घोड़े बिकेंगे बाजार में, लगेगी घोड़ामंडी

अपन ने जब लिखना शुरू किया। तो मनमोहन सिंह उड़न खटोले पर बैठ चुके थे। आते ही सोनिया-प्रतिभा पाटील से मिलेंगे। सीसीपीए की मीटिंग भी होगी। ताकि बहुमत साबित करने की तारीख मुकर्रर हो।  बुधवार को लेफ्ट ने प्रतिभा ताई को समर्थन वापसी की चिट्ठी दी। तो सोनिया ने वर्किंग कमेटी की मीटिंग बुला ली। जुमे के दिन यानी कल होगी वर्किंग कमेटी। यों तो हालात बेहद नाजुक। अपन को 1999 से कोई फर्क नहीं दिखता। जब वाजपेयी की सरकार एक वोट से गिरी थी। पर दिग्गी राजा और वीरप्पा मोइली बेफिक्र दिखे। बेफिक्री वाला 280 का आंकड़ा परोसते रहे। मनीष तिवारी तो बिजली की चमक में चकाचौंध दिखे। बोले- 'सरकार को कोई खतरा नहीं। एटमी करार होगा। तो देश में बिजली चमचमाएगी।' अपन मनीष तिवारी के जनरल नॉलेज को चुनौती नहीं देते। पर आपको बता दें। मनमोहन-बुश ने सितंबर में वन-टू-थ्री पर घुग्गी मारी। तब भी बिजली देने वाला रिएक्टर 2020 से पहले चालू नहीं होगा। यानी मनमोहन के बाद दो-तीन सरकारें और निपटेंगी। तब जाकर पहला रिएक्टर चलेगा। आपको एटमी बिजली का करंट न लगे। सो अपन पहले सावधान कर दें। आज ही एटमी बिजली मिलने लगे। तो एक यूनिट आठ रुपए से कम नहीं होगा। यानी मौजूदा रेट से तीन गुना। अब आप 2020 का अंदाजा लगा लें। अपने हिसाब से चौबीस-पच्चीस रुपए यूनिट बैठेगा। आम आदमी को बिजली तब चमचमाती नहीं दिखेगी। आम आदमी तो करंट लगाकर आत्म हत्या के लिए ही इस्तेमाल करेगा। पर मनमोहन-सोनिया सब कर रहे हैं आम आदमी के नाम पर। वैसे अपन को अजित सिंह के वोट का कोई भरोसा नहीं। आखिरी वक्त क्या लेन-देन हो जाए। पर उनने इथनॉल और पवन ऊर्जा की बात उठा दी। यह बात तब भी चली थी। जब एटमी करार पर बहस हो रही थी। अमेरिका ने हर करार विरोधी को पटाने के लिए दूत भेजे थे। दूत कलाम और बृजेश मिश्र को भी मिले थे। अमर सिंह तो अमेरिका जाकर खुद पट आए। पर अमेरिकी दूत आडवाणी-वाजपेयी को नहीं पटा पाए। खैर लेफ्ट ने समर्थन वापस लिया। तो मुलायम-अमर की जोड़ी समर्थन की नई चिट्ठी दे आई। अब जिसको राजनीति की जरा भी समझ। वह आजकल आंकड़ो के जमा-घटाओ से कागज खराब करने में मशगूल। तो आपकी सहूलियत के लिए अपन कुछ आंकड़े रख दें। बुधवार का सरकार का ताजा आंकड़ा 269 का। यानी टू-सेवंटी-टू से तीन कदम दूर। अपन को 1999 का वह दिन नहीं भूलता। जब एक वोट से वाजपेयी की सरकार गिराकर सोनिया राष्ट्रपति भवन गई थी। केआर नारायण से मिलकर बाहर निकली। तो अपन राष्ट्रपति भवन की चौखट पर खड़े थे। सोनिया से पूछा- 'कितना नंबर हो गया?' तो वह जाते-जाते 'तू सेवंती तू' बोलकर चली गई। सोनिया का यह जुमला कई दिन अखबारों-मैगजीनों में छाया रहा। पर मुलायम सिंह आखिरी वक्त पर गच्चा दे गए थे। अब वही मुलायम गिरती-पड़ती कांग्रेसी सरकार बचाने को बेताब। बेगाने की शादी में कोई मुलायम यों ही दिवाना नहीं होता। कोई बड़ी सौदेबाजी जरूर हुई होगी। आखिर हू-ब-हू ऐसे ही मौके पर नरसिंह राव ने थैलियों के मुंह खोल दिए थे। अब जब मनमोहन भी वैसे ही हालात से रू-ब-रू। तो नरसिंह राव के दांवपेच याद आते होंगे। वैसे ही अब भी घोड़ामंडी लगेगी। जिसकी अंटी में पैसे होंगे, घोड़े वही ले जाएगा। आने वाले दस दिनों में अपन ऐसे-ऐसे घोड़ों का नाम सुनेंगे। जिनका पिछले चार साल में सुना न हो। पर फिलहाल बात बुधवार के उतार-चढ़ाव की। कांग्रेस के पाले में 269 का आंकड़ा हो गया। इसमें अपन ने जेडीएस के बागी विरेंद्र कुमार, बीएसपी के बागी उमाकांत, टीआरएस के बागी ए. नरेंद्र, एसडीएफ के नुकुल दास राय, पीडीपी की महबूबा, दादरा नगर हवेली के देलकर, लद्दाख के थुप्सत्म जोड़ लिए। मणिपुर-असम-नगालैंड-मिजोरम के चार सांसदों पर कांग्रेस की नजर। ममता ने अभी मुंह नहीं खोला। देवगौड़ा, अजित सिंह राजनीतिक कीमत वसूलेंगे। चंद्रशेखर राव ने राजनीतिक कीमत बता दी। बोले- 'तेलंगाना दे दो, समर्थन ले लो।'

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