करनूल के जंगलों में सीएम का हेलीकाप्टर गायब

हड़कंप मचना ही था। आंध्र के सीएम राजशेखर रेड्डी का हेलीकाप्टर लापता हो गया। वाईएस राजशेखर रेड्डी से अपनी पहली मुलाकात शिमला में हुई। मौका था- कांग्रेस कनक्लेव। जब आठ जुलाई 2003 को अपनी मुलाकात हुई। तो वह उनका जन्मदिन था। उस दिन 54 साल के हुए थे राजशेखर। मुलाकात शिमला के उस होटल में हुई। जहां वह ठहरे हुए थे। राजशेखर की राजनीतिक किस्मत तब जागी। जब सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बनी। बीस साल तक बागी कांग्रेसी के तौर पर जाने गए राजशेखर। चेन्ना रेड्डी, जनार्दन रेड्डी, विजय भास्कर रेड्डी सभी के बागी। सो अस्सी से तिरासी के तीन साल ही मंत्री रह पाए। यों पांच बार एमएलए और चार बार एमपी बने। सोनिया कांग्रेस की अध्यक्ष बनी। तब जाकर 1998 में प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बने। हालांकि कईयों ने इसकी वजह राजशेखर का ईसाई होना माना। पर राजशेखर ने अपनी काबिलियत साबित की। उनने चंद्रबाबू नायडू का दस साल पुराना शासन उखाड़ फेंका। तीन महीने की पदयात्रा ने 2004 के चुनाव में नतीजा दिखाया। वैसे अपन कहें- केंद्र में कांग्रेस की सरकार भी आंध्र के बूते बनी। तो गलत कतई नहीं होगा। तब आंध्र से 29 सांसद दिए थे राजशेखर ने। इस बार तो 33 सांसद दिए। दुबारा सीएम बनने में भी दिक्कत नहीं आई। पर बात राजशेखर के राजनीतिक इतिहास की नहीं। बात राजशेखर के हेलीकाप्टर लापता होने की। सुबह पौने नौ बजे सही सलामत उड़ा था बेगमपेट हवाई अड्डे से। पर पैंतालीस मिनट बाद हवाई अड्डे से संपर्क टूट गया। शमशाबाद एटीसी से भी संपर्क नहीं रहा। दस बजे खबर तूफान की तरह फैली। पर बारह बजते-बजते खबर आई- 'सीएम सही सलामत मिले'। चैनलों ने इसे तीन घंटे तक 'ब्रेकिंग न्यूज' बनाकर बेचा। वैसे अपन चैनलों का कसूर भी उतना नहीं मानते। बस थोड़ा खबर से आगे दौड़ रहे थे। चंडूखाने के नेताओं पर भरोसा करके न्यूज ब्रेक कर रहे थे। करनूल के आत्मकूर नाम के गांव तक देखा गया था हेलीकाप्टर। वहां से शुरू हुआ नालमाला जंगल। बहुत घना है यह जंगल। नक्सलियों का इलाका है यह। आपको याद होगा- नक्सलियों से दोस्ती हुई थी राजशेखर रेड्डी की। वह दोस्ती ज्यादा दिन नहीं चली। यह अलग बात। पर उस दोस्ती के दौर में नक्सलियों ने खुद को ताकतवर बनाया। हेलीकाप्टर जब गायब हुआ। तो उसमें सीएम का सेकेट्री सुब्रह्मण्यम और सीएसओ वेसली भी था। दो पायलट भी। यानी कुल पांच लोग। अपन को इसमें बिजनेस दुश्मनी तो नहीं दिखती। वैसे बताते जाएं- कर्नाटक के बेल्लारी वाले रेड्डी घराने से दोस्ती-दुश्मनी का रिश्ता। यों तो राजशेखर रेड्डी के पार्टनर हैं येदुरप्पा सरकार के मंत्री रेड्डी। पर आंध्र प्रदेश के कच्चे लोहे की खदानों में हिस्सेदारी पर झगड़ा नया-नया। खदानों से निकला लोहा नफीस किस्म का। सो हिस्सेदारी पचास फीसदी हो या बीस फीसदी। पर मौका राजशेखर परिवार के बिजनेस का खुलासा करने का नहीं। वैसे राजशेखर परिवार का आजकल मीडिया में भी दखल। सालभर पहले ही निकाला है 'साक्षी' अखबार और चैनल। चैनल की बात चली तो बताते जाएं- राजशेखर के मिल जाने की 'ब्रेकिंग न्यूज' तीन बजे तक 'साक्षी' में भी चलती रही। पर यह चंडूखाना हुआ करनूल के कांग्रेसी एमएलए प्रताप रेड्डी की वजह से। उनने फोन पर कहा- 'सीएम सुरक्षित, और मेरे साथ। हम लौट रहे हैं।' 'साक्षी'  ने तो यहां तक कहा- 'सीएम से सेटेलाइट फोन पर बात हो गई है।' पर तीन बजकर दस मिनट पर के रोसैया ने चैनलों का मुंह बंद किया। उनने कहा- 'चीफ मिनिस्टर का कोई पता नहीं चला है। ढूंढने की कोशिशें जारी।' जब चैनल चंडूखाने की खबर पेल रहे थे। तब चीफ सेकेट्री रमाकांत रेड्डी कोशिशों में लगे थे। उनने नेशनल रिमोट सेंसिंग एजेंसी तक से संपर्क साधा। उसका कम ऊंचाई पर उड़ने वाला हवाई जहाज मंगवाया। इसरो से मदद मांगी। माधवन नायर से बात की। अमेरिकी सेटेलाइट एजेंसी से भी संपर्क साधा गया। गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय सब में फोन घनघनाए। शाम होते-होते मौसम भी खराब हो गया। जंगल छान रहे हेलीकाप्टर वापस बुलाने पड़े। पर एनआरएसए का विमान रात को भी लगा था छानबीन में। पर आखिरी बात। चैनल तो सेटेलाइट फोन से बात का दावा कर रहे थे। पर चीफ सेकेट्री ने बताया- 'हेलीकाप्टर में सेटेलाइट फोन है ही नहीं।'

हुम्म रोचक जानकारि ........

हुम्म रोचक जानकारि ........ आप्के केह्ने का अन्दाज अच्चा है |

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