जो भाजपा की पूंजी है,  वह अब कांग्रेस की समस्या है

Publsihed: 17.Dec.2023, 21:14

इंडिया गेट से अजय सेतिया / नब्बे के दशक में असरानी का एक हिट विज्ञापन आया था| असरानी के घर का बल्ब फ्यूज हो जाता है, तो वह बल्ब लेने मार्किट में जाते हैं| दूकानदार उन्हें एक बल्ब दिखा कर उसकी खूबियाँ गिनाते हैं, तो असरानी कहते हैं, सारे घर के बदल डालूँगा| तीस साल बाद नरेंद्र मोदी ने तीन राज्यों के पुराने चेहरे बदल कर उस विज्ञापन की याद ताज़ा कर दी है| तीन तीन चार चार बार मुख्यमंत्री रहे तीनों धुरंधर चुनाव लडे भी थे, और जीते भी थे, लेकिन तीनों को हटा कर नई रोशनी वाले नए बल्ब लगा दिए गए| रमन सिंह ने मन मसोस कर स्पीकर बनाना स्वीकार कर लिया| जबकि वसुंधरा राजे और शिवराज सिंह चौहान हटाए जाने का निर्णय बहुत ही बुझे मन से स्वीकार किया| मीडिया के एक वर्ग को यह सब समझ नहीं आ रहा की भाजपा ने यह कैसे कर लिया| जबकि कांग्रेस अपना पूरा जोर लगाकर 2018 में अशोक गहलोत को किनारे नहीं कर सकी सकी थी, अभी कुछ महीने पहले सिद्धारमैया को भी किनारे नहीं कर सकी| इससे पहले भाजपा ने महाराष्ट्र में अपने मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस को उप मुख्यमंत्री बना दिया था, और उसने बिना नानुकर किए उसे स्वीकार भी कर लिया| कांग्रेस समर्थक और भाजपा विरोधी पत्रकारों के लिए भाजपा के भीतर का अनुशासन एक पहेली बन गया है| कांग्रेस तो हार के सदमे से उभर कर एक हफ्ते के भीतर संसद में हंगामें पर उतर आई है| कांग्रेस समर्थक यूटयूबर हार के सदमे से उभर नहीं पा रहे, तो अब उन्होंने नया शिगूफा छोड़ दिया है कि तीन राज्यों में नए चेहरे लाने के बाद अब योगी आदित्यानाथ की बारी है| इस तरह के वीडियो और खबरें आनी शुरू हो गई हैं| वैसे यह नया शिगूफा नहीं है, अमित शाह और योगी में टकराव की खबरें कई महीनों से प्लांट हो रहीं थी| कोई इन से पूछता नहीं कि जब तुम लोगों की सारी खबरें गलत हो जाती हैं, तो काहे के राजनीतिक पंडित बने घूम रहे हो| अब इन्होने नए तरीके का आकलन शुरू कर दिया है कि इन चुनावों का लोकसभा चुनावों पर क्या असर होगा| चुनावों के दौरान तो विधानसभा चुनावों को सेमीफाइनल बता रहे थे, लेकिन अब कह रहे हैं कि वसुंधरा राजे और शिवराज को हटाने से भाजपा को लोकसभा चुनाव में नुक्सान उठाना पड़ेगा| मोदी की भाषा में इन्हें मूर्खों के सरदार कहना पड़ेगा, क्योंकि इन तीनों राज्यों में कोई और पार्टी तो है नहीं, तो क्या कांग्रेस कुछ सीटें जीत जाएगी| अगर वे यही कहना चाहते हैं, तो बहुत बड़ी गलतफहमी में है| कांग्रेस तभी जीतना शुरू करेगी, जब वह चंडूखाने के यूट्यूबारों और एनजीओ चलाने वालों की सलाह लेना बंद करेगी| अब राहुल गांधी ने यह किस की सलाह पर कहा कि संसद में घुसपैठ की वजह बेरोजगारी और महंगाई है| इन्हीं चंडूखाने के यूटयूबरों और एनजीओ वालों की सलाह पर| योगेन्द्र यादव आजकल राहुल गांधी के गुरु बने हुए हैं| यह ज्ञान उन्हें योगेन्द्र यादव ने दिया है, जो लोकसभा में छलांग लगाने वालों को भगत सिंह बता रहे हैं| अपराध को महंगाई और बेरोजगारी से जोड़ रहे हैं| कांग्रेस के आचार्य प्रमोद ने ही राहुल गांधी को आईना दिखा दिया है| उन्होंने कहा है कि अराजकता को देश की समस्याओं के साथ जोड़ना देशद्रोह है| गरीबी और महंगाई कोई 2014 के बाद की समस्या है क्या| इंदिरा गांधी ने 1971 में गरीबी हटाओं का नारा दिया था| देश की किसी समस्या का मतलब यह नहीं है कि लोकतंत्र पर ही हमला कर दिया जाए| संसद देश की समस्याओं पर विचार करने का मंच है, घुसपैठ कर के धुंआ फैलाने का मंच नहीं है| लेकिन  राहुल गांधी अपराधियों  का बचाव कर रहे हैं| मुझे याद आता है कि यूपीए के शासनकाल में नक्सलवाद समस्या बहुत बढ़ गई थी, तब भी गृहमंत्री पी.चिदंबरम कुछ इसी तरह का ज्ञान दिया करते थे| अभी भी वह कह रहे हैं कि भाजपा का अति राष्ट्रवाद खतरनाक है| कांग्रेस के नेता यही नहीं समझ पा रहे कि राष्ट्रवाद ही भाजपा की पूंजी है| राष्ट्रवाद कभी कांग्रेस की भी पूंजी हुआ करती थी| कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टिकरण और कम्युनिस्टों के चक्कर में आकर राष्ट्रवाद को नजरअंदाज कर दिया| क्योंकि ये दोनों ही वर्ग राष्ट्रवाद को नहीं मानते, दोनों वर्गों की आस्था देश से बाहर है| भारतीय जनता पार्टी ने इसे लपक लिया है, इसलिए जैसे कांग्रेस की जड़ें जमी हुई थीं, वैसे ही भाजपा की जड़ें जम गई हैं| इसलिए पी.चिदंबरम ने तो मान लिया है कि 2024 में विपक्ष मोदी को नहीं हरा सकता| क्योंकि भाजपा चुनाव को आख़िरी चुनाव समझ कर लडती है, और कांग्रेस चुनाव को गंभीरता से लड़ ही नहीं पाती| अब मैं तो इसे राहुल गांधी पर टिप्पणी के रूप में देखता हूँ, जो खुद ही कांग्रेस का खेल बिगाड़ देते हैं| जैसे वह राष्ट्रवाद को पनौती कह देते हैं| मोदी क्रिकेट का मैच राष्ट्रवाद का मुजाहरा करने के लिए देखने गए थे, भारत हार गया, तो राहुल गांधी ने मोदी को ही पनौती कह दिया| राहुल गांधी चुनाव को गंभीरता से लड़ रहे होते, तो पनौती वाली टिप्पणी करने से पहले सोचते कि लोग इसका क्या अर्थ निकालेंगे| मोदी देश की जनता के साथ जुड़ चुके हैं, जनता के दिमाग से मोदी को निकालने के लिए कांग्रेस को नकारात्मक राजनीति छोड़ कर सकारात्मक राजनीति करनी होगी| लेकिन हैरानी यह है कि कांग्रेस देश के मिजाज को समझ ही नहीं रही है| देश का मिजाज 370 के खिलाफ था, कांग्रेस ने उसे नहीं पहचाना| अब सुप्रीमकोर्ट फैसले के बाद भी वह ऐसे ऐसे लोगों को ढूंढ कर ला रही है, जो सुप्रीमकोर्ट के फैसले को गलत बताएं| कांग्रेस फाली नरीमन को उठा लाई है, जो सुप्रीमकोर्ट के फैसले को असंवैधानिक बता रहे हैं| यहीं पर राष्ट्रवाद का इम्तिहान हो जाता है| संसद और सुप्रीमकोर्ट के जिस फैसले का पाकिस्तान और चीन विरोध कर रहा है, उसका फारूख अब्दुला और महबूबा मुफ्ती की तरह कांग्रेस भी विरोध करेगी, तो देश उसे उसी नजर से देखेगा, जिस नजर से फारूख अब्दुला और महबूबा को देखता है| मोदी और अमित शाह तो ताल ठोककर संसद में कह रहे हैं कि वे राष्ट्रवाद से किसी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे|

 

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