गणतंत्र दिवस के दुकानदार

अपनी नई राष्ट्रपति का देश के नाम पहला संदेश। दूरदर्शन-आकाशवाणी से जारी हुआ। एक जमाना था- जब भाषण सुनने को देश थम जाता था। पर अब लोगों की दिलचस्पी घटने लगी। नेताओं की कथनी-करनी एक सी रहती। तो राष्ट्रपति के भाषण का बजट की तरह इंतजार होता। पर जब प्रतिभा पाटिल देश को संदेश दे रही थी। तो सारे प्राइवेट खबरिया चैनल किडनी रैकेट दिखा रहे थे। गुड़गांव में चल रहा था दुनिया का सबसे बड़ा किडनी रैकेट। अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, इटली तक से आते थे किडनी के ग्राहक। बात इटली की चली। आप चौंकिए नहीं। अपन सोनिया की बात नहीं कर रहे। अपन बात कर रहे हैं कार्ला ब्रूनी की। आज अपने गणतंत्र दिवस के विदेशी मेहमान निकोलस सरकोजी की गर्लफ्रेंड। यों सोनिया भी जब भारत आई। तो राजीव गांधी की पत्नी नहीं, गर्लफ्रेंड थी। फ्रांस के राष्ट्रपति सरकोजी के साथ कार्ला ब्रूनी नहीं आई। पर कार्ला ब्रूनी की बात चल ही गई। तो बताते जाएं- सरकोजी की गर्लफ्रेंड बनने से पहले मिक जैगर, एरिक क्लाप्टन, डोनाल्ड कै्रपटर, राफेल एंथोबेन की गर्लफ्रेंड थी। सो काफी तजुर्बेकार है। सरकोजी आज ताजमहल देखने जाएंगे। तब टपक पड़ेगीं, अपने मीडिया को ऐसी उम्मीद। पर फ्रांसीसी खबरचियों को यह उम्मीद कतई नहीं। अपन भी क्या कर्ला ब्रूनी को लेकर बैठ गए। अपने यहां कम तजुर्बेकार गर्ल फ्रेंड नहीं। ऐश्वर्या राय को ही लें। सलमान, विवेक और अब अभिषेक। करीना कपूर को ही लें। शाहिद कपूर हाथ मलते रह गए। सैफ ले उड़े। कहीं और कोई और न ले उड़े। सो सैफ ने एक हाथ में नाम खुदवा लिया। दूसरा काटकर खून बहा लिया। पर गणतंत्र दिवस पर अपन भी क्या लफड़ा लेकर बैठ गए। इससे बड़ा लफड़ा तो बर्ड फ्ल्यू का। जो कोलकाता तक आ पहुंचा। अब बंगाल की सीमा पार हो गई। बिहार, मेघालय के बाद झारखंड भी सावधान। अपन ने कल मुर्गेबाजों के रोजों का जिक्र किया। मुर्गेबाजों ने रोजे शुरू न किए, तो बाँग देते दिखेंगे। कहते हैं- बर्ड फ्ल्यू वाला मुर्गा सीधा गले पर असर करेगा। आने वाले दिनों में सारा देश बर्ड फ्ल्यू का शिकार दिखे। तो हैरानी नहीं। पर अपनी प्रतिभा पाटील के भाषण में जिक्र नहीं। प्रतिभा पाटील ने मनमोहन को जरूर सावधान किया। बोली- 'अर्थव्यवस्था की ऐसी मजबूती का कोई मतलब नहीं। जो गरीब के आंसू न पोंछ सके।' यह अच्छा कटाक्ष हुआ। सरकोजी के साथ प्रेस कांफ्रेंस में मनमोहन ने ताल ठोकी थी- 'दुनिया के आर्थिक उथल-पुथल का भारत पर असर नहीं होगा। भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत।' सरकोजी की बात चली। तो बताते जाएं- बुलाए तो गणतंत्र दिवस पर चीफ गेस्ट थे। पर वह दुकानदार बनकर आ गए। मनमोहन के सामने हथियारों का ऐसा बाजार लगा दिया। जैसे दिल्ली के किसी मोहल्ले का हफ्तावार बाजार हो। पांच समझौतों से सब्र नहीं हुआ। एटमी ईंधन का लालच देकर राफेल लड़ाकू विमान सामने रख दिए। बोले- 'सवा सौ मल्टीरोल कम्पेक्ट एयरक्राफ्ट तो जब आएंगे, तब आएंगे। फिलहाल चालीस राफेल खरीद लो। फौरन सप्लाई कर देंगे।' मनमोहन का पसीना छूटा, या नहीं। अपन नहीं जानते। पर अपने शिवराज पाटिल नर्वस हो गए। एक सौदे पर दस्तखत करके फ्रेंच मंत्री को फाइल थमा दी। पर उसके दस्तखत वाली फाइल लेना भूल गए। यों पाटिल से ज्यादा नर्वस तो मनमोहन सिंह होंगे। उनने पता नहीं क्या सोचकर ऐसे देश के राष्ट्रपति को बुलाया। जिस देश में सिख बच्चे पगड़ी बांध स्कूल नहीं जा सकते। अपने मनमोहन ने पगड़ी की लाज क्या रखी होगी। दिल्ली की सड़कों पर सिखों का जुलूस निकला। सो प्रेस कांफ्रेंस में पगड़ी की बात भी उठी। मनमोहन तो चुप्पी साधे बैठे रहे। सरकोजी ने चलताऊ सा जवाब दिया। स्कूलों में पगड़ी पर लगी रोक हटेगी। ऐसा कोई वादा नहीं। वह तो दुकानदार बनकर आए थे। अब उन्हें अपने जज्बातों से क्या।

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