लालकिला की होड़ में राहुल से आगे आडवाणी

इतिहास में आठ अप्रेल का खास महत्व। अंग्रेजों ने मंगल पाण्डे को इसी दिन फांसी दी। भगत सिंह ने इसी दिन संसद के सेंट्रल हाल में बम फेंके। सो बीजेपी ने 1857 की क्रांति का याददाश्त दिन मनाया। देशभर से पहुंचे 1857 मोटरसाईकिलों का काफिला लालकिला पहुंचा। अपने आडवाणी ने लालकिले से बोलने की रिहर्सल कर ली। बात आडवाणी की चली। तो याद कराएं- भगत सिंह ने संसद में बम फेंका। तो उम्रकैद हुई। आडवाणी ने 'माई कंट्री माई लाइफ' में गलत लिखा। भगत सिंह को बम फेंकने पर फांसी नहीं हुई। अलबत्ता सांडर्स हत्याकांड में फांसी हुई थी। आडवाणी से किताब में कम गलतियां नहीं हुई। अपने सतपाल डांग को मरा हुआ बता दिया। अट्ठासी साल के डांग अभी अमृतसर में मौजूद। पता चला, तो आडवाणी ने फोन कर माफी मांगी। कंधार अपहरण के समय अमेरिकी राजदूत रिचर्ड सेलेस्टे से बात हुई। पर लिख दिया- राबर्ट ब्लैकविल। ऑप्रेशन ब्ल्यू स्टार का ठीकरा अपने सिर फोड़ लिया। कंधार के मामले में तो किताब पर इंटरव्यू में फंसे। कांग्रेस को किताब के बहाने आडवाणी पर हमले का अच्छा मौका मिला। लगातार बारहवें दिन भी सिंघवी आलोचना करते दिखे। तो एक खबरची ने कहा- 'कब तक आलोचना करते रहोगे? आलोचना से किताब की बिक्री बढ़ रही है।' सिंघवी को काटो, तो खून नहीं। किताब में भले दर्जनों गलतियां हों। पर बिक गई हाथों-हाथ। पचास हजार छपी थी। सारी बिक गई। पाकिस्तान में भी जमकर बिकी। खासकर सिंध में। सिंध की बात चली। तो बताते जाएं- बंटवारे के बाद पहली बार सिंध के हिंदू वैष्णोदेवी के दर्शन करने पहुंचे। भारत-पाक रिश्तों की बात चल ही पड़ी। तो यह भी बताते जाएं- गुलाम कश्मीर में जाने के इच्छुकों की तादाद साढ़े चौदह हजार। पर हर साल जा पाएंगे- पांच सौ। यानी तीस साल की लाइन अभी से तैयार। अपन को नवाज शरीफ का फार्मूला अच्छा लगा- 'वीजा प्रणाली बंद की जाए। बॉर्डर पर जाकर पासपोर्ट दिखाओ, मोहर लगवाओ। सीमा पार करो।' पर करनी और कथनी एक जैसी होती। तो अपने देश की यह हालत न होती। आम आदमी का हाल देख लो। जिसे झुनझुना दिखाकर कांग्रेस सत्ता में आई। महंगाई से आम आदमी का कचूमर निकाल दिया। तो पहले दुनियाभर में महंगाई का बहाना लगाया। पर जब यह बहाना नहीं चला। तो सोनिया बोली- 'राज्य सरकारें महंगाई घटाने में मदद करें।' गैर कांग्रेसी सरकारों पर हमले की तरकीब तो अच्छी। पर अपने प्रेम कुमार धूमल ने गजब का पलटवार किया। मंगलवार को असेंबली में ताल ठोककर बोले- 'केंद्र की कांग्रेसी सरकार ने मुद्रास्फीति साढ़े छह फीसदी कर दी। पर हिमाचल में सिर्फ 3.2 फीसदी।' अपने नरेंद्र मोदी अभी बोले नहीं। उनने जीडीपी में ही चिदंबरम की बोलती बंद कर दी थी। अब बोले, तो सोनिया की बोलती बंद होगी। पर फिलहाल तो मायावती लगी है राहुल की बोलती बंद करने। यों यह मायावती की बेचैनी। राहुल बाबा दलित के घर क्या गए। मायावती की नींद उड़ गई। दलितों से बोली- 'दलित के घर से लौटकर सुगंधित साबुन से नहाते हैं राहुल। अगरबत्तियां जलाकर खुद को शुध्द करते हैं।' कांग्रेस ने पांचवीं पीढ़ी का गांधी उतारा। तो सबसे ज्यादा मायावती परेशान। मोहनदास करमचंद गांधी के बाद इंदिरा गांधी। इंदिरा के बाद राजीव गांधी। राजीव के बाद सोनिया गांधी। अब राहुल गांधी। सोनिया की तरह अब राहुल को भी त्यागी-तपस्वी बताने की मुहिम शुरू। पर राहुल बाबा राज्यमंत्री क्यों बनते। सीधे पीएम बन लालकिला पहुचेंगे। पर मंगलवार को राहुल पर भारी पड़े आडवाणी। उनने इंतजार नहीं किया। लालकिले पर भाषण दे दिया। पर बात मायावती की भड़ास की। जिस पर कांग्रेसी तो भड़के, सो भड़के ही। राहुल की सबसे ज्यादा तरफदारी राजनाथ सिंह ने की। राहुल के सुगंधित साबुन से नहाने की मायावाणी पर बोले- 'यह बेतुकी बात है।'

आप ठीक कह रहे है, मायावती का

आप ठीक कह रहे है, मायावती का यह कहना तो साम्प्रदायिक दंगों को भडकाने का काम लग रहा है|दलितो के यहाँ से आकर राहुल का शुद्धिकरण हो रहा है...:) नेताओ का उलट फ़ेर तो मुझे भी समझा आया था जरा देखिये... http://sanuspoems.blogspot.com/

पाँच पिढी? गाँधीजी को राहूल

पाँच पिढी? गाँधीजी को राहूल के साथ जोड़ना अजिब लगा, बाकि चकाचक है.

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