टूबर को बुश से क्या कहा। पृथ्वीराज चव्हाण बता रहे थे- 'एटमी करार पर बात नहीं हुई।' तो नाइजीरिया में संजय बारू ने जो  बताया था। वह क्या था? चव्हाण ने मुंह फेर लिया। हू-ब-हू यही बात अमेरिका में भी हुई। टोनी फ्रेटो बोले- 'बुश-मनमोहन बात की सही-सही जानकारी मुझे नहीं।' पर बात मनमोहन के निराश होने की।

मनमोहन का अमेरिका से इमोशनल रिश्ता ?

Publsihed: 23.Oct.2007, 04:25

अपन कुत्ते-बिल्ली का खेल कहें। तो कोई बुरा मान लेगा। सो अपन इसे कछुए और खरगोश की दौड़ कहेंगे। कभी कछुआ आगे, कभी खरगोश। कभी मनमोहन आगे, कभी प्रकाश करात। कौन कछुआ, कौन खरगोश। अपन यह भी नहीं जानते। पर यह चिख-चिख अब बहुत बेढंगी हो गई। कानों को नहीं सुहाती। कभी करात की धमकी। कभी एबी वर्धन की। तो कभी मोहलत बढ़ाना। कभी मनमोहन का चुनौती देना। तो कभी वापस लेना। पता नहीं यह नौटंकी कब तक चलेगी। पहले कहा था- 'पांच अक्टूबर को आर या पार होगा।' फिर कहा- 'नौ अक्टूबर को इधर या उधर होगा।' फिर कहा- 'दुर्गा पूजा-दशहरे के बाद।' रावण दहन के बाद का नाम सुन यूपीए बेहद डर गया।

तालिबान-आईएसआई गठजोड़ बुश पर भारी

Publsihed: 20.Oct.2007, 10:21

अपन ने कल जब लिखा- 'मुशर्रफ अब एलानिया अमेरिकी एजेंट। पाक में कोई साख नहीं। सो जो मुशर्रफ से सौदा करे। वह भी अमेरिकी एजेंट। बेनजीर की वापसी से ठीक पहले तालिबान ने धमकी दी।'  तो अपनी आशंका साफ थी- हो, न हो तालिबानी फिदायिन हमला जरूर करेंगे। तालिबानी बेतुल्ला महमूद ने कह दिया था- 'बेनजीर का स्वागत फिदायिन करेंगे।' आखिर बेनजीर के काफिले पर फिदायिन हमला हो ही गया। अपन को रायसिना रोड का वह मंजर याद आया।

बुश ने बनाया बेनजीर को मुशर्रफ की ढाल

Publsihed: 19.Oct.2007, 07:46

बेनजीर भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसी। तो अदालती फैसले से ठीक पहले इंग्लैंड भाग गई। बेचारे पति आसिफ अली जरदारी ने जेल की हवा खाई। बेनजीर दुबई-इंग्लैंड में दुबकी रही। हां, जरदारी के लिए दुआ करने अजमेर शरीफ जरूर आई। यों भी बेनजीर का अपने राजस्थान से गहरा रिश्ता। पर पहले आठ साल बाद लौटने पर कराची में हुए स्वागत की बात। अपनी बेटी के स्वागत में सारा शहर सड़कों पर आ गया। बेनजीर पहले उसी जिन्ना की मजार पर गई। जहां जाकर अपने आडवाणी संघ परिवार में अछूत हो गए थे। आडवाणी-बेनजीर दोनों सिंधी। अब राजस्थानी रिश्ते की बात। बेनजीर के दादा थे जूनागढ़ के वजीर-ए-आजम सर शाहनवाज भुट्टो। शाहनवाज की दूसरी पत्नी रतन बाई अपने जोधपुर की थी।

मार्केट सुधारने पर जोर राष्ट्रीय सुरक्षा दांव पर

Publsihed: 18.Oct.2007, 10:30

शेयर बाजार को अपन ज्यादा नहीं जानते। अलबत्ता जानते ही नहीं। सो अपन कभी इस पचड़े में नहीं पड़े। पर जब कभी शेयर बाजार ने भूचाल मचाया। अपन को भी क-ख-ग समझना पड़ा। वाजपेयी के वक्त तब सिर्फ एक बार बवाल मचा। जब सिंगापुर रूट से मार्केट में उछाल आया। यशवंत सिन्हा की बेटी सिंगापुर में थी। सो संसद में ऊंगली सिन्हा पर उठी।

करार टला, सरकार पर खतरा नहीं

Publsihed: 17.Oct.2007, 09:31

तीन अगस्त को वन-टू-थ्री का ड्राफ्ट जारी हुआ। तो उसके बाद अपन बार-बार लिखते रहे- लेफ्ट सिर्फ न्यूक-डील पर सरकार नहीं गिराएगा। साथ में आर्थिक मुद्दे भी जोड़ेगा। अब जब एटमी करार ठंडे बस्ते में पड़ गया। तो कांग्रेस खेमे में भले ही मातम। लेफ्ट में किला फतेह होने पर कोई खुशी नहीं। असल में लेफ्ट को अभी भी कांग्रेस की नियत पर शक। सो लेफ्ट ने मंगलवार को जो नए तेवर दिखाए। उनका जिक्र अपन बाद में करेंगे। पहले अमेरिका में छाए मातम की बात कर लें। करार ठंडे बस्ते में पड़ने से बुश बेहद खफा।

अपने मंत्री रूस की ओर, सोनिया चीन की तरफ

Publsihed: 16.Oct.2007, 14:44

अपन ने यहीं पर बारह अक्टूबर को वह ब्रेकिंग न्यूज दी। जिसमें अपन ने लिखा- 'आईएईए-एनएसजी समझौते तीन महीने ठंडे बस्ते में पड़ेंगे।' जब आप लोग यह पढ़ चुके। तो उसी दिन मनमोहन-सोनिया के एचटी सम्मेलन में भाषण का लब्बोलुआब था- 'सरकार वक्त से पहले गिराने का इरादा नहीं। एटमी करार भले ही ठंडे बस्ते में पड़े।' यही अपन ने तेरह अक्टूबर को लिखा।

ताजा अक्ल, करार पर चुनाव अक्लमंदी नहीं

Publsihed: 13.Oct.2007, 12:32

मिड टर्म चुनाव हुए। तो बीस महीने पहले देश पर तीन सौ करोड़ का बोझ। यह तो सरकारी खर्च। कोई दस गुना राजनीतिक दलों का खर्च समझ लो। देश पर सवा तीन हजार करोड़ का बोझ पड़ेगा। तो महंगाई का अंदाजा लगा लो। वैसे भी महंगाई और कांग्रेस का चोली-दामन का साथ। आजकल प्याज से सेब सस्ता। सो इस महंगाई में चुनाव जितने दिन टलें। उतना अच्छा। गुरुवार को लालू-पवार ने चुनाव टलने की बात कही। तो शुक्र को खुद सोनिया-मनमोहन ने चुनाव से तौबा की। वैसे अपन को बजट के बाद अब भी चुनाव का अंदेशा।

तो रूस से एटमी करार तोड़ेगा लेफ्ट से गतिरोध

Publsihed: 12.Oct.2007, 13:47

मनमोहन-अल बरदई गुफ्तगू हो गई। डेढ़ घंटा सिर्फ खाना तो नहीं खाया होगा। या सौफे पर बैठे भारत-आस्टे्रलिया मैच तो नहीं देख रहे होंगे। जरूर रिएक्टरों की निगरानी पर बतियाए होंगे। पर लेफ्ट को क्यों बताएं। लेफ्ट ने पहले ही कह दिया था- 'बात की तो देख लेंगे।' बुधवार को प्रणव-बरदई मुलाकात हुई। तो बताया गया- 'सिर्फ एटमी ऊर्जा की जरूरत पर बात हुई। रिएक्टरों की निगरानी पर नहीं।' यों यूएन की इंटरनेशनल एटमी एनर्जी एजेंसी के प्रमुख बरदई कोई अमेरिकी एजेंट नहीं।

मिड टर्म से पहले राहुल का टर्मिनल

Publsihed: 11.Oct.2007, 13:47

अपन ने सितंबर में लिखा- 'यूपीए सरकार चार महीनों की मेहमान।' मंगलवार को यूपीए-लेफ्ट में युध्द विराम की नौटंकी ही हुई। युध्द विराम नहीं। यों तो लेफ्टिए धर्म-कर्म के विरोधी। पर दुर्गापूजा पर वोटरों को लुभाने में विघ्न न पड़े। सो दशहरे तक की मोहलत दी। अपने मुख्तार अब्बास नकवी की नजर में तो यह युध्द विराम में कमर्शियल ब्रेक। जो दोनों ने अपना कमर्शियल फायदा देखकर लगाई। तब तक कांग्रेसी हुकमरान अल बरदई से बतिया लेंगे।