बीजेपी को नहीं पची हत्या की नक्सली थ्योरी

राजनीति नेता से क्या-क्या नहीं करवाती। अपने मनमोहन सिंह को ही देखो। जब तक सोनिया को लेकर बिहार की बाढ़ का हवाई सर्वे नहीं किया। तब तक लोग डूबते-मरते, भूख से बिलबिलाते रहे। केंद्र से राहत नहीं भेजी। सोनिया-लालू-पासवान समेत शिव की बारात लेकर बिहार गए। तब राहत राशि का मुंह खोला। राजनीति जम्मू में भी कम नहीं हुई। कंधमाल में भी कम नहीं हो रही। कंधमाल के हालात भी अभी जम्मू की तरह। गुरुवार को भी हिंसा की खबरें आईं। बीजेपी अपनी ही सरकार से खुश नहीं। पुलिस ने बिना तहकिकात किए हत्या में नक्सली हाथ बता दिया। पुलिस की यह थ्योरी बीजेपी के पल्ले नहीं पड़ रही। सो बीजेपी के दर्जनभर एमएलए इस्तीफों को तैयार। बीजेपी आलाकमान की धड़कनें बढ़ी। तो विनय कटियार को उड़ीसा भेजा। कटियार का बेकग्राउंड उग्र हिंदू लीडर का। बजरंग दल के चीफ थे, तो खुद आग उगलने वाले भाषण देते थे। अब आग उगलने वालों को काबू करने की जिम्मेदारी। यों गुरुवार को रविशंकर प्रसाद ने साफ किया- ‘बीजेपी समर्थन वापस नहीं ले रही। बीजेडी से पुराना रिश्ता। पुराने रिश्ते एक-आध झगड़े पर नहीं टूटा करते।’ रिश्ता तो पुराना। पर भाजपाई अपनी जमीन कैसे उखड़ने दें। स्वामी लक्ष्मणानंद की हत्या का राज हर कोई जानता है। हर कोई जानता है- हत्या से किस को फायदा होगा। स्वामी लक्ष्मणानंद धर्म परिवर्तन के आगे दीवार बनकर खड़े थे। यों अपन गलतफहमी दूर कर दें। उड़ीसा में धर्म परिवर्तन विरोधी कानून लागू। वैसा ही कानून अपने मध्यप्रदेश में भी। पर राजस्थान में वैसा कानून नहीं बना। विधानसभा ने पास तो किया। पर अपनी मौजूदा राष्ट्रपति तब गवर्नर हुआ करती थीं। उनने रोक लिया था। वेटिकन सिटी प्रतिभा पाटील से बेहद खुश थी। फिर सोनिया ने प्रतिभा पाटील को राष्ट्रपति बनवा दिया। बात सोनिया की चली। तो अपन कल की अधूरी बात आगे बढ़ाएं। तेईस दिसंबर 2007 को स्वामी लक्ष्मणानंद पर हमला हुआ। तो हिंदू भड़क गए थे। ईसाईयों पर हमले का खतरा बढ़ा। सीएम नवीन पटनायक ने शिवराज पाटिल को फोन किया। पैरा मिलट्री फोर्स की तीन कंपनियां मांगी। पर आप शिवराज पाटिल को तो जानते ही हैं। पहली नजर में उन्हें कोई घटना गंभीर नहीं लगती। सो उनने कह दिया- ‘मेरे पास फोर्स नहीं। अपनी पुलिस से ही काम चलाओ।’ फिर कंधमाल के ईसाई कांग्रेसी सांसद राधानाथ ने सोनिया को फोन किया। तब जाकर शिवराज पाटिल ने जम्मू से तीन कंपनियां भिजवाई। अब भी कांग्रेस ने अपनी राजनीति शुरू की। गुरुवार को कांग्रेस ने एसेंबली नहीं चलने दी। बोले- ‘कंधमाल जल रहा है। सदन में बहस का क्या फायदा।’ कांग्रेस नवीन पटनायक सरकार की बलि लेने के मूड में। श्री प्रकाश जायसवाल कंधमाल नहीं जा पाए। अब यही कांग्रेस का नया हथियार। कांग्रेस-लेफ्ट फिर एक हो गए। गुरुवार को दोनों बोले- ‘तोगड़ियां को कंधमाल जाने दिया। जायसवाल को नहीं जाने दिया। बीजेडी-बीजेपी सरकार में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं।’ यों अपन से पूछो, तो तोगड़िया-जायसवाल में कोई फर्क नहीं। जायसवाल भी ऐसे बयान कम नहीं देते। जिनसे सारे बदन में आग लग जाए। यों अपन बताते जाएं। जायसवाल को कंधमाल जाने से किसी ने नहीं रोका। उन्हें सिर्फ सलाह दी गई थी। बताया गया था- ‘अल्पसंख्यकवाद कहीं कंधमाल में उलटा न पड़े।’ जाना जायसवाल ने खुद टाला। पर बात पटनायक पर कांग्रेस-लेफ्ट हमलों की। वे कितने भी शब्दबाण छोड़ें। सरकार नहीं गिरा सकते। सरकार तो तब गिरेगी। जब बीजेपी गिराएगी। बीजेपी के तीन लीडरों सुरेश पुजारी, बीबी हरिचंदन, मनमोहन सामल की नवीन पटनायक से गुफ्तगू हो गई। तीनों ने वही बात कही। जो अपन ने कल लिखी थी- ‘नक्सली-चर्च गठजोड़ तो और खतरनाक होगा।’ तीनों ने सीएम से पूछा- ‘बिना जांच नक्सलियों का नाम कैसे लिया? हत्या का मकसद क्या था?’ फिर साफ-साफ कह दिया- ‘नक्सलियों के नाम पर असली अपराधियों को बचाया नहीं जाए।’

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