मुशर्रफ से पहला टकराव तो इफ्तिखार पर

तो पाकिस्तान में वकील फिर सड़कों पर आ गए। परवेज मुशर्रफ की पार्टी का यह हाल न होता। अगर उनने तीन नवंबर को ज्यूडिसरी पर हमला न किया होता। अब तो मुशर्रफ को अपने दिन गिनने चाहिए। अमेरिका भी कितनी मदद करेगा। रिपब्लिकन पार्टी का यों भी अमेरिकी चुनाव जीतना मुश्किल। ओबामा हो या हिलेरी। जीतेंगे डेमोक्रेट। बुश की नीतियां कुछ दिन की मेहमान। तब तक मुशर्रफ बच गए। तो बच गए। उसके बाद तो मुशर्रफ का मुश्किल। अपन आसिफ जरदारी का रुख तो नहीं जानते। पर इतना तो साफ- वह अमेरिकी दबाव में। सो जजों की बहाली पर उतने गर्म नहीं। जितने नवाज शरीफ हो चुके। गुरुवार की बात ही लो। चुनावी नतीजों का उत्साह वकीलों में दिखा। तो कराची से लेकर लाहौर तक वकील सड़कों पर उतरे। जीत का जश्न बार एसोसिएशन ने इफ्तिखार के घर के बाहर मनाया। तो नवाज शरीफ खुद भाषण देने पहुंचे। बर्खास्त चीफ जस्टिस भले ही अपने घर में कैद। पर जब बाहर नवाज शरीफ दहाड़ रहे थे। तो अंदर से इफ्तिखार चौधरी टेलीफोन पर कराची में बोल रहे थे। कराची की बार एसोसिएशन ने भी जश्न मनाया। तो इफ्तिखार चौधरी ने टेलीफोन पर भाषण दिया। इफ्तिखार चौधरी बोले- ‘मुझे प्रशासनिक आदेश से बर्खास्त किया गया। प्रशासनिक आदेश से ही बहाली संभव। नेशनल एसेंबली में दो तिहाई बहुमत की जरूरत नहीं। मैं और बाकी सभी बर्खास्त किए गए जज अभी भी कानून जज हैं। जैसे ही मेरी नजरबंदी खत्म होगी। मैं सुप्रीम कोर्ट चार्ज लेने जाऊंगा।’ नवाज शरीफ ने क्या कहा, अपन बताएं। उससे पहले बता दें। कराची में वकीलों पर आसूं गैस के गोले छोड़े गए। बात कराची की चली। तो एक बात और बताते जाएं। अपनी शेयर मार्केट का नेशनल अड्डा मुंबई में। तो पाकिस्तान की शेयर मार्केट का नेशनल अड्डा कराची में। मुशर्रफ की हार का नतीजा देखिए। स्टॉक एक्सचेंज पुराने सारे रिकार्ड तोड़ गया। अब बात नवाज शरीफ की। तो वकीलों को संबोधित करते हुए वह बोले- ‘आपका काम कानून का पालन करना है। परवेज मुशर्रफ के आदेशों का पालन करना नहीं। परवेज मुशर्रफ तो खुद ही गैर कानूनी और असंवैधानिक।’ नई सरकार में अपन को यही सबसे बड़ा पेंच लगा। नवाज शरीफ का एजेंडा साफ- ‘मुशर्रफ की बर्खास्तगी। इफ्तिखार चौधरी की बहाली।’ पर जरदारी इन दोनों मुद्दों पर अमेरिकी दबाव में। यों जनता का फैसला मुशर्रफ के खिलाफ। पर जनता का फैसला बेनजीर-जरदारी की पीपीपी के हक में ज्यादा। नवाज शरीफ से 21 सीटें ज्यादा जो मिली। पर जरदारी-नवाज गठबंधन कामयाब रहा। तो अमेरिका भी साथ-साथ हो लेगा। गुरुवार शाम नवाज शरीफ-आसिफ जरदारी मुलाकात हुई। तो तस्वीर साफ होने लगी। नवाज शरीफ पीएम पद के दावेदार नहीं। यह अपने आप में गठबंधन के लिए अच्छी बात। आखिर राजनीति में एक हाथ ले। एक हाथ दे ही सफलता की कुंजी। पाकिस्तान में पीपीपी सरकार बने। पंजाब में मुस्लिम लीग की सरकार बने। केंद्र में मुस्लिम लीग पीपीपी को समर्थन दे। पंजाब में पीपीपी मुस्लिम लीग को समर्थन दे। सिंध में पीपीपी को बहुमत मिल ही चुका। जहां तक बात नार्थ-वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस और ब्लूचीस्तान की। तो वहां आवामी नेशनल पार्टी ताकतवर होकर उभरी। यह अच्छी बात हुई। जो जरदारी-शरीफ मुलाकात में एएनपी को साथ लेने की बात हुई। तीनों का गठबंधन हुआ। तो सरकार मजबूत होगी। पर पहला टकराव इफ्तिखार चौधरी पर ही तय। परवेज मुशर्रफ अकड़कर बोले- ‘इफ्तिखार चौधरी की बहाली असंभव।’ कहावत है ना- ‘रस्सी जल गई, बल नहीं गया।’ अब फैसला पीपीपी को करना होगा। पीएम कौन होंगे। मकदूम अमीन फाहिम, शाह महमूद कुरेशी या युसूफ रजा गिलानी। अपन ज्यूडिसरी से जोड़कर देखें। तो मौजूदा जमहूरियत में बार एसोसिएशन की भूमिका अहम। सो बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एतजाज अहसान की राय में दम। उनने मकदूम अमीन फाहिम की पैरवी की। फाहिम का पलड़ा भारी। पर जरदारी का रुख साफ नहीं।

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