प्रतिभा पाटील के पाले में अब एक नहीं, दो गेंदे

चौदहवीं लोकसभा का आखिरी सैशन आज से। अपने प्रियरंजन दासमुंशी डिसचार्ज होते। तो अपन उन्हीं के मुंह से सैशन का एजेंडा सुनते। दासमुंशी की जगह वायलार रवि ने एजेंडे पर रोशनी डाली। रेल और आम बजट समेत 37 सरकारी आईटम। सत्ताईस बिल पेश-पास-वापसी एजेंडे पर। पर महिला आरक्षण बिल का जिक्र भी नहीं। याद है- कितना ड्रामा किया था- जब राज्यसभा में बिल पेश किया। अपन कांग्रेस के लग्गुओं-भग्गुओं की बात नहीं करते। सोनिया तक महान उपलब्धि बताते नहीं थकी। अब आखिरी सैशन के एजेंडे में भी नहीं। वही हाल भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल बिल का। यूपीए नहीं चाहता पीएम लोकपाल के दायरे में हो। खैर पंद्रह दिन का सैशन चलेगा दस दिन। पर आधे दिन तो हंगामे जाएंगे। एक दिन अपनी प्रतिभा ताई के अभिभाषण का। एक दिन प्रणव दा के आम बजट का। यों तो फाइनेंस खुद पीएम के पास। पर पीएम भी दासमुंशी की तरह बिस्तर पर। यों पीएम ऑपरेशन के बाद चंगे-भले। पर प्रणव दा आखिरी सैशन में फन्नेखां होंगे। सदन के नेता, विदेशमंत्री और वित्तमंत्री भी। यों तो तीन महीने की अनुदान मांगें काफी होती। पर चुनावी झुनझुनों के लिए अंतरिम बजट की रणनीति। टारगेट होगी मिडिल क्लास। लुभाने का बंदोबस्त इनकम टैक्स के जरिए होगा। जमकर रेवड़ियां बटेंगी सोलह फरवरी को। पर बजट सैशन से ठीक पहले की बात। कांग्रेसी मंत्री महावीर प्रसाद हत्यारों को पनाह देते फंस गए। पुलिस ने तो हत्या को एक्सीडेंट बना दिया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के हुक्म से एफआईआर दर्ज हुई। सो कांग्रेस बौखलाई हुई दिखी। मनीष तिवारी बोले- 'एफआईआर का क्या। चार्जशीट दाखिल हो, तो जानें।' पर चिदंबरम उखड़े-उखड़े से दिखे। इस्तीफे की बात करते दिखे। बोले- 'मैंने भी एक चैनल पर खबर देखी। खबर ठीक हुई। तो चैनल हैड को इस्तीफा नहीं देना पड़ेगा।' तो क्या खबर ठीक होने पर महावीर प्रसाद को देना पड़ेगा। पर महावीर प्रसाद इस्तीफे को तैयार नहीं। सवाल एफआईआर पर नैतिकता का उठाया। तो बोले- 'कैसी नैतिकता। हम चुनाव जीत रहे हैं, आगे भी जीतेंगे।' यानी जीतने वाले को अनैतिकता का हक। पर बात चिदंबरम की चल रही थी। तो बताते जाएं- बुधवार को मोदी पर भड़कने की बारी उनकी थी। बोले- 'आपको मोदी से पूछना चाहिए। क्या पाकिस्तान के संपर्क में हैं वह।' जबसे मोदी ने मुंबई धमाकों से स्लीपिंग सेल की बात कही। तबसे कांग्रेसियों को मिर्ची लगी हुई है। मोदी ने पहले भी कांग्रेस-यूपीए की नींद उड़ाई थी। जब उनने पूछा था- 'जब हिरासत में दिया बयान भारत की अदालत में मंजूर नहीं। तो पाकिस्तान क्यों कसाब का हिरासत में दिया कबूलनामा मानेगा।' मोदी ने कांग्रेस की दुखती रग पर हाथ धरा था। पोटा में यह प्रोविजन था। पर कांग्रेस ने पोटा हटा दिया। बात स्लीपिंग सेल की। फाहिम अंसारी क्या स्लीपिंग सेल नहीं था। उसकी मदद से ही दस पाकिस्तानी आतंकियों ने हमला किया। यही तो कहा है मोदी ने- 'लोकल स्लीपिंग सेल के बिना हमला संभव न होता।' आखिर स्लीपिंग सेल पर इतनी फिदा क्यों है कांग्रेस-सरकार। पाक ने तो कसाब समेत चार के खिलाफ केस कर दिया। मुंबई मामले पर नौ गिरफ्तारियां और  होंगी। वैसे मुंबई हमले के बाद देश में एकजुटता का जो माहौल बना था। उसे यूपीए सरकार ने गवां दिया। सो जो पांच-सात दिन सैशन चलेगा। उसमें आतंकवाद-पाक और मुंबई जोरशोर से होगा। वायलार रवि कह रहे थे- 'हमें कोई डर नहीं। विपक्ष सत्यम, नवीन चावला, झारखंड या आतंकवाद किसी मुद्दे पर बहस करा ले। यों राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस होगी। तो सभी मुद्दे उठेंगे ही।' वैसे लगते हाथों बताते जाएं। कांग्रेस इस बार राष्ट्रपति के अभिभाषण का भी बेजा फायदा उठाएगी। अभिभाषण क्या, चुनाव घोषणापत्र होगा। बात राष्ट्रपति प्रतिभा ताई की चली। तो बताते जाएं- ताई के पाले में अब दो-दो गेंदें। अफजल गुरु का फैसला तो पेंडिंग था ही। अब नवीन चावला की बर्खास्तगी की सिफारिश भी पेंडिंग। दोनों मुद्दे कांग्रेस की दुखती रग।

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