कांग्रेस को धोकर रख दिया प्रणब दा ने

Publsihed: 14.Jun.2018, 09:46

अजय सेतिया / प्रणब मुखर्जी के भाषण की समीक्षा होना अभी बाकी है | अपन कांग्रेस प्रवक्ता सुरजेवाला की तरह तुरत फुरत टिप्पणी नहीं कर सके | अलबता अपन करना ही नहीं चाहते थे | प्रणब दा को समझना इतना आसान भी नहीं है | सो अपन ने धीरज धरा | अभी तक एक एक शब्द की समीक्षा हो रही है | संघ ने बड़ा डाव खेला था , यह तो सोनिया गांधी को भी पता था | इसी लिए तो कांग्रेस के तीस नेताओं से बया जारी करवाया था | प्रणब दा की बेटी को काम पर लगा दिया था | शायद यह पहली बार हुआ , जो आख़िरी भाषण मेहमान का हुआ | वरना संघ की परम्परा आख़िरी भाषण सरसंघ चालक के भाषण की ही रही है | यह स्क्रिप्ट लिखी लिखाई थी | प्रणब दा कांग्रेस को चोट करने के इरादे से ही संघ के मंच पर गए | इस से पहले अपनी किताब में भी सोनिया गांधी को हिन्दू विरोधी बता चुके थे | उन अपनी किताब में जयेंद्र सरस्वती की गिरफ्तारी का भी विरोध किया है | यह गिरफ्तारी जयललिता और सोनिया गांधी की सांठ गाँठ से हुई थी | किताब के बाद अब प्रणब दा ने संघ की लाठी से कांग्रेस को इतनी चोट पहुचाई है कि कांग्रेस छलनी हो गई | और किसी को पता भी नहीं चला | कांग्रेस और सेकुलर गैंग के मुंह से आवाज भी नहीं निकल रही | प्रणब दा ने पांच ऐसी बातें कही हैं जिससे कांग्रेसी विचारधारा नींव हिल गई है | कांग्रेस के बुद्धिजीवी गैंग का दावा है कि प्रणब दा ने कांग्रेस की राष्ट्रवाद की अवधारणा को केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया | कुछ यह दावा कर रहे हैं कि प्रणब दा ने संघ को राष्ट्रवाद पर सीख दी | संघ मुख्यालय में ही संघ की क्लास लगाई |  पर कांग्रेस इस बात से खुश हैं  दादा ने कांग्रेस पार्टी को नुकसान नहीं पहुंचाया |

ज़रा समझें वो पांच बातें क्या हैं | पहली -पहला झटका प्रणब मुखर्जी ने कांग्रेस को तब दिया  | जब उनने विजिटर बुक में लिखा- ''मैं आज यहां भारत मां के महान सपूत डॉ के बी हेडगेवार को श्रद्धांजलि देने आया हूं | '' इसमें नोट करने वाले शब्द हैं - भारत मां और महान सपूत | मुस्लिम कट्टरपंथियों के दबाव में अब कांग्रेस भारत माता नहीं कहती | भारत को माता कहने पर मुसलमानों को एतराज है | उन का सब से बड़ा विरोध ही यह है कि वे भारत माता की जय नहीं बोलेंगे | भारत मां की वंदना मूर्ति पूजा के बराबर है |  भारत को मां कहने को साम्प्रदायिक माना जाने लगा है | कांग्रेस पार्टी और कांग्रेसी इतिहासकार हेडगेवार खलनायक बताते रहे हैं | प्रणब दा ने उन्हें अपने हाथ से भारत मां का महान सपूत लिख दिया |

दूसरी बात- प्रणब मुखर्जी ने अपने भाषण में भारत को 5000 साल पुरानी सभ्यता बताया |  इतना ही नहीं उन ने यहाँ तक कहा कि भारत की सभ्यता 5000 साल से अंखण्डित रही | निरंतर इसका विकास होता रहा है.! यही तो संघ कहता है | भाजपा भी तो सांस्कृतिक रास्गत्र्वाद की बात इसी आधार पर कहती है | नेहरू तो डिस्कवरी आफ इंडिया में लिख गए कि मुगलों से पहले भारत में कबीले रहते थे | कांग्रेस सरकारों में पाठ्य पुस्तकें लिखने वाले किराए के वामपंथी भारत का विकृत इतिहास लिखते रहे | हमें  तो यही पढ़ाया गया कि हमारा इतिहास सिधू घाटी सभ्यता से शुरु होटा है | जिसके बाद आर्य आए |

तीसरी बात – अपने भाषण में दादा ने यह कह कर तो सेकुलर गैंग का कलेजा छलनी कर दिया कि मुगल आक्रांता थे.. आक्रमणकारी थे | अपन बता दें कि यह बात दादा ने नागपुर आने के बाद जोड़ी , जो उन के लिखित भाषण में नहीं थी | शायद यह संघ मुख्यालय में बिताए कुछ पलों का असर रहा होगा | उनने बाबर को मुस्लिम इनवेडर बताया  | जिसने दिल्ली पर कब्जा किया था | यह तो कांग्रेस की विचारधारा कभी नहीं रही थी | ये तो सिर्फ संघ की शाखाओं में ही बताया जाता रहा कि बाबर एक लुटेरा था | जिसने तोपों के बल पर भारत पर कब्जा कर लिया | सेकुलर इतिहासकार तो तैमूर लंग के परपोते बाबर को कला-प्रेमी, लेखक व दयालु शहंशाह बताते रहे | बाबर को आक्रमणकारी कहने वालों को तो सांप्रदायिक बताया जाता था | बाबरी ढाँचे के टूटने पर विलाप करने वाले बाबर की तारीफ़ में लिखते रहते थे | अब प्रणब दा ने भी  बाबर को आक्रमणकारी बता दिया  | तो फिर कांग्रेस के स्पिन-डॉक्टर्स किस बात की खुशियां मना रहे हैं?  

चौथी बात – जो मुलिम आक्रमणकारी और हिन्दू राजाओं में भेद करने वाली है | प्रणब दा ने चंद्रगुप्त मौर्य का उल्लेख किया | राजा अशोक का बखान किया  | पर उनने किसी भी मुस्लिम सुल्तान का नाम नहीं लिया.!  जबकि, कांग्रेसी तो अब तक अशोका द ग्रेट कहने पर तुरंत अकबर द ग्रेट बोलते हैं |  सवाल है कि दादा ने अशोक का नाम लिया , फिर  अकबर का नाम क्यों भूल गए | हकीकत ये है कि वो लिखे हुए भाषण को पढ़ रहे थे | इसलिए भूलने का सवाल नहीं है | मतलब साफ है उनने जानबूझ कर अकबर का नाम नहीं लिया |

पांचवी बात- प्रणब दा ने कहा कि वसुधैव कुटुम्बकम्और सर्वे भवन्तु सुखिन:.. भारत के राष्ट्रवाद का आधार है.! यह बात संसद भवन  की दीवारों पर भी लिखी है | हकीकत ये है कि  वसुधैव कुटुम्बकम्और सर्वे भवन्तु सुखिऩः’ – ये दोनों वाक्य हिंदुत्व का भी आधार है | संघ के सरसंघचालकों के भाषणों में अक्सर ये दो वाक्य सुनने को मिलता है | अटल बिहारी वाजपेयी ने संसद में कई बार इन दोनों वाक्यों की व्याख्या की है | नरसिंह राव भी इन डो वाक्यों को दोहराते रहते थे | जो सोनिया गांधी की आँख की किरकिरी बन गए थे | प्रणब दा भी सोनिया की आँख की किरकिरी थे | प्रणब दा ने इंदिरा गांधी की हत्या के बाद  पीएम् पद पर दावा ठोका था | तब उन्हें कांग्रेस इ निकाल दिया गया था | राजीव गांधी के रहते वह कभी कांग्रेस में नहीं लौट सके | नरसिंह राव ही प्रणब दा को कांग्रेस में लाए थे | तभी दोनों सोनिया की आँख की किरकिरी थे | सोनिया ने कांग्रेस में सब से वरिष्ठ होते हुए भी प्रणब दा को पीएम नहीं बनने दिया | मनमोहन सिंह को पीएम् बना दिया | दस साल तक प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह ने कभी वसुधैव कुटुम्बकम्और सर्वे भवन्तु सुखिऩः नहीं कहा | न ही राहुल गांधी ने कभी इसका जिक्र किया | वह तो खैर संस्कृत के इतने मुश्किल श्लोक बोल ही न सकेंगे |

यही पांच बातें प्रणब दा के भाषण की आत्मा है | कांग्रेस पार्टी ने प्रणब दा को नागपुर जाने से रोकने की हर कोशिश की | प्रणब दा फिर भी गए.. कांग्रेसी नेताओं ने प्रणब दा से मिलकर मिन्नतें की | फिर भी प्रणब दा नहीं माने | थक हार कर उन्होंने प्रणब दा से ये गुजारिश की कि नागपुर जाकर कम से कम संघ की तारीफ न करें | प्रणब दा शायद मान गए | यही वजह है दादा ने अपने भाषण में संघ के बारे में एक शब्द नहीं कहा |  पर वह बात उन ने  विजिटर्स बुक लिख कर कह दी | असल में प्रणब दा ने कांग्रेस को संघ की लाठी से ऐसा प्रहार किया है कि कांग्रेस लम्बे समय तक छटपटाती रहेगी |  और सबसे मुख्य बात प्रणव दा के भाषण के अंत में वन्दे मातरम् कहा | जो कांग्रेस मुस्लिम कट्टरपंथियों के दबाव में पूरी तरह छोड़ चुकी है |

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