मैच फिक्सर को पाकर सोनिया हुई बाग-ओ-बाग

लोकसभा अब चली-चला की वेला में। गुरुवार को सभी दलों के सांसद अपना-अपना एजेंडा लेकर वैल में कूदे। तो हमेशा की तरह स्पीकर सोमनाथ चटर्जी बिफर गए। वैसे तो अपन को चौदहवीं लोकसभा का कोई सत्र याद नहीं। जब दादा ने संसद का बंटाधार होने की बात न कही हो। पर गुरुवार को उनने वो कहा। जो सबको चुभ गया। उनने भी अपनी मर्यादा तोड़ दी। बोले- 'मैं उम्मीद करता हूं कि आप सभी चुनाव में हार जाएं। आप सभी को चुनाव में हारना चाहिए। जनता अपना फैसला ठीक ढंग से करेगी।' पर बात चुनाव से पहले झूला झूलने की। जैसा अपन ने कल लिखा था। झूला बदलने की चुनावी सर्कस शुरू हो गई। उध्दव ठाकरे ने शरद पवार से मुलाकात की। बीजेपी-शिवसेना का चौबीस साल पुराना रिश्ता चौराहे पर। रामविलास पासवान बोले- 'मैं नहीं जानता बिहार में यूपीए मिलकर लड़ेगा या नहीं। मिलकर नहीं लड़ा। तो मेरी पार्टी 40 सीटों पर चुनाव में उतरेगी।' पासवान चुनाव के आस-पास पाला बदलने के माहिर। लालू भले ही रेलवे की दशा सुधारने के कितने झंडे गाड़ें। बिहार में लालू की लुटिया डूबनी तय। सो पासवान की निगाह अब नीतिश कुमार पर। तभी तो नीतिश भी बीजेपी से मोल-भाव करने लगे। बिहार जैसा हाल तमिलनाडु में भी। पीएमके-एमडीएमके की लोकसभा में जुगलबंदी दिखी। तो अपने कान खड़े हुए। क्या आखिरी वक्त में रामदौस भी पाला बदलेंगे। डीएमके-कांग्रेस के रिश्तों में भी दरार। प्रणव दा के तमिल-श्रीलंका स्टैंड से करुणानिधि भी खफा। इसी सुलगती आग में गुरुवार को जयललिता ने घी डाल दिया। चोट ठीक उस समय की। जब लोहा गर्म था। उनने कहा- 'कांग्रेस डीएमके से रिश्ते तोड़ ले। तो कांग्रेस-एआईडीएमके गठबंधन संभव।' है ना सर्कस का झूला लपकने वाला खेल। जयललिता-करात गठबंधन का ऐलान हुए एक महीना भी नहीं हुआ। अम्मा लेफ्ट का झूला छोड़ कांग्रेस का झूला थामने को बेताब। अजितसिंह बीजेपी से बात करते-करते कांग्रेस को टटोल रहे थे। पर गुरुवार को फिर बीजेपी के झूले में दिखे। अजितसिंह के राम आसरे बोले- 'हम दस मांग रहे हैं, वे सात दे रहे हैं। ले-देकर बन जाएगी बात।' यूपी की बात चली। तो बताते जाएं- संजय दत्त चुनाव नहीं लड़ सकते। पर तैयारियां पूरी। बुधवार को उनने लखनऊ में कहा- 'कोई फिल्मी हस्ती मेरे खिलाफ चुनाव नहीं लड़ेगी।' गुरुवार को मीडिया ने हवा में तीर फेंका। हेमा मालिनी से पूछा- 'क्या आप लखनऊ से चुनाव लड़ेंगी?' वह बोली- 'यह पार्टी तय करेगी।' तब कहा- 'संजू बाबा ने कहा है- कोई फिल्मी हस्ती उनके खिलाफ नहीं लड़ेगी।' वह उखड़कर बोली- 'अच्छी बात है, अगर उन्हें इतना ही भरोसा है।' संजू बाबा फिलहाल सजायाफ्ता। जब तक कोर्ट सजा पर रोक न लगाए। तब तक चुनाव नहीं लड़ सकते। नवजोत सिध्दू को सुप्रीम कोर्ट ने इजाजत दी थी। तब अमृतसर में दुबारा लड़े थे। पर बात दागियों की चल ही पड़ी। तो बात कांग्रेस में आए नए दागी की। क्रिकेटर अजरुद्दीन आखिर कांग्रेस में आ ही गए। हैदराबाद-सिकंदराबाद से कहीं चुनाव लड़ेंगे। कहां से लड़ेंगे? पूछा तो बोले- 'मैं कैप्टन नहीं, कैप्टन तय करेगा।' बात क्रिकेट की चल ही पड़ी। तो मैच फिक्सिंग का किस्सा भी सामने आया। फिक्सिंग की बात उठते ही उखड़ गए। बोले- 'पुरानी बातें क्यों पूछते हो।' याद करा दें- अजरुद्दीन पर मैच फिक्सिंग का केस साबित हुआ था। सो क्रिकेट टीम से बर्खास्त हुए। यही हाल पर्सनल जिंदगी का। अजरुद्दीन की बीवी थी- नौदीन। दुबई के रईसजादे की बेटी। संगीता बिजलानी के प्यार में पड़ कर अजरुद्दीन ने नौदीन को तलाक दे दिया। बीजेपी के एक नेता ने कहा- 'जो देश का न हुआ। जो पत्नी का न हुआ। वह कांग्रेस का।' पर अपने शाहनवाज हुसैन ने एक तीर से दो निशाने साधे। निशाने पर अजरुद्दीन और संजू बाबा दोनों थे। बोले- 'सभी फिक्सर कांग्रेस या सपा में शामिल हो रहे हैं।' पर वीरप्पा मोइली बेहद खुश थे। बोले- 'अजरुद्दीन के कांग्रेस में आने से सोनिया बेहद खुश।'

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