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Published: 26.Nov.2022, 17:05

अजय सेतिया / मुलायम सिंह के निधन से खाली हुई मैनपुरी लोकसभा सीट और आजम खान की विधायकी रद्द होने से खाली रामपुर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहा है| वैसे खतौली विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव हो रहा है, लेकिन मैनपुरी और रामपुर सीटों का राजनीतिक महत्व ज्यादा है| ये दोनों उपचुनाव सिर्फ दो सीटों के उपचुनाव नहीं है| बल्कि 2024 के लोकसभा चुनावों का लिटमस टेस्ट है| समाजवादी पार्टी का भविष्य तय करने वाले उपचुनाव है| दोनों ही ये सीटें समाजवादी पार्टी का गढ़ रही हैं| मैनपुरी यादव बहुल सीट है और रामपुर मुस्लिम बहुल| यादव और मुस्लिम ही समाजवादी पार्टी के मूल आधार हैं| भाजपा अगर इन में से एक सीट भी जीत गई, तो समाजवादी पार्टी का अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा के विकल्प बनने पर भी सवालिया निशान लगेगा| मायावती चाहती हैं कि सपा का ग्राफ गिरे, ताकि जनता में, खासकर मुसलमानों में यह धारणा बनने लगे कि सपा भाजपा को नहीं रोक सकी| अगर यह धारणा बन गई तो सपा के साथ गया मुस्लिम वोट बसपा की तरफ लौट आएगा| इससे अगले लोकसभा चुनाव में एम.वाई गठबंधन की जगह मुस्लिम दलित गठबंधन बन सकेगा|

मायावती ने तीनों ही…

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Published: 25.Nov.2022, 13:31

अजय सेतिया / लगता है मोदी सरकार ने मुगलों का गुणगान करने वाले और भारतीयों के मन में हीनभावना भरने वाले झूठे इतिहास को फिर से लिखवाने का मन बना लिया है| पिछले साढे आठ साल से इस महत्वपूर्ण काम की अनदेखी हो रही थी, ऐसा लगता था कि यह काम मोदी के एजेंडे पर है ही नहीं| औरंगजेब को धूल चटाने वाले असम के आहोम शासकों के सेनापति लचित बरफुकन की 400वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने साफ़ साफ़ शब्दों में इतिहास के पुनर्लेखन को सरकार के एजेंडे पर बताया है| मोदी ने कहा कि भारत के इतिहास को दबाया गया, भारत का इतिहास सिर्फ गुलामी का इतिहास नहीं है| भारत का इतिहास योद्धाओं का इतिहास है| दुर्भाग्य से हमें आजादी के बाद भी वही इतिहास पढ़ाया जाता रहा, जो गुलामी के कालखंड में साजिशन रचा गया था| आजादी के बाद जरूरत थी कि हमें गुलाम बनाने वाले विदेशियों के एजेंडों को बदला जाए, लेकिन ऐसा किया नहीं गया| देश के हर कोने में मां भारती के वीर बेटे-बेटियों ने कैसे आतताइयों का मुकाबला किया, अपना जीवन समर्पित कर दिया, इस इतिहास को जानबूझकर दबा दिया गया|…

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Published: 19.Nov.2022, 14:51

अजय सेतिया / अगर आप किसी पर कीचड़ फेंकेंगे, तो उस के कुछ छींटे आप पर भी पड़ेंगे| राहुल गांधी के साथ वही हो रहा है, वह अंगरेजी के वामपथी “हिन्दू” अखबार की मुहीम और राम पुनियानी जैसे मुगलों के समर्थक और हिन्दुओं के कट्टर विरोधियों की बातों में आ कर हिन्दुओं के नायक वीर सावरकर पर बार बार कीचड़ फैंक कर रहे| लेकिन इस बार उन की खुद की झकाझक सफेद विदेशी टी-शर्ट पर कीचड़ के इतने दाग लग गए हैं, कि कोई वाशिंग मशीन उनके काम नहीं आ रही| वीर सावरकर के पत्र की जैसी भाषा राहुल गांधी ने मीडिया को दिखाई है, हू-ब-हू वैसी ही भाषा वाली महात्मा गांधी की ब्रिटिश सरकार को लिखी गई दो चिठियाँ मार्केट में आ गई है| महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने महात्मा गांधी की वह चिठ्ठी ट्विटर पर पोस्ट कर दी है, जिस में महात्मा गांधी ने अंत में लिखा था- “ मैं आपकी शाही महारानी के वफादार नौकर बने रहने की भीख माँगता हूँ|” - इस के बाद महात्मा गांधी के दस्तखत हैं| असल में ब्रिटिश राज में चिठ्ठियों की भाषा ऐसी ही होती थी, ऐसे जवाहर लाल नेहरू के भी अनेक पत्र मौजूद हैं, जिन में महारानी की चाटुकारिता वाली भाषा…

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Published: 15.Nov.2022, 13:16

इंडिया गेट से अजय सेतिया / गुजरात के विधानसभा चुनाव में पहली बार कांग्रेस और भाजपा में बड़ी बगावत देखने को मिल रही है | कांग्रेस के पिछली बार चुने गए 19 विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं , इनमें से 17 को भाजपा ने टिकट दे दिया है, जबकि खुद के 38 विधायकों का टिकट काट दिया है, जिनमें चार तो मंत्री भी हैं, इनमें ज्यादातर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी की टिकट पर या निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं|

नरेंद्र मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद 2007 के विधानसभा चुनाव के समय भी भाजपा में ऐसी ही बगावत देखने को मिली थी, जब भाजपा के 17 विधायक बागी हो गए थे|गुजरात में भाजपा और कांग्रेस में बगावत का लंबा इतिहास रहा है| 1974 में चिमनभाई पटेल ने इंदिरा गांधी को दो टूक कह दिया था कि वह मुख्यमंत्री तय नहीं कर सकतीं, मुख्यमंत्री विधायक तय करेंगे, उन की इस धमकी के बाद सीक्रेट वोटिंग करवाई गई, वोटों का बक्सा दिल्ली ला कर गिनती की गई थी, जिसमें इंदिरा गांधी का उम्मीदवार कांतिलाल घिया सात वोट से हार गए और चिमनभाई मुख्यमंत्री बने|

गुजरात के नवनिर्माण आन्दोलन के कारण चिमनभाई को इस्त…

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Published: 16.Oct.2022, 19:08

इंडिया गेट से अजय सेतिया / सुप्रीमकोर्ट ने माओवादी साईबाबा और उसके चार साथियों को बरी किए जाने के मुम्बई हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा कर महाराष्ट्र सरकार ही नहीं केंद्र सरकार को भी बड़ी राहत दी है| सुप्रीमकोर्ट के इस फैसले के कुछ घंटों के भीतर ही टुकड़े टुकड़े गैंग ने सुप्रीमकोर्ट के खिलाफ प्रदर्शन किया| जिसमें जेएनयू और दिल्ली यूनिवर्सिटी में वामपंथी विचारधारा के शिक्षकों और आईसा से जुड़े 40-50 छात्रों ने भाग लिया| सीपीआई (लिबरेशन) का यह वही छात्र संगठन है जो नागरिकता संशोधन क़ानून के खिलासफ़ आन्दोलन में अग्रणी भूमिका निभा रहा था| छतीसगढ़ में नक्सली जब पुलिस कर्मियों की हत्या करते हैं , तो जेएनयू, दिल्ली यूनिवर्सिटी और जाधवपुर यूनिवर्सिटी में आईसा और अन्य वामपंथी संगठनों से जुड़े छात्र ही साईबाबा से प्रेरणा पा कर जश्न मनाया करते थे| साईबाबा भारत के टुकड़े टुकड़े गैंग के सरगना और अर्बन नक्सलियों के प्रेरणा पुरुष हैं|

इस से पहले कि जेएनयू में साईबाबा की रिहाई के आदेश का जश्न मनाया जाता, सुप्रीमकोर्ट ने मुम्बई हाईकोर्ट को फटकार लगाते हुए, साई बाबा की रिहाई पर रोक लगा दी| सुप्रीम…

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Published: 13.Oct.2022, 13:16

इंडिया गेट से अजय सेतिया / नीतीश कुमार वक्त वक्त पर राजनीतिक पाला ही नहीं बदलते रहे, विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय भी बदलते रहे हैं| वह मौक़ा देख कर चौका मारते हैं| जब भाजपा के साथ होते हैं , तो आएएसएस के खिलाफ कुछ नहीं बोलते, आरएसएस के कई कामों की तारीफ़ भी करने लगते हैं| लेकिन जब भाजपा के साथ नहीं होते तो उन्हें संघ और भाजपा में सब बुराईयाँ नजर आने लगती हैं| 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले वह भारतीय जनता पार्टी के साथ थे , तो एक न्यूज चेनल पर इंटरव्यू के दौरान उन से पांच मिनट तक संघ से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछे गए| एक बार भी उन्होंने संघ की बुराई नहीं की , अलबत्ता हर सवाल पर संघ के विस्तार ,संघ की संगठनात्मक क्षमता और देश के हर कौने में संघ के कार्यों की तारीफ़ के पुल बांधते रहे| उन्होंने यह जरुर कहा था कि उन्होंने संघ, मार्क्स और समाजवाद का सारा लिटरेचर 23 साल की उम्र में पढ़ लिया था| लेकिन गांधी , जेपी और लोहिया की विचारधारा से ज्यादा प्रभावित हुए| हैरानी वाली बात यह है कि उन्होंने जिस राम मनोहर लोहिया का जिक्र किया , वह लोहिया खुद 1960 के बाद संघ की विचारधारा से प्रभावित हो गए थ…

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Published: 12.Oct.2022, 10:39

अजय सेतिया | जस्टिस चन्द्रचूड को चीफ जस्टिस बनाए जाने का विभिन्न हिन्दू संगठन सोशल मीडिया पर विरोध कर रहे थे| विरोध का कारण सबरीमाला सहित उन की कुछ ऐसी जजमेंट थीं, जो हिन्दुओं के खिलाफ दी गईं थी| हालांकि यह विरोध सोशल मीडिया तक ही ज्यादा सीमित रहा| इस बीच दो बड़ी घटनाएं और हुई , जिन्होंने चीफ जस्टिस की नियुक्ति को सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया| पहली घटना 30 सितंबर की है, जब चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित ने सुप्रीमकोर्ट के चार जजों की नियुक्ति के लिए कोलिजियम की बैठक बुलाई थी| कोलिजियम में चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, एसके कौल, एस अब्दुल नजीर और केएम जोसेफ सदस्य हैं| जस्टिस चन्द्रचूड उस दिन जानबूझ कर रात दस बजे तक केसों की सुनवाई कर रहे थे, जबकि कोलिजियम की बैठक ज्यादा महत्वपूर्ण थी| इस से मेसेज यह गया कि वह इस लिए कोलिजियम की बैठक में नहीं गए, क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि मौजूदा कोलिजियम की इस बैठक में सुप्रीमकोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश भेजी जाए| चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित की यह अंतिम बैठक थी, क्योंकि 8 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं और रिटायमेंट के आख़िरी महीने…

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Published: 06.Oct.2022, 10:12

अजय सेतिया/ अगले महीने 8 नवम्बर को मौजूदा चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित रिटायर हो जायेंगे | चीफ जस्टिस के तौर पर उन्हें सिर्फ ढाई महीना काम करने का मौक़ा मिला| परंपरा यह है कि सरकार एक महीना पहले कोल्जिय्म से रिटायर हो रहे चीफ जस्टिस के उत्तराधिकारी का नाम पूछती है| 8 अक्टूबर के आसपास  सरकार कोलिजिय्म से आधिकारिक तौर पर पूछेगी| परंपरा के अनुसार कोलिजिय्म वरिष्ठतम न्यायधीश जस्टिस d.y चन्द्रचूढ़ का नाम भेजेगा| उन के नाम की सिफारिश से पहले ही हिंदूवादी संगठनों ने उन्हें चीफ जस्टिस बनाए जाने पर कड़ी आपत्ति जाहिर करना शुरू कर दिया है| हाल ही के उन के एक फैसले पर सोशल मीडिया में उन के खिलाफ जोरदार मुहीम चल रही है, जिस में उन पर व्यक्तिगत कटाक्ष भी किए जा रहे हैं | इसी बीच सोशल मीडिया पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी से अपील की जा रही है कि वे जस्टिस चन्द्र्चूद की चीफ जस्टिस के तौर पर नियुक्ति को रोकें| हालांकि 1998 के सुप्रीमकोर्ट के फैसले के बाद सरकार के पास उन्हे ही चीफ जस्टिस बनाने के  सिवा कोई चारा नहीं है| इस फैसले में सीनियर मोस्ट जस्टिस को चीफ जस्टिस बनाने की बात थी|…

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Published: 04.Oct.2022, 16:14

अजय सेतिया/ विधानसभा चुनाव से पहले जम्मू कश्मीर में बड़ा बदलाव हो रहा है| अब्दुल्ला और मुफ्ती परिवार मुस्लिम वोट बैंक के जरिए सत्ता हथियाने के पुराने फार्मूले पर ही अटकी पड़ी हैं| दोनों 370 और 35 ए की वापसी को ही उन की सत्ता वापसी की गारंटी मान कर आन्दोलन चला रही हैं| उधर मोदी सरकार ने भारत की इस एक मात्र मुस्लिम स्टेट को इन दो परिवारों की गिरफ्त से निकालने के लिए नए नए प्रयोग शुरू कर दिए हैं| पहला प्रयोग तो जम्मू कश्मीर की 16 विधानसभा सीटों को आरक्षित करना है| जिनमें से 9 एसटी वर्ग के लिए और 7 एससी वर्ग के लिए हैं| परिसीमन आयोग की उस रिपोर्ट का गजट नोटिफिकेशन हो गया है जिसमें एसटी-एससी वर्ग के लिए सीटें आरक्षित की गई हैं| यहाँ महत्वपूर्ण यह है कि जम्मू कश्मीर में पहली बार एससी - एसटी के लिए सीटें रिजर्व की गई हैं| अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सभी सात सीटों पर भाजपा की दावेदारी सब से ज्यादा मजबूत होगी, क्योंकि उन्हें तो वोट का अधिकार ही पहली बार मोदी सरकार ने दिया है|

जहां तक एसटी सीटों का सवाल है, 1991 में कश्मीर घाटी से हिन्दुओं के पलायन होने के बाद तब की चन्द्र शेखर…

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Published: 02.Oct.2022, 14:32

अजय सेतिया / एक समय था जब भारतीय जनता पार्टी महाराष्ट्र के दिग्गज खिलाड़ी शरद पवार को अपने साथ लाना चाहती थी| शरद पवार को 2014 से ही संकेत दिए जाते रहे| 2014 में लोकसभा चुनावों के बाद हुए विधानसभा चुनावों में गठबंधन तोड़ कर भाजपा और शिव सेना अलग अलग अलग लड़े थे| भाजपा 122 सीटों के साथ सब से बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी थी| तब जब उद्धव ठाकरे भाजपा पर ढाई ढाई साल मुख्यमंत्री का दबाव बना रहे थे, तो एनसीपी ने भाजपा को बाहर से समर्थन का एलान किया था| इस दबाव के बाद ही उद्धव ठाकरे ने भाजपा को समर्थन दिया था| 2019 के विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद भी जब उद्धव ठाकरे ने ढाई ढाई साल की शर्त रखी , तो भाजपा ने एक बार फिर शरद पवार से समर्थन माँगा, और बदले में उन्हें केंद्र सरकार में कृषि मंत्री बनाने की पेशकश भी की थी| यह बातचीत अभी अधूरी थी कि शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने भाजपा से उप मुख्यमंत्री पद हासिल कर के भाजपा-एनसीपी की साझा सरकार बना ली थी| शरद पवार उस समय डबल गेम कर रहे थे , एक तरफ अजीत पवार को भाजपा के साथ भेज दिया था, दूसरी तरफ खुद शिवसेना और कांग्रेस के साथ मिल कर महाअघाडी सरकार बन…

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