तो आडवाणी ने थामी महाराष्ट्र की महाभारत
अपन ने तो कल को ही लिख दिया था। आडवाणी की बीच बचाव से गोपीनाथ मुंडे दिल्ली आने को राजी। मुंडे तो सोमवार की रात ही आ जाते। पर फ्लाइट के चक्कर में नहीं आ पाए। मंगलवार सुबह दिल्ली पहुंचे। तो सीधे आडवाणी के घर गए। मुंडे ने राजनाथ से नाराजगी के पूरे सबूत दिए। यों फारमेल्टी के लिए बाद में राजनाथ से मिले जरुर। पर मुंडे ने आडवाणी को पहले ही कह दिया था- 'बात आपसे ही करुंगा।' सो दिनभर बैठकों का दौर आडवाणी के घर ही चला। आडवाणी के सिपाहसलार वेकैंया नायडु भी दिनभर डटे रहे। यानी झगड़े निपटाने का जिम्मा आडवाणी कैंप ने संभाला। राजनाथ कैंप को मुंह की खानी पड़ी। यों राजनाथ सिंह ने सोमवार को ही हथियार डाल दिए थे। शाम को कोर कमेटी शुरु हुई। तब तक राजनाथ की हवाईयां उडी थी। मुंडे ने दिल्ली आने से इंकार कर दिया था। हालांकि आडवाणी रजामंद कर चुके थे। उनने कोर कमेटी की मीटिंग में ही रजामंदी का खुलासा किया। तो राजनाथ की जान में जान आई। कोर कमेटी से निकलते राजनाथ बोले- 'मुंडे दिल्ली आ रहे हैं।' बात कोर कमेटी की। जहां राजनाथ के साथ सिर्फ बाल आप्टे दिखाई दिए। आप्टे भी बचाव मुद्रा में ज्यादा थे। अपन ने कल ही लिखा था- झगड़े की सारी जड़ बाल आप्टे-नितिन गड़करी गठजोड़। इसी गठजोड़ ने मुंडे को महाराष्ट्र से बाहर भेजा। पर कोर कमेटी ने रुख तय किया। तो मंगलवार सुबह पार्लियामेंट्री पार्टी से निकलते हुए आप्टे बोले- 'मुंडे महाराष्ट्र के नेता। मुंडे की रहनुमाई में ही चुनाव लड़े जाएंगे।' यही तो सबसे बड़ा झगड़ा था। जो मुंडे के दिल्ली आने से पहले ही कोर कमेटी में निपट गया। कोर कमेटी ने ही मुंडे से बात का जिम्मा आडवाणी को सौंपा। कोर कमेटी में आडवाणी कैंप पहली बार हमलावर हुआ। यों भी कोर कमेटी में राजनाथ कैंप अल्पसंख्यक। सो हमले शुरु हुए, तो जमकर हुए। दिल्ली से लेकर पटना तक की बात उठी। बंगलुरू से लेकर मुंबई तक की बाते हुई। आखिर हर जगह बगावत क्यों। ऐसा नहीं, जो बगावतें पहले न हुई हों। आडवाणी के समय भी कम नाराजगियां नहीं हुई। आडवाणी के रहते ही गोविंदाचार्य को जाना पड़ा। कल्याण सिंह को रुख्सत होना पड़ा। दोनों आडवाणी के खास थे। पर आडवाणी कुछ नहीं कर पाएं। आडवाणी के रहते ही बाबूलाल मंराडी गए। उमा भारती गई। मदन लाल खुराना गए। मध्यप्रदेश से तो लंबी चौड़ी फौज गई। सभी संघ बैकग्राउंड के। कल्याण सिंह के बाद रघुनंदन शर्मा-मदन लाल खुराना की वापसी हुई। एक तरफ लोकसभा चुनाव से पहले सारा बिखरा कुनबा समेटने की तैयारी। तो दूसरी तरफ नई बगावतों का दौर। सो कोर कमेटी में राजनाथ की काबलियत पर सवाल उठा। पर बात मुंडे के दिल्ली आने की। मुंडे न सिर्फ दिल्ली पहुंचे। अलबत्ता अपना इस्तीफा भी वापस लिया। अपन ने कल भी लिखा था-विवाद मधु चव्हाण का नहीं। पर मधु चव्हाण की तैनाती फौरी विस्फोट की वजह बनी। सो मंगलवार को तय हुआ- मधु चव्हाण नहीं, मुंबई के भाजपा अध्यक्ष गोपाल शेट्टी होंगे। आडवाणी के घर पहले मुंडे-आडवाणी-वेकैंया में घंटा भर बात हुई। फिर पांडुरंग-खड्के की आडवाणी-वेकैंया से बंद कमरे में बात हुई। फिर रामनाईक, प्रकाश जावड़ेकर, किरिट सौम्मया, प्रकाश मेहता, एकनाथ खड्के, पांडुरंग फडके की वेकैंया से बैठक हुई। सब का लंच भी आडवाणी के घर हुआ। निपटकर मुंडे पार्टी अध्यक्ष राजनाथ से मिले। महाराष्ट्र का संकट तो कटा। आडवाणी भाजपा के पितृ पुरुष बनकर उभरे।
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