खुली खुफिया तंत्र की पोल

अपने यहां तो खुफिया विभाग में कोई खबर तक नहीं थी। डेविड हेडली और राना अमेरिका में पकड़े गए। तब जाकर पता चला- हेडली-राना तो भारत में सक्रिय थे। मुंबई पर आतंकी हमले के बाद भी अपन ने कई ऐंगल निकाले। पुलिस ने कई थ्योरियां पेली। पाकिस्तान से सीधे तार जुड़े। मोटर बोट की मोटरें खरीदने तक के सबूत ढूंढ लिए। अब एक साल होने को। पर हेडली-राना का कोई ऐंगल तो कभी सामने नहीं आया। यह ऐंगल खुला, तो अमेरिका में जाकर खुला। अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई ने खोला। अब मुंबई के सन्नी सिंह कहते हैं-'हेडली मेरे पास फ्लैट किराए पर लेने आया था। ऐना नाम की एक विदेशी महिला साथ थी। बोलचाल का ढंग विदेशी था। मैने फ्लैट दिला भी दिया। पर जब पासपोर्ट-वीजा की बात आई। तो हेडली उत्तेजित हो गया।' शक-सुभह के लिए तो इतना संकेत काफी था। पर न अपने खुफिया तंत्र की प्रॉपर्टी डीलरों तक पहुंच। न लोकल पुलिस का प्रॉपर्टी डीलरों से तालमेल। कोई विदेशी भी आकर फ्लैट किराए पर लेकर रह जाए। तो किसी को खबर न लगे। कारगिल के वक्त खुफिया तंत्र की पोल खुली। तो खुफिया एजेंसियों में तालमेल का सवाल उठा। वाजपेयी ने सुझावों के लिए कमेटी बनाई। कमेटी की सिफारिश थी- 'देश में हर स्तर पर खुफिया तंत्र को मजबूत किया जाए। खुफिया एजेंसियों का आपस में तालमेल हो।' पर मुंबई पर आतंकी हमला तो कारगिल से करीब एक दशक बाद हुआ। अपनी खुफिया एजेंसियां अभी भी जस की तस। पर अपन बात कर रहे थे- हेडली-राना के 'टारगेट इंडिया की'। पर मुंबई पर हमले से पहले हेडली आठ बार भारत आया। नौवें बार तो मुंबई पर हमले के बाद भी आया। हेडली का पासपोर्ट बताता है- पिछले तीन साल में करीब एक साल हेडली भारत में रहा। कभी मुंबई तो कभी दिल्ली। फ्लैट तो चलो नहीं मिला। होटलों में तो ठहरा होगा हेडली। अपन ने एक कानून बना रखा है- 'होटल में ठहरने वाले से पहचान पत्र की फोटो कॉपी ली जाए। फोटो कॉपियां ली भी जाती होंगी। पर उसकी छानबीन करने का कोई ढांचा नहीं। खुफिया तंत्र की चूलें इतनी ढीली। जहां देखो छेद ही छेद। कई बार तो अपन को लगता है- देश के हुक्मरान न सीमाओं को लेकर गंभीर। न आतंरिक सुरक्षा पर ईमानदार।' नागरिक पहचान पत्र का सवाल ही लो। करीब डेढ़ दशक से सिर्फ बातें ही हो रही। जमीनी हकीकत कुछ भी नहीं। लालकृष्ण आडवाणी ने नागरिक पहचान पत्र का सवाल उठाया। तो ओछी राजनीति हावी हो गई। आडवाणी के कदम को बांग्लादेश के खिलाफ मान विरोध किया गया। यों अपन बांग्लादेशियों के हिमायतियों की तादाद देखकर भी हैरान। आतंकवाद के मूल में बांग्लादेशी भी कम नहीं। जगह-जगह वही बनते हैं पाकिस्तानी आतंकियों के 'स्लीपिंग सेल'। हेडली की जांच तो अभी शुरू हुई। जांच आगे बढ़ी। तो बांग्लादेशी स्लीपिंग सेल ही सहयोगी निकलेंगे। दिल्ली हो या मुंबई। कोई बारह महीने यों ही कैसे छुपा रहा होगा। अतिथियों के फिल्मी परिवारों के रिश्तों का एक नया खुलासा भी हो गया। दाउद इब्राहिम के करीब थे संजय दत्त। मुंबई पर 1993 में जब दाउद का कहर टूटा। तो जाने-अनजाने में संजय दत्त सहयोगी थे। अब महेश भट्ट का बेटा राहुल भट्ट सुर्खियों में। अपन महेश भट्ट के पुराने बयानों को आधार नहीं बनाते। महेश भट्ट पर उंगली उठाने का कोई पूर्वाग्रह भी नहीं। पर महेश भट्ट की जहमियत किसी से छिपी भी नहीं। राहुल भट्ट ने कहा है- 'हेडली तो मुझे जिम में मिला।' पुलिस ने पूछताछ की। पूछताछ अभी और भी होगी। क्लीनचिट लेने की कोई कसर नहीं छोड़ रहे महेश भट्ट। पर हैडली तो भट्ट परिवार के रिश्तों को इस्तेमाल कर ही रहा था।

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