Current Analysis

Earlier known as राजनीति this column has been re-christened as हाल फिलहाल.

पंजाब मे राहुल ने खेला कमल नाथ का उल्टा दांव

कमल नाथ 1984 मे सीखों के नरसंहार के दोषियों मे से एक हैं। नानावटी आयोग और मिश्रा आयोग ने गुरुद्वारा रकाबगंज के सामने दो  सिखों को जिंदा जलाने के मामले मे आरोपी माना था। दिल्ली पुलिस कमिश्नर सुभाष टंडन , अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर गौतम कौल के अतिरिक्त पत्रकार संजय सूरी ने भी आयोगो के सामने कमल नाथ के खिलाफ गवाही दी थी। कमल नाथ ने नानावटी आयोग के सामने स्वीकार किया था कि वह मौका-ए-वारदात पर मौजूद थे। गवाहियों के मुताबिक पाँच घंटे के नरसंहार के दौरान दो घंटे तक कमल नाथ वंहा मौजूद थे और भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे।

तालिबान का नया प्रमुख मुल्लाह हैबतुल्लाह अखुंदजादा

पिछले सप्ताह अमेरिकी ड्रोन हमले में तालिबान प्रमुख मुल्लाह अख्तर मंसूर के मारे जाने के बाद मुल्लाह हैबतुल्लाह अखुंदजादा को नया प्रमुख चुना गया है. पहले वह डिप्टी प्रमुख था, दूसरे डिप्टी प्रमुख सिराजुदीन हक्कानी डिप्टी प्रमुख बने रहेंगे. वह अफ्गानिस्तान के 34 राज्यों में से 15 राज्यों की तालिबान मिल्ट्री का प्रमुख होने के साथ साथ हक्कानी नेटवर्क भी चलाता है. हक्कानी नेटवर्क 2001 से ही अमेरिकी फोज पर हमले करने का काम कर रहा है. अमेरिका हक्कानी नेटवर्क से बेहद परेशान है, इसीलिए तालिबान और अफ्गानिस्तान सरकार में बातचीत करवा कर पतली गली से निकलने के पक्ष में है.

हरीश रावत नहीं दे पाये सीबीआई के सवालों का जवाब

सात जून को होगी फिर पूछताछ। हरीश रावत आखिर आज सीबीआई के सामने पेश हुये । बहुत कोशिश की कि सीबीआई के सामने जाने से बचा जाए । कपिल सिब्बल भी हरीश रावत को सीबीआई से बचा नहीं पाये। आज उनसे सीबीआई ने पाँच घंटे तक पूछताछ की , हालांकि जांच से निकला कुछ भी नहीं। अब सीबीआई 7 जून को हरीश रावत से फिर पूछताछ करेगी। सीबीआई से बचने की सारी कोशिशों मे नाकाम होने के बाद रावत आज सुबह 11 बजे सीबीआई मुख्यालय पँहुचे थे। फिर से मुख्यमंत्री कि कुर्सी संभालने के बाद हरीश रावत ने पहला काम यह किया था कि स्टिंग आपरेशन की जांच सीबीआई से लेने की कोशिश की

बाटला हाउस मुठभेड़ का भगोड़ा आई एस आई एस का आतंकी बना

बाटला हाउस की  मुठभेड़ फिर सुर्ख़ियो मे आने वाली है। इशरत जहां मुठभेड़ को कैसे फर्जी मुठभेड़ बताया गया था। अब उसका भी भंडाफोड़ हो चुका है। साध्वी ऋतंभरा को कैसे फंसाया गया था । उसका भी खुलासा हो चुका है । कांग्रेस राज मे आतकवाद को कैसे बढ़ावा दिया गया । धीरे धीरे भडा फूट रहा है । कांग्रेस ने उस समय बाटला हाउस मुठभेड़ को भी फर्जी कहा था। अब आई एस आई एस का एक वीडियो सामने आया है। जिसमे बाटला हाउस मुठभेड़ के दोरान बच कर भाग निकला एक आतंकी दिखाई दे रहा है। उस मुठभेड़ मे दो आतंकी भाग निक

विकल्प मे नितीश पर भरी पड़ेगी जयललिता

सारे रिकार्ड तोड़ते हुये जयललिता ने तमिलनाडू मे लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री की शपथ ले ली। मद्रास विश्वविध्याल्य मे हुया शपथ ग्रहण क्लासरूम जैसा ही था। शपथ ग्रहण करने वाले मंत्री पुराने  जमाने की गुरु शिष्य परंपरा की तरह जयललिता की चरण वंदना करते दिखाई दिये । केन्द्रीय राजनीति मे ऐसी चरण वंदना कभी इन्दिरा गांधी की भी नहीं हुयी। जयललिता की तरह ममता और नितीश कुमार भी लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने हैं। लेकिन जहां  तक नरेंदर मोदी के विकल्प का सवाल है जयललिता उन दोनों पर भारी पड़ सकती हैं। पहले भी 1996 मे एक  समय आया था जब जयललिता केन्द्रीय राजनीति मे सक्

संवैधानिक ब्रेकडाउन और राजनीतिक अनाडीपन

उत्तराखंड विधानसभा का नतीजा उम्मीद के मुताबिक ही है. स्पीकर ने भाजपा के विधायक भीम लाल आर्य को बर्खास्त नहीं कर के भाजपा का एक वोट हरीश रावत के लिए सुरक्षित कर लिया था. इस लिए भाजपा 28 से 27 हो गई, लेकिन कांग्रेस की रेखा आर्य ने भाजपा के साथ वोट कर के भाजपा के वोट फिर 28 कर दिए. बाकी 62 में से 34 वोट हरीश रावत के पक्ष में गए.....यानि स्पीकर ने 9 कांग्रेसी विधायकों को निलंबित न किया होता तो हरीश रावत के पक्ष में 34 और उन के विपक्ष में 37 विधायक होते.

अटार्नी जनरल संवैधानिक ब्रेकडाउन समझाने में फेल

नैनीताल हाईकोर्ट ने जब उत्तराखंड में राष्ट्रपति राज की अधिसूचना रद्द करते हुए विधानसभा और सरकार को बहाल कर दिया था तो सुब्रह्मणयम स्वामी ने कहा था कि अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी को इस्तीफा देना चाहिए. अब सुप्रीम कोर्ट भी उसी दिशा में आगे बढ रहा है तो अटार्नी जनरल की योग्यता पर सवाल खडा होता है. उत्तराखंड विधानसभा को केंद्रीय मंत्रीमंडल ने संवैधानिक ब्रेकडाउन का मुद्दा बना कर निलंबित और सरकार को बर्खास्त किया था. अटार्नी जनरल दोनो अदालतों में सरकार का यह पक्ष तर्कपूर्ण ढंग से नहीं रख पाए.

क्या सुप्रीमकोर्ट में संवैधानिक ब्रेकडाऊन आधार बनेगा

सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी जिसमे उत्तराखंड के राष्ट्रपति राज की अधिसूचना को रद्द कर के 29 अप्रैल को विधानसभा में बहुमत का फैसला करने के आदेश जारी किए थे.स्टे अंतरिम है , उस पर आगे सुनवाई 27 अप्रेल को होगी. अब 9 विधायकों ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है कि जब तक उन की सदस्यता का फैसला नहीं होता उन्हे 29 अप्रेल को वोट का अधिकार दिया जाए. हाई कोर्ट ने कह दिया था कि मतविभाजन के समय विधानसभा में विधायकों की स्थिति वह रहेगी, जो 27 मार्च को थी.

हाई कोर्ट की बेजा टिप्पणियां

जैसी कि उमींद थी नैनीताल हाइ कोर्ट की टिप्पणियाँ मर्यादाहीन हो गयी हैं। हाइ कोर्ट को राष्ट्रपति राज पर फैसला करने का हक़ है । इसलिए तो राष्ट्रपति राज को हाइ कोर्ट मे चुनोती दी गयी है। पहले भी हाइ कोर्ट राष्ट्रपति राज पर फैसले करती आई हैं। पर किसी हाइ कोर्ट को राष्ट्रपति के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी करने कि न हिम्मत हुयी, न जरूरत थी। यह कहना कि राष्ट्रपति राजा नहीं है, बहुद ही बेहूदा टिप्पणी है। जज को यह भी नहीं पता कि उसे बहुमत का नहीं सरकार की संवैधानिकता पर फैसला करना है ,क्योंकि सदन मे विनियोग बिल पास नहीं हुया था। लेकिन वह लगातार गलत टिप्पणियाँ कर रहे हैं। जैसे कल उन्होने कह दिया कि भरष्टा

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