India Gate Se

Published: 02.Dec.2019, 13:35

अजय सेतिया / क्या महाराष्ट्र विधानसभा का सचिवालय उद्धव ठाकरे को सहयोग नहीं कर रहा | वरना विशवास मत के समय नियमों की इतनी गलतियाँ नहीं होती | वैसे भाजपा के पास वाक आऊट के सिवा कोई विकल्प ही नहीं था ,क्योंकि सत्ता उन के दरवाजे से वापस चली गई है | वाक आऊट से पहले देवेन्द्र फडणविस ने उन नियमों का हवाला दिया , जिन की अवहेलना की गई है | बाहर निकल कर उन्होंने मीडिया के सामने वे सब गलतियाँ गिनाईं , फिर वे राज भवन में शिकायत करने भी गए | हालांकि इस शिकायत का कोई फायदा नहीं होना , क्योंकि एक गलती तो खुद राज्यपाल से भी हुई है | राज्यपाल से गलती यह हुई कि उन्होंने नए मुख्यमंत्री की सिफारिश पर प्रोतेम स्पीकर ही बदल दिया , जब कि संसदीय इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था | राज्यपाल प्रोटेम स्पीकर बदलने से इनकार कर सकते थे | अमूमन प्रोटेम स्पीकर में राजनीतिक दल की भूमिका नहीं होती | विधानसभा सचिवालय वरीयता के हिसाब से तीन चार वरिष्ठ विधायकों की सूची राज्यपाल को सौंपता है , जिन में से प्रोटेम स्पीकर नियुक्त करने का अधिकार राज्यपाल का होता है |

बाकी चार गलतियाँ सचिवालय की ओर से उद्धव…

और पढ़ें →
Published: 26.Nov.2019, 16:31

अजय सेतिया / हूँ-ब-हूँ कर्नाटक दोहराया गया | कर्नाटक में भी सुप्रीमकोर्ट ने ऐसे ही बी.एस.येद्दियुरप्पा को 24 घंटे में बहुमत साबित करने को कहा था | कर्नाटक विधानसभा की 224 सीटें हैं और भाजपा को 104 सीटें मिलीं थी , बहुमत के लिए सिर्फ 8 विधायक चाहिए थे | खरीद-फरोख्त की बहुत कोशिश हुई , कांग्रेस-जेडीएस के कुछ विधायक मुम्बई भेजे भी गए | पर आठ विधायक नहीं जुट पाए थे , इसलिए 24 घंटे बाद 19 मई 2018 को शाम चार बजे मतविभाजन से पहले भावुक भाषण दे कर इस्तीफा दे दिया था | अब कर्नाटक में भी वही हुआ , भाजपा जिस अजित पवार को तोड़ कर लाई थी , वह बहुमत के लिए वांछित 40 विधायक नहीं जुटा पाए , पांच दिन तक भाजपा की जलालत करवा कर खुद ही उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर चले गए  | तब देवेन्द्र फडणविस  के पल्ले भी क्या बचा था , वह भी इस्तीफा देने को मजबूर हुए | उन्होंने येद्दियुरप्पा की तरह विधानसभा में भाषण देने की हिम्मत भी नहीं की, मीडिया के सामने ही अपनी नाकामी का भाषण दे कर  इस्तीफा दे दिया |

कर्नाटक में तो चोट खाए येद्दियुरप्पा ने आखिरकार कांग्रेस के 15 विधायक तोड़ कर अपनी…

और पढ़ें →
Published: 26.Nov.2019, 10:24

अजय सेतिया / शनिवार रात को सुप्रीमकोर्ट की दहलीज पर जाने और रविवार को अदालत  खुलवाने वाली शिवसेना को सोमवार को भी कोई राहत नहीं मिली | मंगलवार को कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी , ऐसा लगता है कि कोर्ट 30 नवम्बर तक ही बहुमत साबित करने के लिए कहेगी | वह इस लिए क्योंकि अगर 27 नवम्बर को सदन की कार्यवाही शुरू होती है तो कम से कम 3 दिन तो 288 विधायकों की शपथ ग्रहण में लगेंगे | 30 नवम्बर ही राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी ने बहुमत साबित करने के लिए तय किया था | यानी शिवसेना को कोर्ट जाने का कोई लाभ नहीं हुआ, इस से पहले जब राज्यपाल ने शिवसेना को दावा पेश करने की मोहलत बढाने से इनकार कर दिया था , तब भी वह भागी भागी सुप्रीम कोर्ट गई थी , लेकिन कपिल सिब्बल न शिवसेना को ज्यादा मोहलत दिला सके न राज्यपाल को राष्ट्रपति राज लागू करवाने से रोक सके | हालांकि उन्होंने राज्यपाल की आलोचना जम कर की थी |

अब भी दोनों दिन सुनवाई के समय राज्यपाल कपिल सिब्बल के निशाने पर रहे , लेकिन सिब्बल को जजों की डांट खानी पड़ी | सोमवार को कोर्ट ने साफ़ साफ़ कह दिया कि राज्यपाल के अधिकार पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे |…

और पढ़ें →
Published: 24.Nov.2019, 15:35

अजय सेतिया / दस नवम्बर 2019 और 23 नवम्बर की स्थिति में कोई अंतर नहीं आया है | फिर सवाल खड़ा होता है कि देवेन्द्र फडणविस ने दस नवमबर को मुख्यमंत्री पद पर दावा क्यों नहीं किया था और 23 नवम्बर को क्यों किया | फर्क सिर्फ इतना था कि 54 सदस्यीय राष्ट्रवादी कांग्रेस विधायक दल के नेता अजित पवार ने अपनी पार्टी को धोखा देते हुए देवेन्द्र फडणविस को समर्थन की चिठ्ठी दे दी थी | यह चिठ्ठी दस नवम्बर को देवेन्द्र फडणविस के पास नहीं थी | लेकिन तब राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी ने उन से समर्थन की चिठ्ठियाँ लाने को कहा भी नहीं था | देवेन्द्र फडणविस को अगर शपथ ही लेनी थी , तो राज्यपाल से कह देते कि वह बहुमत साबित कर देंगे | राज्यपाल सब से बड़े दल के नाते उन्हें सरकार बनाने का न्योता दे देते , जैसे मई 2018 में कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाईवाला ने येद्दुरप्पा को बहुमत नहीं होने के बावजूद मौक़ा दे दिया था | महाराष्ट्र की स्थिति तो कर्नाटक से बेहतर थी , क्योंकि कर्नाटक में तो तब तक कांग्रेस-जनता दल एस का गठबंधन हो चुका था और उन के पास बहुमत था , जबकि 9 नवम्बर को जब भगत सिंह कोशियारी ने देवेन्द्र फडणविस से पू…

और पढ़ें →
Published: 24.Nov.2019, 11:43

अजय सेतिया / एनसीपी-शिवसेना-कांग्रेस की मीटिंग शुक्रवार शाम 8 बजे खत्म हुई , 9 बजे शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने अपने ट्विटर हैंडल पर मीटिंग के चार फोटो पोस्ट किए | साढे नौ बजे भाजपा विधायक दल के नेता देवेन्द्र फडनवीस और एनसीपी विधायक दल के नेता अजित पवार ने राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी से मिल कर दावा पेश किया | केंद्र को संदेश पहुंचा , रात को केबिनेट की आपात बैठक हुई और सुबह 5.47 पर राष्ट्रपति भवन के फरमान से राष्ट्रपति राज खत्म कर दिया गया | साढे  छह बजे शरद पवार को सूचना गई कि आठ बजे राजभवन में भाजपा-एनसीपी सरकार का शपथ ग्रहण है | सुबह 8 बज कर 4 मिनट पर देवेन्द्र फडनवीस ने मुख्यमंत्री और अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद और गोपनीयताकी शपथ ले ली |

महाराष्ट्र में 1978 दोहराया गया , जब शरद पवार ने कांग्रेस के सिर्फ 12 विधायकों के साथ दलबदल कर वसंत दादा पाटिल की सरकार का तख्ता पलट कर जनता पार्टी के साथ साझा सरकार बना ली थी | शुक्रवार रात को 9 बजे तक शरद पवार का भतीजा उन के साथ था और साढ़े नौ बजे देवेन्द्र फडनवीस के साथ | शनिवार को एनसीपी-शिवसेना-कांग्रेस की बैठक के बा…

और पढ़ें →
Published: 21.Nov.2019, 13:20

अजय सेतिया / खुले और यहाँ तक की संकुचित विचारों वाले हिन्दुओं ने भी बनारस हिन्दू विश्व विद्यालय में चल रहे संस्कृत छात्रों के उस आन्दोलन का विरोध किया है , जो उन्होंने मुस्लिम अध्यापक की नियुक्ति के खिलाफ शुरू किया है | अपन ने भी शुरू एन आन्दोलन का विरोध किया | नए तथ्य सामने आने के बाद हिन्दू समाज को अपने विरोध पर पुनर्विचार की जरूरत है | मुस्लिम अध्यापक की नियुक्ति का विरोध कर रहे छात्र शुरू में अपनी बात स्पष्ट नहीं कर सके , या मीडिया के एक वर्ग ने जानबूझ कर कुछ तथ्यों को छुपा कर हिन्दू मुस्लिम का विवाद बनाया | अब जो बातें सामने आई हैं , उन के मुताबिक़ बीएचयू में संस्कृत से जुड़े दो विभाग हैं , जहां तक संस्कृत भाषा का सवाल है वह कला संकाय के अंतर्गत आता है , जहां संस्कृत पढाई जाती है | जिस विभाग में डा. फिरोज खान की नियुक्ति हुई है , वह संस्कृत विभाग नहीं है , अलबत्ता संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान विभाग है , जहां हिन्दू धर्म और उस के कर्मकांडों की शिक्षा दी जाती है , ताकि वे अध्ययन के उपरान्त हिन्दुओं के कर्मकांड करवा सकें |

उपरोक्त तथ्यों से जाहिर है कि यह हिन्दू मुस्लि…

और पढ़ें →
Published: 20.Nov.2019, 14:26

अजय सेतिया / शिव सेना के सांसद संजय राउत ने सही तो कहा है कि शरद पवार को समझने में सौ जन्म लगेंगे | अच्छी भली एनसीपी-शिवसेना-कांग्रेस की सरकार बनने की बात चल रही है | इसी बीच शरद पवार जब साझा सरकार बनने सम्बन्धी शिवसेना के इस दावे पर हैरानी प्रकट करें और मीडिया से कह दें कि उनकी तो सोनिया गांधी से महाराष्ट्र में साझा सरकार बनाने के मुद्दे पर कोई बात नहीं हुई , तो स्वाभाविक है कि शरद पवार को समझना आसान नहीं | सोमवार को सोनिया गांधी से मुलाक़ात के बाद जब शरद पवार ने ये बातें कहीं थी तो भाजपाईयों के चेहरे खिल उठे थे | अपन को भी तब भाजपा के कई नेताओं का फोन आया , तो अपन ने भी उन्हें यही बात कही थी , जो संजय राउत ने कही है | शरद पवार कोई इतने सरल राजनीतिग्य नहीं हैं , वह बिना नफा-नुक्सान सोचे कोई कदम नहीं उठाते और कोई भी कदम जल्दबाजी में तो कतई नहीं उठाते | वह तो आप शिवसेना को 27 दिन से लटकाए रखने से समझ ही सकते हैं |

अब अचानक सुगबुगाहट चल रही है कि शिवसेना की भाजपा से गुपचुप बात चल रही है | यह बात अपने पल्ले नहीं पडती , क्योंकि शरद पवार की कोई बात मोदी या अमित शाह के स्तर…

और पढ़ें →
Published: 19.Nov.2019, 23:31

छात्रों के नारे देख कर कोई भी अनुमान लगा सकता है कि होस्टल की फीस वृद्धि तो एक बहाना है , छात्रों को मोदी सरकार के खिलाफ संसद घेरने के लिए इस्तेमाल किया गया | एक टीवी बहस में वामपंथी प्रतिनिधि इफरा ने दो टूक शब्दों में कह दिया कि दिल्ली की सडकों पर छात्रों का गुस्सा असल में 370 हटाए जाने के खिलाफ है |

 

अजय सेतिया / सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी और सीपीआई के महासचिव डी.राजा ने कहा है कि जेएनयू के छात्रों पर जिस तरह लाठीचार्ज हुआ है उस ने आपातकाल की याद ताज़ा कर दी है | यह कह कर इन दोनों ने खुद को आपातकाल से लड़ने वाले योद्धाओं की तरह पेश किया है | सब जानते हैं कि सोवियत संघ के इशारे पर सीपीआई और उस के स्टूडेंट विंग आल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन ने आपातकाल का समर्थन किया था | जेएनयू में भी एआईएसऍफ़ ने चुप्पी साध ली थी | सीपीएम ने जरुर आपातकाल का विरोध किया था , लेकिन वह भी इतना नहीं था कि उस के नेता खुद को आपातकाल से लड़ने वाला योद्धा कह सकें | सीताराम येचुरी तो उस समय जेएनयू के छात्र थे , क्या वह बता सकते हैं कि वह किस जेल में थे , या उन्होंने किस दिन जेएनयू…

और पढ़ें →
Published: 12.Nov.2019, 15:27

राज्यपाल ने न तो शिवसेना को ज्यादा मोहलत दी और न ही बाद में एनसीपी को दी गई 24 घंटे की मोहलत बढाई अलबत्ता राष्ट्रपति राज की सिफारिश कर दी | हालांकि राष्ट्रपति राज में भी तीनों को मिल कर दावा पेश करने का कानूनी हक है |

 अजय सेतिया / भाजपा–शिवसेना का तलाक हो गया है | भाजपा दीवार पर लिखी इबारत नहीं पढ़ सकी | वाजपेयी के जमाने में भाजपा कहा करती थी कि कांग्रेस अपने सहयोगियों को खा जाती है | इसलिए उस का कुनबा नहीं बढ़ता , जबकि भाजपा अपने सहयोगियों की कीमत पर अपना प्रभाव क्षेत्र बढाने की कोशिश नहीं करती | मोदी-अमित शाह के जमाने में भाजपा में कांग्रेस के गुण आ गए हैं | शिव सेना के भडकने के अनेक कारणों में से एक कारण यह भी है | इस की पृष्ठभूमि समझने के लिए अपन को जरा पीछे जाना पड़ेगा | भिवंडी के दंगों में अगर शिवसेना न होती तो मुम्बई में रहने वाले गुजराती व्यापारी समाज के जान माल नहीं बचते | श्रीकृष्णा आयोग की रिपोर्ट में बाला साहिब ठाकरे , नारायण राणे और छगन भुजबल के नामों का जिक्र है | शरद पवार ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में श्रीकृष्णा आयोग की रिपोर्ट को खारिज कर दिया था…

और पढ़ें →
Published: 11.Nov.2019, 18:12

अजय सेतिया / भाजपा–शिवसेना का तलाक हो गया है | भाजपा दीवार पर लिखी इबारत नहीं पढ़ सकी | वाजपेयी के जमाने में भाजपा कहा करती थी कि कांग्रेस अपने सहयोगियों को खा जाती है | इसलिए उस का कुनबा नहीं बढ़ता , जबकि भाजपा अपने सहयोगियों की कीमत पर अपना प्रभाव क्षेत्र बढाने की कोशिश नहीं करती | मोदी-अमित शाह के जमाने में भाजपा में कांग्रेस के गुण आ गए हैं | शिव सेना के भडकने के अनेक कारणों में से एक कारण यह भी है | इस की पृष्ठभूमि समझने के लिए अपन को जरा पीछे जाना पड़ेगा | भिवंडी के दंगों में अगर शिवसेना न होती तो मुम्बई में रहने वाले गुजराती व्यापारी समाज के जान माल नहीं बचते | श्रीकृष्णा आयोग की रिपोर्ट में बाला साहिब ठाकरे , नारायण राणे और छगन भुजबल के नामों का जिक्र है | शरद पवार ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में श्रीकृष्णा आयोग की रिपोर्ट को खारिज कर दिया था |

महाराष्ट्र की राजनीति के जानकार मानते हैं कि एक समय में बाला साहिब ठाकरे और शरद पवार के बहुत अच्छे सम्बन्ध रहे हैं | बाद में इन के साथ प्रमोद महाजन भी जुड़ गए थे | बाला साहिब का मुख्य प्रभाव क्षेत्र मुम्बई तक सीमित था और उन…

और पढ़ें →