India Gate se Sanjay Uvach
खुली खुफिया तंत्र की पोल
Sat, 14-Nov-2009अपने यहां तो खुफिया विभाग में कोई खबर तक नहीं थी। डेविड हेडली और राना अमेरिका में पकड़े गए। तब जाकर पता चला- हेडली-राना तो भारत में सक्रिय थे। मुंबई पर आतंकी हमले के बाद भी अपन ने कई ऐंगल निकाले। पुलिस ने कई थ्योरियां पेली। पाकिस्तान से सीधे तार जुड़े। मोटर बोट की मोटरें खरीदने तक के सबूत ढूंढ लिए। अब एक साल होने को। पर हेडली-राना का कोई ऐंगल तो कभी सामने नहीं आया। यह ऐंगल खुला, तो अमेरिका में जाकर खुला। अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई ने खोला। अब मुंबई के सन्नी सिंह कहते हैं-'हेडली मेरे पास फ्लैट किराए पर लेने आया था। ऐना नाम की एक विदेशी महिला साथ थी। बोलचाल का ढंग विदेशी था। मैने फ्लैट दिला भी दिया। पर जब पासपोर्ट-वीजा की बात आई। तो हेडली उत्तेजित हो गया।'
बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव हो, तो मोदी जैसा कोई नहीं
Fri, 13-Nov-2009संघ ने बंद मुट्ठी खोल ली। बीजेपी की साख बढ़ेगी या घटेगी। यह तो बीजेपी वाले या संघ वाले जाने। पर एनडीए का कुनबा बिखरेगा। एनडीए का आडवाणी को नेता मानना भी आसान नहीं था। पर शरद यादव-नीतीश कुमार जैसों ने आडवाणी को करीब से देखा था। तो आडवाणी को कबूल करना आसान हुआ। वरना मीडिया ने आडवाणी की ऐसी इमेज बना दी थी। अपन को तो वाजपेयी के बाद ही कुनबा बिखरने का अंदेशा था। आडवाणी का असली व्यक्तित्व मीडिया की बनाई इमेज से कोसों दूर। शरद यादव ने एक बार कहा था-'हमने आडवाणी के साथ छह साल काम किया। हमें उन्हें एनडीए का नेता मानने में कोई प्रॉब्लम नहीं।' मीडिया की नजर में मोदी की इमेज तो आडवाणी से भी बुरी।
आडवाणी पर भविष्यवाणी करने वाले अब कहां हैं
Thu, 12-Nov-2009अपनी स्पीकर मीरा कुमार जा रही हैं अमेरिका। उन्नीस नवंबर को लौटेंगी। तब सेशन से पहले मीटिंग का वक्त नहीं होगा। सो उनने आज ही मीटिंग बुला ली। सेशन से एक हफ्ता पहले। यों तो इस मीटिंग के मुताबिक सेशन नहीं चलना। मीरा कहेंगी-'सबको मौका मिलेगा। सेशन को हंगामों से बचाओ।' पर हंगामें तो होकर रहेंगे। मंहगाई पर अब विपक्ष जरूर एकजुट होगा। मुलायम को भी कांग्रेस से हाथ मिलाने की अकल आ चुकी। सोचो, एटमी करार पर सरकार गिर जाती। तो कांग्रेस को 206 सीटें मिल पातीं। कतई नहीं। अलबत्ता 1989 के हालात बनते। पर बात मंहगाई की।
गलतियों का दूसरा दौर शुरू करने को तैयार बीजेपी
Wed, 11-Nov-2009कांग्रेस यूपी-केरल में लौट आएगी। बीजपी का सितारा डूबना बरकरार। यह है मंगलवार को निकले नतीजों का लब्बोलुआब। सबसे ज्यादा महत्व यूपी के नतीजों का। न मुलायम अपनी पुत्रवधू को जीता पाए। न अखिलेश अपनी सीट अपनी बीवी के नाम कर पाए। सो यह बाप-बेटे दोनों की हार हुई। अपन भी फिरोजाबाद को यादव सीट समझते थे। तो फिरोजाबाद से जातिवाद राजनीति का भूत उतर गया। राज बब्बर की जीत इसका साफ इशारा। अपन को लगता था- फतेहपुर सीकरी के बाद फिरोजाबाद भी हारेंगे राज बब्बर। पर फिरोजाबाद ने सिर्फ यादव महारथियों को नहीं हराया। आने वाले कल के यूपी की इबारत लिख दी। राहुल गांधी ने दाव लगाया था फिरोजाबाद पर। राहुल कोई सीएम पद के उम्मीदवार तो नहीं होंगे। पर 2012 की यूपी एसेंबली चुनाव के कांग्रेसी दूल्हे जरूर होंगे।
न लाग, न लपेट, खरी-खोटी वाले थे प्रभाष जी
Sat, 07-Nov-2009
कोई माने, न माने। प्रभाष जोशी के साथ ही मिशनरी पत्रकारिता का अंत हो गया। मिशनरी पत्रकारिता के वही थे आखिरी स्तंभ। यों उनके जमाने में ही पत्रकारिता व्यवसायिक हो गई। प्रभाष जी का आखिरी साल तो व्यवसायिकता के खिलाफ जंग में बीता। चुनावों में जिस तरह अखबारों ने न्यूज कंटेंट बेचने शुरू किए। उनने उसके खिलाफ खम ठोक लिया। उनने लिखा- 'ऐसे अखबारों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर प्रिटिंग प्रेस के लाइसेंस देने चाहिए।' इन्हीं महाराष्ट्र, हरियाणा, अरुणाचल के चुनावों में उनने निगरानी कमेटियां बनाई। पत्रकारिता की स्वतंत्रता को जिंदा रखने की आग थी प्रभाष जी में। प्रभाष जी पांच नवंबर को भारत-आस्ट्रेलिया मैच देखते-देखते सिधार गए। प्रभाष जी की दो दिवानगियां देखते ही बनती थी। उन्हीं में एक दिवानगी उनके सांस पखेरू उड़ा ले गई। क्रिकेट मैच में हार का सदमा नहीं झेल पाए। हार्ट अटैक से चले गए। दूसरी दिवानगी थी- पाखंडी नेताओं की चङ्ढी उतारना।
तो बनते-बनते बिगड़ गई कर्नाटक की बात
Fri, 06-Nov-2009अपन ने कल बीजेपी की कंगाली में आटा गीला होने की कहानी बताई। बिहार में सुशील मोदी के खिलाफ नई बगावत। झारखंड में जेडीयू के साथ गठबंधन में फच्चर। कर्नाटक में रेड्डी ब्रदर्स का येदुरप्पा के खिलाफ खम ठोकना। अब आगे। सुशील मोदी के खिलाफ दो साल पहले भी बिगुल बजा था। तब बीजेपी ने डेमोक्रेटिक फार्मूला निकाला। बीजेपी के सारे एमएलए दिल्ली बुलाए गए। बंद कमरे में एक-एक को बुलाकर पूछा। फैसला मोदी के हक में निकला। मोदी बच गए। पर यह फार्मूला न खंडूरी को हटाते समय उत्तराखंड में लागू हुआ। न वसुंधरा को हटाते समय राजस्थान में। अब सुशील मोदी के खिलाफ दुबारा बिगुल बजा। तो अपन को इंतजार करना होगा हाईकमान के नए रुख का। झारखंड में फंसा गठबंधन का फच्चर गुरुवार को निकल गया।
भाजपा का तो कंगाली में आटा ही गीला
Thu, 05-Nov-2009अपन ने कल लिखा ही था- 'आडवाणी होम मिनिस्टर रहते वीएचपी की मीटिंग में जाते। तो जमकर बवाल होता। पर चिदंबरम जमात-उलेमा-ए-हिंद की मीटिंग में गए। तो पत्ता भी नहीं हिला।' देवबंद की उसी कांफ्रेंस में वंदेमातरम् के खिलाफ फतवा हो गया। पी चिदंबरम ने दिल्ली आकर सफाई दी- 'मेरे सामने कोई फतवा नहीं हुआ। मुझे तो पता भी नहीं।' चिदंबरम् ठहरे चतुर सुजान। जमात-उलेमा-ए-हिंद का प्रस्ताव ही फतवे का आगाज था। यह प्रस्ताव पास हुआ था सोमवार को। चिदंबरम पहुंचे मंगल को। कहते हैं- 'मुझे तो पता भी नहीं।' चतुर सुजान चिदंबरम का किस्सा तो अरुण जेटली ने सुनाया। मौका था- 'डायरेक्ट टैक्स पर सेमीनार का।' सेमीनार किया था- 'कनफैडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स ने।' जेटली बोले- 'उदारीकरण शुरू हुआ। तो टैक्स घटने शुरू हुए। लक्ष्य था- लगातार टैक्स घटाते जाना। ताकि भारतीय उद्योग धंधे अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले खड़े हों। पर चिदंबरम जब-जब वित्त मंत्री बने। उनने टैक्सों का बोझ लादा। चिदंबरम बजट की पैकेजिंग के माहिर।
ए आर रहमान ने बनाया वंदेमातरम को विश्वगीत
Wed, 04-Nov-2009वोट बैंक की राजनीति देश को कहां ले जाएगी। इसका ताजा उदाहरण देवबंद में दिखा। देश का होम मिनिस्टर पहुंच गया जमात-उलेमा-ए-हिंद की मीटिंग में। आडवाणी होम मिनिस्टर होते हुए वीएचपी की मीटिंग में जाते। तो सोचो कितना बवाल होता। कांग्रेस-लेफ्ट-सपा-राजद सब चढ़ दौड़ते। पर चिदंबरम मुस्लिम सम्मेलन में जाकर धन्य हो गए। तो देश में पत्ता भी नहीं हिला। चिदंबरम को पौने दो साल पहले के फतवे की तारीफ करना याद रहा। पर ताजा फतवे पर चुप्पी साध गए। चिदंबरम ने जिस आतंकवाद विरोधी फतवे की तारीफ की। वह देवबंद से 25 फरवरी 2008 को जारी हुआ था। पर ताजा फतवा हुआ वंदेमातरम के खिलाफ। जमायत-उलेमा-ए-हिंद के इसी सम्मेलन में प्रस्ताव पास हुआ- 'मुसलमानों को 'वंदे मातरम्' नहीं गाना चाहिए।' वजह बताई- 'वंदे मातरम् में देश के लिए सजदा है। मुसलमान अल्लाह के अलावा किसी की इबादत नहीं करते।'
इंदिरा के जमाने से ही शुरू हो गई थी सियासत व्यापार बननी
Sat, 31-Oct-2009महाराष्ट्र-हरियाणा के चुनाव नतीजे आए आज दसवां दिन। जीत का जश्न मनाने के बावजूद सरकारें नहीं बन पाई। दोनों जगह बहुमत का जुगाड़ तो हो गया। पर राजनीतिक मलाई पर सौदेबाजी नहीं निपट रही। महाराष्ट्र - हरियाणा की बात बताएं। पर उससे पहले आरके धवन की बात। जो भजनलाल को फिर से कांग्रेस में लाने की कोशिश में। धवन ने इंदिरा गांधी का स्टेनो बनकर सफर शुरू किया। सो इंदिरा गांधी को करीब से समझने वालों में धवन भी। इंदिरा की बरसी पर धवन ने कहा- 'इंदिरा ने इमरजेंसी और ब्ल्यू स्टार के कदम मजबूरी में उठाए। दोनों का बहुत अफसोस था बाद में।' ताकि सनद रहे। सो बताना जरूरी।
पवार के लंच में भी नहीं हो पाई 'पावर' की बंदरबांट
Fri, 30-Oct-2009पाकिस्तान ने हिलेरी क्लिंटन से कहा- 'भारत को समग्र बात के लिए राजी करो।' मनमोहन सिंह ने श्रीनगर में कहा- 'किसी के दबाव में कोई बात नहीं होगी। पाक पहले आतंकवाद पर नकेल डाले। तभी बात होगी।' यों दबी जुबान में उनने कह दिया- 'यह शर्त नहीं।' मनमोहन तलवार की धार पर। शर्म-अल-शेख में कहा था- 'आतंकवाद बातचीत में बाधा नहीं बनना चाहिए।' पर दिल्ली में सोनिया का दबाव बना। तो संसद में कहा-'आतंकवाद रुके, तो बातचीत होगी।' अब दोनों बातों का संतुलन रखना पड़ता है मनमोहन को। बात समग्र बातचीत की। तो मनमोहन के लिए आसान बात नहीं। सोनिया गांधी का फच्चर न होता। तो मनमोहन शुरू करा चुके होते।