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Exclusive Articles written by Ajay Setia

बीजेपी को नहीं पची हत्या की नक्सली थ्योरी

Publsihed: 28.Aug.2008, 20:37

राजनीति नेता से क्या-क्या नहीं करवाती। अपने मनमोहन सिंह को ही देखो। जब तक सोनिया को लेकर बिहार की बाढ़ का हवाई सर्वे नहीं किया। तब तक लोग डूबते-मरते, भूख से बिलबिलाते रहे। केंद्र से राहत नहीं भेजी। सोनिया-लालू-पासवान समेत शिव की बारात लेकर बिहार गए। तब राहत राशि का मुंह खोला। राजनीति जम्मू में भी कम नहीं हुई। कंधमाल में भी कम नहीं हो रही।

नक्सली-चर्च गठजोड़ तो और खतरनाक होगा

Publsihed: 27.Aug.2008, 20:40

उड़ीसा का कंधमाल इलाका। जहां आजकल हिंदू-ईसाई सांप्रदायिक तनाव। अपन को 22 जनवरी 1999 की याद आ गई। तब ईसाई मिशनरी ग्राहिम स्टेन्स की हत्या हुई थी। स्टेन्स अपने दो बेटों के साथ कार में सो रहे थे। तीनों को जिंदा जला दिया गया। तब अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था- 'स्टेन्स के हत्यारों को माफ नहीं किया जाएगा।' अब अस्सी साल के स्वामी लक्ष्मणानंद की हू-ब-हू वैसे ही हत्या हुई।

टीडीपी के बाद अब तिरुपति से प्रजाराज्यम्

Publsihed: 27.Aug.2008, 06:20

तिरुपति की ठीक वही जगह। जहां मार्च 1982 में नंदमूरि तारक रामाराव ने टीडीपी बनाई थी। यानी एनटीआर की तेलुगूदेशम पार्टी। छब्बीस साल बाद उसी तिरुपति में अब प्रजाराज्यम्। एक और फिल्मी हस्ती चिरंजीवी का नया राजनीतिक दल। फर्क सिर्फ इतनाभर। एनटीआर ने मुअजिज लोगों का महानाडु बुलाया था। पर चिरंजीवी ने लाखों लोगों की रैली कर डाली। लाखों लोगों का हुजूम अपन ने ठीक इसी जगह 1992 में देखा था।

कश्मीर के हालात नेहरू की गलतियों का नतीजा

Publsihed: 25.Aug.2008, 20:39

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी बेहद खफा दिखे। खफा दिखे- बीजेपी ने उन्हें आतंकियों का चीयर्स लीडर क्यों कहा। इसका जवाब अरुण जेटली ने बाखूबी दिया। वह बोले- 'मुस्लिम तुष्टिकरण अब पुरानी बात हो गई। कांग्रेस अब अलगाववादियों-आतंकवादियों का तुष्टिकरण करने लगी।' यह बात अपन ने तेईस अगस्त को लिखी ही थी।

प्याज खाकर जूते खाने वाली बात न हो जाए

Publsihed: 22.Aug.2008, 20:40

अपन ने कल कांग्रेस के चार संकटों का जिक्र किया। जम्मू, स्टिंग, शिबू और एनएसजी। आज उन चारों की आगे पड़ताल। हुआ वही, जो अपन को शुरू से लगता था। एनएसजी ने एटमी ऊर्जा ईंधन व्यापार की छूट नहीं दी। पहली अगस्त को जब आईएईए ने करार पर मुहर लगाई। तब अपन ने लिखा था- 'रुकावटें अभी खत्म नहीं हुई। एनएसजी की शर्तें तो अपन की हालत ईरान जैसी बना देगी।'

कांग्रेस के चार संकट,जम्मू, स्टिंग, शिबू और एनएसजी

Publsihed: 22.Aug.2008, 06:26

यूपीए सरकार की एक मुसीबत हो तो बताएं। आखिरी दिनों में कुकरमुत्तों की तरह उग आई मुसीबतें। आखिरी दिनों की मुसीबत कितनी भारी पड़ती है। यह बीजेपी से बेहतर कोई नहीं जानता। आखिरी महीने में प्याज के भाव ने दिल्ली में बीजेपी के आंसू निकाले। यों कांग्रेस की मुसीबतें तो सारी खुद की खड़ी की हुई।

एनएसजी को फच्चर फंसाने का मौका दिया इराक ने

Publsihed: 21.Aug.2008, 06:08

एटमी करार के लिए अपने मनमोहन ने कितने पापड़ बेले। लेफ्ट की बैसाखी छोड़ मुलायम का सहारा लिया। वह भी कम पडा। तो सांसदों की खरीद-फरोख्त का कलंक माथे लगाया। आज उसी करार का इम्तिहान विएना में होगा। एनएसजी के पैंतालीस देश जांच पड़ताल करेंगे। एनएसजी की हरी झंडी मिली। तभी करार अमरीकी कांग्रेस में मंजूरी के लिए जाएगा। एनएसजी का फच्चर फंसा। तो समझो करार का राम नाम सत्य।

मुशर्रफ का फच्चर निकला तो अब इफ्तिकार चौधरी

Publsihed: 20.Aug.2008, 06:16

पाकिस्तान से चार खबरें चौंकाने वाली आई। पहली- अपनी अरुंधति राय ने कहा है- 'कश्मीरियों को भारत से आजादी चाहिए।' एपीपी ने यह खबर एक इंटरव्यू के हवाले से दी। अरुंधति राय को बहुतेरे लोग इज्जत की नजर से देखते होंगे। अपन पहले भी नहीं देखते थे। पंचमड़ी में जंगलात की जमीन पर कब्जे ने अपना मन खट्टा कर दिया था। अब तो उनने देशद्रोह का काम किया।

तो मुशर्रफ जुगाड़ नहीं कर पाए एबस्टेन का

Publsihed: 19.Aug.2008, 07:10

परवेज मुशर्रफ को जाना पड़ा। जाना नहीं चाहते थे। भले ही उनने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा- 'महाभियोग में मैं हारूं, या जीतूं। हार देश की होती। तो मैं इस्तीफा दे रहा हूं।' परवेज मुशर्रफ भले ही अब कुछ कहें। कितना ही जम्हूरियत प्रेमी होने का दावा करें। पर असलियत किसी से छिपी नहीं। मुशर्रफ की नीयत में शुरू से खोट था। नीयत में खोट न होता। तो भंग हो रही असेंबलियों से खुद को न चुनवाते।

अपनी जम्हूरियत और उनकी जम्हूरियत का फर्क

Publsihed: 15.Aug.2008, 06:08

यों अपन आज बात करेंगे जश्न-ए-आजादी की। फिर भी शुरूआत मनमोहन सिंह को एक और बधाई से कर दें। अबके महंगाई के नए रिकार्ड पर बधाई। तीन महीने पहले मुद्रास्फीति सात फीसदी हुई। तब अखबारों में बैनर छपे थे- 'महंगाई सातवें आसमान पर।' अब 12.44 फीसदी होकर महंगाई तेरहवें आसमान पर। पर लीड भी नहीं छपती। अपन महंगाई के इतने अभ्यस्त हो गए। मनमोहन-चिदंबरम को इसीलिए महंगाई की फिक्र नहीं। सो सोलह साल का रिकार्ड तोड़ने पर दोनों को बधाई। सोलह साल पहले मनमोहन सिंह वित्त मंत्री बने थे। तो यह रिकार्ड बनाया था। जिसकी बराबरी आज फिर से कर ली है। अपन बाजार से जो सब्जी बीस रुपए की लाते थे। अब पचास रुपए में भी नहीं आ