बोफोर्स जिन्न से नजदीकी बढ़ी बीजेपी-माया की

बोफोर्स का जिन्न भी निकल आया। मनमोहन सरकार जाते-जाते क्वात्रोची का रेड कार्नर वारंट भी रद्द करवा गई। टाईटलर-सान के बाद सीबीआई पर नया दाग। अपन नहीं जानते भ्रष्टाचार का चुनाव पर कितना असर। बोफोर्स का 1989 में तो खूब असर हुआ। वोटर 1989 के मूड में आए। तो कांग्रेस मुश्किल में होगी। बताते जाएं- 1989 के बाद कांग्रेस कभी स्पष्ट बहुमत में नहीं आई। चुनावी डुगडुगी बजे एक महीना हो चुका। महीनेभर में अपन ने कई रंग देखे। शुरूआत तो जरनैल सिंह के जूते से हुई। अब आए दिन जूतेबाजी की खबर। जरनैल के जूते से चौरासी का भूत निकला। तो अपने टाईटलर-सान का टिकट कटा। कांग्रेस अक्लमंद निकली। जो टिकट काट कर डैमेज कंट्रोल कर लिया। अब न दिल्ली में नुकसान का डर, न पंजाब में। जब चौरासी का भूत निकल आया। तो गोधरा का जिन्न क्यों दबा रहता। गोधरा का जिन्न भी निकल आया। नरेंद्र मोदी को कपिल सिब्बल की धमकी पहले आई। गोधरा का जिन्न बाद में निकला। यों सेक्युलरिम की बयानबाजी भले जितनी हो। पर मोदी की सेहत पर असर नहीं। मोदी को तो फायदे की उम्मीद। तीसरी बड़ी घटना अपने समुद्री पड़ौसी श्रीलंका में हुई। अपन ने उसका असर तमिलनाडु में देखा। करुणानिधि-जयललिता की बात तो छोड़िए। तमिल मीडिया भी यूपीए के खिलाफ उबल पड़ा। यह नजारा अपन ने कांग्रेस ब्रीफिंग में देखा। जब कांग्रेसी प्रवक्ता ने एक जर्नलिस्ट को जयललिता का प्रवक्ता बता दिया। मनमोहन सरकार ने डैमेज कंट्रोल तो श्रीलंका में भी किया। पर सीज फायर की पोल अगले दिन ही खुल गई। सो बादल भले पंजाब में जूते का फायदा उठाने से चूके। पर जयललिता नहीं चूकने वाली। अब जयललिता का एक ही प्रचार- ‘यूपीए सरकार मरवा रही तमिलों को। श्रीलंका को सारे हथियार यूपीए सरकार ने दिए। वही यूपीए सरकार जिसमें करुणानिधि हिस्सेदार।’ अपन दिल्ली बैठे जमीनी हकीकत तो नहीं जानते। पर छन-छन कर पहुंची रिपोर्ट यूपीए के जबरदस्त घाटे वाली। पिछली बार सूपड़ा साफ हुआ था जयललिता का। तमिलनाडु में परंपरा एक बार इसका सूपड़ा साफ। दूसरी बार उसका। पर इस चुनावी सफर में जब आधी सीटें निपट चुकी। तो सिख, मुस्लिम, तमिल नरसंहारों के बाद अब बोफोर्स का जिन्न। अरुण जेटली बता रहे थे- ‘स्वीडिश रेडियो ने घोटाले का खुलासा 1987 में किया। पर राजीव राज में एफआईआर भी दर्ज नहीं हुआ। वीपी-देवगौड़ा-वाजपेयी काल में जांच आगे बढ़ी। सबूत मिले, खाते सील हुए। पर जबसे यूपीए सरकार आई। क्वात्रोची को बचाने की मुहिम। पहले हिंदुजा मामले में सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट जाने से रोका। फिर क्वात्रोची के सील खाते खुलवाए। फिर अर्जेटिना ने गिरफ्तार किया। तो छुड़वा दिया। अब क्वात्रोची के रेड कार्नर वारंट भी रद्द करवा दिए।’ उनने कहा- ‘एनडीए सरकार बनी। तो सीबीआई की जांच के लिए आयोग बिठाएंगे। सीबीआई को सरकार से मुक्त कराएंगे।’ जांच होगी- यूपीए राज में सीबीआई के दुरुपयोग की। पर कांग्रेस सीबीआई के नहीं। क्वात्रोची के बचाव में उतरी। वीरप्पा मोइली से लेकर आनंद शर्मा तक बोले- ‘क्वात्रोची के खिलाफ सबूत क्या हैं?’ वैसे तो इसका जवाब जोगिन्दर सिंह ने दिया। जो देवगौड़ा के वक्त सीबीआई चीफ थे। बोले- ‘सबूत सीबीआई के पास मौजूद।’ आडवाणी अहमदाबाद में बोले। उनने कहा- ‘कांग्रेस को सत्ता में आने का भरोसा नहीं। सो क्वात्रोची को बचाने का आखिरी काम कर दिया।’ पर सरकार आएगी किसकी। श्रीलंका मुद्दे ने जयललिता की कांग्रेस से दूरियां बढ़ाई। तो सीबीआई के दुरुपयोग ने मायावती से कांग्रेस की दूरी बढ़ाई। उस दिन अपने दिग्गी राजा ने सीबीआई की धमकी दी। तो मायावती ने कहा था- ‘सीबीआई का दुरुपयोग कर रही कांग्रेस।’ बीजेपी ने फोरन साथ दिया। अब जब बीजेपी ने बोफोर्स पर सीबीआई को कटघरे में उतारा। तो मायावती भी फौरन बीजेपी की भाषा बोली।

One Response to “बोफोर्स जिन्न से नजदीकी बढ़ी बीजेपी-माया की”

  1. कांग्रेस ने हार मान ली है.

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