चुनाव की पूर्वसंध्या पर फूटा भ्रष्टाचार का बम

तो आज तीन राज्यों में वोट पड़ेंगे। महाराष्ट्र, हरियाणा, अरुणाचल। हरियाणा में कांग्रेस का पलड़ा भारी। बहुमत पा ही जाएगी कांग्रेस। पर हुड्डा की बजाए शैलजा सीएम होंगी। इस खुलासे ने कांग्रेस के होश उड़ा दिए। यों सोनिया का इरादा यही था। अपन ने छह अक्तूबर को किया था खुलासा। हवा उड़ी थी तो जाटों में खलबली मची। जाट चौटाला की तरफ दौड़ने लगे। हुड्डा कैंप के तो होश फाख्ता हो गए। खुद हुड्डा ने सोनिया से अर्ज किया- 'चुनाव से पहले मेरे नाम का ऐलान न किया। तो जाट वोट बैंक खिसक जाएगा।' सो इतवार को सोनिया ने वक्त की नजाकत को पहचाना। हुड्डा के नाम का ऐलान कर दिया। सो अब हुड्डा कैंप में राहत। बात अरुणाचल की। तो कांग्रेस की सरकार वहां भी बनेगी। यों भी वहां जिसका केंद्र उसका राज्य की परंपरा। चीफ मिनिस्टर दोरजी खांडू बिना लड़े ही जीत चुके। बता दें- उसी तवांग से चुने गए हैं खांडू। जहां नवंबर में दलाई लामा के जाने का प्रोग्राम। चुनाव के बाद केंद्र दौरे पर रुख अपनाएगा। अपन को बेसब्री से इंतजार। सिर्फ सीएम नहीं। अलबत्ता तीन लोग निर्विरोध एमएलए हो गए। अब बाकी 57 सीटों का चुनाव। एक दिलचस्प किस्सा और बता दें। कांग्रेस-तृणमूल में ही कई जगह सिर फुटोव्वल। कांग्रेस ने जिन 10 विधायकों को टिकट नहीं दिया। वे अब तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार। पर असली घमासान तो महाराष्ट्र में। बीजेपी-शिवसेना को दस साल बाद बड़ी उम्मीद थी। पर चारों तरफ से घिर गई। एक तरफ कांग्रेस-एनसीपी से कड़ी टक्कर। तो दूसरी तरफ बाल ठाकरे के भतीजे की कड़ी चुनौती। फिर रही सही कसर बागी पूरी करेंगे। सो बीजेपी-शिवसेना पर भारी पड़ेगी कांग्रेस-एनसीपी। यों कांग्रेस 69 से बढ़कर 80 तक जाएगी। पर एनसीपी 71 से घटकर 50 पर अटकेगी। यानी गठबंधन को 11 का नफा, तो 21 का नुकसान। जुगाड़ का महारथी सीएम होगा। शरद पवार या विलास राव। वक्त ही बताएगा। पर चुनाव खिचड़ी सरकार के लिए नहीं। चुनावी हिंसा के लिए याद रखा जाएगा। शोलापुर में बीजेपी के वर्कर की हत्या हो गई। हत्या का आरोप कांग्रेसी मंत्री सिध्दराम म्हात्रे पर। शोलापुर जिले में ही एनसीपी उम्मीदवार के साले हनमंत बगल पर गोली चली। शिवसेना उम्मीदवार अजय भोसले पर भी फायरिंग हुई। भोसले का आरोप- 'एनसीपी उम्मीदवार ने गोली चलवाई।' एक इंडिपेंडेंट उम्मीदवार बाला साहब नाहटा पर हमला हुआ। तो एनसीपी का मिनिस्टर बबनराव पचपुते एफआईआर में नामजद। कांग्रेस के एक बागी श्रीकांत देशमुख भी बाल-बाल बचे। गोली कान के पास से गुजर गई। हिंसक वारदातों की लंबी लिस्ट। पर असली चुनावी विस्फोट चुनाव की पूर्वसंध्या पर हुआ। धमाका किया बीजेपी के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने। वह अपनी अमेरिकी राजदूत मीरा शंकर की चिट्ठी उठा लाए। चिट्ठी में भ्रष्टाचार के सात मामलों का लेखा-जोखा। पर मनमोहन चिट्ठी पर कुंडली मारकर बैठ गएं। राजदूत  ने चिट्ठी 12 मई को भेजी थी। ठीक लोकसभा चुनावों के मौके पर। पर मनमोहन पांच महीने से दबाकर बैठे थे। अमेरिकी फर्मों ने रिश्वत देकर सौदे हथियाए। ठीक वैसे ही, जैसे एबी बोफोर्स ने 64 करोड़ की रिश्वत देकर तोपें बेची थी। अमेरिकी फर्मो का किस्सा बाद में बताएंगे। बात भ्रष्टाचार की चली। तो चलते-चलते जिक्र कर दें। राजस्थान में भी सोलर और विंड पावर प्लांटों के सौदे हड़बड़ी में होने लगी। वजह है चीफ सेक्रेट्री कुशाल सिंह का इसी महीने रिटायर होना। सो जाने से पहले निपटाने की हड़बड़ी समझ से परे। पर अपन बात कर रहे थे मीरा शंकर की चिट्ठी की। सात फर्मों में महाराष्ट्र बिजली बोर्ड सबसे ऊपर। अमेरिकी कंपनी मारियो कोविनो ने दी थी यह रिश्वत। सिर्फ महाराष्ट्र का बिजली बोर्ड नहीं। सेंट्रल इनसेक्टिसाईड बोर्ड, एटी कीमरने इंडिया के अलावा इंडियन रेलवे भी। रेलवे की रिश्वतखोरी का तो लंबा-चौड़ा मामला। एनडीए शासन का भी खुलासा। पर बात सिर्फ आरोपों की लिस्ट की नहीं। दलाली और रिश्वत का खुलासा कोरी आरोपबाजी नहीं। अमेरिकी कानून एफसीजीए में दोषी पाई गई हैं सातों फर्में। मीरा शंकर ने चिट्ठी भेजी थी टीकेए नायर को। मनमोहन सिंह के प्रिंसिपल सेक्रेट्री हैं नायर। कह नहीं सकते- मिली नहीं।

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