महिला आरक्षण कांग्रेस के जी का जंजाल

Publsihed: 30.Jan.2008, 20:35

सांप्रदायिकता भड़काने वाली सीडी का भूत फिर निकल आया। खुन्नस निकालने मायावती का भी जवाब नहीं। जिस लालजी टंडन के हाथ पर राखी बांधती थी। उसी हाथ में हथकड़ी का इरादा। अपने राजनाथ सिंह भी लपेटे में। यूपी चुनाव के दौरान सीडी का बवाल खड़ा हुआ। तो चुनाव आयोग के फरमान पर एफआईआर दायर हुई थी। बीजेपी ने सीडी से नाता तोड़ा, वापस ली। आयोग के कहने पर माफी भी मांगी। पर मायावती ताज घोटाले की खुन्नस निकालने पर उतारू। वाजपेयी के समय ताज घोटाले में न फंसती। तो बीजेपी-बसपा शादी भी न टूटती। अब जब मायावती ने सीडी का भूत निकाला।

तो भाजपाईयों के पसीने छूट गए। चार्जशीट होते ही राजनाथ फिर गिरफ्तारी देने जाएंगे। तब गिरफ्तारी देने गए थे। तो पुलिस ने कहा था- 'राजनाथ के खिलाफ कोई सबूत नहीं।' बीजेपी के डेलीगेशन को यों भी नवीन चावला के खिलाफ पटीशन डालनी थी। सो बुधवार को सीईसी गोपालस्वामी को डेलीगेशन मिला। तो लगते हाथों मायावती की शिकायत भी हुई। पर चुनाव आयोग का अब मायावती पर कोई जोर नहीं। मायावती मदमस्त हथनी की तरह सभी को फुंफकारने लगी। बुंदेलखंड में राहुल ने मोर्चा खोला। तो मायावती ने राहुल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। अब मायावती-सोनिया में जल्द से तालमेल के आसार नहीं। मायावती ने सोनिया को भी चुनौती दे दी- 'इनकम टैक्स और ताज कॉरिडोर मामले में जो करना चाहें कर लें।' पर बात नवीन चावला की चली थी। तो बताते जाएं- एनडीए ने चावला के खिलाफ फिर मोर्चा खोल लिया। डेढ़ साल पहले चावला के खिलाफ राष्ट्रपति को अलख जगाई थी। पर अपने कलाम ने पटीशन सीईसी की बजाए पीएम को भेज दी। केबिनेट ने पटीशन खारिज कर दी। तो अपने जसवंत सिंह सुप्रीम कोर्ट गए। कोर्ट में सरकार ने कहा- 'पटीशन चुनाव आयोग को भेजना, न भेजना केबिनेट का काम।' अदालत ने इस बाबत आयोग से पूछा। तो सीईसी ने कहा- 'आयुक्त को हटाना मेरे अधिकार के क्षेत्र में। पर मेरे पास कोई पटीशन तो आए।' कोर्ट की सलाह से जसवंत ने पटीशन वापस ली। तय था- एनडीए अब सीईसी का दरवाजा खटखटाएगा। सो बुधवार को 180 एमपी के दस्तखतों वाली पटीशन दायर हुई। तो कांग्रेस फिर से आग बबूला हो गई। अपनी जयंती नटराजन बोली- 'बीजेपी का तो काम ही संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ बोलना।' पर अपन बताते जाएं। पटीशन में एक आरोप नवीन चावला की कांग्रेस से नजदीकी। इसके सबूत भी नत्थी किए। दूसरा आरोप- ईसी बनने के बाद बीजेपी विरोधी फैसलों का। यह आरोप चुनाव आयोग के फैसलों से ही निकला। आधार बना- आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी। अपन बताते जाएं- एन गोपालस्वामी जून में रिटायर होंगे। तो नवीन चावला सीईसी बन जाएंगे। लोकसभा चुनाव में सीईसी हुए। तो कांग्रेस को फायदा करेंगे। सो एनडीए का एजेंडा सोनिया करीबी चावला को सीईसी बनने से रोकना। लोकसभा चुनाव की बात चली। तो बता दें, यों तो चुनाव को सवा साल बाकी। पर अपने गोपालस्वामी ने चुनावी तैयारियां शुरू कर दी। देशभर के मुख्य चुनाव अधिकारियों की मीटिंग सात फरवरी को। आखिर नवंबर में चुनावों की फुसफुसाहट आयोग तक भी पहुंची होगी। चुनावों की बात चल ही पड़ी। तो बताएं- अपन ने बीजेपी का एजेंडा तो बता ही दिया- 'महिलाएं और मोदित्व।' मोदित्व का सेक्युलरवादी कोई भी मतलब निकालें। पर अब मोदित्व का मतलब विकास। जहां तक महिलाओं की बात। तो महिला आरक्षण भी अब कांग्रेस के गले की हड्डी। बुधवार को कांग्रेस ने साफ कर दिया- 'तैंतीस फीसदी टिकटों का फार्मूला कांग्रेस को मंजूर नहीं। कांग्रेस तैंतीस फीसदी सीटों के आरक्षण पर ही बाजिद।' यानी न सहमति बनेगी, न आरक्षण होगा। कांग्रेस का इरादा साफ- 'न नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेगी।'

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