जब प्रज्ञा को उसके शिष्य से पिटवाया

अपन की निगाह अब मानवाधिकारवादियों पर। जो जम्मू कश्मीर में आतंकियों के पैरवीकार बने फिरते थे। प्रज्ञा ठाकुर का हल्फिया बयान रोंगटे खड़े करने वाला। मानवाधिकारों का तो एटीएस ने जो हश्र किया, सो किया। देश की धर्म संस्कृति को भी अपमानित किया। अपन हल्फिया बयान के कुछ हिस्से बताएंगे। इन हिस्सों को पढ़कर आडवाणी ने भी चुप्पी तोड़ दी। अब तक मोर्चा राजनाथ सिंह संभाले हुए थे। मंगलवार को छत्तीसगढ़ में आडवाणी बोले- 'प्रज्ञा ठाकुर को दी गई यातनाओं की ज्यूडिशियल जांच होनी चाहिए। कानून पुलिस को यातनाओं की इजाजत नहीं देता। पुलिस का यह तौर-तरीका घोर आपत्तिजनक।' अपने मुख्तार अब्बास नकवी से भी अब तो नहीं रहा गया। रामपुर में बोले- 'सरकारें इस तरह हिंदू साधु-संतों के साथ करने लगी। तो देश में विद्रोह हो जाएगा। मनमोहन सिंह दुनियाभर में भारत को बदनाम करने से बाज आएं।' राहुल गांधी को अपनी राय रखने का हक। वह एटीएस पर भरोसा करने के लिए पूरी तरह आजाद। उनने अमृतसर में कहा- 'बीजेपी को प्रज्ञा ठाकुर से अपने रिश्तों पर गौर करना चाहिए।' अब बात एटीएस की। एटीएस के दावे एक-एक कर हवा होने लगे। लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित के खिलाफ कितना बावेला खड़ा किया। पर मंगलवार को फर्जीवाड़े के ताजा दर्ज करवाए केस में पुणे पुलिस को सौंप दिया। वेंकैया नायडू भी एटीएस पर खूब बरसे। बोले- 'मीडिया में झूठी खबरें छपवा रही है। उसे अपना मुंह बंद करके जांच करनी चाहिए। एटीएस की हरकतों से राजनीतिक साजिश की बू आती है।'अब बात प्रज्ञा ठाकुर के आठ पेजी हल्फिया बयान की। प्रज्ञा ने खुलासा किया- 'मुझे सावंत नाम के पुलिस अफसर ने सात अक्टूबर को फोन किया। मेरे मोटर साईकिल बरामद होने पर पूछा। मैंने कहा- वह मैंने चार साल पहले बेच दिया था। सावंत ने कहा कि वह बात करना चाहते हैं। मुझे सूरत आने के लिए कहा गया। मैं दस अक्टूबर को सुबह सूरत पहुंची। मेरा एक शिष्य स्टेशन पर मुझे लेने आया। मैं उसी के घर में रुकी। सावंत मुझे उसी के घर मिलने आया। लंबी पूछताछ के बाद उसने मुझे मुंबई चलने को कहा। मैं उसके साथ उसी दिन मुंबई लाई गई। मेरे साथ मेरा एक शिष्य भीमभाई पसरीचा भी था। मैं तब से पुलिस की हिरासत में। मुझे होटल राजदूत में ले जाकर रजिस्टर पर दस्तखत करवाए गए। मेरे शिष्य पसरीचा को मुझे मारने के लिए कहा गया। वह तैयार नहीं हुआ। तो मेरे सामने उसकी पिटाई की गई। जब उसे बेहद मारा गया। तो वह मुझे मारने को तैयार हो गया। पुलिस उससे संतुष्ट नहीं हुई। उस पर पिटाई का नाटक करने का आरोप लगाया। फिर पुलिस ने पसरीचा और मेरी पिटाई की। लगातार कई दिन पिटाई के बाद नार्को टेस्ट किया गया। मेरी हालत खराब हो गई। तो मुझे शुश्रुता अस्पताल में भर्ती कराया गया। मुझे आईसीयू में रखा गया। फिर दूसरे अस्पताल ले जाया गया। कई टेस्ट किए गए। पुलिस ने मुझे तेईस अक्टूबर को अदालत में पेश किया।' प्रज्ञा ठाकुर ने अदालत से कहा है- 'मैंने जो आरोप लगाए हैं। इन पर मेरा एक और नार्को टेस्ट किया जाए। जिन पुलिस वालों पर मैंने आरोप लगाए हैं। उनका भी नार्को टेस्ट किया जाए।' प्रज्ञा ने अपने हल्फिया बयान में खानविलकर नाम के अफसर का जिक्र किया। उसने कहा है- 'दूसरे का नाम नहीं पता। उसने मूछ रखी हुई है। सामने आएगा तो पहचान लूंगी।' मानवाधिकार हनन पर मंगलवार को पीयूसीएल नहीं बोली। बाटला हाऊस मुठभेड़ की जांच चाहने वाले भी चुप रहे। कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी भी चुप्पी साध गए। पर मनीष तिवारी को आडवाणी-राजनाथ के तेवरों पर ऐतराज। बोले- 'भाजपाईयों का आतंकवाद पर चेहरा बेनकाब हो गया।' यों अपन इसे संयोग नहीं मानते। जो सारी घटनाएं एक साथ हुई। हैदराबाद, दिल्ली, यूपी में गिरफ्तार कई आतंकी अक्टूबर में रिहा हुए। अक्टूबर में प्रज्ञा ठाकुर, पुरोहित, रमेश उपाध्याय, समीर कुलकर्णी, दयानंद पांडे वगैरह गिरफ्तार हुए।

कांग्रेस और दूसरी पार्टियों

कांग्रेस और दूसरी पार्टियों में भी हिंदू हैं, क्या इन का जमीर इतना मर गया है कि हिंदू जाति और हिंदू धर्म पर हो रहे इन हमलों से इन्हें कोई तकलीफ नहीं होती. बम धमाकों की जाँच करो, जिन पर संदेह है उन से पूछताछ करो, पर उन्हें मारने का, उन्हें गन्दी गालियाँ देने का अधिकार जाँच एजेंसिओं को किस ने दिया? मानवाधिकार आयोग क्या सिर्फ़ गैर-हिन्दुओं के लिए है? अदालतें क्या तभी बोलेंगी जब कोई गैर-हिंदू पुलिसके हाथों पिटेगा? मनमोहन सिंह को नींद नहीं आई थी जब एक मुसलमान विदेश में आतंकवादी हमले के आरोप में गिरफ्तार हुआ था. आज वह गहरी नींद सो रहे हैं. विदेशी सरकार से गुहार लगाई थी उन्होंने. लेकिन वह अपने देश की जाँच एजेंसी से यह नहीं कह सकते कि आरोपिओं से मार-पीट मत करो. कितनी शर्म कि बात है यह.

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