जम्मू में झुका लिया अब गुजरात की बारी

जम्मू पर आडवाणी की चिट्ठी के बाद चारा नहीं रहा। अमरनाथ बोर्ड को जमीन देनी पड़ी। पर बुश की चिट्ठी तो मनमोहन को कहीं का नहीं छोड़ेगी। एटमी करार ही छोड़ना पड़ेगा। जार्ज बुश ने एनएसजी को लिखा है- 'भारत ने न्यूक टेस्ट किया। तो करार खत्म हो जाएगा। ईंधन की सप्लाई बंद हो जाएगी।' अपन यही शक शुरू से जाहिर कर रहे थे। पर मनमोहन संसद को गुमराह करते रहे। सोलह अगस्त 2007 को मनमोहन और प्रणव दा ने लोकसभा में कहा- 'हाईड एक्ट अमेरिका की सिरदर्दी, हमारी नहीं। हमें न्यूक टेस्ट का हक बना रहेगा।' पर अब एनएसजी में पोल खुल जाएगी। तो मनमोहन देश को क्या जवाब देंगे। आडवाणी यह मोर्चा छह सितम्बर को खोलेंगे। पर फिलहाल तो मोर्चा आतंकवादियों के तुष्टिकरण के खिलाफ। निशाने पर वही- शिवराज पाटिल। अपन ने कल ही बताया था- जम्मू की सारी गलती पाटिल की थी। तब आडवाणी ने अरुण जेटली को आगे किया। अब के नरेंद्र मोदी आगे। मोदी लंबे अर्से बाद ग्यारह अशोका रोड पर मिले। तो बोले- 'बहुत अर्से बाद मिल रहा हूं।' मिले तो फिर जमकर मिले। आडवाणी चले गए, तो भी बैठे रहे। खबरचियों से गपियाए। कहीं यह दिल्ली का मोर्चा संभालने की तैयारी तो नहीं। गपशप में सवाल यह भी हुआ। पर बड़ी होशियारी से टाल गए जवाब। हंसी ठट्ठे में सवाल टालना कोई मोदी से सीखे। सवाल सिंगूर और नैनो का उठा। तो उनने पुरानी कहानी सुनाई- 'पारसी समुद्र के रास्ते भारत पहुंचे। तो गुजरात के तट पर आए थे। लंगर डालकर पारसियों ने दूध का गिलास भेजा। तो गुजरातियों ने उसमें चीनी मिलाकर वापस भेजा था। तब से पारसियों-गुजरातियों का रिश्ता दूध-चीनी का।' समझे आप- टाटा ठहरे पारसी। मोदी बोले- 'टाटा दूध भेजें। तो हम चीनी मिला लेंगे।' यों अपन अंदर की बात बताएं। मोदी ने विलासराव-शिवराज की तरह ढिंढोरा नहीं पीटा। चुपके से न्यौता उनने भी दिया। अपन को लगता है- 'खंडूरी की आधी मलाई मोदी ही खाएंगे।' पर सवाल नैनो का नहीं। सवाल गुजरात के संगठित अपराध पर लटके कानून का। जिसे मनमोहन ने मुस्लिम विरोधी बताकर कुंडली मार ली। मोदी 29 अगस्त को पीएम से मिले। तो अपन ने यहीं पर मोदी की मांग का जिक्र किया था। मोदी ने बुधवार को उसी का खुलासा किया। बोले- 'मनमोहन से बात की। तो सुरक्षा सलाहकार नारायणन भी साथ थे। दोनों ने हर बात पर हामी में सिर हिलाया। विदेशी के साथ अब देशी आतंकवाद के खतरे को कबूला। पर वही ढाक के तीन पात। कानून को हरी झंडी नहीं दे रहे। वापस भी नहीं भिजवा रहे। एसेंबली दो बार बिल पास कर चुकी। यह लोकतंत्र का मजाक है।' यों वैसा ही कानून राजस्थान-मध्यप्रदेश का भी पेंडिंग। पर वसुंधरा-शिवराज चुप्पी साधकर क्यों बैठे हैं? यह सवाल हुआ, तो मोदी बोले- 'सबकी तरफ से मैं बोलूंगा।' सुना, वसुंधरा और चौहान साहब आपने। यों मनमोहन के हाथों में कुछ होता। तो जरूर हरी झंडी देते। सरकार की नीति साऊथ ब्लाक-सात रेसकोर्स में भी नहीं बनती। तय होता है- दस जनपथ में। तभी तो मुस्लिम तुष्टिकरण से आतंकवादियों के तुष्टिकरण तक आ पहुंचे। सो आडवाणी-मोदी ने सोनिया पर ही निशाना साधा। मोदी ने मोर्चा खोला, तो दमदार ढंग से खोला। आखिर वही तो हैं- जिनने आतंकवाद से सिमी के तार खोज निकाले। वरना शिवराज पाटिल तो 2005 में ही सिमी की लल्लो-चप्पो में लगे थे। मोदी बोले- 'नौ राज्यों में सिमी ने इंडियन मुजाहिदीन बना ली है। सिमी में उम्र की मियाद तीस साल। इंडियन मुजाहिदीन में कोई मियाद नहीं।' नौ राज्यों में दक्षिण के चारों राज्य। केरल, तमिलनाडु, आंध्र, कर्नाटक। बाकी पांच बचे- एमपी, यूपी, राजस्थान, महाराष्ट्र और जम्मू कश्मीर। मोदी ने बतौर सीएम सारे सबूत पीएम को दे दिए। सिमी की कुंडली बनाकर पेश कर दी। अपने आडवाणी ने पीएम को सलाह दी- 'जरा सिमी पर श्वेतपत्र जारी कर दो। आपके मंत्रियों रामविलास-लालू की आंखें तो खुलें। नए-नए सहयोगी मुलायम की भी।'

जोरदार लिखा है, मजा आया.

जोरदार लिखा है, मजा आया.

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