राजनाथ बोले- 'सत्ता के लिए कांग्रेस फिर देश तोड़ देगी'

विश्वेंद्र सिंह टिकटों का मोलभाव करने में माहिर। पर इस बार एक नहीं चली। तो वसुंधरा पर ही टिकटें बेचने का आरोप मढ़ दिया। चलो एक जैसे हो गए। कांग्रेस मारग्रेट, मकवाना के आरोपों से जूझ रही थी। बीजेपी पर वैसा ही आरोप विश्वेंद्र ने मढ़ दिया। कांग्रेस की जान में जान आ गई। पर अपने गोपीनाथ मुंडे कह रहे थे- 'विश्वेंद्र को कितना देते। सोलह टिकटों के ठेकेदार बने बैठे थे।' यानि विश्वेंद्र का आरोप मारग्रेट जितना दमदार नहीं। कांग्रेस को तो मारग्रेट का जवाब ही नहीं सूझा। गोपीनाथ ने तो विश्वेंद्र के आरोपों का जवाब दे दिया। जिसका जवाब विश्वेंद्र के पास भी नहीं। वह तो सचमुच ढेर सारी सीटें मांग रहे थे। पर सोनिया ने टिकट बेचने के आरोपों को पुष्ट कर दिया। आपको याद होगा। अपन ने योगेंद्र मकवाना के टिकटें बिकने के आरोप बताए थे। मारग्रेट अल्वा के बाद गुरुवार को उन पर नजला उतरा। तो कांग्रेस के प्रेस नोट में कहा गया- 'मकवाना पार्टी की नीति और कार्यप्रणाली की आलोचना कर रहे हैं। सो सोनिया गांधी ने उन्हें एससी सेल के अध्यक्ष पद से हटा दिया है।' यानि टिकटें बेचना पार्टी की नीति और कार्यप्रणाली का हिस्सा। अब जाफर शरीफ और जालप्पा का क्या होगा। उनने भी यही आरोप लगाए थे। पर गुरुवार को ज्यादा महत्वपूर्ण रहा एजीपी का एनडीए में लौटना। आडवाणी एनडीए का पुराना कुनबा जोड़ने में मशगूल। चौटाला के बाद प्रफुल्ल महंत की पार्टी ले आए। बुधवार को उनने चेन्नई में रजनी कांत से मुलाकात की। रजनी कांत अब के बीजेपी का प्रचार करेंगे। अब जयललिता का भी जुड़ना तय समझिए। आडवाणी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे। पर राजनाथ सिंह का पूरा जोर असेंबली चुनावों पर। आतंकवाद-मंहगाई बीजेपी के चुनावी मुद्दे। कांग्रेस ने दोनों की काट निकाल ली। मंदी में मंहगाई दर तो गिर ही गई। भले इससे मंहगाई न घटे। पर मंहगाई का प्रचार तो घटेगा। जहां तक बात आतंकवाद की। तो कांग्रेस अपनी नीति नहीं बदलेगी। न अफजल को फांसी देगी, न सख्त कानून का वादा करेगी। दुनिया में भले ही इस्लामिक टेरेरिज्म का खतरा मंडराता हो। कांग्रेस को भारत में ऐसा खतरा नहीं दिखता।  कांग्रेस स्ट्रेटजी अब हिंदुओं को भी आतंकी साबित करने की। ताकि बीजेपी के पास आतंकवाद का मुद्दा भी न बचे। साध्वी प्रज्ञा को बम फोड़ने के आरोप में पकड़ा। सबूत मिलने का नाम नहीं ले रहे। तो लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को पकड़ लिया। सबूत वहां भी नहीं मिल रहे। शुरू-शुरू में बीजेपी दहशत में थी। आडवाणी की तो अभी भी तेल की धार देखने की नीति। पर राजनाथ सिंह ने कांग्रेस की काउंटर स्ट्रेटजी पर हमला बोल दिया। गुरुवार को लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित पर पुलिस की थर्ड डिग्री की खबर आई। तो गुस्से से तमतमाए राजनाथ बोले- 'यूपीए सरकार आतंकवाद पर भ्रामक दृष्टिकोण के कारण भारतीय सेना को भी नहीं बख्श रही। सेना को बदनाम करने की साजिश के गंभीर नतीजे निकलेंगे। जब तक सबूत न हों। तब तक सेना से जुड़ी कोई बात नहीं कहनी चाहिए। सेना में घुसपैठ जैसे शब्दों का इस्तेमाल खतरनाक।' राजनाथ सिंह ने कहा- 'चार साल में हर आतंकी वारदात पर आंख मूंदकर सोई रही। एक भी आतंकी को सजा नहीं मिली। होम मिनिस्टर संसद पर हमला करने वाले अफजल की पैरवी करते रहे। अब साजिश के तहत हिंदू साधु-संतों के खिलाफ अभियान चल रहा है। सरकार के पास कोई सबूत नहीं। मीडिया में झूठा प्रोपोगंडा किया जा रहा है।' चेतावनी भरे लहजे में बोले- 'कांग्रेस  ने पहले भी सत्ता के लिए देश तोड़ा। अब भी चुनाव जीतने के लिए आतंकवाद को सांप्रदायिक रंग देने को आमादा। वह इससे बाज न आई। तो सांप्रदायिक धु्रवीकरण से देश की एकता-अखंडता खतरे में।' उनने कहा- 'मैं किसी का बचाव नहीं करता। पर सरकार कोई सबूत तो सामने लाए।'

देश तोड़ने की बात में दम है.

देश तोड़ने की बात में दम है.

पर राजस्थान मैं सचमुच चमचों

पर राजस्थान मैं सचमुच चमचों को टिकिट बांटे गये हैं....उदाहरण के तौर सीकर जिले की विधानसभा सीटों पर पिछली बार की तरह संगठन को और कार्य कर्ताओं को दर किनार कर सांसद सुभाष महरिया के चमचों को टिकिट दिये गये हैं...जो अधिकतर जनाधारविहीन लोग हैं...कमोबेश यही स्थिति पूरे राजस्थान मैं है कि वसुंधरा ने चुन चुन कर संगटन निष्ठ लोगों के टिकिट काट दियें हैं और हर स्तर पर स्वयं मैं आस्था रखने वाले लोगों को टिकिट बांटे हैं ....तो परिणाम कैसा आने वाला है अंदाजा लगायें

'कांग्रेस ने सत्ता के लिए देश

'कांग्रेस ने सत्ता के लिए देश तोड़ा', यह कहने की क्या जरूरत है? यह तो कांग्रेस का चरित्र है. क्या कोई कहता है कि नमक नमकीन है?

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