India Gate Se

Published: 11.Feb.2021, 09:32

अजय सेतिया  / अपन को मोदी की सब से अच्छी बात यह लगी कि ब्यूरोक्रेसी के बारे में उन की आँखे खुलने लगी है | उनके रूख में परिवर्तन होने लगा है | अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों और पार्टी नेताओं के मुकाबले ब्यूरोक्रेसी को ज्यादा महत्व देने पर अपन हमेशा आलोचक रहे हैं | अपन इसी कालम में लिख चुके हैं कि सामान्य स्नातक की डिग्री ले कर आईएएस बनने वाले किसी भी विषय के विशेषग्य नहीं होते , लेकिन दुर्भाग्य यह है कि उन्हें ही सब विषयों का विशेषग्य माना जाता है | इतना ही नहीं , रिटायरमेंट के बाद भी उन्हें विशेषग्य के तौर पर मंत्रालयों में सलाहाकार नियुक्त कर दिया जाता है , यह परम्परा मोदी के राज में बढी है | मोदी ने ज्वाईट सेक्रेटरी लेवल पर सीधी भर्ती का एलान किया था , लेकिन एक नियुक्ति के बाद ही ब्यूरोक्रेसी के दबाव में आ गए थे | अपन सब जानते हैं कि देश के सारे पीएसयू का भठ्ठा बिठाने में उन्हीं ब्यूरोक्रेट्स की भूमिका है | मोदी ने जब ब्यूरोक्रेट्स को दूध देने वाले पीएसयू को बेचना शुरू किया तो ब्यूरोक्रेसी का सच उन के सामने आने लगा है , क्योंकि वे कांग्रेस और मीडिया के माध्यम से विरोध खड़ा…

और पढ़ें →
Published: 09.Feb.2021, 19:58

अजय सेतिया / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिर्फ अपना हुलिया नहीं बदला , मिजाज भी बदल लिया है | पिछले दो दिन से राज्यसभा में बदले बदले से नजर आए | सोमवार को जब राष्ट्रपति के अभिभाषण का जवाब देते हुए वह कृषि कानूनों की वकालत कर रहे थे , तो 26 जनवरी को लाल किले पर तिरंगे का अपमान होने के बावजूद गुस्से में नहीं थे | रिहाना, ग्रेटा, सुसेन के ट्विटो से किसान आन्दोलन के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ जाहिर हो जाने के बावजूद उन का लहजा विनम्रता वाला था | इन्हीं सब को उन्होंने फारेन डिसट्रेकटिव आइडियोलोजी बताते हुए , इन से देश को सावधान रहने को कहा | जिस बात को अपन कई दिन से लिख रहे थे कि मोदी विरोधी पिछले छह साल से हर आन्दोलन में दिख रहे हैं , उसे उन्होंने जन्मजात आंदोलनजीवी का नाम दे कर बेनकाब भी किया |

26 जनवरी की घटना के बाद अपन ने 28 जनवरी को लिखा था-“ क्या आप इसमें समानता नहीं देखते कि 2014 के बाद से हर सरकार विरोधी आन्दोलन का चेहरा रहे जेएनयूवादी वामी योगेन्द्र यादव , अरुंधती राय , कविता कृष्णन , प्रशांत भूषण , हन्नान मौला किसान आन्दोलन को भी भटका रहे थे |” इन्हीं सब की ओर…

और पढ़ें →
Published: 08.Feb.2021, 20:15

अजय सेतिया / शुरुआती तौर पर कुछ वैज्ञानिकों का आकलन है कि द्रोणागिरी ग्लेशियर फटने का एक कारण कोरोना का असर भी हो सकता है | इसे अपन क्रमवार समझने की कोशिश करते हैं | आप को याद होगा कि लाकडाउन के समय जलवायु में परिवर्तन आया और पर्यावरण बहुत शुद्ध हो गया था , पंजाब , हरियाणा , हिमाचल और उत्तर प्रदेश के कई शहरों से हिमालय की बर्फीली चौटियाँ दिखने लगी थी | इस पर्यावरण शुद्धि का असर यह हुआ कि इस बार हिमालियाई क्षेत्रों में बर्फ भी ज्यादा पड़ी है | चार फरवरी को ही 15 से 18 हजार फीट ऊपर वाले ग्लेशियरों में खूब बर्फ पड़ी | सूरज की ज्यादा तपिश के चलते ग्लेशियर की बर्फ न सिर्फ बहुत तेजी से पिघली बल्कि ग्लेशियर के ऊपरी हिस्से में जमी बर्फ ज्यादा होने के चलते खिसकी | जिससे हिमनदों के निचले हिस्से में जमें पानी के स्रोत टूट गए और तीव्र गति से धौलगंगा नदी में बह गए | शुरुआती आकलन तो यह था कि ऋषिकेश और हरिद्वार भी तक तबाही होगी , यह सुन कर ही भारत के जनमानस में 2013 की याद ताजा हो गई थी , जिसमें हजारों लोग मारे गए थे | लेकिन इसे ईश्वर की कृपा ही माननी चाहिए कि उत्तराखंड के श्रीनगर में आते…

और पढ़ें →
Published: 06.Feb.2021, 14:37

अजय सेतिया / किसान आंदोलन के नाम पर भारतीय लोकतंत्र को बर्बाद करने की अंतरराष्ट्रीय साजिश खुलकर सामने आ गई है | नागरिकता संशोधन क़ानून के खिलाफ चले आन्दोलन के पीछे भी विदेशी साजिश थी , यह बात दिल्ली पुलिस ने पिछले साल 25 जून को अदालत में कही थी | सीएए के खिलाफ आन्दोलन विफल होने बाद विदेशी ताकतें नए मौके की तलाश में थीं , जो उन्हें तीन कृषि कानूनों से मिल गया , जिस के खिलाफ पंजाब के किसान आंदोलित थे | सीएए के खिलाफ मुस्लिम देशों को इस्तेमाल किया गया था | जिन में एक मुस्लिम देश की राजकुमारी भी अभियान में शामिल हुई थी | अब कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आन्दोलन के बहाने साजिश का दायरा बढ गया है | अब अलग अलग देशों की अंतर्राष्ट्रीय सेलिब्रिटीज का इस्तेमाल किया जा रहा है | हालीवुड की गायिका रिहाना , मियाँ खलीफा ,स्वीडन की 18 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग के बाद अमेरिकी हिरोइन सुसेन का ट्विट भी इस का प्रमाण है |

ग्रेटा थनबर्ग की टीम ने गलती से अपनी ट्विट के साथ आन्दोलन की सारी रणनीति का प्रारूप ही नत्थी कर दिया था,  जिस से भारत और मोदी सरकार विरोधी ताकतों की अंत…

और पढ़ें →
Published: 03.Feb.2021, 20:21

अजय सेतिया / आंदोलनकारी किसान अब थकने शुरू हो गए हैं | हाईवे और इंटरनेट बंद होने से जनता परेशान है , तो 26 जनवरी के बाद यूपी, हरियाणा सरकारों की सख्ती से किसानों का हगना मूतना भी मुश्किल हो गया है | उन्हें खुले में शौच करना पद रहा है | बुधवार को जींद में हुई किसान महापंचायत में पारित पांच सूत्रीय प्रस्ताव में प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से अपील की गई है कि वे खुद किसानों से बात करें | इस महापंचायत में राकेश टिकैत भी शामिल थे | राकेश टिकैत ने दो दिन पहले ही कहा है कि वह प्रधानमंत्री को झुकाना नहीं चाहते , न ही किसानों को झुका हुआ देखना चाहते हैं , कोई बीच का रास्ता निकलना चाहिए | बातचीत का दरवाजा खोलते हुए महापंचायत ने थकने के संकेत तो दिए हैं , झुकने के संकेत नहीं दिए , बाकी चार मांगें जस की तस हैं | तीनों कानूनों की वापसी , एमएसपी पर क़ानून , स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट और किसानों पर दायर केस वापस | खैर 26 जनवरी को गिरफ्तार किसानों की रिहाई बुधवार को शुरू हो गई |  

लेकिन टिकैत के बीच बचाव वाले बयान से भयभीत कांग्रेस के पूर्व और भावी अध्यक्ष राहुल गां…

और पढ़ें →
Published: 28.Jan.2021, 19:38

अजय सेतिया / अपन ने जब नवंबर में ही कहा था कि यह पंजाब के समृद्ध  किसानों का आंदोलन है । और किसान भी ऐसे जिन की अपनी आढ़त की दूकानें है । और सरकारी खरीद एजेंसियों के अफसरों से गठजोड़ कर के छोटे किसानों का शोषण करते हैं । तो भाजपा के ही एक जाट किसान नेता ने टीवी चैनल पर अपन को भला बुरा कहा था । किसानों की कुछ मांगे जायज है। तीनों कानूनों में खामियां भी भरपूर है। उस के दूरगामी नतीजे भी भयानक होंगे । तीनों कानूनों से किसानों का भले कोई नुक्सान नहीं । पर कारपोरेट घरानों की पांचों उंगलियां घी में होंगी । दूसरी तरफ सच यह भी है कि आंदोलन की रूपरेखा बहुत गहरी थी । अनेक शक्तियों ने मिलकर साजिश रची थी । दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों ने पिछले कई सालों से जमीन पर काम किया था । विदेशों में बैठे खालिस्तानी खाद पानी डाल रहे थे । सरकारी अमले से मिलीभगत कर आढ़त से हजारों करोड़ की कमाई करने वाले बड़े किसान आंदोलन की रीढ़ की हड्डी बने । जो छोटे किसानों से एमएसपी से कम भाव पर गेहूं चावल ले कर सरकार को एमएसपी रेट पर बेचने का गौरखधंधा करते हैं । भाजपा, कांग्रेस, अकाली हर पार्टी का नेता इस लूट म…

और पढ़ें →
Published: 28.Jan.2021, 13:57

अजय सेतिया / राकेश टिकैत और योगेंद्र यादव जैसे इक्का दुक्का यूपी हरियाणा के चेहरे किसान आंदोलन में न होते तो यह पंजाब के जाट सिखों का ही आंदोलन है। महेंद्र सिंह टिकैत के बेटे राकेश टिकैत ने पहले तीनों कानूनों का समर्थन किया था । टिकैत बाप बेटे की कांग्रेस से नजदीकी रही है । पंजाब के किसान संगठनों ने पंजाब के फिल्मी चेहरे दीप संधू पर हिंसा करवाने और ट्रैक्टर रैली को जबरदस्ती लालकिले पर ले जाने का आरोप लगाया है । इस की वजह यह है कि दीप संधू के बहाने भाजपा और सरकार को कटघरे में खडा किया जा सकता है । दीप संधू ने गुरदासपुर में भाजपा उम्मीदवार सन्नी देओल के लिए प्रचार किया था। लालकिले की प्राचीर ,जहां से प्रधानमंत्री स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराते हैं । वहां सिखों के धार्मिक निशान साहिब का झंडा फहराया गया , दीप संधू ने वहीं पर खड़े हो कर फेसबुक लाईव किया था । 

राकेश टिकैत के ऐसे अनेक वीडियो सामने आ चुके हैं , जिनमें उन्होंन…

और पढ़ें →
Published: 27.Jan.2021, 10:58

अजय सेतिया / गणतंत्र दिवस पर जो कुछ दिल्ली में हुआ , वह होना ही था, इसके संकेत शुरू से मिल रहे थे । 26 नवंबर को हरियाणा से गुजरते हुए पंजाब के किसानों ने पुलिस के बैरिकेड तोडते हुए जो तांडव दिखाया था , वह संकेत काफी था । इससे पहले जिस तरह दो महीने तक पंजाब में ट्रेनें नहीं चलने दी गई थी तो वह संकेत भी काफी था । उसी समय जब इंटरनेट और मोबाइल फोन के 1500 से ज्यादा टावर तोड दिए गए थे तो वह संकेत भी काफी था । भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने ट्रैक्टर रैली से ठीक पहले देश और सरकार से वायदा किया था कि रैली शांतिपूर्वक होगी । वह शुरू से ही आंदोलन के पीछे खालिस्तानियों और कम्युनिस्टों नकस्लियों का हाथ होने का खंडन कर रहे थे । पंजाब से बाहर के वही एक किसान नेता थे , जो आंदोलन के पीछे किसी राजनीतिक साज़िश से इंकार करते हुए कहते थे कि यह आंदोलन को बदनाम करने की सरकारी साजिश है ।अब जब आज़ादी के बाद पहली बार आजादी के प्रतीक लालकिले पर हिंसक ट्रैक्टर रैली हो गई है , तो उन्होंने ही सब से पहले कहा कि कुछ राजनीतिक तत्वों ने रैली में घुस कर हिंसा की । जबकि अपन और अपन जैसे अनेकों पत्र…

और पढ़ें →
Published: 22.Jan.2021, 20:49

अजय सेतिया / किसान नहीं माने , उन का कहना है कि एमएसपी पर कमेटी बनाने से बात नहीं बनेगी क्योंकि स्वामीनाथन कमेटी का हश्र वे पहले ही देख चुके हैं | डेढ़ साल तक कृषि क़ानून स्थगित करने पर भी किसान सहमत नही हुए , हालांकि इस मुद्दे पर किसान नेताओं में फूट है , योगेन्द्र यादव , हन्नान मौला,दर्शन सिंह टाईप वामपंथियों ने बात नहीं बनने दी | फिलहाल बातचीत टूट गई है ,तो कांग्रेस ने अपनी कार्यसमिति बैठक में कृषि कानूनों को लेकर मोदी पर पूंजीपतियों के लिए काम करने का आरोप लगाया है | कांग्रेस को पता है कि मोदी बुरी तरह घिर गए हैं , 2015 में भी वह कृषि भूमि अधिगृहण के मुद्दे पर घिरे थे और उस के बाद किसानों के मुद्दे पर ही अब दुबारा घिरे हैं | इस लिए कांग्रेस ने आंदोलनकारी किसानों की पीठ थपथपाई | पर मोदी इन बातों से बेखबर से दिखते हैं , वह अपनी राजनीतिक गोटियाँ अपने ढंग से चलते रहते हैं | उन्होंने एक बार कहा था कि मेरा क्या है , मैं अपना झोला-कमंडल उठा कर चला जाउंगा | अब तो उन्होंने बाबाओं वाली दाढी भी बढा ली है | लेकिन झोला उठाने के कुछ और भी मतलब हैं | उन्होंने किसानों के हित में क़ानून बना…

और पढ़ें →
Published: 21.Jan.2021, 21:27

अजय सेतिया / डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के नस्लवादी श्वेतों को हवा दे कर अश्वेतों को अपने खिलाफ कर लिया था | भारतीय न श्वेतों में आते हैं , न अश्वेतों में , लेकिन जो बाइडेन ने कमला देवी हैरिस को अपना उपराष्ट्रप्ति पद का उम्मीन्द्वार बना कर भारतीय मूल के अमेरिकियों को अपने पाले में कर लिया था | हालांकि बाइडेन की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति भारतीयों के अनुकूल नहीं है , फिर भी भारतीय मूल के हिन्दू वोटर उन के साथ जुड़ गए | बाइडेन की मुस्लिम तुष्टिकरण वाली नीति के कारण पाकिस्तान मूल के अमेरिकी मुस्लिम भी बाइडेन के पक्ष में आ गए | बाइडेन ने अपनी राजनीतिक चाल से एशियाई देशों के हिन्दुओं और मुसलमानों को अपने पक्ष में कर के ट्रंप को मात दे दी , जो मुस्लिम आतंकवाद के खिलाफ जंग लड रहे थे | बाइडेन ने शपथ के दौरान अपने भाषण में नस्लीय भेदभाव को खत्म करने की बात करते हुए कहा कि अमेरिका एक महान देश है और लोकतंत्र को मजबूत करते हुए अब एकता के साथ आगे बढ़ने का समय है |

बाइडेन ने बात तो नस्लीय भेदभाव खत्म करने की , लेकिन जैसा कि अपन ने लिखा था उन्होंने आग से खेलना शुरू कर दिया है | शपथ ले…

और पढ़ें →