आडवाणी-मनमोहन और वरुण-प्रियंका में खुली जंग

अपन ने जैसे ही सोनिया के हाथ में कांग्रेस का घोषणा पत्र देखा। बगल में बैठे संपादक से कहा- 'तो राहुल मैदान से बाहर।' घोषणा पत्र पर सिर्फ मनमोहन-सोनिया का फोटू। प्रेस कांफ्रेंस आगे बढ़ी। तो सोनिया ने साफ किया- 'मनमोहन पीएम पद के उम्मीदवार होंगे। सोनिया-राहुल बिलकुल नहीं।' राहुल के बारे में पूछा। तो सोनिया बोली- 'आपने घोषणा पत्र पर फोटो नहीं देखे।' वैसे राहुल को मैदान से बाहर वरुण के डर से नहीं किया। कांग्रेस के अपने सर्वेक्षण का नतीजा। यह अलग बात जो वरुण के सामने बौने दिखने लगे हैं राहुल। सो सोनिया ने वरुण से निपटने का जिम्मा प्रियंका को सौंप दिया। प्रियंका मंगलवार को दूसरे दिन भी वरुण पर बरसी। बोली- 'सवाल परिवार का नहीं। सवाल गांधी परिवार के सिध्दांतों का।' अपन बताते जाएं। सोमवार को प्रियंका ने वरुण को गीता पढ़ने की सलाह दी थी। तो बीजेपी ने कहा था- 'हिंदुत्व सिखाने की कोशिश न करे।' प्रियंका बोली- 'मैं कौन होती हूं किसी को सिखाने वाली। सिखाएगी तो जनता।' मजे की बात देखिए। वरुण के चुनाव मैदान में कूदते ही सोनिया परिवार में दहशत। सोनिया की हरी झंडी मिलते ही मनमोहन भी खूब बरसे। किसी ने उध्दव ठाकरे पर सवाल पूछा। तो अपने जनार्दन द्विवेदी ने सोनिया को जवाब ही नहीं देने दिया। कहा- 'वह इस स्तर के नेता नहीं, जो पीएम या सोनिया जवाब दें।' पर वरुण की दहशत मनमोहन-सोनिया पर साफ दिखी। वरुण के बारे में तो सवाल की जरूरत भी नहीं पड़ी। मनमोहन खुद ही ताबड़तोड़ शुरू हो गए। बोले- 'वरुण गांधी ने जो लाईन ली। वह बीजेपी मानसिकता का सबूत। बीजेपी का वरुण के बचाव में आना शर्मनाक। सांप्रदायिक मानसिकता वाली पार्टी के हाथ में देश सुरक्षित नहीं।' मनमोहन को सोनिया ने पीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया। तो मनमोहन चहकने लगे। पीएम पद के भाजपाई उम्मीदवार पर इतने बरसे कि पूछो मत। कमजोर पीएम होने का सवाल उठा। तो सीने में छुपा गुब्बार निकाल डाला। बोले- 'आडवाणी का यह कुप्रचार पांच साल से यही सुन रहा हूं। आडवाणी खुद कमजोर नेता। जब वह होम मिनिस्टर थे। तभी लालकिले पर हमला हुआ। तभी संसद पर हमला हुआ। बार्डर पर बारह महीने फौजें खड़ी रहीं। हवाई जहाज का अपहरण हुआ। गुजरात में दंगे तभी हुए जब वह एचएम थे। देश तय करेगा आडवाणी पीएम पद के लायक हैं या नहीं। जिन्नाह को सेक्युलर बताने पर खुद संघ परिवार में क्या हुआ। कितने कमजोर पड़ गए थे आडवाणी।' सो मनमोहन की तैयारी साफ। वह चुनाव को आडवाणी बनाम मनमोहन बनाएंगे। आडवाणी को कमजोर बताकर शुरूआत कर दी। आडवाणी भी मथुरा में खूब बोले। कहा- 'केन्द्र सरकार को मनमोहन सरकार कहना गलत। वह तो कोई फैसला ही नहीं कर सकते। लोकतंत्र में सबसे बड़ा एड्रेस पीएम निवास होता था। पर उनने सबसे बड़ा एड्रेस दस जनपथ बना दिया।' मनमोहन-आडवाणी की तू-तू, मैं-मैं अब खूब मजेदार होगी। एक-दूसरे को कमजोर और खुद को मजबूत बताने की जंग। पर सोनिया खुद न आडवाणी के खिलाफ उतना बोली। न देवर के बेटे वरुण के खिलाफ। वरुण के बारे में पूछे सवाल टालती रही। एक बार जरूर कहा- 'यह कांग्रेस कल्चर नहीं। आडवाणी कल्चर।' बार-बार सवाल हुए। तो सोनिया के चेहरे का रंग देख जनार्दन द्विवेदी बोले- 'इस सवाल का जवाब दे चुकी।' फिर सवाल हुआ। तो सोनिया बोली- 'पीएम बोल चुके।' यानी पीएम को जिम्मा सौंप दिया था सोनिया ने। पर लाख टके का सवाल- 'राहुल पीएम कब बनेंगे। इस उम्र में तो राजीव बन गए थे। क्या बीच में मनमोहन को हटाकर?' सोनिया ने इस सवाल को यह कहकर टाला- 'आपने घोषणा पत्र नहीं देखा।' पर जब पूछा- 'संगठन में शीर्ष स्तर पर बदलाव कब होगा?' तो वह बोली- 'होगा, इंतजार करिए।' यानी चुनाव के बाद राहुल बनेंगे कांग्रेस अध्यक्ष।

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