बीजेपी ने जांच एजेंसी बन अमर-उमा पर फंदा कसा

गच्चा खाई बीजेपी ने सीएनएन-आईबीएन से तलाक ले लिया। सो अब पति-पत्नी के पुराने रिश्तों पर बोलने को तैयार नहीं। यों हमलावर होने में कोई कसर नहीं। हमला करने खुद अरुण जेतली को सामने आना पड़ा। उनने सीएनएन-आईबीएन पर जम कर हमला किया। अपन ने बाद में जेतली से पूछा -'मीडिया पार्टनर चुनने में गलती हुई क्या?' जेतली को जवाब सोचने में टाईम लगा। फिर बोले-'तलाक के बाद यह नहीं पूछा जाता-आपके रिश्ते कैसे थे।' इतवार को आमतौर पर दिल्ली में इतनी चार्जड प्रैस कांफ्रेंस नहीं होती। पर जेतली की प्रैस कांफ्रेंस को कौन छोड़ता। सो इतवार के बावजूद ग्यारह अशोका रोड भर गया। अपन को मुद्दे पर कोई अंदेशा नहीं था। अपन को पता था सीडी का नया धमाका होगा। इस की दो वजहें थी। पहली-सुधींद्र कुलकर्णी का गवाह के तौर पर सामने आना। सुधींद्र ने इंडियन एक्सप्रेस में अपने कालम 'एमपी आन सेल' में कहा -'मैं सांसदों की खरीद-फरोख्त का चश्मदीद गवाह। मैं खुद सीएनएन-आईबीएन टीम के साथ अर्गल के घर पर था। संसदीय कमेटी मुझे तलब कर गवाही ले।' दूसरी वजह-अपन को पता था सोमवार को संसदीय जांच कमेटी की मीटिंग होगी। सो मीटिंग से पहला इक्कठे किए गए सबूत जारी करना जरुरी। वही हुआ। जेतली ने कहा -'मीडिया अपने फर्ज से पीछे हट गया। सो बीजेपी को जांच एजेसिंयों और मीडिया का काम करना पड़ा। ' बीजेपी ने सचमुच पुख्ता सबूत जुटा लिए। सबूतों को देख अपन ने सोचा -'आरुषि हत्याकांड की गुत्थी बीजेपी सीबीआई से पहले सुलझा लेती।' अब बात सबूतों की। अपने महावीर भगौरा तो अस्पताल में। सो इतवार को अर्गल और कुलस्ते ने जांच कमेटी के अध्यक्ष को नए सबूत सौंपे। सत्रह पेज की चिट्ठी के साथ बातचीत का ट्रांस्क्रीप्ट भी। यानी बीजेपी ने चैनल के दफ्तर में सेंध लगा ली। तभी तो ट्रांस्क्रीप्ट तैयार कर पाए होंगे। सिर्फ इतना नहीं। करोड़ रुपये नगद देने वाले की पूरी जन्मकुंडली खोलकर रख दी। एक करोड़ रुपया लाया था -'संजीव सक्सेना।' वही संजीव सक्सेना जो उमा भारती वाली सीडी में भी दिखा। पर वह संजीव सक्सेना की एक्टिंग थी। रवानगी अमर सिंह के घर की बजाए शाहिद साद्दिकी के घर से दिखाना। नोटों की बैग बीजेपी दफ्तर 9 अशोक रोड से दिखना। फिर उसी घर में घुसना। जहाँ वास्तव में 22 जुलाई की सुबह बैग लेकर पहुंचा था। एक्टिंग में दो गलतियां हुई। पहली -'अशोक अर्गल के घर के बाहर रिश्वत न लेने का बधाई बोर्ड सीडी में आ गया। ' दूसरी ब्रांडेड टी-शर्ट तो 22 जुर्लाई वाली ही थी। पर नोटों का बैग बदल गया। सीएनएन आईबीएन की सीडी में वह बैग कपड़े का। पर उमा भारती की सीडी में लेदराईट का। अब उमा को भी गवाही देनी पड़ेगी। कहां से लाई थी वह सीडी। पर बात संजीव सक्सेना की। वही, जो दोनों सीडी में मौजूद। वह है अमर सिंह का वफादार नौकर। उसका मोबाईल नवंर है-'9811721499'। इसी नबंर से उसने तीनों सांसदों की अमर सिंह से बात करवाई। जिस फोन पर बात हुई। वह था -'24616827'। यह फोन अमर सिंह के नाम पर है। बीजेपी ने मोबाईल कंपनी से सारा रिकार्ड ले जांच कमेटी को सौंप दिया। यह भी बता दिया -'सुबह यह फोन अमर सिंह के घर 27, लोधी एस्टेट के टावर दायरे में था। दस बजे अशोक अर्गल के घर 4 फिरोजशाह रोड के टावर दायरे में।'बाईस की शाम को जब सांसदों ने करोड़ रुपया संसद पटल पर पटका। तब से यह मोबाईल बंद। जेतली बोले -'मोबाइल का बंद होना ही सबूत।' पर सबूत तो और भी बहुतेरे। संजीव सक्सेना का यह मोबाईल एचएफसीएल कंपनी के नाम। यह कारपोरेट घराना अमर सिंह का खास। संजीव सक्सेना जिस सफेद जिप्सी डीएल 3 सी एस 8562 पर रुपये देने पहुंचा। वह जिप्सी पंकज आर्ट एंड क्रेडिट कंपनी के नाम। बकौल जेतली -यह कंपनी अमर सिंह परिवार की। जिस पते ई-593 जीके-2 पर जिप्सी रजिस्टर्ड । एमपी बनने से पहले अमर सिंह वहीं रहते थे। इतने ही सबूत नहीं। अलबता अमर सिंह की अहमद पटेल से फोन पर बात का वक्त। सपा सांसद रेवती रमण सिंह से तीनों सांसदों की बातचीत। सब सबूत किशोर चंद्र देव को सौंप दिए। कटघरे में खड़े होने से कैसे बचेगें रेवती रमण, अमर सिंह, अहमद पटेल। कहां भागेंगे- संजीव सेक्सेना। सीएनएन का वह स्टाफ भी गवाह जिसने अर्गल के घर कैमरा फिट किया। अभी तो सबूतों की पहली खेप। जेएमएम सांसदों की खरीद-फरोख्त से यादा पुख्ता है सबूत।

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