अवार्ड वापसी गैंग को अब लगता है अदालत का दुरूपयोग

Publsihed: 09.Oct.2019, 10:27

नई दिल्ली ( समीक्षा ) आतंकवादियों और बलात्कारियों को बचाने के लिए अदालत का दुरूपयोग करने वाले अवार्ड वापसी गैंग को लगता है कि उन के खिलाफ अदालत का दुरूपयोग हो रहा है | किसी न किसी बहाने मोदी सरकार को घेरने के लिए नए नए मुद्दे ढूँढने वाले इस गैंग के खिलाफ एक अदालत ने इस लिए ऍफ़आईआर दायर करने के आदेश दिए थे , क्योंकि भारत को विदेशों में बदनाम करने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री को माब लिंचिंग के मुद्दे पर चिठ्ठी लिख कर उसे अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में प्रचारित किया |

इमरान ने इस्लामोफोबिया से क्या पाया 

Publsihed: 05.Oct.2019, 17:47

अजय सेतिया / अब जब गर्द बैठ गई है तो इस्लामिक दुनिया में इमरान खान के संयुक्त राष्ट्र में दिए गए भाषण की समीक्षा शुरू हो गई है | यह भी समीक्षा की जा रही है कि इमरान खान की भरसक कोशिश के बावजूद 58 मुस्लिम देशों में से सिर्फ दो टर्की और मलेशिया ही इस्लाम के नाम पर पाकिस्तान के साथ क्यों खड़े हुए | असल में अब खुलासा यह हो रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से इस्लामिक आतंकवाद के साथ सीधे संघर्ष की घोषणा के बाद इस्लामिक मुल्क अमेरिका के साथ सीधे टकरा

क्या पाकिस्तान की पत्रकारिता हम से बेहतर है

Publsihed: 05.Oct.2019, 01:06

अजय सेतिया / पाकिस्तान के टीवी चेनलों को देख कर लगने लगा है कि पाकिस्तान की पत्रकारिता हम से बेहतर होने लगी है | वह इस लिए कि पाकिस्तान के मंत्रियों को सामने बैठ कर उन की धुनाई की जाती है | मंत्री भी उसी तीखे अंदाज में जवाब देते हैं या सवाल से कन्नी काट लेते हैं , लेकिन इंटरव्यू से उठ कर नहीं जाते | यानी दोनों तरफ से पेशेवाराना ईमानदारी बनी हुई है , पेशेवाराना ईमानदारी यह है कि पारदर्शिता का सम्मान | शुक्रवार को पाकिस्तानी न्यूज चेनल एक्सप्रेस न्यूज के एंकर जावेद चौधरी की सिर्फ साढे बारह मिनट की क्लिपिंग भारत और पाकिस्तान के राजनीतिक और मीडिया सर्कल में चर्चा का मुद्दा बन गई, जिस में प

सवाल यह है कि गांधी कितने संतुष्ट थे 

Publsihed: 03.Oct.2019, 01:02

अजय सेतिया / गांधी का डेढ़ सौवां जन्मदिन धूम धाम से मनाया गया | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात से हैं , सो उन्होंने गांधी को वैसे ही अपना लिया है , जैसे कांग्रेस ने अपनाया हुआ था | हालांकि कांग्रेस अब किसी दृष्टिकोण से गांधी के आदर्शों पर चलती नहीं दिखती | इंदिरा गांधी के जमाने तक गांधी जयंती पर कांग्रेस के नेता दलित बस्तियों में झाडू ले कर निकलते थे | अब गांधी के नाम पर मोदी के लोग झाडू ले कर चलते हैं | कई बार लुटियन दिल्ली की चमचमाती सडकों पर भी झाडू मारने के फोटो खिंचवाए जाते हैं | पर सवाल यह है कि क्या साफ़-सफाई, झाडू-शौचालय ही गांधीवाद है | और उस से भी बड़ा सवाल यह है कि क्या अपने आख़िरी