मोदी बेंगलूर में गरजे बम दिल्ली में फटे

दिल्ली में फिर बम फट गए। जयपुर के बाद अहमदाबाद-सूरत। अब दिल्ली की बारी। कांग्रेस आतंकवाद का खतरा नहीं समझ रही। समझती हो तो आंखें बंद न करती। मनमोहन के साढ़े चार साल में वाजपेयी के छह साल से ज्यादा बम फट चुके। ज्यादा गंभीर आतंकी वारदातें हो चुकी। ज्यादा लोग मर चुके। अलबता कई गुणा लोग मर चुके। पर मनमोहन-सोनिया को पोटा हटाने का जरा मलाल नहीं। पोटा पर मलाल की बात छोड़िए। अपने नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ कानून बनाया। तो उसे दबाकर बैठ गए मनमोहन। अपने शिवराज चौहान ने बनाया तो। कुंडली मार कर बैठ गए। अपनी वसुंधरा ने बनाया। तो छुपा ही लिया। सोनिया-मनमोहन के निंदा वाले बयानों का क्या मतलब। बयानों से आतंकवाद काबू नहीं होगा। दोनों के इन बयानों पर कौन भरोसा करेगा- 'कसूरवार बख्शे नहीं जाएंगे।' सब अफजल पर सोनिया-मनमोहन का रुख देख चुके। कितनी जगह बम फट चुके। सोनिया-मनमोहन का हमेशा ऐसा बयान ही आया। आतंकी पकड़े कहीं नहीं गए। पकड़े गए तो सिर्फ बीजेपी रूल गुजरात-राजस्थान में ही। बाकी कितनी जगह पर बम फटे। मुंबई, पूना, हैदराबाद, मालेगांव, वाराणसी, समझौता एक्सप्रेस। अपन को जितने याद आए गिनाए। अब दिल्ली में सीरियल बम धमाके। अपने नरेंद्र शनिवार को बीजेपी वर्किंग कमेटी में गलत नहीं बोले। जब उनने कहा- 'यह सरकार ही देश की एकता-अखंडता के लिए खतरा बन गई।' बात नरेंद्र मादी की। आतंकियों के सबसे बड़े दुश्मन मोदी। मोदी के सबसे बड़े दुश्मन आतंकी। आतंकियों और मोदी की जंग में जनता मोदी के साथ। सरकार आतंकियों के साथ। तभी तो  आतंकवाद विरोधी कानून दबाकर बैठ गई मनमोहन सरकार। पिछले हफ्ते किसी ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका लगा दी। तो अपन ने मनमोहन सरकार का रुख देख लिया। हाईकोर्ट में मनमोहन सरकार बोली- 'मोदी का कानून पोटा जैसा। जब हमने पोटा रद्द कर दिया। तो आतंकवाद के खिलाफ वैसे ही कानून को इजाजत क्यों दे।' इस हल्फिया बयान से आप को नहीं लगा मनमोहन सरकार किस के साथ। जब बाड़ ही खेत को खाने लगे। तो देश का  भगवान ही मालिक। एक नहीं मोदी ने दस उदाहरण गिना दिए। पोटा हटाना, अफजल बचाना, रामसेतु, अमरनाथ, घुसपैठियों की  पैरवी, घुसपैठ विरोधी नियम का न बनाना, सिमी समर्थन, धर्मांतरण को बढ़ाना, सच्चर कमेटी से तुष्टिकरण, मुस्लिम आरक्षण, एटमी करार से राष्ट्रीय सुरक्षा की अनदेखी। अपन से कोई वर्किंग कमेटी की उपलब्धि पूछे। तो अपन कहेंगे- मोदी का राष्ट्रीय मुद्दों पर स्पष्ट होकर उभरना। मोदी के सामने सब मंद पड़ गए। राजनीतिक प्रस्ताव पर भी हावी हो गए मोदी। शुक्रवार को हुए राजनाथ सिंह बारह पेजी भाषण। रविशंकर के पेश किए बारह पेजी प्रस्ताव में कोई ज्यादा फर्क नहीं दिखा। बीजेपी की वर्किंग कमेटी को दिशा दे दी। सब पर भारी पड़े मोदी। अब आज बारी आडवाणी की। आडवाणी वर्किंग कमेटी का समापन करेंगे। बीजेपी के अब दो नेता- आडवाणी के बाद मोदी। यों अनंत कुमार से पूछा- 'आडवाणी के बाद कौन?' तो अनंत कुमार नए विवाद से बचे। वह भी मोदी की तरह आडवाणी खेमे के। सो उनने कहा- 'फिलहाल आडवाणी को पीएम बनाना ही लक्ष्य।' पर बेंगलूर का संदेश- 'आडवाणी पीएम हों। मोदी देश के गृहमंत्री हों'  मोदी जिनकी दृष्टि सरदार पटेल की तरह साफ। जिन का राष्ट्रवाद सरदार पटेल की तरह स्पष्ट। जिन की नीति देश विरोधियों के खिलाफ सख्त। मोदी अपने मौजूदा होम मिनिस्टर जैसे नहीं। जो आतंकियों नकसलियों के हमदर्द। कसूर सिर्फ मनमोहन-पाटिल का नहीं। कांग्रेस की नजर में राष्ट्रवाद बीते जमाने की बात हो चुकी।  'यही है सोनिया की रहनुमाई वाली नई कांग्रेस'- नरेंद्र मोदी बोले। शुकर है बम बीजेपी वर्किंग कमेटी के कारण बेंगलूर में नहीं फटे। वर्किंग कमेटी में आज आडवाणी के तेवर सख्त होंगे।

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