India Gate se Sanjay Uvach
तो कांग्रेस का आपरेशन आजमगढ़ शुरू होगा अब
Wed, 10-Feb-2010तो दिग्गी राजा ने कांग्रेसी प्रवक्ताओं की हवा खिसका दी। अपन भी हैरान थे। दस जनपथ के इशारे बिना तो आजमगढ़ नहीं गए होंगे दिग्गीराजा। वही सच निकला। दिग्गी राजा ने सोनिया को आजमगढ़ दौरे की रपट दी। तो कांग्रेसी प्रवक्ताओं की घिग्गी बंध गई। अभिषेक मनु सिंघवी, मनीष तिवारी, शकील अहमद को पता ही नहीं था। इसीलिए परेशानी का इजहार कर गए। प्रवक्ताओं को पता ही नहीं लगती- सोनिया-राहुल की रणनीति। खुद सोनिया गांधी और राहुल ने दिग्गी को सौंपा था आपरेशन आजमगढ़। जो दिग्गी राजा की रपट से पूरा नहीं हुआ। अलबत्ता आपरेशन तो अब शुरू होगा। सोनिया को सौंपी लिखित रपट दाखिल खारिज नहीं होगी। अलबत्ता रपट की एक-एक सिफारिश पर अमल होगा।
पवार की ठाकरे वंदना से राहुल ब्रिगेड भड़की
Tue, 09-Feb-2010राहुल बाबा ने उस दिन गलती से बिहार की जगह गुजरात कह दिया। तो बवाल खड़ा हो गया। बवाल से नरेन्द्र मोदी गदगद हुए। अब वरुण बाबा ने मंहगाई पर दोधारी तलवार चलाई। तो फिर विवादों में फंस गए। उनने कहा - 'केन्द्र में रावण, तो प्रदेश में सूर्पनखा।' दोनों बाबाओं का विवादों से पुराना रिश्ता। खैर सोमवार राहुल और वरुण का नहीं। आरक्षण और मुखपत्रों की जंग का रहा। जिनके अपने मुखपत्र नहीं। उनने ब्लागों से जंग-ए-एलान कर दिया। कई दिन अमर सिंह ब्लाग पर तीर चलाते रहे। अमर सिंह तो मुलायम के कुनबे पर तीर चला रहे थे। पर लालकृष्ण आडवाणी ने मनमोहन पर निशाना साधा है। अमर सिंह निकाल बाहर किए गए। मुलायम ने अमर सिंह की जगह दूसरा ठाकुर मोहन सिंह भिड़ा दिया। मोहन सिंह अब मनमोहन-माया पर उतना नहीं बरसते। जितना अमर सिंह पर। ऐसे लगता है- जैसे ठाकुरों की जंग शुरु हो गई हो।
कांग्रेस वर्किंग कमेटी पर दिखी राहुल की छाया
Sat, 06-Feb-2010कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग अर्से बाद हुई। महंगाई पर पिछली मीटिंग पंद्रह अगस्त के बाद उन्नीस अगस्त को हुई थी। अब छब्बीस जनवरी के बाद पांच फरवरी को। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के बीच महंगाई और बढ़ गई। वर्किंग कमेटी के दो मेंबर घट गए। शिवराज पाटिल पंजाब के गवर्नर हो गए। उर्मिला सिंह हिमाचल की। गैर कांग्रेसी सरकारों पर नंबरदार बनाकर भेज दिए। अर्जुन सिंह और सीके जाफर शरीफ की सेहत ने इजाजत नहीं दी। या कोपभवन में बैठे हैं दोनों। अर्जुन बेटी को टिकट नहीं दिला पाए थे। तो जाफर शरीफ पोते के लिए भटक रहे थे। नारायणस्वामी तो कहीं अटक गए होंगे। पर राहुल गांधी नहीं आए। तो महाराष्ट्र और पांडिचेरी के मुख्यमंत्री कैसे आते। कांग्रेस के 'युवराज' महाराष्ट्र-पांडिचेरी के दौरे पर थे। सो दोनों 'जी हुजूरी' में लगे थे। जी हुजूरी का जलवा तो मुंबई में दिखा। जहां गृहराज्यमंत्री रमेश भागवे ने राहुल के जूते उठा लिए।
पाक में जेहाद के नारे, भारत में पाक से गुफ्तगू की तैयारी
Fri, 05-Feb-2010उधर न्यूयार्क से खबर आई- 'भारत के खिलाफ आतंकियों का इस्तेमाल कर रहा है पाक।' इधर दिल्ली की खबर है- 'भारत फिर से गुफ्तगू को तैयार।' शर्म-अल-शेख में गड़बड़झाले के बाद पीएम ने संसद में वादा किया था- 'बिना ठोस कार्रवाई का सबूत मिले बात नहीं होगी।' दो दिन पहले जब चिदंबरम-एंटनी ने एक साथ कहा- 'पाक ने आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।' तो अपना माथा ठनका था। दोनों से बयान दिलाकर टैस्ट कर रही थी सरकार। विपक्ष ने कड़े तेवर नहीं दिखाए। तो बुधवार को एसएम कृष्णा ने जुबान खोल दी। कुवैत जा रहे कृष्णा रास्ते में खबरचियों से बोले- 'पाक कसाब के बयान को सबूत मानने को राजी हो गया है। यह संबंध सुधारने में सकारात्मक कदम है।'
बाल ठाकरे अब बिहार में बीजेपी की लुटिया डुबोएंगे
Thu, 04-Feb-2010बीजेपी 2004 का चुनाव हारी। तो प्रमोद महाजन निशाने पर थे। हर ऐरा-गैरा कहता था- 'प्रमोद के फाइव स्टार कल्चर ने पार्टी का बंटाधार किया।' अब समाजवादी अपने अमर सिंह पर भी वही आरोप लगा रहे। समाजवादी पार्टी से निकाले गए। तो अमर सिंह अब बेपेंदे के लौटे जैसे दिखने लगे। दिन में मायावती की तारीफ। रात में सोनिया गांधी की। कभी सोनिया को इटेलियन कहते नहीं थकते थे। अब बोले- 'मेरा डीएनए कांग्रेस विरोधी नहीं।' अब उन्हें कांग्रेस मुलायम से बेहतर लगने लगी। पर अपन बात कर रहे थे फाइव स्टार कल्चर की। यों तो प्रमोद भी उसी साल मुंबई वर्किंग कमेटी में सादगी दिखा गए थे। पर जबसे नितिन गड़करी आए हैं। तब से सादगी का ढोल ज्यादा ही पीटा जाने लगा। पहले गड़करी के लिए फूल और बुक्के लाने पर रोक लगी। अब इंदौर अधिवेशन में तंबुओं में आवास। और दाल-रोटी, एक-आध सब्जी का प्रचार। प्रमोद ने रसगुल्लों, आइसक्रीम, जलेबियों की जगह गुड रखवा दिया था। इंदौर वाले मीठे में भी कुछ ऐसा ही परोसेंगे। यों यह खाने-पीने की ठाठ वाले इंदौर की परंपरा नहीं।
महंगाई के मोल-तोल में सरकार एक कदम आगे, दो कदम पीछे
Sat, 30-Jan-2010महंगाई पर केबिनेट कमेटी हुई। तो शरद पवार ने दावा ठोका था- 'अब महंगाई घटनी शुरू हो जाएगी। कम से कम चीनी के दाम जल्द घटेंगे।' प्रेस कांफ्रेंस का ऐलान छपा। अखबारों की स्याही सूखी नहीं थी। खुद पवार ने दूध की किल्लत का रोना रो दिया। बात पवार की चल ही रही। तो बताते जाएं- शरद पवार का मंत्रालय ही परस्पर विरोधी। उनका मंत्रालय है- कृषि एवं खाद्य आपूर्ति। एक तरफ उनका काम फसलों और किसानों का हित देखना। देश को अनाज सही समय पर मिलता रहे। इसकी निगरानी करना। दूसरी तरफ आम आदमी को वाजिब कीमत पर खाद्य आपूर्ति करना। अब अगर वह किसानों के हितों की रक्षा करें। तो किसानों को वाजिब कीमत दिलाने की जद्दोजहद करेंगे। किसानों की चीजों के दाम बढ़ेंगे। तो उसका असर बाजार पर होगा ही। यानी आम आदमी को अनाज महंगा मिलेगा ही। सो हुआ ना परस्पर विरोधी मंत्रालय। किसके हितों की रक्षा करें? किसानों की या उपभोक्ताओं की।
कंगारूओं की करतूतों से भरा सब्र का प्याला
Fri, 29-Jan-2010आस्ट्रेलिया में हमले थम नहीं रहे। गुरुवार को फिर ताजा खबर आ गई। एक ही दिन में तीन हमले। तीन टैक्सी ड्राईवर निशाने पर थे। चौथा पिज्जा डिलिवरी करता था। अपन खुद ही हमलों की छानबीन कर लें। पिछले एक साल में जितने हमले हुए। सभी छोटे-मोटे करिंदों पर थे। या फिर उन भारतीय छात्रों पर। जो पढ़ाई के साथ काम भी करते थे। किसी रेस्टोरेंट, होटल, पेट्रोलपंप या डिपार्टमेंटल स्टोर पर। अपन ने पहली नजर में रंगभेदी हमले माने। गोरों को गेहुंआ रंग पसंद नहीं आता। शायद 'बिग ब्रदर' में शिल्पा शेट्टी से हुआ दुर्व्यवहार का असर होगा। सो अपन उसी लाईन पर सोचते रहे। सोचो, जेड गुड्डी हमलावर क्यों थी। शिल्पा को सबसे ज्यादा परेशान तो उसी ने किया। तो अपन सहज ही नतीजे पर पहुंचेंगे।
कांग्रेस पर हावी होने लगे यूपीए सरकार के मंत्री
Thu, 28-Jan-2010यों तो पहले कांग्रेस की सरकारें रही हों। या बीजेपी की। पार्टियों का वजूद खत्म सा हो जाता रहा। इंदिरा-राजीव-नरसिंह राव पीएम थे। तो कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष भी थे। सो कांग्रेस चौबीस अकबर रोड से नहीं। पीएम के घर से ही चलती थी। सरकार वाजपेयी की बनी। तो वाजपेयी बीजेपी के अध्यक्ष नहीं थे। न लालकृष्ण आडवाणी। पर पार्टी के अध्यक्ष इन दोनों के आगे बौने ही थे। सो सत्ता के समय कांग्रेस-बीजेपी को पीएम ही चलाते रहे। पर अब जब मनमोहन सिंह कांग्रेस के अध्यक्ष नहीं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का रुतबा मनमोहन सिंह से ज्यादा। तो कायदे से दबदबा कांग्रेस पार्टी का होना चाहिए। पर हाल ही की घटनाएं इसे साबित नहीं करती। यूपीए सरकार के मंत्री। कांग्रेसी हों या गैर कांग्रेसी। कांग्रेस को हर बात पर ठेंगा दिखाने लगे।
पवार के मुंहतोड़ जवाब से कांग्रेस हुई लाजवाब
Tue, 26-Jan-2010गणतंत्र दिवस की बधाई। खुशी के मौके पर महंगाई का रोना ठीक नहीं। सो मनमोहन ने मुख्यमंत्रियों की मीटिंग टाल दी। सोनिया ने सीडब्ल्यूसी की मीटिंग बुलाई। पर गणतंत्र दिवस के बाद। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली म्यूंग बाक दिल्ली पहुंच गए। वह आज गणतंत्र दिवस के खास मेहमान होंगे। ली के आने से पहले ही अपन ने मेहमाननवाजी शुरू कर दी थी। दक्षिण कोरिया की स्टील कंपनी पास्को को पर्यावरण मंत्रालय ने हरी झंडी दी। उड़ीसा में लगाया जाएगा स्टील प्लांट। सोमवार को चार समझौतों पर दस्तखत भी हुए। आने वाले साल अपने काम का रहेगा दक्षिण कोरिया। अपन को एशिया पेसेफिक को-आपरेशन फोर्म में मददगार होगा। हर साल अपन विदेशी मेहमान कोई यों ही नहीं चुन लेते। कूटनीतिक-आर्थिक हित देखकर ही होता है फैसला। पिछले सालों अपन ने कजाकिस्तान, फ्रांस और रूस के राष्ट्रपतियों को बुलाया। तीनों एटमी ईंधन मुहैया कराने वाले देश।
मंहगाई का ठीकरा फोड़ा तो पवार भी मुंहतोड़ जवाब देंगे
Sat, 23-Jan-2010बात मंहगाई की। कांग्रेस मीडिया के सवालों से परेशान। ऊपर से पवार के चीनी-दूध की कीमतें बढ़ाने वाले बयान। यों भी कांग्रेस को मंहगाई पर कोई जवाब नहीं सूझ रहा। पीएम केबिनेट कमेटी की मीटिंग कर चुके। केबिनेट में चर्चा हो चुकी। चीनी की कीमतें घटाने के कुछ कदम भी उठाए। खासकर इम्पोर्टेड चीनी को किसी भी चीनी मिल में लाने की छूट। मायावती ने किसानों के दबाव में रोक लगाई थी। सो रॉ चीनी बंदरगाहों पर अटकी थी। फैसले से मायावती को बदनाम करने का मौका मिला। पर मायावती भी राजनीति की अनाड़ी नहीं। उनने मुख्यमंत्रियों की मीटिंग में आने की शर्त रख दी। बोली - 'पहले मंहगाई के जिम्मेदार पवार को हटाओ। फिर आएंगी मीटिंग में।' माया-पवार की तू तू - मैं मैं शुरू हो गई। कांग्रेस बाहर बैठकर तमाशा देखने लगी।