पर येदुरप्पा की बात क्यों माने कांग्रेस

वेंकटरमण आखिरी दिनों में कांग्रेसी नहीं थे। कांग्रेस के विरोधी भी हो गए थे। तमिलनाडु में जयेंद्र सरस्वती की गिरफ्तारी हुई। तो वेंकटरमण बीजेपी के साथ सड़क पर उतरे थे। मंगलवार को वेंकटरमण का देहांत हो गया। इस बार के गणतंत्र दिवस पर सूर्यग्रहण था। उसका असर तो दो दिन पहले से दिखने लगा। तो एक दिन बाद भी दिखाई दिया। अपने पीएम मनमोहन की बाईपास सूर्यग्रहण से पहले कराना पड़ा। नतीजतन पहली बार अपना पीएम गणतंत्र दिवस समारोह में नहीं था। अब वेंकटरमण के देहांत का असर। बीटिंग रिट्रीट भी पहली बार रद्द हुआ। पर शोक के माहौल में भी राजनीति ठंडी नहीं पड़ती। बीजेपी-कांग्रेस में आरोपबाजी का खेल जारी रहा। अभिषेक मनु सिंघवी ने मंगलूर पर भड़ास निकाली। तो बीजेपी ने कांग्रेस के आरएसएस फोबिया पर। पहले बात सिंघवी की। बोले- 'जहां-जहां बीजेपी का राज। वहां-वहां कट्टरपंथियों के हौंसले बुलंद। ये सभी कट्टरपंथी एक दिन बीजेपी को खा जाएंगे।' अपन काफी हद तक सिंघवी से सहमत। पर बात येदुरप्पा की हो। तो बता दें। उनने सितंबर 2008 में भी फौरी कार्रवाई की थी। अब भी फौरी कार्रवाई की। अढ़तालीस घंटों में 19 लोग पकड़े जा चुके थे। बाकियों की तलाश जारी। अपने राजनाथ सिंह मंगलवार को मैसूर के पास थे। प्रोग्राम महीनेभर पहले से तय था। सो बेंगलुरु में प्रेस कांफ्रेंस भी हुई। उनने भी मंगलूर की वारदात को गुंडागर्दी कहा। पर कांग्रेस को संतोष कहां। संघ परिवार पर आरोप लगाने से बाज नहीं आए। बेंगलुरु में वीरप्पा मोइली बोले। तो दिल्ली में अपने अभिषेक महाशय। बात अभिषेक की। बोले- 'सभी संघ परिवारी। नाम बदल-बदलकर आतंक फैलाते हैं।' प्रणव दा ने यही बात लश्कर-ए-तोयबा के लिए कही थी। कांग्रेस संघ और लश्कर में फर्क नहीं समझती। अब कांग्रेस गुंडागर्दी करने वालों को संघ परिवारी नहीं कहे। तो क्या खाक राजनीति करेगी। पर बात उस रेव पार्टी की। जिस पर श्रीराम सेना ने हमला किया। ताकि सनद रहे, सो बता दें। समुद्र किनारे बसे मंगलूर के घर-घर में बनती है 'वाइन'। सो पीना-पिलाना मंगलूर में नई बात नहीं। पर 'पब' में सिर्फ पीना-पिलाना नहीं होता। अलबत्ता 'पबों' में 'ड्रग्स' का शिकार हो रहे यूथ। सत्रहवीं शताब्दी में टिपू सुल्तान समुद्र के रास्ते घुसा था मंगलूर में। उसने मैसूर पर राज यों ही नहीं किया। उससे पहले आठ हजार से ज्यादा मंदिर तोड़े। लाखों हिंदुओं का धर्म परिवर्तन किया। अब उसी मंगलूर पर समुद्र के रास्ते ड्रग्स का हमला। सैकडों यूथ हो रहे नशेड़ी। जिस ड्रग्स के खिलाफ संयुक्तराष्ट्र। जिस ड्रग्स के खिलाफ अपने भी कड़े कानून। पर उसे कानून ही आंखों से पट्टी हटाकर देखे, तो ठीक। अब लगते हाथों बात गुंडागर्दी वाली श्रीराम सेना की। प्रमोद मुतालिक कभी बजरंगदली था। पर छह साल पहले अलग हो गया। कुछ ज्यादा ही कट्टवादी था। बालठाकरे की शिवसेना में चला गया। शिवसेना की कर्नाटक ब्रांच का हेड हो गया। शिवसेना के एक प्रोग्राम में कर्नाटक रक्षण वेदिका ने हमला बोला। तो मुतालिक के होश ठिकाने आ गए। बता दें- कर्नाटक-महाराष्ट्र में जमीन का झगड़ा पुराना। अब कोई कन्नड़ शिवसेना की ब्रांच खोले। तो कन्नड़ कैसे बर्दाश्त करते। यह बात प्रमोद मुतालिक की समझ में आई। तो उनने 'राष्ट्रीय हिंदू सेना' बना ली। उसकी राज ठाकरे जैसी हुड़दंगी शाखा खोली- 'श्रीरामसेना'। श्रीरामसेना के हुड़दंगियों ने शनिवार को पब पर हमला बोला। तो कांग्रेस, लेफ्ट, यूपीए सबके निशाने पर संघ परिवार। अब जब गांधी की हत्या पर इन सबने झूठ बोलना नहीं छोड़ा। तो श्रीरामसेना पर तो किसी आयोग की रपट भी नहीं आई। येदुरप्पा कह रहे थे- 'ईमानदारी से कह रहा हूं। श्रीरामसेना का संघ परिवार से कुछ लेना-देना नहीं।' पर जब कांग्रेस ने गांधी हत्याकांड पर किसी आयोग की रपट नहीं मानी। तो येदुरप्पा की बात क्यों माने कांग्रेस।

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