दीवाली की राम-राम

आज दीवाली। गुरुवार को लाल कृष्ण आडवाणी का जन्मदिन था। सो बीजेपी में एक दिन पहले ही दीवाली मन गई। अपनी वसुंधरा समेत बीजेपी के सारे सीएम बधाई देने पहुंचे। नरेंद्र मोदी ही नहीं आए। तो खटका। सीएम-इन-वेटिंग येदुरप्पा भी दिखाई दिए। पर बात दीवाली की। वह भी जमाना था। जब घी के दीए जलते। आतिशबाजी से सुगंध निकलती। लक्ष्मी की पूजा होती। मिठाईयां बंटती। चारों तरफ खुशी ही खुशी। गांधी ने ऐसे ही रामराज की कल्पना की थी। पर मौजूदा सरकार जब राम के अस्तित्व पर ही भ्रम में। तो रामराज की कल्पना क्या करे। बात मनमोहन सरकार की चली। तो बताते जाएं।  दीवाली की छुट्टियों के बाद अपन मिलेंगे। तो मनमोहन रूस से लौट चुके होंगे। पता नहीं एटमी करार पर लेफ्टियों के लिए क्या संदेश लाएं। पर फिलहाल बात दीवाली की। घी के दीए वाली दीवाली। सुगंधित आतिशबाजी वाली दीवाली। पर अब जमाना बदल गया। सांस अटका देने वाला धुआं उगलती आतिशबाजी। मिठाईयों पर विदेशी चाकलेट का हमला। किसी के पास बधाईयां देने का वक्त भी नहीं। सो एसएमएस और ई-मेल बधाईयों का जमाना। संघ की शाखाओं पर संख्या घटने लगी। तो अपन ने संघियों को ई-शाखा की सलाह दी। देर-सबेर ई-शाखाएं ही लगेंगी। फिलहाल तो अपना मोबाइल ग्रीटिंग एसएमएस से जाम। ई-मेल खाता लबालब। पर बात गांधी के रामराज की। रामराज नहीं आया। तो लक्ष्मी भी कुछ घरों में सिमट गई। घी के दीए अब कुछ घरों को ही मुअस्सर। अब तो तिल या सरसों तेल के दीए भी नहीं जलते। घंटों जलकर घर को रोशन करती मोमबत्तियां भी नहीं रही। अब तो चीन से आई भ्रम फैलाने वाली इलेक्ट्रानिक मोमबत्तियों का जमाना। हवा में जहर घोलने वाली शिवकाशी की आतिशबाजी। बाल मजदूरों की नगरी शिवकाशी। अपन बाल मजदूरी मिटाने का कितना ढोल पीटें। नुक्कड़ की चाय वाली दुकान। शहर के कोने वाला ढाबा। अपने ढोल की पोल खोल रहा है। दफ्तर में चाय लेकर आए रमेश से अपन ने उम्र पूछी। तो झिझकते हुए बोला- चौदह साल। उम्र को चौदह बताना अब नौकरी की शर्त। अपन ने चौदह की उम्र तक शिक्षा लाजमी जो कर दी। बाल मजदूरी रोकने का यह जरिया निकाला। थाने में चाय लाने वाले लड़के से जब थानेदार उम्र नहीं पूछता। तो सिपाही को क्या पड़ी। हफ्ता वसूलने वाला बीट सिपाही भी पूछताछ नहीं करता। उसका हफ्ता बढ़ चुका। ज्यादा कानून तोड़ने पर ज्यादा वसूली। यह है अपना रामराज। बात बाल मजदूरों के हाथों बनी आतिशबाजी की ही नहीं। शिवकाशी के साथ चीन से आने वाले आतिशबाजी की भी। जिसने इस बार हवा में कुछ ज्यादा ही जहर घोल दिया। दिल्ली की दीवाली में तो अब दम घुटने लगा। अपन जैसे अस्थमा पीड़ितों के नाक में दम। दशकभर पहले दिल्ली गैस चैंबर बनी। तो सुप्रीम कोर्ट ने हवा में जहर घोलती बसों पर ब्रेक लगाई। अपनी शीला दीक्षित की रामराज सरकार तो ब्रेक के खिलाफ थी। पर एक दशक बाद अब दिल्ली फिर वैसी की वैसी। डीजल बसों पर ब्रेक लगी। तो डीजल कारों ने धावा बोल दिया। कामनवेल्थ खेलों से पहले-पहले दिल्ली फिर गैस चैंबर होगी। जिसका टे्रलर अपन को दीवाली में दिखने लगा। गांधी ऐसा रामराज चाहते थे। जिसमें लोग दीवाली पर बधाईयां देने सड़कों पर निकल आएं। पर अब डाक्टर सलाह देता है- 'दीवाली वाले दिन घर से बाहर न निकलें।' सरकार मुनियादी करवाती है- 'आसपास कोई संदिग्ध चीज दिखे। तो फौरन पुलिस को खबर करें। क्या पता बम हो।' पिछली धनतेरस पर अपन दिल्ली की मार्किट में चिथड़े देख चुके। इस बार धनतेरस तो राम-राम करते बीत गई। राम जी दीवाली को आतंकियों से बचाए। अपन की सबको दीवाली पर राम-राम।

दिवाली मुबारक!

दिवाली मुबारक!

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