अटल के नाम से लिब्राहन रपट की साख दाव पर
लिब्राहन आयोग की रपट कब पेश होगी। यह पी. चिदंबरम ने अभी भी नहीं बताया। सोमवार को 'रपट' लीक हो गई। रपट में अटल बिहारी वाजपेयी का नाम चौंकाने वाला। छपी 'रपट' पर भरोसा करें। तो वाजपेयी, आडवाणी, जोशी बराबर के जिम्मेदार। 'रपट' के मुताबिक नरसिंह राव सरकार जिम्मेदार नहीं। पर वाजपेयी का नाम सुन आडवाणी खुद चौंक गए। सो उनने खुद कामरोको का नोटिस दिया। बीजेपी में फुलझड़ी चलती रही- 'मेहनत आडवाणी ने की थी। पीएम वाजपेयी बने। अयोध्या आंदोलन भी आडवाणी ने चलाया। पर ढांचा टूटने का सेहरा भी वाजपेयी के सिर बंध गया।' सुषमा बोली- 'हम खुद हैरान हैं। वाजपेयी उस आंदोलन में थे ही नहीं।' पर अपन को याद है- वाजपेयी 5 दिसंबर को लखनऊ में थे। आडवाणी उसी रैली से विदा हुए। लिब्राहन आयोग ने वाजपेयी के उसी भाषण को आधार बनाया होगा। पर आयोग ने वाजपेयी को सम्मन भी नहीं किया। फिर दोषी कैसे ठहरा सकते हैं। सतपाल जैन आयोग में बीजेपी के वकील थे। उनने कहा- 'वाजपेयी को कभी सम्मन नहीं दिया, तो नाम कैसे हो सकता है।' पर असलम भूरे ने वाजपेयी को बुलाने की अर्जी दी थी। लिब्राहन ने सतपाल जैन को बुलाकर पूछा- 'क्या वाजपेयी को बुलाना चाहिए।' अपन को लालकृष्ण आडवाणी ने खुद बताया- 'मैंने लिखकर दिया था कि उन्हें बुलाने का कोई मतलब नहीं।' वाजपेयी के नाम से सिर्फ बीजेपी में नहीं। कांग्रेस में भी भयंकर खलबली थी। पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा से अपन ने पूछा। तो वह बोले- 'अगर सचमुच वाजपेयी का नाम। तो आयोग की रपट पर कौन भरोसा करेगा।' नेता और पत्रकार जातीय आधार पर बंटे हुए दिखे। दस जनपथ के करीबी एक ब्राह्मण पत्रकार बेहद उत्तजित थे। बोले- 'रपट में वाजपेयी का नाम हो। तो सरकार को रपट खारिज कर देनी चाहिए।' वाजपेयी के नाम का किसी को भरोसा नहीं। आडवाणी बोले- 'मुझे तो समझ नहीं आ रहा। भीड़ जुटाने में मेरी भूमिका के लिए मुझे जिम्मेदार ठहराते। तो ठीक ही था। पर वाजपेयी कैसे।' तो क्या रपट से पिंड छुड़ाएगी कांग्रेस। पर सवाल फिलहाल लीकेज का। जिसने अयोध्या जैसे मुद्दे पर भी विपक्ष को एकजुट कर दिया। अपन ने आडवाणी से पूछा। तो उनने कहा- 'गन्ने की कीमतों पर विपक्ष एकजुटता से खफा थी सरकार। मंहगाई और मधु कौड़ा पर भी विपक्षी एकता से डरी थी सरकार।' यों आडवाणी की राय- 'झारखंड चुनाव में मधु कौड़ा से बचना चाहती है सरकार। इसलिए लीक की होगी।' बुधवार को वोटिंग होगी झारखंड एसेंबली की। जहां मधु कौड़ा का भ्रष्टाचार चुनावी मुद्दा। इस मुद्दे से घिरी है कांग्रेस भी। अपन को अरुण जेतली बता रहे थे- 'पहले तीनों दिन सरकार कटघरे में रही। पहले गन्ना मूल्य पर फिर आयोग की लीकेज पर। अब मंगलवार को मधु कौड़ा पर घेरेंगे।' वैसे फैसला आज बीजेपी पार्लियामेंट्री करेगी। पर मोटतौर पर यही फैसला होगा। आडवाणी-जेतली के साफ संकेत थे। पर बात लीकेज की। तो आयोग की रपट सिर्फ चिदंबरम के पास थी। या फिर जस्टिस लिब्राहन के पास। लीकेज से दोनों ने इनकार किया। पर छपी खबर का खंडन दोनों ने नहीं किया। यानी वाजपेयी का नाम है। अगर है तो रपट पर कौन भरोसा करेगा। चिदंबरम ने दोनों सदनों में सफाई दी- 'रपट मेरे कब्जे में। होम मिनिस्ट्री से लीक होने का सवाल नहीं।' राज्यसभा में तो भड़क कर बोले- 'मैं इतना मूर्ख नहीं। जो रपट लीक कर शर्मसार होऊं।' पर जस्टिस लिब्राहन सवाल से भड़क गए। बोले- 'मुझ पर आरोप लगा रहे हो। कौन कह रहा है, मैने लीक की। मैं ऐसा आदमी नहीं जो रपट लीक करूं।' वह गुस्से में तमतमाए हुए थे। अपन कई बार फैसला बॉडी लेंग्वेज देख कर भी करते हैं। सो बॉडी लेंग्वेज से साफ जाहिर- 'चिदंबरम ने ही लीक की होगी।' अपन को याद है जब 30 जून को रपट पेश हुई। तो पीएम के नए-नए मीडिया सलाहकार हरीश खरे ने सुझाव दिया- 'रिपोर्ट के हिस्से मीडिया को दे देने चाहिए।' चिदंबरम ने कड़ा ऐतराज जताया था। कहा था- 'यह संसद की अवमानना होगी।' पर अब पांच महीने बाद लीकेज। वह भी सैशन के दौरान। वैसे शक एचएस ज्ञानी पर भी। रपट के मजमून से खफा होकर जब अनुपम गुप्ता ने इस्तीफा दिया। तो ज्ञानी को लाए थे लिब्राहन। सोनिया गांधी भी परेशान दिखी। पांच साल बाद आडवाणी अपने पुराने राममई तेवरों में दिखे। तो परेशान होना ही था। सो प्रणव, चिदंबरम, एंटनी, वगैरह तलब हुए। पर बात आडवाणी की। उनने 'राम काज' का एलान कर दिया। लोकसभा में बोले- 'मुझे राम मंदिर आंदोलन में कूदने पर गर्व।' तो क्या रपट आने पर बाकी जीवन 'राम काज' को देने का एलान कर देंगे आडवाणी। पर अरुण जेतली की मानें। तो रपट में वाजपेयी दोषी नहीं। राव सरकार को हरी झंडी नहीं। आडवाणी-जोशी पर उतना सख्त नहीं रपट। कल्याण-उमा-कटियार पर होगा रपट का प्रहार।
sir i want to tell one thing
sir i want to tell one thing if "The somanth temple issue is right for indians" then "The Ayodya issue also right" the bjp done a great job. now here is congress government so they are saying like that.... see this link "http://www.scribd.com/doc/12789634/Salutations-to-Lord-SomanathaI2322009" so many proofs i have mr. pandit jawaharlal nehru worked for the construction of somnath temple by demolishing a mosque... in the historic point of view nothing is wrong... ram mandir is the first place there after that they built mosque so it is right to demolish mosque there and built our historic ram mandir.... rebulting an historic thing is not an issue... its not a communal issue its our historic issue but rather it was changed by meadia as a communal....
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