सोनिया को लेकर पाटिल पहुंचेंगे मेंगलूर

कर्नाटक में राजनीतिक घमासान शुरू हो गया। कांग्रेस मौके का फायदा उठाने की फिराक में। तो येदुरप्पा भी हर ईंट का जवाब पत्थर में देने को तैयार। अपने पाटिल ने पहले दो हिदायतें भिजवाई। फिर कुमावत की रहनुमाई वाली टीम। टीम मंगलवार को बेंगलुरु-मेंगलूर घूम ली। नौकरशाही की क्या मजाल। जो येदुरप्पा के लॉ एंड आर्डर को दुरुस्त बता दे। जहां तक बात कानून व्यवस्था की। तो येदुरप्पा ने ताल ठोककर कहा- 'कर्नाटक का लॉ एंड आर्डर दिल्ली से बेहतर। कांग्रेस हालात सुधारने में मदद के बजाए आग में घी डालना छोड़े।' अपन ने जैसा कल लिखा। येदुरप्पा मंगलवार को हुबली में थे। मनमोहन सरकार पर फिर गरजे। मोदी के अलावा ऐसी हिम्मत अपन ने येदुरप्पा में ही देखी। येदुरप्पा ने कांग्रेस की रीढ़ पर हमला किया। बोले- 'कर्नाटक में रह रहे बांग्लादेशियों को निकाल बाहर किया जाएगा।' अपन बता दें- कर्नाटक के तटीय इलाके आतंकियों के ट्रेनिंग सेंटर बन चुके। दिल्ली में फटे  बमों की सामग्री वहीं से आई थी। दिल्ली पुलिस ने सोमवार को मनीपाल में धावा बोला। मनीपाल और जामिया यूनिवर्सिटियां आतंकियों के नए अड्डे। अब येदुरप्पा का डंडा पाकिस्तानियों-बांग्लादेशियों पर चला। तो कांग्रेस के वोट बैंक पर हमला होगा। याद होगा, कोर्ट ने जब दिल्ली से बांग्लादेशी निकालने का फरमान दिया। तो कांग्रेस कैसे हड़बड़ाई थी। शीला दीक्षित की सरकार ने आज तक रवानगी शुरू नहीं की। कांग्रेस के हमजोली पासवान की तो नई दलील- 'इटली और बांग्लादेश वालों में भेदभाव न हो।' पर अपन बात कर रहे थे येदुरप्पा के आरोप की। यानी आग में घी डालने वाला आरोप। तो कांग्रेस-जेडीएस कोई कसर नहीं छोड़ रही। देवगौड़ा दिल्ली आकर धरने पर बैठे। कर्नाटक की जमीन तो खिसक ही चुकी। सो कर्नाटक की लड़ाई दिल्ली ले आए। पर देवगौड़ा से ज्यादा चतुर सोनिया। वह दिल्ली की राजनीति मेंगलूर ले जाएगी। सोनिया उड़ीसा में जाने से बची। कहीं ईसाईपरस्ती का आरोप न लग जाए। सोनिया खुद को ईसाई कहलाना पसंद नहीं करती। पर ईसाईपरस्ती में कोई कमी नहीं। अजीत जोगी हों या राजशेखर रेड्डी। दस जनपथ के आशीर्वाद से अंदरूनी गुटबाजी में सब पर भारी। रेड्डी की बात चली। तो बताते जाएं। जब से राजशेखर सीएम बने। तब से आंध्र में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण हुआ। कर्नाटक में जिस हिंदू विरोधी किताब पर बवाल हुआ। उसे भी पहले तेलुगू में लिखा गया। किताब का नाम है- 'सत्यदर्शनी'। लेखक हैं- 'परवस्तु सूर्य नारायण।' कन्नड़ में अनुवाद किया है- 'श्रीराम रेड्डी ने।' सोचो, क्या कोई श्रीराम देवी-देवताओं के खिलाफ लिखेगा। पर क्यों नहीं। जब सीता-राम येचुरी श्रीरामसेतु को तुड़वाने पर उतारू हों। तो कोई श्रीराम रेड्डी ढूंढना क्या मुश्किल। इसी किताब ने कर्नाटक में बवाल किया। सोनिया इस किताब से कितना सहमत? अपन नहीं जानते। अपन को गोधरा कांड की बात याद। जब सोनिया ने गोधरा कांड की निंदा में एक शब्द नहीं बोला। पर गोधरा कांड पर हिंदुओं का खून खौला। तो वह राष्ट्रपति भवन जा पहुंची थी। अपन ने राष्ट्रपति भवन की दहलीज पर ही पूछा था- 'आपने गोधरा कांड की निंदा क्यों नहीं की?' तो वह भड़क उठी थीं। फिर उसी शाम गोधरा कांड की निंदा का बयान जारी हुआ। अब वही बात कर्नाटक में। हिंदू विरोधी किताब पर न पीएम बोले, न पाटिल। फिर मनीष तिवारी, सिंघवी की क्या बिसात। सोनिया बोलती तो तोता रटंत शुरू होती। अपन को डर सोनिया मेंगलूर जाएंगी। तो कहीं हिंदुओं के जख्मों पर नमक न डाल आएं। दोनों के जख्मों पर मरहम लगाएंगी। तभी देश की नेता बनेंगी सोनिया। जैसे गोधरा के वक्त वाजपेयी ने किया था। बात पाटिल की। जब सोनिया मेंगलूर जाना तय करें। तो पाटिल की क्या बिसात। अपन तो साढ़े चार साल से देख रहे। सोनिया को कहीं जाना हो। पाटिल या प्रणव सरकारी उड़नखटोला लेकर दरवाजे पर खड़े होंगे। कई बार तो मनमोहन भी। सरकारी उड़न खटोले का ऐसा बेजा इस्तेमाल पहले कभी नहीं देखा।

जय हो माता की...

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