राज्यपाल की घोड़ा चाल में फंसे कुमार स्वामी

Publsihed: 18.Jul.2019, 23:10

नई दिल्ली ( अजय सेतिया ) कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर ने आज विधानसभा कार्यवाही कल तक स्थगित कर के एच.डी कुमार स्वामी की सरकार को जीवनदान दे दिया था | पर राज्यपाल वजूभाईवाला ने रात 9 बजे बाजी पलट दी | उन ने एच.डी.कुमार स्वामी को चिठ्ठी लिख कर कहा कि वह सदन का विशवास खो चुके हैं , इस लिए शुक्रवार दोपहर डेढ़ बजे तक अपना बहुमत साबित करें | अब स्पीकर और कुमार स्वामी की मक्कारी ज्यादा नहीं चल सकती | कुमार स्वामी ज्यादा वक्त देने के लिए भी नहीं कह सकते , क्योंकि आज खुद तो विश्वासमत रखा था | 

आज विधानसभा में मतविभाजन टलवाने के बाद कुमार स्वामी संकेत दे रहे थे कि जरूरी नहीं कि इसी सत्र में विश्वासमत पर वोटिंग हो जाए | यानी कांग्रेस और जेडीएस अपने उन विधायकों को मनाने की कोशिश बरकरार रखना चाहते थे , जो विधानसभा स्पीकर को इस्तीफा और राज्यपाल को इस्तीफों की प्रति देकर महाराष्ट्र जा बैठे हैं | उन्होंने अपने इस्तीफों की मंजूरी के लिए सुप्रीमकोर्ट तक गुहार लगाई | 

कुमार स्वामी ने आज विधानसभा में विश्वासमत का प्रस्ताव रख दिया था | आम तौर पर विशवास मत और अविश्वास प्रस्तावों पर उसी दिन ही बहस और मतविभाजन होता है | पर विधानसभा स्पीकर ने कांग्रेस और जेडीएस को अपने विधायकों को मना कर वापस लाने का मौक़ा दे दिया | जिस से खफा हो कर भाजपा के सभी विधायक विधानसभा के अंदर ही धरना दे कर बैठ गए | रात का खाना और अपने बिस्तर भी घरों से मंगवा लिए और विधानसभा में फर्श पर बिछा लिए | 

कांग्रेस और जेडीएस कई रणनीतियों पर विचार कर रही थी | जिन में से एक तो यह थी कि मतविभाजन को टाल ही दिया जाए | दूसरी यह थी कि व्हिप जारी कर के मतविभाजन करवा लिया जाए , और व्हिप के उलंघन पर उन सभी 15 विधायकों को बर्खास्त कर दिया जाए | हालांकि बाद में उन पन्द्रह के साथ एक कांग्रेसी और जुड़ गया था | वैसे आज गठबंधन के 21 विधायक सदन में नहीं थे | उन सोलह विधायकों के अलावा दो निर्दलीय, दो कांग्रेस और एक बसपा का विधायक भी नदारद था | इस तरह गठबंधन के विधायकों की तादाद 95 रह गई है , जब कि येदुरप्पा खेमे में अब भाजपा के 105 के अलावा , दो निर्दलीय और एक बसपा का विधायक  है | 

अब भले ही व्हिप जारी कर के 21 विधायकों को बर्खास्त करने की रणनीति बने या कुछ और रणनीति बने | कुमार स्वामी के पास सरकार बचाने के विकल्प नहीं बचे | अगर स्पीकर ने डेढ़ बजे तक मतविभाजन नहीं करवाया तो राज्यपाल सरकार को बर्खास्त कर देंगें | विधायकों की बर्खास्तगी का कोई ज्यादा मतलब नहीं | जितना ड्रामा हो चुका है , अब सुप्रीमकोर्ट से उन्हें बर्खास्तगी पर स्टे मिल जाएगा | सुप्रीमकोर्ट के तीन जजों की बेंच ने जब यह कहा था कि विधायकों को सदन में आने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता , तो कोर्ट का मूड साफ़ हो गया था | इसे विधायकों के प्रति हमदर्दी माना जाना चाहिए | यही बात आज भाजपा के एक विधायक ने सदन में कह भी दी थी | 

तो अपना मानना है कि 23 मई 2018 को बनी सरकार का 19 जुलाई 2019 को आख़िरी दिन है | कर्नाटक में चल रहे इतने बड़े नाटक के बावजूद दिल्ली में भाजपा का कोई बड़ा नेता मुहं नहीं खोल रहा | पता नहीं मोदी और अमित शाह के मन में क्या है , वे येदुरप्पा का शपथ ग्रहण चाहते भी हैं या चुनाव करवाना चाहते हैं | इस लिए क्यों कोई अपना मुहं खोले | दो साल पहले रणनीति बना कर येदुरप्पा को कर्नाटक की राजनीति करने भेज दिया गया था | हालांकि वह सांसद थे | पर विधानसभा चुनावों में भाजपा 105 पर अटक गई तो येदुरप्पा से किसी को हमदर्दी नहीं थी | फिर भी येदुरप्पा ने लोकसभा की सदस्यता छोड़ दी थी | अब वह मुख्यमंत्री बनने की तैयारी कर चुके हैं | पर मोदी और अमित शाह के मन में क्या है , यह किसी को पता नहीं | पर राज्यपाल ने जिस तरह तेजी दिखाई , उस से एक बात तो साफ़ हुई कि कुमार स्वामी सरकार गिराने के लिए केंद्र की हरी झंडी है | 

 

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