और ऐसे फराह से बन गई माही

Publsihed: 19.Dec.2020, 10:12

फरहा से माही बनी युवती शुक्रवार को नमन मदान की हो गई। ऋषिकेश के एक होटल से बरामद करने के बाद नौचंदी पुलिस ने उसके कोर्ट में बयान दर्ज कराए। यहां माही ने कहा कि वह बालिग (23) है और उसने शास्त्रीनगर निवासी नमन मदान से शादी कर ली है। इसलिए वह पति के साथ रहना चाहती है, इस पर कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि वह माही को उसके ससुराल पहुंचाए । इसके बाद माही ने नौचंदी पुलिस स्टेशन पर मौजूद अपने ससुरालियों के पांव छूकर आशीर्वाद लिया और पुलिस वालों को मिठाई खिलाई ।  

‘‘कोविड-19: सभ्‍यता का संकट और समाधान : कैलाश सत्यार्थी

Publsihed: 18.Dec.2020, 17:55

नई दिल्ली । नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित जानेमाने बाल अधिकार कार्यकर्ता श्री कैलाश सत्‍यार्थी की पुस्‍तक ‘‘कोविड-19: सभ्‍यता का संकट और समाधान’’ का लोकार्पण भारत के पूर्व मुख्‍य न्‍यायाधीश न्‍यायमूर्ति श्री दीपक मिश्रा ने किया। राज्‍यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश के विशिष्‍ट आतिथ्‍य में इस समारोह का आयोजन किया गया। प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस पुस्‍तक का लोकार्पण ऑनलाइन माध्‍यम से संपन्‍न हुआ।
पुस्‍तक के लोकार्पण समारोह का संचालन प्रभात प्रकाशन के निदेशक श्री प्रभात कुमार ने किया, जबकि धन्‍यवाद ज्ञापन श्री पीयूष कुमार ने किया।

शादी से 8 घंटे पहले अपंग हो गई दुल्हन

Publsihed: 17.Dec.2020, 01:00

प्रयागराज: दहेज की मांग पूरी न होने, बारातियों की खातिरदारी पसंद के मुताबिक न होने या फिर लड़की और उसके परिवार में कोई कमी होने पर अक्सर लोग मंडप में पहुंचने और जयमाल होने के बावजूद शादियां तोड़ देते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ प्रतापगढ़ के एक शख्स ने इंसानियत और मोहब्बत की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसे लोग बरसों तक याद रखेंगे.

कोरोनाकाल में बच्चों की दुर्दशा पर आयोग चुप रहे , मीडिया सोया रहा : सेतिया

Publsihed: 16.Dec.2020, 20:26

नई दिल्‍ली। बच्‍चों के लिए श्री कैलाश सत्‍यार्थी को नोबेल शांति पुरस्‍कार मिलने की छठी वर्षगांठ पर इंडिया फॉर चिल्‍ड्रेन और कैलाश सत्‍यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन (केएससीएफ) की ओर से ‘‘कोरोनाकाल, बच्‍चे और मीडिया’’ विषयक एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा में देश के जाने-माने पत्रकार पद्मश्री श्री आलोक मेहता, वरिष्ठ पत्रकार और उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष श्री अजय सेतिया, अमर उजाला डिजिटल के संपादक श्री जयदीप कार्णिक, हिंदुस्तान लाइव के संपादक श्री प्रभाष झा और लेखक एवं फिल्‍म निदेशक श्री जैगम इमाम ने भाग लिया।

कोरोना काल और लोकतंत्र का मंदिर

Publsihed: 15.Dec.2020, 23:27

अजय सेतिया / कोरोनावायरस जब अपने पूरे शबाब पर था , तो 40 दिन बाद लाकडाउन खोलना शुरू कर दिया गया था , क्योंकि देश की आर्थिकी तबाही के कगार पर पहुंच गई थी | अब ट्रेनों को छोड़ कर शायद कुछ बचा नहीं , सब कुछ खुल चुका है | सुनते हैं जब ट्रेनें खुलेंगी तो कुछ ट्रेनें और सारे स्टेशन प्राईवेट हाथों में होंगे | इस बीच कोरोना काल में ही बिहार विधानसभा और देश के अन्य राज्यों की खाली सीटों पर भी चुनाव हो गए | लाकडाउन के दौरान ही संसद का मानसून सत्र भी बुलाया गया , जिसमें हल्ले गुल्ले के दौरान ही कृषि बिल पास करवाए गए ,जो अब मोदी सरकार के गले की फांस बने हुए हैं | लोग सवाल कर रहे हैं कि लाकडाउन पीर