तो बनते-बनते बिगड़ गई कर्नाटक की बात

अपन ने कल बीजेपी की कंगाली में आटा गीला होने की कहानी बताई। बिहार में सुशील मोदी के खिलाफ नई बगावत। झारखंड में जेडीयू के साथ गठबंधन में फच्चर। कर्नाटक में रेड्डी ब्रदर्स का येदुरप्पा के खिलाफ खम ठोकना। अब आगे। सुशील मोदी के खिलाफ दो साल पहले भी बिगुल बजा था। तब बीजेपी ने डेमोक्रेटिक फार्मूला निकाला। बीजेपी के सारे एमएलए दिल्ली बुलाए गए। बंद कमरे में एक-एक को बुलाकर पूछा। फैसला मोदी के हक में निकला। मोदी बच गए। पर यह फार्मूला न खंडूरी को हटाते समय उत्तराखंड में लागू हुआ। न वसुंधरा को हटाते समय राजस्थान में। अब सुशील मोदी के खिलाफ दुबारा बिगुल बजा। तो अपन को इंतजार करना होगा हाईकमान के नए रुख का। झारखंड में फंसा गठबंधन का फच्चर गुरुवार को निकल गया। थोड़ा शरद यादव झुके। थोड़ा बीजेपी झुकी। राजनाथ-शरद में 67-14 का तालमेल हो गया। अपन कर्नाटक की बात तो खुलकर करेंगे ही। पहले बात झारखंड की ही हो जाए। कांग्रेस के पुराने भाजपाई मरांडी से बात नहीं टूटी। मरांडी ने 31 सीटें मांगी थी। कांग्रेस ने पहले ना-नुक्कर की। पर अब तक 81 में से उम्मीदवार 50 ही तय किए। वैसे गवर्नरों का बेजा इस्तेमाल कांग्रेस के लिए नई बात नहीं। झारखंड के गवर्नर गुरुवार को दिल्ली आकर सोनिया से मिले। तो अपने कान खड़े हुए। सोनिया ने तालमेल पर गवर्नर की राय ली। बात गवर्नर की चली है। तो झारखंड के पहले गवर्नर की बात। सिब्ते रजी का नाम भी अब मधु कोड़ा से जुड़ने लगा। सिब्ते रजी के ट्रांसफर से ही कान खड़े हुए थे। अब भ्रष्टाचार में हिस्सेदारी की बातें भी होने लगी। वैसे सिब्ते रजी भी सोनिया को सफाई दे चुके। अपन ने कृपाशंकर सिंह की सफाई का किस्सा तो कल बताया ही था। बात महाराष्ट्र की शुरू हुई। तो बता दें- कांग्रेस-एनसीपी का समझौता हो गया। वही 20-20 का फार्मूला। अशोक चव्हाण अपनी लिस्ट लेकर दिल्ली पहुंचे। सोनिया के दरबार में हाजिर हुए। अब आज शपथ ग्रहण हो ही जाएगी। पर बात गवर्नर की कर रहे थे। तो बताते जाएं- जब कर्नाटक की सरकार चौराहे पर। तो वहां के गवर्नर हंसराज भारद्वाज भी दिल्ली पहुंच गए। राजभवनों की सरकारें बनाने-गिराने में भूमिका बताने की जरूरत नहीं। पर बात बीजेपी के अंदरूनी झगड़े की। येदुरप्पा बुधवार रात दिल्ली पहुंचते ही वेंकैया नायडू से मिले। नायडू के घर से गए अनंत कुमार के घर। अनंत को साथ लेकर पहुंचे ताज पैलेस। वहीं पर रुके हैं स्पीकर जगदीश शेट्टर। तीनों की गुफ्तगू में क्या निकला। इसकी भनक तो सिर्फ इतनी लगी- शोभा करंदलजे-वीपी बालीगार की छुट्टी पर ऐतराज नहीं। शेट्टर चाहें तो होम मिनिस्टर हो जाएं। यह बात अपन ने तीन नवंबर को ही लिख दी थी। वीएस आचार्य को यों भी होम मिनिस्टरी का मोह नहीं। शोभा करंदलजे के पर कुतरे जाएंगे। यह भी अपन ने तीन नवंबर को लिखा था। गुरुवार को शोभा के स्पीकर बनने की अफवाह ने खूब जोर पकड़ा। पर शाम होते-होते निकला कुछ भी नहीं। अपन दिनभर का टाइम टेबल बता दें। पहले वेंकैया के घर ब्रेकफास्ट। कर्नाटक के सारे नेता थे। कर्नाटक के नेता निकले। तो जनार्दन रेड्डी दो सांसदों जे शांता, फकीरप्पा के साथ वेंकैया के यहां पहुंचे। फिर लंच के वक्त मीटिंग हुई राजनाथ के घर। जेटली, अनंत, सुषमा, रामलाल, वेंकैया के साथ येदुरप्पा भी थे। शाम को येदुरप्पा बोले- 'दो घंटे में हल निकल जाएगा। रात को बेंगलुरु लौट जाऊंगा।' पूछा तो बोले- 'कुछ बातों पर मैं भी झुकूंगा। बीजेपी नेशनल पार्टी। हाईकमान का कहा माना जाएगा।' पर यह कहकर येदुरप्पा, सदानंद गौड़ा, वीएस आचार्य जब आडवाणी के घर पहुंचे। तो हालात बदल गए। मीटिंग से निकलकर येदुरप्पा तो कुछ नहीं बोले। पर सदानंद गौड़ा बोले- 'मीटिंग शुक्रवार को  भी होगी। मीटिंग में सीएम और जनार्दन रेड्डी भी होंगे। छोटे-मोटे मसलों का हल निकाल लेंगे।' यानी बनते-बनते कहीं बिगड़ गई बात।

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