बमों के तार कहीं दाऊद इब्राहिम से तो नहीं जुड़े

गुजरात में बमों का मिलना अभी जारी। बुधवार रात तक सूरत में सत्ताईस बम मिल चुके। हैरानी की बात। अहमदाबाद के सभी बम फट गए। सूरत का एक भी नहीं फटा। बुधवार को अपने नरेंद्र भाई मोदी सूरत पहुंचे। वह लबेश्वर चौक गए। जहां मंगलवार को अच्छे-खासे बम मिले। मोदी बड़ोदा प्रेसटीज मार्किट से सिर्फ पांच सौ मीटर दूर थे। जहां बुधवार को भी बम मिला। अपन गुजरात में आतंकवाद की जड़ में जाएं। उससे पहले जरा सांसदों की खरीद-फरोख्त का आतंकवाद देख लें। दिग्गी राजा का दावा तो हवा हो गया। बुधवार को नोटों की गड्डियां जांच कमेटी के सामने आई। तो किसी गड्डी पर इंदौर के बैंक की मुहर नहीं थी। दिग्गी राजा ने शक की सुई शिवराज सिंह चौहान पर टिका दी थी। अब शक की सुई भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर टिकेगी। अहमद पटेल के काफी करीब हैं भूपेंद्र सिंह हुड्डा। नोटों की गड्डियों पर गुड़गांव-फरीदाबाद के बैंकों की मुहर। सुषमा स्वराज के आतंकवाद वाले बयान से अपन सहमत नहीं थे। पर दिग्गी राजा को चुनौती दमदार रही। यों अपन को किशोर चंद्र देव की कमेटी से ज्यादा उम्मीद नहीं। सात मेंबरी कमेटी में चार मेंबर सरकारी बेंचों के। सो अपना अंदेशा- वह बी. शंकरानंद साबित होंगे। बोफोर्स कांड की जेपीसी के अध्यक्ष थे बी. शंकरानंद। इस कमेटी की रपट थी- 'कोई घोटाला नहीं हुआ।' पर बाद में क्वात्रोची के घूसखोरी वाले खाते सील हुए। तो कांग्रेस बुरी तरह फंस गई थी। अब जब यूपीए सरकार बनी। तो अपने हंसराज भारद्वाज ने क्वात्रोची के सील खाते खुलवाए। खैर बुधवार को किशोर चंद्र कमेटी ने जांच शुरू की। कमेटी अब चार अगस्त को बैठेगी। अपने एमपी के अर्गल-कुलस्ते बुला लिए गए। अपने राजस्थान के महावीर भगोरा भी। भगोरा की बात चली। तो बताते जाएं- भगोरा को हार्ट अटैक हो गया। अहमदाबाद के अस्पताल में आपरेशन। इधर बुधवार को कैश फार वोट की जांच शुरू हुई। उधर बीजेपी ने तीनों सांसदों की शिकायत जग जाहिर की। शिकायत में लिखा है- 'हमें सीधे अपरोच किया गया। तो हमने भंडाफोड़ करने का फैसला किया। हमने सीएनएन-आईबीएन से संपर्क साधा। चैनल ने सिध्दार्थ गौतम को काम पर लगाया। इक्कीस की रात को रेवती रमण सिंह का संदेश आया। वह आधी रात के बाद मिलने आए। सीएनएन-आईबीएन ने सारी बात रिकार्ड की। सुबह हमें अमर सिंह से मिलाने ले जाया गया। सीएनएन-आईबीएन की कार हमारे पीछे थी।' तीन पेज की लंबी-चौड़ी चिट्ठी में कई खुलासे। पर बात फिलहाल सीएनएन-आईबीएन चैनल की। मीटिंग से निकलते हुए किशोर चंद्र ने कहा- 'हमने चैनल पर कोई रोक नहीं लगाई। वह चाहे तो स्टिंग आपरेशन दिखाए।' अब कटघरे में पद्मश्री राजदीप सरदेसाई भी। पिछले दिनों एक अखबार के फंक्शन में नरेंद्र मोदी दिल्ली आए। तो राजदीप सरदेसाई मंच संचालन कर रहे थे। मोदी देखकर आग बबूला हो गए। राजदीप-मोदी में छत्तीस का आंकड़ा दंगों के वक्त से। गुजरात में हालात अब भी दंगों के। आतंकियों ने जिस तरह गुजरात को जगह-जगह छलनी किया। जनता का सब्र कब टूट जाए। कहना मुश्किल। अपन ने कल लिखा था- 'यूपीए सरकार की नीतियों से आतंकियों के हौंसले बढ़े। आतंक फैलाने वालों को यूपीए सरकार अपनी सी लगी।' सूरत में बम भले नहीं फटे। सूरत के बम डेटोनेटर बैटरी से जुड़े थे। अहमदाबाद के बमों में टाइमर डिवाइस लगी थी। बनाने में जरूर कोई तकनीकी खामी रही होगी। वरना बेंगलुरु-अहमदाबाद-सूरत के बम एक जैसे। बमों का रिश्ता वड़ोदरा से भी। कारों पर नंबर वड़ोदरा के थे। बमों पर लिपटे अखबार वड़ोदरा के थे। बम बनाने-लगाने में सौ से ज्यादा लोग लगे होंगे। इतने लोग पाकिस्तान से तो नहीं आए होंगे। तीनों शहरों में बम लगाने का तरीका 1993 में मुंबई में लगाए बमों जैसा। जयपुर में भी यही तरीका अपनाया गया। तो क्या- आतंकवाद की मौजूदा आंधी के पीछे कराची बैठे दाऊद का हाथ। सुरक्षा एजेंसियों के माहिर बी रमन को भी यही शक। काबिल-ए-गौर है- आतंकवाद की आंधी मुंबई बम धमाकों के अदालती फैसले के बाद चली।

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