तारीखों पर गोपालस्वामी चावला की कशमकश

संसद के सेंट्रल हाल की गहमा-गहमी बढ़ गई। गहमा-गहमी का यह आखिरी हफ्ता। कल के बाद चौदहवीं लोकसभा नहीं बैठेगी। अब जून में पंद्रहवीं लोकसभा ही बैठेगी। उसमें मौजूदा सांसद कितने होंगे। कितनों को टिकट मिलेगा, कितनों का कटेगा। जिनको मिलेगा, उनमें कितने जीतेंगे। सो सेंट्रल हाल में चमकते चेहरे कम। उतरे हुए चेहरे ज्यादा दिखने लगे। मंगलवार की बात ही लो। अपने नमो नारायण मीणा पूरे शबाब पर थे। बिना लाग लपेट बोले- 'वापस आने वालों की तादाद चालीस फीसदी ही होगी।' यह फार्मूला सिर्फ कांग्रेस का नहीं। बीजेपी का भी यही फार्मूला। राजस्थान के भाजपाईयों के चेहरे ज्यादा लुढ़के दिखे। सेंट्रल हाल के किसी बैंच पर बैठ जाइए। एक ही बात सुनने को मिलेगी- 'कहीं और हो न हो, राजस्थान में कांग्रेस को फायदा होगा।' यह सुन-सुनकर राजस्थान के भाजपाई सांसदों की हवा खराब। कांग्रेसी दावा तो मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ पर भी कम नहीं ठोकते। पर मध्यप्रदेश के भाजपाई उतने परेशान नहीं। हां, छत्तीसगढ़ के भाजपाई परेशान। अपन को विद्या भैय्या बता रहे थे- 'एसेंबली तो सीएम प्रोजेक्ट करने की गलती से हारे। पर लोकसभा की छह-सात सीटें जीतेंगे।' बता दें- छत्तीसगढ़ के ग्यारह में से फिलहाल कांग्रेस का एक ही सांसद था। अजीत जोगी, उसकी मेंबरी भी खत्म हो चुकी। बात जोगी की चली। तो बता दें- वह अपने बेटे को टिकट दिलाने की फिराक में। पर बीजेपी के एक नेता ने टोका- 'उस पर तो हत्या का मामला।' तभी एक कांगेसी ने कहा- 'जोगी के हाथों की लंबाई आप नहीं जानते।' पर अपन बात कर रहे थे विद्या भैय्या की। एनसीपी-बीजेपी से लौटकर विद्या भैय्या फिर कांग्रेस में। महासमंद से चुनाव लड़ने के फेर में। पिछली बार वहीं पर जोगी से हारे थे। भैय्या ने रमेश बैंस को भूतपूर्व सांसदों के बैंच पर देखा। तो चुटकी ली- 'बैंस तो अभी से पूर्व सांसदों के पास जा बैठे।' अपन ने विद्या भैय्या से पूछा- 'कांग्रेस लौट पाएगी क्या?' वह बड़े कांफिडेंस से बोले- ' पौने दो सौ सीटें आएंगी।' अपन तो कांग्रेस के नेताओं का कांफिडेंस देख कर दंग। जिससे पूछो- पौने दो सौ-दो सौ बताएगा। पर पूछो- 'कहां से आएंगी।' तो जवाब मिलेगा- 'यह मत पूछो।' ज्यादा कुरेदो, तो कहेगा- 'राजस्थान में पंद्रह बढ़ेंगी। केरल में दस मिलेंगी।' कांग्रेसियों को छत्तीसगढ़-उड़ीसा और बंगाल पर भी उम्मीद। पर आंध्र के कांग्रेसी नेताओं से पूछो। तो वे अपने नेताओं की हवा निकाल देंगे। चुनाव के मौके पर सत्यम घोटाले ने कमर तोड़ दी। राजशेखर रेड्डी पर भ्रष्टाचार के वैसे ही आरोप। जैसे अस्सी के दशक में एनटीआर ने कांग्रेस पर लगाए थे। चलो मान लो कांग्रेस राजस्थान, केरल, उड़ीसा, बंगाल, पंजाब में तीस सीटें बढ़ी। तो इन राज्यों का गुड़ आंध्र प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, तमिलनाडु ही गोबर कर देंगे। पर बात कांग्रेस के ख्वाब की। अपन को कांग्रेस के एक आला नेता ने खुलासा किया- 'हमारे सर्वेक्षण के मुताबिक यूपीए को 215 से 250 तक सीटें मिलेंगी। लेफ्ट को समर्थन करना ही पड़ेगा। और कोई चारा भी नहीं होगा।' सेंट्रल हाल में वायलार रवि को वृंदा कारत के साथ बैठे देखा। तो अपन को लगा- जैसे चुनाव बाद का समर्थन मांगने आए हों। पर कांग्रेस के इन ख्याली पुलावों में बीजेपी के हौंसले भी कम बुलंद नहीं। अपन को बीजेपी के एक चुनाव मैनेजर ने कहा- '2004 में कांग्रेस सरकार बनाने का दावा करती थी। तो आप लोग पूछते थे- नंबर कहां से आएगा। कांग्रेस की हालत अब वही, जो 2004 में बीजेपी की थी। आप देखते जाइए- जयललिता भी हमारे साथ आएगी। चंद्रबाबू- चंद्रशेखर राव भी हमारे साथ आएंगे।' लब्बोलुबाब यह- चुनावी अटकलें शुरू। चुनाव का ऐलान भी अब कभी भी। पिछली बार 29 फरवरी 2004 को हुआ था ऐलान। चुनाव 20 अप्रेल से 10 मई तक चार फेज में हुए। अब के भी बीस अप्रेल तक चुनाव निपटे। तो गोपालस्वामी सीईसी होंगे। बीस अप्रेल ही रिटायरमेंट तारीख। सो कांग्रेस का इरादा दस दिन लेट करने का। पर नवीन चावला का सीईसी बनने का मामला कोर्ट में गया, तो।

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