मौत का सौदागर मोदी या अफजल? नया सवाल

यह तो अपन को पहले से पता था-'मोदी पर जहर बुझे तीर चलाएगी सोनिया।' पर अपन को भरोसा था-सोनिया चक्रव्यूह में नहीं फसेगी। भले ही अनारी कितनी ऊट-पटांग बाते लिखकर थमाएं। पर अपना भरोसा टूट गया। जब सोनिया ने चिकली में मोदी को बेइमान और मौत का सौदागर कह दिया। साथ में गांधी के गुजरात को गोडसे से जोड़ बलंडर किया। तहलका का ऑपरेशन कलंक आया। तो कांग्रेस घबराई हुई थी। उस रात कांग्रेस के अकलमंद नेताओं ने बहुत कोशिश की- यह मुद्दा अखबारों की सुर्खिया न बने। कांग्रेस के अकलमंद नेता इस बात से वाकिफ-ध्रुविकरण से तो कांग्रेस का ही बाजा बजेगा। मोदी को गाली देने से देश-विदेश में भले ही वाह-वाह हो। गुजरात में तो वोट घटेंगे। पर सोनिया ने फिर वही गलती कर दी। मोदी को तो नया मुद्दा मिल गया। भले ही सोमवार को मोदी की कई रैलियां नहीं हो पाई। पर जहाँ बोले, जम कर बोले। कहा- 'हत्याओं की सौदागर तो कांग्रेस । जो डेढ़ साल से अफजल को फांसी नहीं दे रही। मैं जिन मौत के सौदागरों से लड़ रहा हूं । सोनिया और उनकी कांग्रेस उन मौत के सौदागरों की सरपरस्त।' अफजल का भूत गुजरात में कांग्रेस की जान ले लें। तो अपन को ताज्जुब नहीं होगा। पर बड़े मियां, सो बड़े मियां। छोटे मियां सुभान अल्लाह। दिल्ली में अभिषेक मनु सिंघवी बोले- 'बीजेपी मोदी की बंधक बन चुकी। कोई बोल नहीं सकता।' सिंघवी पता नहीं सोच कर क्यों नहीं बोले। कोई यही बात सोनिया-राहुल का नाम लेकर कांग्रेस के बारे में कहे, तो। गुजरात में मोदी की आरती ऐसे तो नहीं होती। जैसी तालकटोरा स्टेडियम में 17 नवम्बर को राहुल की हुई। कांग्रेस में महासचिव तो और भी बहुतेरे बने।  वैसे मोदी को जैसी चुनौती केशुभाई के झडफियों ने दी। यों बीजेपी के सात-आठ झडफिये कांग्रेस ले भागी। पर झडफिये को लेने की हिम्मत नहीं हुई। वरना मोदी पर आरोप तो बाद में लगता। पहले कांग्रेस कटघरे में होती। दंगों में मोदी के हाथ का कोई सबूत नहीं। पर झडफिये के खिलाफ तो सबूतों की कतार। पर बात हो रही थी चुनौतियों की। जैसे भाजपाई झडफिये मोदी के खिलाफ निकले। क्या कांग्रेस में किसी एक की भी ऐसा झडफिया बनने की कूवत। पर बात राहुल की चली। तो बताते जाएं । इतवार को एयरपोर्ट पर राहुल को आडवाणी दिखे । तो  मुलाकात करने जा पहुंचे। आडवाणी ने राहुल को राजनीतिक दीक्षा देते हुए कहा -'कांग्रेस बीजेपी आपस में दुश्मनी न पाले। राजनीतिक विरोधी ही समझें। तो देश को फायदा।' अब उनने बेटे को सुनाकर मां को कहा हो। तो बड़ी बात नहीं। पर बात मोदी की। मोदी को  तो इस बार कांग्रेस से ज्यादा अपने झडफियों से खतरा। सोमवार को झडफिया का इस्तिहार देखा-सुना आपने। केशुभाई के पुराने बयानों की कटिंग- पेस्टिंग से बवाल खड़ा कर दिया। अब केशुभाई पिछे भी हटें, तो किस मुंह से। बोले- 'मैंने तो कोई इस्तिहार नहीं दिया। पर जो बयान मैंने पहले दिए। उससे मैं इनकार भी नहीं कर सकता।' सो केशुभाई के पुराने तीर मोदी पर नया निशाना साध गए। कपिल सिब्बल बोले- 'समझने वाले समझ गए। जो न समझे अनाड़ी।' वैसे अपन एक बात बता दें। गांठ बांधकर रख लें। चारों तरफ मोदी पर वार होंगे।  तो चुनाव का मुद्दा न विकास होगा, न दंगे। मुद्दा बनेगा मोदी। यही तो चाहते हैं-मोदी के रणनीतिकार अरुण जेटली-ओम माथुर। पर बात मौत के सौदागर की। तो मौत का सौदागर कौन? सोनिया ने कहा- मोदी। मोदी ने कहा- अफजल । अब जनता तय करेगी मोदी या अफजल। सोनिया का आरोप पुराना। मोदी 2002 का चुनाव जीत जनता का फतवा ले चुके। अफजल को सुप्रीम कोर्ट फांसी की सजा दे चुकी। वैसे भी यह कौन नहीं जानता- भारत में मौत के सौदागर अफजली आतंकवादी। बात आतंकवाद की चली। तो बता दें, आईबी ने दिल्ली पर आतंकी हमले की नई रपट थमा दी।

एकदम सही कहा ..............

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